Friday, 29 December 2017

कॉमिक्स आवर पैशन...   प्रस्तुत करते हैं

@अभिराज ठाकुर


बारूद के ढ़ेर

मुम्बई...सपनों की मायानगरी...जहाँ देश भर से लोग खाली जेबों और सपनों की पोटली अपने कंधों पर उठाए हर रोज़ पहुँचते हैं...जिनमे से नाममात्र ही वहाँ कि जीवनशैली मैं टिक पाते हैं बाक़ी नाउम्मीद होके घर वापस हो लेते हैं.... इनके अलावा जो लोग पैदा ही मुम्बई में होते हैं...उनके सपने औरों से अलग होते हैं ख़ासतौर पर ज़ुर्म के दलदल में पैदा होने वाले लोग...पिछले 10 सालों में मुंबई का क्राइम रेट 10 गुना बढ़ चुका है...और ऐसा सिर्फ़ मुम्बई की सड़कों पर दौड़ने वाले छोटे बड़े माफ़िया की वज़ह से नही . बल्कि इसमें बाहरी ताकतों का भी खूब हाथ रहा है।  रात दिन तेज़ी से बढ़ती जा रही शहरी चकाचौंध की वज़ह से नई पीढ़ी का सब्र टूटने लगा है....उन्हें सारी सुविधाओं का लाभ लेना ही होता है...फ़िर चाहे वो सीधी तरह हो या टेढ़ी तरह ....और उस भागमभाग कि वज़ह से ज़्यादातर नौजवानों ने तेज़ मगर ग़लत रास्ता ही अख्तियार कर लिया है...और इसकी वजह से जोश खरोश से लबरेज़ नौजवान एक चलता फिरता बारूद बन चुका है...और पूरा शहर एक बारूद का ढेर ....पर क्या होगा अगर ये बारूद का ढेर ...ऐसे इंसान से टकरा जाए जो ख़ुद बारुदपुत्र हो एक ऐसा इंसान जिसके लिए समस्या को सुलझाना मुश्किल और उन्हें जड़ से उखाड़ना आसान रास्ता लगता हो..??  जिसके लिए ज़ुर्म के दलदल के अंदर पनपने वाले हर कीड़े के लिए सिर्फ नफरत की आग भरी हो..? और सभी जानते हैं आग और बारूद का मेल सिर्फ़ तबाही लाता है...

तो तैयार रहिए एक ख़ूनी जंग के लिए , जिसमें सिर्फ़ बारूद से बारूद ही नही टकरायेगा... बल्कि ये जंग होगी विचार और विचारधाराओं कि..

जल्द ही कॉप की वेबसाइट पर......

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