Monday, 2 January 2017

 COP प्रस्तुत करते हैं

The Protector:Origin Of Superhero 

लेखक - नीरज यदुवंशी


Mumbai, 9:30 PM
Place- Dharaavi Slum Area

कुछ लोग एक सोलह वर्षीय नवयुवक को चारों तरफ से घेर कर मार रहे थे, कोई उसेे हाथों से मार रहा था तो कोई पैरों से मार रहा था और दो लोग उसे लोहे के डंडे से मार रहे थे |
उन सभी ने उस नवयुवक को मार-मारकर मरणासन्न स्थिति में पहुंचा दिया |

रॉनी-(गाड़ी के ऊपर बैठकर सिगरेट पीते हुए) ऐ गनपत! देख ये साला मरा की नहीं..?

गनपत-(पैरों से टटोलते हुए) भाई...! लगता तो है कि मर गया साला...!

टीटू-(अपने पैरों से उस नवयुवक को मारते हुए) भाई...! 100℅ कन्फर्म है, ये साला मर गया

रॉनी-(मुंह से सिगरेट का धुआं निकलते हुए) पप्पू..जैकी..! डाल साले को गाड़ी में

पप्पू, जैकी दोनों एक साथ बोलते हैं- जी भाई...!
दोनों उस नवयुवक को गाड़ी की डिक्की में रख कर बंद कर देते हैं और आकर गाड़ी में बैठ जाते हैं|
गनपत गाड़ी स्टार्ट करता है और गाड़ी अपने गंतव्य की ओर चल पड़ती है|

असलम- भाई, हम इस लाश का करेंगे क्या..?
रॉनी- अबे, करेंगे क्या..? फेंक देंगे किसी जंगल में साले को

कुछ समय बाद गाड़ी मालेगांव के जंगलों में रुकती है|

रॉनी- असलम..महेश, फेंक दो साले को यहीं

उस नवयुवक को वहीं फेंक कर सब वहाँ से चले जाते हैं|
फिर कुछ समय बाद बारिश शुरु हो जाती है|

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Indian Space Research Center, 10:00PM

(चीफ साइंसटिस्ट डॉक्टर दीपक रेड्डी सेन्टर के कमांड एंड कंट्रोल रूम में प्रवेश करते हुए)- तो हमें क्या मिला है डॉक्टर जैकब..?

डॉ. जैकब- सर..! एक उल्कापिंड है जो बहुत ही तेजी से हमारी तरफ बढ़ रहा है

(डॉक्टर रेड्डी रूम में लगी बड़ी स्क्रीन को देखते हुए)- जैकब..! मुझे इसकी सैटेलाइट तस्वीरें चाहिए

डॉ. जैकब- जी सर...!
वह एक लेडी साइंसटिस्ट की तरफ देखता है तो वह लेडी साइंसटिस्ट तुरन्त ही तस्वीरें लाकर डॉक्टर रेड्डी को देती है

डॉ. रेड्डी-(सैटेलाइट तस्वीरें देखते हुए) आखिर तुम हो क्या...? जैकब...! तस्वीरों में तो यह उल्कापिंड जैसा ही दिख रहा है, इसके बारे में नासा का क्या कहना है...?

डॉ. जैकब-सर..! नासा का कहना है कि यह एक फुटबाल के साइज का उल्कापिंड है जो किसी अंजाने अंतरिक्ष धातु से भरा हुआ है और ये किस तरह का धातु है..? ये तो ना हमारी सैटेलाइट पकड़ पा रही है, ना ही नासा की और ना ही दुनिया की किसी अन्य अंतरिक्ष एजेंसी की

डॉ. रेड्डी- जैकब...! इसके गिरने की स्पीड क्या है..?

डॉ. जैकब- सर..! ध्वनि की गति से बीस गुना तेज है इसकी नीचे गिरने की स्पीड

डॉ. रेड्डी- कहां गिरेगा ये और इससे कितना नुकसान होगा...?

डॉ. जैकब- सर...! ये मुंबई के मालेगांव के जंगलों में गिरेगा और इसके गिरने से लगभग पचास फीट का गड्डा बीस मीटर के दायरे में हो सकता है

डॉ. रेड्डी- ये कितनी देर में पहुंचने वाला है...?

डॉ. जैकब- पांच मिनट में सर..!

डॉ. रेड्डी- ठीक है जैकब..! तुम लोकल टीम से कहो कि वह उस जगह पर तुरन्त वहाँ पहुंचे और चॉपर मंगवाओ जिसमें एक टीम के साथ उस जगह पर चलने की तैयारी करो तुरन्त...!

डॉ. जैकब- जी सर..! अभी करता हूँ (ऐसा कहकर वह वहाँ से चला जाता है)

डॉ. रेड्डी-(उस रुम में मौजूद सभी साइंसटिस्टों से) ओके गाइज...! मैं एक टीम के साथ वहाँ पर जा रहा हूँ और मुझे इस उल्कापिंड के बारे में पल-पल की जानकारी चाहिए होगी...तो आप सब अपने काम करने की स्पीड बढ़ा दीजिए

(तभी डॉक्टर जैकब वहाँ पर वापस आते हैं)

डॉ. जैकब- सर...! हम निकलने के लिए तैयार हैं

डॉ. रेड्डी- ठीक है जैकब..! चलो चलें , हम कितनी देर में वहाँ पर पहुंंचेंगे..?

डॉ. जैकब- लगभग डेढ़ घंटे में सर...!

डॉ. रेड्डी- जैकब..! तुमने प्रेसीडेंट, पीएम और रक्षा मंत्रालय को इन्फॉर्म किया...?

डॉ. जैकब- जी सर...! आर्मी व हमारी लोकल टीम बीस मिनट में वहाँ पर पहुंच जायेगी

डॉ. रेड्डी- गुड जॉब...जैकब

सभी लोग चॉपर में बैठते हैं और चॉपर अपने गंतव्य की ओर उड़ान भरता है
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To be continued...........­........!

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