Wednesday, 4 January 2017

कॉप प्रस्तुत करते हैं

भविष्य के रक्षक : ध्रुवास्त्र (भाग 1)

लेखक - राम चौहान

(अध्याय 1:- आरम्भ)

साल 2035
मुम्बई
अँधेरी पुलिस स्टेशन
15 साल का एक लड़का जेल में बैठा बीते दिनों को याद कर रहा था कि एक आहट से चौंक गया।
वो एक हवलदार था।
हवलदार:- "उठ बे चिकने।तेरी जमानत हो गई है।"
लड़का मुस्कुराता हुआ उठा।
गेट तक आया और हंसते हुए बोला:- "इस बार कौन आया है?"
हवलदार घूरता हुआ चला गया।लड़के ने उसका अनुसरण किया और बाहर निकल आया।
लड़के के लिए चेहरा पूरी तरह अंजान था।
सामने एक महिला खड़ी थी।
कोई 36 वर्षीय,लॉन्ग गाउन में किसी एक्ट्रेस की तरह दिख रही थी वो।
दोनों की नजरें मिली।
महिला:- "सारा सामान ले लिया?"
लड़के ने हां में सिर हिला दिया।
महिला पलटकर बाहर निकल गई।
इंस्पेक्टर सूर्य लड़के को देखता रहा।
सूर्य:- "पिछले 6 महीने में 23 बार यहाँ आ चुके हो तुम।इस उम्र में ही आतंकवादी बनने का इरादा है क्या?"
लड़का मुस्कुराया।बोला:- "जल्द ही फिर मिलेंगे ऑफिसर!"

लड़का बाहर आया ही था कि एक कार सामने आकर रुकी।
अंदर वही महिला थी,जिसने अभी उसकी जमानत कराई थी।
महिला:- "अंदर आ जाओ ऋषि मेहरा।"
लड़का चौंका।
"आपको मेरा नाम कैसे पता?"
महिला ने जवाब नहीं दिया।उसने चुपचाप कार का दरवाजा खोल दिया।
ऋषि अंदर बैठ गया।
कार तेजी से चली और सड़कों पर रफ़्तार पकड़ने लगी।
ऋषि:- "आप कौन हैं और मुझे कैसे जानती है?"
महिला:- "मेरा नाम सोनिका है और तुम भी मुझे इसी नाम से बुला सकते हो।"
ड्राइविंग से ध्यान नहीं हटाया उसने।
सोनिका:- "जहाँ तक तुम्हे जानने की बात है।तुम्हारे पापा को पूरी दुनिया जानती है।"
ऋषि शांत ही रहा।
सोनिका:- "कमाल है न?पिता क्राइम फाइटर और बेटा क्रिमिनल।" सोनिका ने ऋषि की तरफ देखा।
ऋषि:- "कार रोकिये।"
सोनिका ने ऋषि की बात अनसुनी कर दी।कार की रफ्तार और तेज हो गई।
ऋषि(थोड़ी तेज आवाज में):- "मैने आपसे कार रोकने कहा है।"
सोनिका पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
ऋषि ने दरवाजा खोलने की कोशिश की।तभी दरवाजा लॉक हो गया।
ऋषि की नजर सोनिका की ड्रेस पर पड़ी।
गाउन में से झांकती उसकी जांघो पर बंधा होल्स्टर।और उसमें फंसी गन।
ऋषि ने थूक निगली।
ऋषि(खूद को संयमित रखने की कोशिश करते हुए):- "वो गन?'
सोनिका ने ऋषि की तरफ देखा और मुस्कुरा दी।बोली अब भी कुछ नहीं।
ऋषि:- "देखिये सोनिका जी।कार रोकिये।मुझे उतरना है।"
सोनिका यूं मुस्काई जैसे उसे कह रही हो कि उतर सको तो उतर जाओ।
ऋषि के जबड़े भींचें।
तेजी से वो स्टेयरिंग पर झपटा।सोनिका क्षण भर के लिए हड़बड़ाई।ऋषि ने स्टेयरिंग को अपनी तरफ पूरा घुमा दिया।
कार बीच सड़क पर तिरछी हुई और पलटती चली गई।

ऋषि की चेतना कुछ समय के लिए लुप्त हो गई थी लेकिन जैसे ही उसे होश आया उसने खुद को कार के बीच फंसा पाया।
उसे समझ नहीं आया कि वो किस जगह फंसा हुआ है।आखिर उसे कार का दरवाजा नजर आया।उसे समझ आ गया कि वो पिछली सीट और आगे की सीट के बीच फंस गया है।
कार उलटी हो चुकी थी और उसमें आग लग चुकी थी।
ऋषि ने निकलने की कोशिश शुरू कर दी।लेकिन खुद को बुरी तरह फंसा पाया।
तभी कार का दरवाजा खुला और सोनिका नजर आई।उसके सिर पर चोट लगी थी।
ऋषि मन ही मन शर्मिंदा हो उठा।
सोनिका ने ऋषि को बाहों से थामा और बाहर खींचने लगी।ऋषि के पैरों में दर्द की लहर दौड़ गई।।
ऋषि:- "मै फंस गया हूँ।"
सोनिका ने देखा,ऋषि का पैर पिछली सीट के नीचे फंसा हुआ था।
सोनिका ने कुछ पल सोचा।फिर बोली:- "तैयार रहना।"
ऋषि(चौंककर):- "किसलिये?"
सोनिका सुनने के लिए न रुकी।

कुछ ही देर बाद ऋषि के कानों में एक कार की आवाज पड़ी।अभी वो कुछ समझ भी न पाया था कि एक जोरदार टक्कर हुई और ऋषि की कार तेज झटके से सीधी हो गई।
ऋषि का पैर बाहर निकल आया और साथ ही एक लंबी खरोंच उसके पैरों में लगी।
ऋषि ने परवाह नही की और बाहर निकल गया।
सामने ही खड़ी कार में सोनिका बैठी थी।
ऋषि ने दूसरी तरफ कदम बढ़ाये और तेजी से भाग निकला।
सोनिका के जबड़े भींचे।
तेजी से उसने कार ऋषि के पीछे दौड़ा दी।


*अध्याय 2:- जंगल का जल्लाद)*

असम
विषनखा की नजरें आसपास घूम रही थीं।एक बैग उसके कंधे पर लटका हुआ था।
उसे बस इंतज़ार था वहां रहने वाले जल्लाद का।
घूम घूम कर विषनखा थक चुकी थी लेकिन भेड़िया का नामोनिशान नजर नहीं आ रहा था।
विषनखा(मन में):- "हो सकता है उन्हें गलतफहमी हुई हो कि क्रूरपाशा और भेड़िया का सामना अब तक नहीं हुआ है।अगर ऐसा होता तो भेड़िया को अब तक मेरे इस जंगल में होने के बारे में पता चल गया होता और एक घुसपैठिये को वो अब तक इतनी आजादी नही देता।"
विषनखा पलटी ही थी कि सामने पेड़ो पर छलांग लगाता हुआ चट्टान रूपी भेड़िया आ खड़ा हुआ।
भेड़िया:- "कौन हो तुम?"
एक पल को विषनखा उसे देखकर सहम गई पर तुरंत ही उसने खुद को संभाला।
विषनखा:- "ब्रह्माण्ड रक्षकों को तुम्हारी जरूरत है।"
भेड़िया(गुर्राता हुआ आगे बढ़ते हुए):- "मैंने पुछा कौन हो तुम?"
विषनखा पीछे हटी।
भेड़िया (आगे बढते हुए):- "अगर ब्रह्माण्ड रक्षको को मेरी जरूरत होगी तो वो मुझे ट्रांसमीटर पर सम्पर्क करेंगे।"
विषनखा ने तेजी से बैग खोला। "मै तुम्हे कुछ दिखाना चाहती हूँ।"
इससे पहले कि विषनखा बैग खोल पाती।भेड़िया की पूंछ बढ़ी और विषनखा की गर्दन पर लिपट गई।
विषनखा के हाथों से बैग छूट गया।
विषनखा की गर्दन पर पूंछ की पकड़ तेज होती जा रही थी।
विषनखा(मन में):- "उफ्फ!इसकी पकड़ तो अजगर सी है।अब अगर जान बचानी है तो हमला करना ही पड़ेगा।"
(विषनखा की कलाइयों में ब्रेसलेट बंधे थे,जिनमे 10 अलग अलग तरह के जहर मौजूद थे।)
विषनखा ने कलाई को लचकाया और तेजी से उसके नाखूनों में जानवरों तक को बेहोश कर देने वाला जहर दौड़ने लगा।तेजी से भेड़िया की पूंछ में विषनखा ने नाख़ून गड़ा दिए।
भेड़िया(मुस्कुराता हुआ):- "तुम सच में उनकी मददगार नही हो सकती।हर ब्रह्मांड रक्षक ये बात जानता है कि मेरे दिव्य आभूषण मुझे हर तरह की चोट से बचाते हैं और हर विष की काट मै जानता हूँ।"
विषनखा को सांस रूकती महसूस हुई।
भेड़िया ने उसे जमीन पर गिरा दिया और चिल्लाया:- "हे भेड़िया देवता! मदद!"
देखते ही देखते प्रलयंकारी गदा प्रकट हो गई और निशाना थी विषनखा।
विषनखा ने तेजी से अपनी ब्रेसलेट में लगा एक बटन दबाया और भेड़िया की गदा का वार होने से पहले ही विषनखा के हाथ में थी तिरंगा की ढाल।
तिरंगा की ढाल देखते ही भेड़िया रुका।
भेड़िया ने इस बार वार नही किया।
भेड़िया:- "कौन हो तुम?"
विषनखा खड़ी हुई।कुछ देर उसे सन्तुलित होने में लग गई।
बोली:- "क्या तुम जानते हो कि तिरंगा के नकाब के पीछे कौन है? अगर नही,तो मै भी अपना चेहरा नही दिखा सकती।"
भेड़िया:- "तुम भारत की.."
विषनखा चौंकी। "तो तुम जानते हो..!"

*(भले ही भेड़िया अभी ये बात नहीं जानता पर यह कहानी भविष्य की है और भविष्य में कुछ भी सम्भव है।)*

विषनखा ने नकाब उतारा।नकाब के पीछे मानसी थी।
बोली:- "भारत यानि तिरंगा,मेरे पति हैं और पिछले 6 महीने से लापता हैं बाकि सभी ब्रह्माण्ड रक्षकों के साथ।"
भेड़िया:- "लेकिन तुम्हे कैसे पता चला कि मै लापता नही हुआ?"
मानसी:- "क्योंकि अब तक काली शक्तियां यहाँ नही पहुंची है।वो काफी धीरे धीरे आगे बढ़ रहे हैं और बहुत मजबूती से।"
भेड़िया:- "कौन कौन लापता हो चूका है?"
मानसी :- "पता नहीं।हम सभी के अलग अलग काम हैं, जिसमे मेरा काम तुम्हे ढूँढना था।"
भेड़िया:- "अगला पड़ाव?"
मानसी:- "राजनगर.."

*(अध्याय 3:- अंधेरा)*

ऋषि लगातार भागता जा रहा था कि एकाएक ही सामने कुत्तों का बड़ा झुण्ड उसके सामने आ खडा हुआ।
ऋषि पीछे पलटा।
सोनिका पास आ चुकी थी।कार में बैठी वह ऋषि को देखती रही।
बैग से हथकड़ी निकाल कर वो ऋषि की तरफ बढ़ी।
ऋषि ने कुत्तो से उन्ही की भाषा में बात करने की कोशिश की।।
ऋषि:- "भौ भौ...(मुझे जाने दो..)"
कुत्तों पर कोई असर नहीं हुआ।
सोनिका पास आ चुकी थी।
सोनिका:- "शायद तुम्हे भागने का बहुत शौक है।"
ऋषि का हाथ पकड़कर सोनिका ने उसके हाथ में हथकड़ी डाल दी।
ऋषि:- "अगर आप महिला नही होती तो मै आपको इसका जवाब जरूर देता।"
सोनिका(हंसते हुए):- "मुजरिमो के मुंह से ऐसे डॉयलोग अच्छे नही लगते।"

अचानक ही कुत्तों के गुर्राने की आवाज तेज हो गई।
सोनिका:- "इट्स ओके चैम्प! ये मजाक कर रहा है।"
सोनिका और ऋषि कुत्तों की तरफ पलटे ही थे कि उनके होश उड़ गए।
सारे कुत्तों की आँखे काली पड़ चुकी थीं और दांत आश्चर्यजनक रूप से लंबे हो चुके थे।
सोनिका:- "ओह माय गॉड.."
ऋषि ने जल्दी से कार की तरफ दौड़ लगा दी।
सोनिका ने भी उसे फॉलो कीया।
दोनों तेजी से कार में समा गए।सोनिका ने कार का दरवाजा बंद किया ही था कि एक कुत्ता तेजी से खिड़की से आ टकराया।
सोनिका ने तेजी से गन निकाली और लगातार कई गोलियां चलाती चली गई।
ऋषि:- "सोनिका जी! वो मर चुका है।"
सोनिका जैसे जागते से उठी।
दोनों की नजर सामने पड़ी।ढेर सारे कुत्ते भौंकते हुए उनकी तरफ लपके।
सोनिका के पाँव एक्सीलेटर पर जम गए।


*(अध्याय 4:- राजनगर के रक्षक)*

राजनगर
सोनिका और ऋषि राजनगर पहुंच चुके थे।
सोनिका:- 'अब मेरी जिम्मेदारी खत्म हो गई है तुम्हे सलामत रखने की।"
ऋषि ने सोनिका की तरफ देखा।सोनिका की आँखों से आंसू बह रहे थे।
ऋषि:- "जो कुछ भी हुआ उसमे आपकी गलती नहीं थी।अगर आप उन्हें न मारती तो शायद वो हमें मार देते।"
सोनिका:- 'जानती हूं।लेकिन मैंने अपने लिये नही,बल्कि तुम्हे बचाने के लिए उन्हें मारा।"

तभी सामने एक रोबोट आ खड़ा हुआ।
कार को तेज ब्रेक लगा।बावजूद इसके कार रोबोट से जा टकराई।
रोबोट को खास फर्क नहीं पड़ा।पर कार पूरी तरह तहस नहस हो गई।
रोबोट ने दरवाजा उखाड़ फेंका और सोनिका को गले से थामकर बाहर निकाल लिया।
ऋषि ने झटके से दरवाजा खोला पर हथकड़ी के कारण उसका हाथ वहीँ अटक गया।
सोनिका ने हथकड़ी दरवाजे के साथ बाँध दी थी।
तभी सामने एक और रोबोट नजर आया।
ऋषि ने तेजी से दरवाजा बंद किया और रोबोट के ब्लास्टर ने दरवाजा उड़ा दिया।
ऋषि धमाके से उछलता हुआ दूसरी ओर से बाहर आ गिरा।
दूसरी तरफ सोनिका अब भी रोबोट के चंगुल में फंसी हुई थी।
तेजी से सोनिका का हाथ अपनी जांघ पर बंधे होल्स्टर पर गया और गन निकालकर उसने रोबोट की गर्दन पर चला दी।
एक माचिस के आकार का यंत्र बाहर आ गिरा और रोबोट अपनी जगह रुक गया।
सोनिका उसकी पकड़ से बाहर निकली और गन ऋषि की तरफ उछाल दी।
ऋषि:- "मै इसका क्या करूँ?"
सोनिका:- "उनकी गर्दन पर निशाना लगाओ और शूट करो।"
ऋषि ने गन वापस सोनिका की तरफ उछाल दी।सोनिका ने गन थामी।
ऋषि:- "निशाना लगाने के लिए मेरे पास कई चीज़ें हैं।"
सोनिका की तरफ से टुटा दरवाजा उठाया ऋषि ने और पूरी ताकत से उसकी ओर बढ़ते रोबोट पर उछाल दिया।रोबोट की किसी हरकत से पहले ही दरवाजा उसकी गर्दन उड़ाता हुआ दूसरी तरफ जा गिरा।
ऋषि:- "ये तो काफी मजेदार है।"
तभी पीछे से एक और रोबोट आया और ब्लास्टर से ऋषि पर हमला कर दिया।
अब ब्लास्टर और ऋषि के बीच ज्यादा दुरी नही थी कि तभी
बीच में आ खड़ा हुआ इंस्पेक्टर स्टील।।
ब्लास्टर स्टील से आ टकराया और चकनाचूर हो गया।
ऋषि:- "इंस्पेक्टर स्टील?''
सोनिका ने गन स्टील पर तानी।
स्टील की मेगागन गन सीधी हुई और सामने खड़े रोबोट्स खत्म होने लगे।
स्टील सोनिका और ऋषि की तरफ पलटा।
सोनिका(बुदबुदाते हुए):- "अब हमारी बारी।"
स्टील ने ऋषि की तरफ हाथ बढ़ाया।
सोनिका(गन तानते हुए):- "मुझे पता है तुम्हारी बॉडी पर गोली असर नहीं करेगी।पर मै सीधे तुम्हारी खोपड़ी उड़ा दूँ तो?"
तभी एक जनाना आवाज सोनिका के कानों में पड़ी:- "वो तुम्हारी मदद करने आया है।"
सोनिका और ऋषि आवाज की दिशा में पलटे।
सामने श्वेता खड़ी थी।
ऋषि:- "बुआ..?"
श्वेता मुस्कुरा पड़ी।
ऋषि दौड़कर श्वेता के गले लग गया।
श्वेता ने उसे कसकर गले लगा लिया।
फिर ऋषि से अलग हुई।
श्वेता:- "तुमने मुझे छोड़कर जाने के बारे में कैसे सोचा? सोचा नही कि तुम जिम्मेदारी हो मेरी?"
ऋषि सर झुकाकर रह गया।
श्वेता सोनिका से बोली:- "इसे यहाँ लाने के लिए थैंक्स..😊"
सोनिका मुस्कुरा दी।
ऋषि:- "ये मुझे नहीं लाईं।मै खुद आया हूँ।"
सोनिका:- "अच्छा..?"
ऋषि:- "हां,आप जब मुझे लेने आईं थीं तभी मैने आपकी गाड़ी का नम्बर देख लिया था और समझ गया था कि आप राजनगर से हैं।"
सोनिका 😊 :-"गाड़ी राजनगर की थी।मै राजनगर की नही हूँ।"
श्वेता:- "मुझे तुम मिल गए इतना काफी है।"
ऋषि:- "लेकिन मै यहाँ सिर्फ अपने बदले के लिए आया हूँ।"
सोनिका:- "कैसा बदला..?"
ऋषि 😈 :- "जलज की मौत.."
सोनिका:- "जलज तो तुम्हारा भाई है न?"
श्वेता:- "हां,पर 6 महीने पहले जब क्रूरपाशा लौटा,रोबो ने उससे हाथ मिला लिया।भैया और नागराज उन्हें रोकने गए पर एन वक़्त पर जलज ने हमे धोखा दिया और नताशा को मार डाला।"
सोनिका(चौंककर):- "मार डाला?"
श्वेता 😢 :- "हां,वो ऋषि को भी मार डालता पर मैंने इसे बचाया और छिप गई।इसी कारण हमने नागराज और भैया को खो दिया।" कहते हुए श्वेता की आँखों में आंसू छलक उठे।
सोनिका ने आगे बढ़कर उसे गले लगा लिया।
श्वेता(आंसू पोंछते हुए):- "तुम्हे आकृति को बचाना है अब.."
सोनिका ने सहमति में सिर हिला दिया।
सोनिका:- "मेरी बच्ची को कौन लेकर आएगा?"
श्वेता:- "मोनिका उसे लेकर आने वाली है।"

*(अध्याय 5:- कालरक्ष)*

अलंघ्या
वापस बनाने में कुछ ही वक़्त लगा था क्रूरपाशा को।अब संसार की सारी ताकत उसके कदमो में थी।पूरी पृथ्वी को अपनी मुट्ठी में भींच कर तोड़ सकता था अब वो।
लेकिन इस बार समझदारी दिखाई उसने।
आराम से और सभी अँधेरे के सौदागरों को साथ लेकर चलने की समझदारी।
पर एक बार फिर रास्ता रोक दिया दो महारथी ने।पर वेग का सामना करना मुश्किल साबित हुआ।

अँधेरा चारो तरफ फैला हुआ था।
फिर भी एक महल नजर आ रहा था।भव्य महल पर अँधेरे के साए में डूब गया लगता था।
जगह जगह मशालें जल रही थी।
एक कक्ष में क्रूरपाशा मौजूद था।उसके सामने उसके कद के बराबर की ऊंचाई में आग की लपटें जल रही थीं।
और उन लपटों में एक चेहरा नजर आ रहा था।काला स्याह,बड़े बड़े दांत और विभत्स्य चेहरा।यदि कोई कमजोर दिल वाला उसे देख ले तो अवश्य ही मर जाये।
क्रूरपाशा:- "तमस सम्राट कालरक्ष को सेवक क्रूरपाशा का प्रणाम।"
कालरक्ष(जब इसने बोलना शुरू किया तो ऐसा लगा जैसे कई शैतान एक साथ जाग उठे हों।):- "क्रूरपाशा...! अब तक अगली बलि मिली क्यों नहीं?"
क्रूरपाशा:- "अगली बलि ध्रुव नाम के उस शैतान की है, जिसने सभी की नाक में दम कर रखा है।जल्द ही आपको उसकी बलि मिल जायेगी तमस सम्राट।"
कालरक्ष:- "सावधान रहो क्रूरपाशा!वंश बेल आने वाली है तुम तक।उन्हें खत्म कर दो और खत्म कर दो वंश रक्षकों को।"
क्रूरपाशा:- "जो आज्ञा।"


अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई थी लेकिन अंत भी निकट था सभी का।
किस तरह बच गए थे स्टील और भेड़िया और क्या हुआ रक्षकों के भविष्य और वंश का
क्या सच में खत्म हो गए थे ब्रह्माण्ड रक्षक

जवाब लेकर आ रहे हैं

वंशरक्षक

1 comments :

बहुत ही अच्छी शुरुआत की है। आगामी भागों का बेसब्री से इन्तजार है।

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