Friday, 29 December 2017

 ध्रुव की शादी : भाग 5 (समापन भाग)

लेखक: दिव्यांशु त्रिपाठी

परमाणु : विसर्पी भाभी आप तुरन्त इस तंत्र आवरण को हटाएं जिससे कि हम लोग वहां पहुँच कर उस दुष्ट को पकड़ ले।

विसर्पी : ये कोई सामान्य तंत्र आवरण नही है परमाणु। ये विशेष तरीके का आवरण है जिसको एक तय अवधि के लिए ही लगाया जाता है। उस अवधि के समाप्त होने के पहले उसको नही हटाया जा सकता। हमे कुछ देर इंतज़ार करना पड़ेगा।

परमाणु : आप भी ना भाभी अपना दिमाग (विसर्पी परमाणु को घूरती है) पूरी तरह से लगती है। बहुत बढियां किया आपने ये आवरण लगा के। ये सारी गलती इस नगराज की है। कौन सुपरहीरो किडनैप होता है बे ? साले कलंक है तू हम पर ।

“ हा हा हा हा “

तभी अचानक से उस जगह पर किसी के अट्टाहस करने की आवाज़ आती है

नागराज : कौन हँस रहा है बे ? ज्यादा हसीं आ रही हो तो बताओ |

कालदूत : मैं ही हँस रहा हूँ | बोल क्या कर लेगा तू |

नागफनी सर्प ( अंदर से) : पेलाये गये ससुर बहुत बकैत बन रहे थे |

नागराज : अरे महात्मन आप | आप काहें बीच बीच में नागु टाइप एंट्री ले रहे है |

कालदूत : का करे अब | बुढ़ापा आ गया है | एक जगह ज्यादा देर टिका नही जाता है |

नागराज(फुसफुसाते हुए) : आप तो पैदा ही बुड्ढे हुए थे | लोगो का बचपन आता है फिर जवानी फिर बुढ़ापा मगर आप का चिरकाल से बुढ़ापा ही चल रहा है |

शीतनाग ( अंदर से) : पैदा हुए होंगे तो हकीम ने कहा होगा , मुबारक हो आपके घर बुड्ढा हुआ है |

नागफनी सर्प : तीन सरो वाला |

नागराज उनकी बात सुनकर हंसने लगता है |

परमाणु : अबे इसका मानसिक संतुलन हिल गया है क्या | खड़े खड़े बिना बात हँस रहा है |

नागराज ( शीतनाग से ): साले तू तो छुपा रुस्तम निकला |

शीतनाग : आप से ही सीखा है गुरु जी |

कालदूत : मेरे को शक था ही | जब से इसने अपना खाजाना दान किया है तभी से इसका मानसिक संतुलन हिला हुआ सा लग रहा था मुझे | गरीबी क्या दिन ना दिखा दे | कुछ बोला भी नही जाता इसकी गरीबी देखकर |

नागराज : हाँ आप कुछ बोल रहे थे महात्मन |

कालदूत : हाँ | मैं कह रहा था की अब बूढ़ा हो गया हूँ | अबेक जगह ज्यादा देर बैठते नही बनता | जरा ...........

तिरंगा (कालदूत की बात को बीच में काटकर ): हाँ सही कहा आपने महात्मन | ये बवासीर है ही ऐसी बीमारी | कम्भख्त जान ही ले लेती है | ना बैठने देती है ना खड़े होने देती है | सुबह की प्रक्रिया में तो ऐसा लगता है की बस अब उठा ही ले भगवान |

कालदूत : ना भैया ना | ऐसा कुछ नही है मेरे साथ | लेकिन तू बड़ा सताया हुआ सा लग रह है इससे |

ध्रुव : वैध ऋषि का अर्श्कल्प खाया कर | ०११५३ ००११५३ पे फोन कर लेना |

परमाणु : करा ली बेज्ज़ती | पड़ गई कलेजे में ठंडक | तेरे तो साले मुंह में भी बवासीर हो रक्खी है |

तिरंगा : अबे मुझे लगा की मैं भी कुछ हिस्सा हो लूं इस संवाद का | साला कोई कॉमिक तो आई नही इतने सालो में | साड़ी बातें मन में ही रह जाती है | किस्से कहूँ | कैसे कहूँ |

परमाणु : दुखती रग पर हाथ रख दिया तूने रे |

नागराज : चुप करो साले | रोज़ का रोना है तुम लोगो का ये | आप बोले महात्मन |

कालदूत : मैं कह रहा था की अब में बूढा हो गया हूँ | ज्यादा समय एक जगह पर बैठते नही बनता है | जरा ..............

नागराज : क्या हुआ महात्मन ? आप चुप क्यूँ हो गये |

कालदूत : नही मैंने सोचा फिर से  कोई ना बोलने लगे बीच में |

ध्रुव( फुसफुसाते हुए) : ये बुड्ढा सही मायनो में सठिया गया है |

नागफनी सर्प : ही ही ही ही |

कालदूत : एक जगह बैठे बैठे बड़ी बोरियत सी महसूस होती है |

परमाणु : तो का अब इनके मनोरंजन के लिए मुजरा करे हम लोग |

कालदूत : वो तो अभी देख कर रहा हूँ |

विसर्पी : क्या कहा आपने महात्मन ?

कालदूत : अर्ररर ....... कुछ नही ....... मैं चलता हूँ जरा काम हैं |

शीतनाग : हाँ हाँ | बड़का काम याद आ रहा है इनको | विसर्पी भाभी चेंप दी तो भाग रहे है |

परमाणु : कतई रसिया है ये बुड्ढा | अरमान जिन्दा है इनके अभी तक |

नागराज : अबे मुझे तो बहुत पहले से पता था बे | मगर मैं बोलूं तो कोई मानता ही नही है | खासकर ये जो बिना बालों वाला टकला है ना वही सबसे ज्यादा है | सर पूरा बंजर है पर जवानी की फसल आज भी लहलहा रही है इसकी | और मेरे को बड़ा ज्ञान पेलता रहता है की दो दो प्रेमिकाएं नही रखनी चाहिए , इंसान को एक औरत के प्रति ही समर्पित रहना चाहिए , फिलाना धिम्काना |

तिरंगा : हाँ तो गलत क्या कहते है | इंसान को एक के साथ ही रहना चाहिए | मुझसे सीखो कुछ सालो |

ध्रुव : अबे तेरी कब बनी बे | हमे तो न पता |

परमाणु : मुझको भी नही पता |

नागराज : मेरेको भी नही मालूम |

विसर्पी,ऋचा और नताशा : हमको भी नही पता |

तिरंगा : और किसी को भी बोलना है तो बोल ले | कर ले बेज्ज़ती |

नागराज के अंदर मौजूद सभी नाग एक स्वर में बोलते हैं |

“ हमको भी नही पता |”

 तिरंगा : तेरे नागो का मूंह कुछ ज्यादा ही नही चल रहा है आजकल |

परमाणु : मुझे भी ऐसा लग रहा है आजकल | लेकिन तू टॉपिक न बदल | कब बनी तेरी प्रेमिका |

तिरंगा : साला सच में मेरी कॉमिक्स कोई नही पढ़ता क्या | हद होती है यार बेज्ज़ती की | अबे सच बोल रहा हूँ | सच में मेरी भी प्रेमिका | हाँ , मैंने भी प्यार किया है |

ध्रुव : कब किया भाई ?

तिरंगा : जा नही बता रहा | जब तक तुम लोगो की तरह दो तीन न पटाओ तुम लोगो को मानना नही है | तुम लोगो की तरह ठरकी न हूँ मैं |

परमाणु : ठरकी ! किसको बोला बे ठरकी ?

तिरंगा : वाह देखो बुरा किसको रहा है | जो सबसे बड़े वाले है | ठरकी | साले बाकी सभी की तो दो ही हैं | तेरी तो तीन तीन है |

परमाणु ( शर्माते हुए ) : अब अपना अपना टैलेंट है | क्या कहें अब |

तिरंगा : वाह भाईसाहब ब्लश मार रहे है | नई नवेली दुल्हन न शरमाये इतना |

ध्रुव : तू सही कह रहा है बे | साला हमारी love लाइफ पर लोगो का ज्यादा ध्यान जाता है | इसके ठरक पर तो कोई ध्यान ही नही देता |

नागराज : हाँ | साला इतना लम्बा चौड़ा भाषण मुझे सुनना पड़ता है उस तीन सर वाले बुढ्वे से | मई कितना शरीफ हूँ |

विसर्पी : शरीफ |

नागफनी सर्प : साला इतना झूठ बोलता है ये आदमी | इसके लिए नर्क में अलग से गर्म तेल की कढ़ाई चढाईं गई होगी |

नागराज (नागफनी सर्पो से ):तुम लोगो का कुछ ज्यादा ही नही हो रहा है |

नागफनी सर्प : चल बे चल | हवा आने दे |

परमाणु : चुप रहो सालो | फ़ालतू की बातों में उलझे हुए हो | अभी ये सोचो की कौन है जो तेरा हमशक्ल बनकर ये काण्ड कर रहा है |

ध्रुव : अभी के लिए तो तू बच गया लेकिन ये मत सोच की आगे भी बचता रहेगा | तुझ पर निगाहें जम चुकी है मेरी |

नागराज : वो तो ठीक है | मगर ये एंथोनी और डोगा कहां गये | दिख नही रहे है |

तिरंगा : वो साले कोने में बैठे हुए है | क्या कर रहे है सब |


कुछ दूरी पर एंथोनी और डोगा बैठे हुए थे | वो दोनों ताश खेल रहे थे |

डोगा : साले बेईमानी कर रहा है | अभी अभी तो तेरी दिल की रानी मैंने जीती थी | फिर से तेरे पास कैसे आया गई |

एंथोनी : मैं नही कर रहा चीटिंग | तूने कब जीती मेरे दिल की रानी.....मेरा मतलब दिल की रानी | साले हार रहा है तो झूठा इलज़ाम लगा रहा है |

डोगा : बंदूके निकल जाएँगी इसी बात पर |

एंथोनी : हम तो कब्र से निकलते ही सर पर कफन बाँध कर | तेरी बंदूके क्या बिगड़ेंगी मेरा |

डोगा ( अपनी सबसे बड़ी बंदूक निकालते हुए ) : रुक साले अभी बताता हूँ तुझे |

एंथोनी : अबे अबे तू हर बात पर सीरियस क्यों हो जाता है | शक्ल कुत्तो वाली है तो कम से कम सोच तो इंसानों वाली रख | ये बात याद रख की वो चाट खाने से पहले मेरी मौत नही आने वाली |
‘ चाटखोरी की तमन्ना अब हमारे दिल में है , देखना है जोर कितना बाजुए चचा में हैं |’

डोगा : वो चाट तेरी ज़िन्दगी का आखिरी निवाला बनेगा साले | ढंग से खेल |

तभी वहां पर बाकी लोग भी पहुँच जाते है |

परमाणु : वाह | कतई जुवारीं हो गये है दोनों |

तिरंगा : साला यहाँ मेरी गर्लफ्रेंड के अस्तित्व पर प्रश्नचिंह लग गया है और इनको ताश खेलने से फुर्सत नही मिल रही है |

डोगा : तेरी गर्लफ्रेंड कब बनी बे |

एंथोनी : साले ऐंवे ही बोल रहा है | मतलब मूंह में जबान है तो कुछ भी बोलेगा |

तिरंगा : बहुत ज्यादा हो रहा है तुम लोगो का | मैं चला जाऊंगा |

नागराज : अबे तू रुक ना | कहां भागे जा रहा है |

परमाणु : अभी तो तुझे ये भी बताना है की तेरी गर्लफ्रेंड कौन है ?

एंथोनी : हुआ क्या ? काहें डिस्टर्ब कर दिया हम दोनों को |

तिरंगा : भौजाई से धोका।

परमाणु : ई पिक्चरवा त देखले हई मर्दवा। कौनो अउर पिक्चर बतावा हो।

तिरंगा : अबे ओ भोजपुरी KRK। सुला ले अपने अंदर के निरहुआ को। मैं कह रहा हूँ कि अपनी होने वाली भाभी के साथ धोखा हुआ है। ध्रुव की ज़ेरॉक्स से सगाई हो गई उनकी।

डोगा : अबे ये सब इस नगराज की करतूत है। भाई कौन सुपरहीरो किडनैप होता है बे। अबे कुछ तो इज़्ज़त रक्खी होती अपनी जात की। ना साले तू किडनैप होता ना हम सब वहां से यहां आते। डूब मर डूब मर चुल्लू भर जहर में।

परमाणु : और किडनेपो केसे भइले। विसर्पी भाभी। आपन होवे वाली मेहरारू से।

तिरंगा : हमे तो अपनो ने लूटा गैरो में कहां दम था,

डोगा : साले इतना मरूँगा की भूल जाएगा कि मुँह में दांत ज्यादा था या कम था।

भोकाल : वाह उस्ताद वाह। क्या फरमाया है।

डोगा : शुक्रिया आप सब का।  बस बह आता है अंदर का टैलेंट कभी कभी। मगर कभी घमण्ड नही किया।

ध्रुव : वाह। नही नही वाह। महफ़िल जमाई जा रही है। मुशायरा हो रहा है मेरे जनाजे पे।

एंथोनी : मैं और मेरी चाट अक्सर ये बातें करते रहते है कि मेरे मुंह के हसीन दांतो के तले वो टिक्की आ जाती तो क्या बात होती। मगर आज तुम नही हो बस है तुम्हारी यादें। मैं और मेरी चाट अक्सर ये बातें किया करते है।

भोकाल : तू कतई आलू टिक्की बन ले। गोता लगा ले तेल में। छन ले तू।

तिरंगा : ये गलत बात है। उसको पूरी शायरी बोलने दी। मुझे नही बोलने देते।

परमाणु : अबे तो उसने सरप्राइज दे दिया ना एकदम अचानक। तेरी शायरी के लिए तो हमेशा तैयार रहते है हम।

डोगा : Back to the topic bro.

परमाणु : भाईसाब अंग्रेजी। इतनी अंग्रेज़ी तो एक साथ कभी न सुनी मैंने।

डोगा : साले मुझे गवांर समझता है क्या। शक्ल से लगता हूंगा मगर हूँ नही।

और तू साले नगराज। विसर्पी भाभी को नही सम्भाल पाता। मुझसे सीख कुछ । मोनिका को हड़का कर रखता हूँ हमेशा।

तभी एक आवाज़ आती है।

" क्या बोले तुम"

डोगा : कौन है बे ?

" मोनिका"

डोगा ( चौंक कर) : मोनिका

परमाणु : ओ माय डार्लिंग।

तभी एक और आवाज़ गूंजती है।

" डार्लिंग। वाह क्या बात है। मेरे लिए तो कभी डार्लिंग का ड भी ना निकला मुँह से ।"

परमाणु : शीना तुम। वो फ्लो फ्लो में निकल गया

शीना : तुम्हारा फ्लो सही करती हूँ मैं अभी।

परमाणु : मगर तुम दोनों यहाँ पर पहुंची कैसे ?

शीना : तुम लोग नही बताओगे तो क्या हमे पता नही चलेगा | ध्रुव ने न्योता भेझा था हमे उसकी सगाई में आने का | लिखा था की भाभियों जरूर आना | लेकिन फिर नताशा और ऋचा ने हमे यहाँ बुला लिया तो हम यहाँ आ गये |

डोगा (परमाणु से) : कुछ ज्यादा ही देवर नही बन रहा है आदमी |

परमाणु : तू सही कह रहा है बे | हमसे बताये बिना इनको न्योता दे आया | इसकी खबर लेनी पड़ेगी |

मोनिका : क्या खुसुर फुसुर लगा रखी है ? जो बोलना है सामने बोलो |

नागराज : इतनी हिम्मत किसमे है ?

विसर्पी : तुम क्या बोले ?

नागराज (सकपका कर) : बस यूँ ही जरा एक गाना गुनगुना रहा था | तुम भी जानू खामखा में शक करती हो |

विसर्पी : तुमने काण्ड ही ऐसे ऐसे किये है |

परमाणु : देखो भाई लोगो अब यहाँ पर हम लोग कुछ बोल तो पाएंगे नही तो अब काम पर लगते है और यहाँ से बाहर निकल कर पता करते है की कौन है वो ढोंगी ध्रुव |

डोगा : हाँ हाँ चलो सब लोग |

नागराज (परमाणु से फुसफुसा कर ) : बचा लिया भाई तूने वरना आज प्राण पखेरू उड़ जाते |

विसर्पी : चलो सब लोग | मैं यहाँ का द्वार खोलती हूँ | अब इस तन्त्र बंधन की अवधि पूरी होने ही वाली है |

विसर्पी अपने होठो को हिलती है तुरंत ही उस गुफा के उपर से तन्त्र बंधन समाप्त हो जाता है |

नागराज : मगर हम वहां जल्दी से जल्दी पहुचेंगे कैसे |

ध्रुव : धनंजय पहुंचाएगा,  हम लोगो को अपनी शक्ति से |

नागराज : ओ धनंजय कैसे हो यार | बड़े दिनों बाद मुलाकात हो रही है अपनी |

धनंजय : जिंदगी झन्ड बा तौनो पे घमंड बा |

नागराज : क्या मतलब भाई ?

धनंजय : तुम्हारी अभी शादी नही हुई है ना |

नागराज : अभी तक तो नही |

धनंजय : तभी पूछ रहे हो | भाई जिंदगी नर्क कर दी है इस औरत ने |  अब ये बताओ की तुम्हारे ससुराल वाले आएंगे तो तुम क्या करोगे ?

नागराज : उनका विशेष रूप से स्वागत करूँगा |

धनंजय : वही तो बात है | हम आम लोग यही करेंगे | मगर हमारी बीवियां आम कहां है | इनका दिमाग तो न जाने कैसे कैसे चलता है | अब मेरे ससुराल वाले आ रहे थे तो मैंने सोचा की चलो भाई थोड़ी आवभगत कर लेता हूँ | लेकिन हमारी बेगम साहिबा का दिमाग तो शर्लाक होल्म्स से भी तेज़ चलता है | हमसे कहने लगीं की क्या बात है बड़ी आवभगत की जा रही है ससुराल वालो की | इससे पहले तो आजतक नही की |

तिरंगा : क्यों नही की ?

धनंजय : अबे पहले पूरी बात तो सुन ले | बीच में ही कूदने लगता है |

परमाणु : सच में तेरे मूंह में बवासीर हुआ है |

धनंजय : तो भाई लोगो इसके पहले मेरे ससुराल वाले जब भी आते थे तो मैं किसी ना किसी काम में व्यस्त रहता था इसीलिए मैं उनका स्वागत नही कर पाता था | इस बार मेरे पास कोई जरुरी काम नही था तो मैं उनके आवभगत की तैयारी करने लगा | मगर भैया हमारी महारानी जी का शक्की दिमाग | कह रहीं है की इस बार पहली बार उनकी छोटी बहन माने हमारी साली साहिबा आ रही है बस इसीलिए हम ये सब तैयारी कर रहे है | अब हम उनको कैसे समझायें की ऐसा कुछ नही है | साली साहिबा आयें ना आयें इससे कोई मतलब नही हमे |

भोकाल: मतलब नही | काहें साली साहिबा सुंदर नही है क्या ?

धनंजय : क्या लगती है यार। मतलब जब सामने से गुजरती है ना तो दिल पर कहर ढा देती है। हूर की परी भी कम है उसके सामने। मैं तो .......

ध्रुव (धनंजय की भावनाओ को रोकने के लिए उसको बीच मे ही काटता है) : उहम्म अहम।

धनंजय उसकी तरफ देखता है और अपनी भावनाओं को बहने से रोकता है।

धनंजय : लेकिन अभी इसपर कोई बात नही है । अरे यार उसके फैमिली की आवभगत करो तो उसे दिक्कत , ना करो तो उसे दिक्कत। इंसान करे तो क्या करे। कुछ ना करो तो कहेगी की तुम्हे तो मेरे परिवार वालो से प्यार ही नही। इतने ताने इतने ताने मन करता है कि इसी समुद्र में डूब कर मर जाऊँ।

तिरंगा : तू तो वो भी नही कर सकता ना।

परमाणु : फोकस फोकस कर साले बवासीर।

 नगराज : अबे ऐसी कोई बात नही होगी। तो जरा एक बार भाभी को पास बैठा कर पूछ प्यार से की उनको आखिर दिक्कत क्या है।

धनंजय : दिक्कत। दिक्कत ये है कि मैंने शादी की। दिक्कत ये है कि मैंने उससे शादी की। दिक्कत ये है कि मैं उसे हमेशा खुश देखना चाहता हूँ। मगर इन बीवियों को तो स्वयं विधाता भी खुश नही रख पाते है तो मैं क्या खाक रख पाऊंगा। तुम लोगो को क्या लगता है कि नारायण बार बार इस नरक रूपी पृथ्वी पर अवतरित क्यों होते है। पाप बढ़ना ना बढ़ना ये तो सब बहाने है। असली कारण ये है कि वो खुद अपनी पत्नी से पिंड छुड़ाकर कुछ दिन सुकून से रहना चाहते है। भोलेनाथ क्या हमेशा ध्यान में ही लीन रहते है । नही भाई नही। ये सब तरीके है माँ पार्वती के बातों को ना सुनने के। यही सब तो देखकर हमारे पवनपुत्र हनुमान ने ब्याह नही किया।

अबे तुम लोगो को मैं क्या बताऊँ। अभी करवाचौथ आएगा । अभी उस त्योहार को आने में महीने भर बाकी रहेंगे की इनका बोलना चालू हो जाएगा कि तबियत जरा खराब सी लग रही कुछ दिनों से , ना जाने मैं व्रत रख पाऊंगी की नही। मैंने कहा , की कोई बात नही अभी तो एक महीना बचा है , तब तक ठीक हो जाएगी। तो कह रही है कि मेरी तबियत है या तुम्हारी। ऐसे कैसे ठीक हो जाएगी। इसपर मैंने कहा कि कोई बात नही इस बार मत रखना तुम व्रत। कोई बात नही । तो गुस्सा गई, कह रही है कि तुम तो चाहते ही हो कि मैं व्रत ना रखूं और हर कोई मुझे सुनाए की देखो कैसी पत्नी है अपने पति के लिए व्रत नही रखती है। मैंने कहा, तो फिर रख लो। उसपर कह रही है कि , हाँ तुम तो चाहते ही हो कि मैं बीमार पड़ जाऊँ और तुम्हे मुझसे छुटकारा मिल जाये। अरे तो क्या बोलूं भगवान। खाना बनाएंगी। अरे जब नही आता खाना बनाने तो काहें बनाती हो खाना। मगर नही इनको तो बनाना है उसपर पूछेगी की कैसा बना है। मैं कहूंगा ठीक है तो कहेगी  ठीक है का क्या मतलब होता है, तुम्हे तो सब कुछ ठीक लगता है। माँ के हाथों जैसा है कि उससे खराब। मैंने कहा की अरे उससे भी अच्छा बना है। तो कह रही है कि झूठ मत बोलो अब इतना भी अच्छा नही बना है। सच सच बताओ कैसा बना है। मैंने कहा, की बिल्कुल बकवास खाना बना है। तुम्हे कुछ भो बनाने नही आता। ऐसा करो जरा खाना बनाने का काम तुम मत किया करो। इस बात पे गुस्सा गई, कहने लगी की बस तुम्हे तो बस कोई ना कोई बहाना चाहिए मेरी बुराई करने का। अरे सच पूछोगी तो सच ही तो बताऊंगा ना मेरी माँ। खाना नही कहेंगे उसको जहर कहेंगे जहर जो वो मुझे रोज़ खिलाती है।कहेंगी घूमने चलो घूमने चलो। तुम तो मुझे कहीं घूमने ले ही नही जाते हो। दिन भर घर पर बैठी रहती हूँ। तुम मुझसे बिल्कुल भी प्यार नही करते लगता है। ये पड़ोस में जो मृत्यंजय रहता है वो देखो कैसे अपनी बीवी को रोज़ रोज़ कहीं ना कहीं घुमाने ले जाता है। तुम भी मुझको ऐसे ही रोज़ घूमने क्यों नही ले जाते हो। मैंने कहा ठीक है चलो घूमने । आज से रोज़ तुम्हे घुमाने ले जाऊंगा। लेकिन उसको कलेजे को ठंड पड़ ही नही सकती ना कभी। दो दिन बाद कह रही है , की अरे जरा घर पे भी रह लिया करो। जब देखो तो घूमने घूमने। अरे घर पर बैठ कर क्या दो प्यार भरी बातें नही होती है क्या तुमसे। जब देखो तो घूमने निकल जाते हो। अरे लेकिन तुमने ही तो कहा था कि घुमाने ले चलो। तो कहती है , बड़ी बात मान रहे हो मेरी। यही बात मानोगे और कोई बात ना मानी आज तक। तो क्या करूँ मर जाऊँ मेरी माँ।

 ये शादी करने का पूरा सिस्टम बनाया किसने। साले को पटक के मरूँगा। अबे भाई अकेले तू क्या नही उखाड़ पा रहा था तो इन औरतो के साथ मिलकर उखाड़ लेगा। वही बात होती है ना। खाली दिमाग शैतान का घर। खाली बैठे होंगे तो आईडिया आया होगा कि चलो शादि करके देख लेते है। अबे गधे इंसान तूने तो शादी कर ली एक्सपेरिमेंट के तौर पे मगर हम सभी मर्दो की तो लगा दी ना तूने।

सारे कुंवारे मर्द देश दुनिया में कितने नाम कमा रहे है। और हम शादी शुदा लोग यहाँ अपना दुखड़ा रो रहे है। इतने आगे सब कैसे बढ गए। मेहनत । नही भाई नही । उनके सर में अपनी बीवियों की कीच कीच नही भरी रहती है । इसीलिए वो फोकस कर पाते है। यहाँ तो पूरी जिंदगी इनकी कीच कीच सुनकर ही बीत जारी है।तंग आ गया हूँ इस कीच कीच से। कीच कीच कीच कीच कीच कीच।

थोड़ी देर के लिए वहां पर सन्नाटा पसर गया। सब एकटक धनंजय को देख रहे थे।सभी की  आँखें और मुंह दोनों ही खुले हुए थे। नगराज ने खामोशी तोड़ने का प्रयास किया।

नगराज : भाई मैं तेरा दुख समझ सकता हूँ। मगर हमे अभी ध्रुव कि सगाई के स्थल पर पहुँचना होगा।

धनंजय : तू अभी नही समझेगा रे। चल तुम लोगो को छोड़ आता हूँ।

परमाणु : अबे रुला दिया भाई ने। बिल्कुल पत्नी पीड़ित है ये आदमी।

डोगा : अबे आँखे खोल दी यार इसने।

एंथोनी : मेरी चाट की खुमारी उतार दी भाई के दुख ने।

तिरंगा : कोई गर्लफ्रैंड ना है मेरी आज से । जो थी उससे भी आज से ब्रेकअप हो गया। अरे मेरे को बनानी ही नही है । सच का सामना कर दिया भाई ने।

धनंजय अपनी शक्तियों की मदद से उस गुफा के बाहर एक द्वार का निर्माण करता है जो उन्हें तुरंत ध्रुव को सगाई के स्थल पर पहुंचा देती है।

सभी लोग वहाँ पर पहुंच जाते है। लोगो की भीड़ काफी कम हो चुकी थी और ज्यादातर परिवार के ही सदस्य उस स्थान पर विचरण कर रहे थे। आई जी राजन और माथुर साहब एक जगह पर खड़े थे और बातें कर रहे थे।  ध्रुव और बाकी सभी लोग तुरन्त उन दोनों के पास पहुँचते है।

राजन मेहरा : अरे ध्रुव। तुम इतनी जल्दी कैसे वापस आ गए। और सिमरन बेटी कहां है।

ध्रुव : में तो अभी आया हूँ ।

परमाणु : मेरा डायलाग मार रहा है कम्भख्त।

राजन मेहरा : क्या मतलब है तुम्हारा ध्रुव ?

ध्रुव : मतलब की जिस शख्स की आप लोगो ने अभी सगाई करवाई थी वो मैं नही था। वो कोई और था।

माथुर साहब : क्या बात कर रहे हो। मज़ाक करने की आदत तुम्हारी नई आई है लगता है। हम क्या तुम्हें देख कर पहचान नही पाएंगे क्या।

ध्रुव : आप लोग बात समझ नही रहे हो पापा और अंकल।

राजन मेहरा : मैं सब समझ रहा हूँ तेरी नौटंकी। हमसे मज़ाक कर रहा है और चाह रहा है को हम बेवकूफ बन जाये। अब इतने भी कम दिमाग वाले ना है हम।

तभी श्वेता सामने आती है ।

श्वेता : पापा भैया और भाभी कहां है ?

राजन मेहरा : तू भी पागल हो गई है । दिख नही रह क्या तेरे भैया तो यही खड़े है। तेरी भाभी को पास वाले शिव मंदिर ले गए थे। अब ये तो आ गया पर बहु नही दिख रही है कहीं।

राजन मेहरा का इतना ही कहना था कि सभी उस मंदिर की और तरफ चल दिये।

दूसरी तरफ उस पार्टी में एंथोनी चाट की तलाश में इधर उधर भटक रहा था।

एंथोनी : चाट, चाट। कहाँ हो तुम। मेरी आवाज सुनो । मुझे पहचानो। मैं ही हूँ तुम्हारा सच्चा आशिक़। मुझे छोड़ कर कहां चल दी तुम। क्यों तुम मेरी आँखों से ओझल सी हो गई हो। तुम्हे मेरी कसम । मेरे सामने तुम्हे आना ही पड़ेगा। चाहे चचा तुम्हे लाख बन्धनों में कैद कर दे मगर तुम्हे आना ही होगा। तुम्हे आना ही होगा।

तभी एक छोटा बच्चा एंथोनी के बगल से गुजरता है  और उसको चाट के लिए तड़पते हुए देखता है।

बच्चा : अरे अंकल। चाट तो खत्म हो गई है।

ये वाक्य ऍंथोनी के दिल पर एक वज्र की तरह गिरते है। वो दर्द से कराह उठता है।

एंथोनी : न्हईई। ऐसा नही हो सकता। ये सुनने के पहले मैं मर क्यों नही गया।

तभी एंथोनी के दिमाग मे उस काइयां चचा का चेहरा आता है उनकी कुटिल मुस्कान के साथ।

एंथोनी : हो ना हो। ये सारा किया धरा उस चचा का ही है। मुझे ऐसा लग रहा है कि अभी भी उनके पास चुराए हुए चाट से भरे दोने होंगे। मुझे उन्हें ढूंढना ही होगा। ढूंढना ही होगा।



दूसरी तरफ मंदिर ज्यादा दूर ना होने की वजह से उन लोगो को मंदिर पहुँचने में ज्यादा समय नही लगा।

परमाणु : अबे हम लोग यहाँ आ तो गए मगर वो दोनों कहीं दिखाई नही दे रहे है।

नगराज : हाँ बे। कहीं भी नही दिखाई दे रहे है।

डोगा : कुछ ज्यादा ही चंट निकले दोनों।

ध्रुव : मुझे यहां की चिड़ियों से पूछना पड़ेगा कि क्या उन्होंने उनको यहाँ देखा है।

तिरंगा : तू कर अपना नाटक । तब तक हम लोग उनको ढूंढते है।

ध्रुव : नाटक । कैसा नाटक।

तिरंगा : चिड़ियों से बात करने का नाटक।

ध्रुव : अबे नाटक नही मैं सच मे बात कर लेता हूँ उनसे।

नगराज : हाँ सही कह रहा है। एक बार एक कौव्वे ने इसके मुँह पर टट्टी कर दी थी तो इसने चिड़ियों की भाषा मे उसको बहुत गरियाया था। बलभर।

नागराज की बात पर सभी ठहाके मार कर हँसने लगते है।

ध्रुव : ले लो मज़ा सालो। देखो अभी मैं ढूंढ लूंगा उनको।

तभी उनके पीछे से एक आवाज़ आती है।

" उसकी कोई जरूरत नही है। हम यहीं पर खड़े है। "

परमाणु : अबे । ऐसे ना किया करो भाई तुम लोग पीछे से। इंसान है। हवाइयां उड़ गई थी एक पल को।

डोगा : सुपरहीरो बनते है।

परमाणु : अबे खाली हवाइयां उड़ी थी। तेरी तरह लीकेज नही हुआ है मेरा।

डोगा : पेट खराब था मेरा।

परमाणु : चल साले।

ध्रुव उस आवाज़ की तरफ मुड़ता है और चौंक पड़ता है।

ध्रुव : वक्र तू। तू है इन सब के पीछे। साले तुझे मैंने अपना दोस्त माना और तूने इस तरह सिला दिया उस दोस्ती का। साले हमने साथ साथ मे युद्धकला सीखी। कुछ तो याद किया होता तूने। इतना बड़ा धोखा। तेरा तो साले में ' बालचरित ' करवाऊंगा। तू देखना साले।

वक्र : मैं कुछ नही भूला हूँ। मगर तू मुझे एक मौका तो दे अपनी बात रखने का।

ध्रुव : अबे अब क्या रह गया है बोलने को। फिर भी बोल ले जो बोलना है तुझे।

वक्र : देख पहली बात तो ये को मैंने तुझे कोई धोका नही दिया है। बात दरसल ये है कि मैं और सिमरन एक दूसरे से बहुत प्यार करते है। ये प्यार आज का नही है बहुत पुराना प्यार है। मगर किन्ही कारणों से मुझे कुछ सालों के लिए अपने मामा की बिज़नेस में मदद करने को विदेश जाना पड़ा। इसी कारण हम दोनों ने ये बात किसी से बताई नही। सोचा कि जब विदेश से वापस आऊंगा तो बता दूंगा और इसका हाथ मांग लूंगा। मगर इसी सब के बीच तेरी इसके साथ शादी फिक्स हो गयी। अब मैं क्या करता, इतनी जल्दी सारा काम छोड़कर यहां तो आ नही सकता था और तुम दोनों की सगाई की डेट भी बहुत नजदीक थी । आनन फानन में मैंने सगाई वाले दिन तक जरूरी काम निपटा कर यहां पहुचने का प्लान बनाया। मैंने ऋचा और नताशा से इस सम्बंध में बात कर ली थी और इस सगाई में तुम्हारी जगह तुम बनकर आने का प्लान भी बना लिया था क्योंकि मेरे पास उतना समय नही था कि मैं यहां आकर माथुर अंकल को सब सच बता पाता और इस सगाई को रुकवा पाता और पता नही ऐसे जल्दी मैं वो मेरी बात मानते की नही। इन दोनों ने मेरी मदद की तुम्हे उलझा कर रखने मैं। फिर मैं तुम्हारा वेश और रूप धरकर आ गया और सिमरन से सगाई कर ली। अब हम यहां यही तय करने आये थे कि कैसे माथुर अंकल और उनके परिवार को मनाएं।

ध्रुव  : तुम दोनों भी।

ऋचा : तो हम क्या करते हमे इनका प्यार सच्चा लगा।

नताशा : और अपना भी।

परमाणु : साला हर कोई इमोशनल कर दे रहा है भाई।

डोगा : हाँ भाई  ध्रुव । तू माफ़ कर दे यारा इसको इसकी कोई गलती नही है।

सभी बारी बारी से ध्रुव से वक्र को माफ करने का आग्रह करते है। ध्रुव का भी दिल पसीज उठता है।

ध्रुव : ये सही कह रहा है ना सिमरन ?

सिमरन : हाँ ध्रुव। सही कह रहा है ये।

ध्रुव : चल ठीक है। माफ किया तुझे।  मगर चल सबको सच्चाई तो बता दे और सिमरन का हाथ भी मांग ले ।

वक्र : चल भाई।

श्वेता : मगर तुमने ध्रुव भैया का रूप धरा कैसे।

वक्र : मैंने नही धरा।

श्वेता : मतलब ?

वक्र : मैंने ऐसा सम्मोहन किया उनपर की उनको लगा कि मैं ध्रुव हूँ। गिलीगिली गुरु से सीखा मैंने ऐसा सम्मोहन। ध्रुव जनता है।

सभी वापस माथुर साहब के घर चल देते है।

ध्रुव : पापा , अंकल ये रहा वो जिससे सिमरन की सगाई हुई है।

माथुर : क्या बात कर रहे हो ध्रुव ? मैंने तुमसे इसकी सगाई करवाई थी। तुम पागल हो गए हो क्या।

ध्रुव : सिमरन अब तुम्ही बताओ सारा माजरा अंकल को।

सिमरन माथुर साहब और बाकी सभी लोगो को पूरी गाथा सुनाती गई और सभी का चेहरा आश्चर्य से भर गया।

वक्र : अंकल आपको अगर किसी बात का बुरा लगा हो तो माफ़ कीजियेगा मगर मैने जो कुछ भी किया सिमरन के लिए ही किया।

राजन मेहरा : माथुर साहब। इस लड़के को तो मैं जानता नही मगर अगर इसने सिमरन के लिए इतनी जहमत उठाई है तो ये समझ लीजिए कि ये आपकी बेटी से बहुत प्यार करता है और सिमरन को हमेशा खुश रखेगा। इसलिए देरी ना कीजिये और झट से इनका रिश्ता मंजूर कर लीजिए।

माथुर साहब : बात तो अपने सही कही है मेहरा साहब। अगर मेरी बेटी खुश है तो मुझे कोई ऐतराज नही है।

रजनी मेहरा : उसके चेहरे की हँसी उसकी खुशी जाहिर कर रही है माथुर साहब। कर दीजिए रिश्ता।

माथुर : चलो फिर तुम्हारे माँ बाप को बुलावा भेजो । उनसे भी मिल ले।

परमाणु : अबे यार हैप्पी एंडिंग तो हो गई मगर मुझे ध्रुव पर बहुत हँसी आ रही है।

नगराज : काहे भाई।

परमाणु : अबे इतना ताम झाम हुआ इनकी शादी की चक्कर में मगर अंत में तो ये साइड करैक्टर ही निकले। मतलब सिमरन को तो वक्र रूपी राज ले निकला और ये बन गए कुलजीते। अब जा अपनी चिड़ियों से बातें कर।

सभी ठहाका मार कर हँसने लगते है।


तिरंगा : अबे वो तो ठीक है मगर ये एंथोनी कहाँ गया।

भोकाल : वो रहा साला। अपनी चाट ढूंढ रहा है । कैसी हालत हो गई है बेचारे की । चलो चलो उसके पास।


सभी एंथोनी के पास पहुंचते है।

डोगा : अबे अब बस कर भाई। तुझे मैं चाट खिला दूंगा।

एंथोनी: बात चाट की नही है दोस्त। बात है मेरे विश्वास की। इस बेहरम दुनियां पर मेरे चाटरूपी विश्वास। आज अगर यहाँ इसी जगह मुझे चाट नही मिली तो मेरा इस दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।

नगराज : अबे अबे देख। कोई अधेड़ उम्र का आदमी बहुत सारे चाट के दोने लिए बैठा है। कहीं वही तो नही है तेरा वो काइयां चचा।

एंथोनी तुरन्त उस जगह पर देखता है और चिल्लाता है।
" चचा अब तू नही बचेगा। वापस कर मेरी चाट। "


समाप्त।


ध्रुव की शादी तो सम्पन्न नही हो पाई और ना ही एंथोनी की चाट की खोज मगर आशा है आपको मज़ा बहुत आया होगा।

अपने अमूल्य रिव्यु अवश्य दे जिससे भविष्य में मैं आपका और अधिक मनोरंजन कर पाऊं।

आप सभी का इस मनोरंजक सफर में साथ चलने के लिए धन्यवाद।

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