Thursday, 14 December 2017

COP प्रस्तुत करते हें

ध्रुव की शादी (भाग 3)

लेखक - दिव्यांशु त्रिपाठी 

परमाणु : अबे भाई लोगो ये सब क्या हो गया। ये साला मज़ाक मज़ाक में बात सीरियस होती जा रही है।

डोगा : अब क्या होगा भाई ?

अन्थोनी : भाई सबको बताना पड़ेगा। अर्थी का इंतज़ाम जो करना है।

परमाणु : हेल्लो, हेल्लो। माइक चेक माइक चेक। ब्रह्मांड रक्षक दल।

डोगा : ससुर गवांर ही रहेंगे। अबे वो ब्रह्मांड रक्षक का ट्रांसमीटर है कोई सोनू DJ का माइक नही।

परमाणु : हेल्लो। ब्रह्मांड रक्षकों अपने ध्रुव की शादी फिक्स हो गई  है यारो।

नगराज : क्या बात कर रहे हो । हद हो गई है। सर मेरा गंजा हुआ जा रहा है और शादी इसकी तय हो रही है।

अन्थोनी : तू साले कुंवारा ही मरेगा। हम सब की शादी में नागिन डांस करने लायक ही है तू।

डोगा: इतनी गर्लफ्रैंड बनाएगा तो यही होगा।

परमाणु :एक को तो अपने शरीर मे ही बसाए हुए है जनाब।

तिरंगा(ट्रांसमीटर पे): अबे यार ये मेरा न्याय स्तम्भ कहाँ गम जाता है बार बार। कभी एक बार मे दिखाई नही पड़ता।

डोगा : वाह। नही नही वाह। ऐसे, ऐसे रक्षक है हमारे। इनका हमेशा न्याय  स्तम्भ ही गायब रहता है। तू दिन भर कुछ न कुछ ढूंढता ही रहता है क्या बे ? जब ट्रांसमीटर ऑन करो तो कभी इनका न्याय स्तम्भ खोया रहता है, कभी इनकी ढाल खोई रहती है कभी इनका लबादा गायब रहता है । भाई  तू क्यों कभी गायब नही हो जाता।

तिरंगा : बहुत से आये मुझे गायब करने के फिराक में.......

परमाणु (तिरंगा की शायरी को बीच मे काटते हुए): साले एक और घटिया शायरी पेली तो ट्रांसमीटर में घुस के मरूँगा।

डोगा : सही में घुस के मार देता है बे। चुप हो जा।

ध्रुव : अरे चुप भी हो जाओ। साले म्हरारुओं की तरह बोले ही जा रहे है।

सभी चुप हो जाते है।

नताशा : उनको चुप कराने से क्या होगा ? सगाई रुक  जाएगी।

अन्थोनी : बिल्कुल सही कह रही है आप भाभी।

ध्रुव ( अन्थोनी को घूरते हुए): ऐसा कुछ नही होगा नताशा। मैं मम्मी से बात करूंगा ना बेबी।

तभी रेडियो ट्रांसमीटर पर रोबो की आवाज़ आती है।
"ओ बेबी शोना। चल ये बता की मेरी बेटी से शादी करेगा कि उसे यू ही टहला रहा है।"

ध्रुव : अरे रोबो तुम।

अन्थोनी : सारी शर्म लिहाज़ धो कर पी गया है। तेरे ससुर जी है। नाम लेकर बुलायेगा ।

रोबो : सीख कुछ सीख। कितना संस्कारी मुर्दा है।

ध्रुव : अब यार ज्ञान न पेलो। अभी मुझे सोचने दो की क्या करना है ये शादी तोड़ने के लिए।

रोबो : जल्दी से जल्दी कर दे वरना मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।  अभी के लिए में चलता हूँ। बहुत दिनों से बालो में शैम्पू नही किया मैंने। आज कर देता हूँ।

परमाणु : उस गंजे की बंजर जमीन पर कब से फसल लहलहाने लगी।

नताशा : तुम्हे जो करना है जिससे बात करना है जल्दी करो ध्रुव वरना फिर मुझे ही कुछ करना पड़ेगा क्योंकि मेरे जीते जी मेरे ध्रुव को कोई अपना नही बना सकता।

ध्रुव : तुम्हे कुछ करने की जरूरत नही है। अभी तुम बस घर जाओ वरना कहीं मम्मी आ गई तो दिक्कत हो जाएगी।

नताशा : ठीक है। मैं जाती हूँ। लेकिन जल्द वापस आऊंगी......

अन्थोनी ( नताशा की बात बीच मे काटते हुए) : दुल्हन के लाल जोड़े में नही या या सर पर सफेद कफ़न ओढ़े।

डोगा : वाह में म्हारे भोजपुरी सुपरस्टार अंथोनीया। बहुत ही सुंदर तरीके से तूने ध्रुव नताशा भाभी के रोमांटिक सीन का कचरा किया है। बहुत खूब। लगा रहा ऐसे ही।

परमाणु : मुर्दे की मौत मरेगा रे तू अंथोनीया।

नताशा : अच्छा अब में चलती  और सगाई के लिए  मुबारकबाद।

ध्रुव :तुम ऐसा क्यों बोल रही हो नताशा। अभी सगाई हुई तो नही है ना। विश्वास करो मुझपर और अपने प्यार पर।

नताशा : मेरे प्यार पर तो मुझे पूरा भरोसा है मगर पर न जाने क्यों अपनी किस्मत पर नही होता है। मैं तुमसे प्यार करने के लायक नही हूँ शायद इसीलिए । अलविदा ध्रुव।

ध्रुव नताशा को समझाना चाहता था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा पर शायद उसे भी इस बात पर पूरी तरह से यकीन नही हो रहा था। शायद वो सही ही कह रही थी।

इसी उधेड़बुन में ध्रुव अपने कमरे में जाकर लेट जाता है और उसे नींद आ जाती है। ध्रुव सोता ही रहता है तभी रजनी मेहरा ध्रुव की कमरे में आती है। ध्रुव को ठंड में ठिठुरता देखकर एक कम्बल ओढ़ा कर वो कमरे से बाहर जाने ही वाली होती है कि तभी ध्रुव की आवाज़ आती है।

ध्रुव : मम्मी। क्या तुम मुझसे नाराज़ हो ?

रजनी: नही तो बेटा। मैं क्यों नाराज़ होने लगी तुझसे।

ध्रुव : तभी तो आज माथुर साहब के यहाँ से लौटने के बाद से आपने एक भी बार मुझसे कोई बात नही की।

रजनी : अरे वो में जरा काम मे व्यस्त थी बेटा। समय नही मिला।

ध्रुव : मैं आपका ही बेटा हूँ माँ। आपके गुस्से में और व्यस्तता में अंतर भी नही पहचानूंगा क्या मैं ?

थोड़ी देर कमरे में सन्नाटा रहता है ।

रजनी : हाँ मैं नाराज़ हूँ। नाराज़ हूँ कि तू मेरे इस फैसले मैं मेरे साथ नही है।

ध्रुव : मगर माँ मैं तो बस  यही कहना चाहता हूँ कि मै अभी शादी के लिए तैयार नही हूँ।

रजनी : देख ध्रुव। मैंने आजतक तुझे किसी भी बात के लिए नही रोका। यहां तक कि जब तूने कहा कि तुझे क्राइम फाइटिंग करनी है तो मैंने उसमे भी तेरा साथ दिया। मुझे नही पता रहता कि जिस ध्रुव को मैंने सुबह देखा वो शाम को घर मैं सही सलामत लौटेगा की नही। हमेशा दिल मे डर रहता है पर मैंने कभी भी तुझे तेरा काम करने से नही रोका। आज पहली बार मैं तेरे लिए अपने मन से कुछ करना चाहती हूँ मगर तुझे मेरे फैसले से ऐतराज़ है। क्या मेरा इतना भी हक नही है तुझपे।

ध्रुव : आप ऐसा क्यों बोल रही है मम्मी। आपका पूरा हक है मेरे ऊपर। आपका हक नही होगा तो और किसका होगा।

रजनी : अगर सच मे ऐसा है तो तू खुशी खुशी ये शादी करेगा।

ध्रुव : जैसा आप कहो मम्मी। लेकिन आगे से ये कभी मत बोलना की आपका मेरे ऊपर हक नही है।

रजनी (अपने आसूँ पोछते हुए) : अच्छा चल अब सो जा। आज बहुत थक गया होगा तू।


कुछ दिनों के बाद । ध्रुव की सगाई का दिन।

माथुर साहब के घर की सजावट देखने लायक। आखिरकार एकलौती बेटी की शादी जो थी। खर्चा दिल खोलकर किया गया था और वो साफ साफ दिख रहा था उस सजावट की भव्यता को देखकर। सारी तैयारियां पूरी हो ही गईं थी। इंतज़ार था तो बस ध्रुव और उसके परिवार के आने का।

ऋचा द्वारा किये गए उस दिन के बवाल के बारे में सबको पता चल गया था और कोई ये मानने को तैयार नही था कि उसका ध्रुव से कोई रिश्ता नही था। हर किसी के मन मे यही कौतूहल चल रही थी मगर कोई साफ साफ कह नही पा रहा था।

तभी वहाँ पर ध्रुव, राजन मेहरा और उनका परिवार सभी सगे सम्बन्धियो के साथ पहुंच जाते है। माथुर साहब उनका स्वागत करने दरवाज़े पर आ जाते।

राजन मेहरा : उम्मीद है कि देरी नही हुई होगी माथुर साहब।

माथुर : अरे नही । आप बिलकुल सही समय पर आए है। बस कुछ ही देर में मुहूर्त लगने वाला है। आइये आप लोग। कुछ मीठा ग्रहण कीजिये।

अन्थोनी ( चहकते हुए ): हाँ हाँ अंकल चलिए । उसी लिए तो आये है।

परमाणु : थोड़ा शर्म कर ले हवसी। तुरन्त ही पेलने लगेगा क्या ?

डोगा ( सजावट को देखकर): भाई साहब बड़ी मालदार पार्टी फसाई है लौंडे ने। जिंदगी बन गई इसकी तो।

तभी वहाँ तिरंगा की एंट्री होती है।

भोकाल : तुझे इतनी देरी क्यों हुई बे। क्या कर रहा था ?

तिरंगा : भई मेरे जूते गुम गए थे। वही ढूंढ रहा था। 

सब एक साथ : भक्क साले।

परमाणु : और ये क्या नीचे से ऊपर पूरे सफेद कपड़ो में आ गया है। शादी है साले मैयत नही।

अन्थोनी : ये शादी कब मैयत में बदल जाये कह नही सकते।

डोगा : तू कभी शुभ ना बोलियों। इतने दिन हो गए मरे हुए  कुछ तो शिष्टता सीख ले।

अन्थोनी : अबे यार ये गुलाब जामुन वाला बहुत दुष्ट है। गुलाब जामुन नही दे रहा।

डोगा : कमाल है मेरे इतने बोलने के बाद भी भाईसाहब के कान पर एक मरी हुई जूं तक नही रेंगी।

परमाणु : क्यों नही दे रहा। ऐसा कैसे कर सकता है। क्या कह रहा है ?

अन्थोनी : कह रहा है कि सर आप कुछ और खा लीजिये। अब गुलाब जामुन आपको नही मिल सकते।

भोकाल : अरे ऐसे कैसे कह दिया । कितने खाये तूने अभी तक  ?

अन्थोनी : केवल 20।

सभी आश्चर्य से अन्थोनी की तरफ देखने लगते है।

तिरंगा : अबे तो और कितना खायेगा बे।

परमाणु : इनके पूरे खानदान का राशन खा लेगा क्या बे ?

डोगा : भाई इतना सब कुछ जाता कहाँ है ? कहीं से लीकेज तो नही है।

भोकाल : वाह। देखो ये बात पूछ कौन रहा है ? जिनसे अपनी खुद की लीकेज नही संभाली जाती।

परमाणु : डायपर पहना है की नही आज ?
डोगा : देख लूंगा । तुम सबको देख लूंगा।

तिरंगा : पहले अपने पेट को देख ले।
तभी माथुर साहब घोषणा करते है,
"अब ध्रुव और सिमरन एक दूसरे को अंगूठी पहना सकते है। शुभ मुहूर्त शुरू हो गया है।"

ध्रुव : अबे परमाणु मेरी अंगूठी कहाँ गयी।

परमाणु : अबे मेरे पास नही है, वो डोगा को दी थी मैंने।

डोगा : अबे मेरा पेट अभी तक सही नही हुआ है। फालतू का टेंशन न दे वरना सारा रायता यही फैल जयेगा। मेरे पास कहाँ है अंगूठी।

भोकाल : रायता नही खिचड़ी। पीली वाली।

भोकल : अबे अंगूठी नगराज के पास है।

ध्रुव :अब ये कहाँ नागिन डांस करने लग गया।

भोकाल : नागिन डांस नही नाग डांस।

परमाणु : पेल दे तू सारा ज्ञान यही पेल दे आज।

डोगा : साला भूतकाल से आया है न इसीलिए ज्यादा हिंदी आ रही है इसको।

तभी टी वी पर न्यूज़ आती है

" अभी अभी प्राप्त जानकारी के अनुसार हमारे विश्वरक्षक, ब्रह्मांड रक्षक, नरकनाशक नगराज का अपहरण हो गया है।"


डोगा : साला इस खबर से ज्यादा तो इस एंकर ने इज़्ज़त उतार दी नागराज की।

परमाणु : अबे लानत है इसपे। बताओ यहाँ मुहूर्त बीता जा रहा है और ये ससुर निकल लिए अपहरण होने। बड़का सूरमा बनते फिरते है। लो आ गई कयामत।

मेहरा : कैसे कैसे दोस्त पाल रखें है तुमने। ये बने फिरते है विशरक्षक।

ध्रुव : मुझे पता है ये काम किसका है।


वहां से दूर एक अनजाने और बियावान स्थान पर नगराज एक जेल में कैद था।

नगराज : ये किसने कैद किया है मुझे। किसने किया ऐसा दुस्साहस। अरे यार मेरा सूट सही है कि नही। कहीं से फट न गया हो, एक ही थो है भी।  एक तो इतनी गरीबी है। जोश में आकर सारा खज़ाना दान तो कर दिया मगर अव पता चल रहा है । साले मेरी सैलरी भी नही बढ़ा रहे है। वो तो शुक्र है कि मेरी त्वचा हरे रंग की है तो लोगो को पता नही चलता कि मैं नँगा रहता हूं , वरना कहाँ से लाता कपड़े इस महंगाई में।

तभी एक आवाज़ आती है।
" अरे बस भी करो यार। तब से गरीबी का रोना रो रहे हो। जब कहो कि नागद्वीप आ जाओ तब तो मानते नही हो। ढंग से एंट्री भी नही मारने दे रहे है। तब से बड़बड़ाए पड़े है।"

नगराज : विसर्पी तुम।

विसर्पी: तो और किसमे इतना दम है कि तुम्हारा अपहरण कर सके।

नगराज : लेकिन क्यों ?

विसर्पी : वो बाद में पता चलेगा तुम्हे। मगर अभी तुम ध्रुव के पास नही जा सकते हो।

नगराज : लेकिन मुझे जाना पड़ेगा विसर्पी। ध्रुव ने मुझे वो अंगूठी दी है जो उसके परिवार की पुश्तैनी अंगूठी है । मेरे वहाँ पहुँचे बिना सगाई नही हो पाएगी।

विसर्पी : तुम यहाँ से कहीं नही जा सकते।

क्रमशः।

क्यों किया  विसर्पी ने नागराज का अपहरण ? क्या नागराज वो अंगूठी लेकर सगाई में पहुंच   पायेगा ?  क्या हो पाएगी ये सगाई ?  जानने के लिए पढ़े इस कहानी का अगला भाग।

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