Sunday, 18 December 2016

【℃OP 】 प्रस्तुत करते हैं

नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, परमाणु, कोबी, शक्ति और नागू का एक सनसनीखेज विशेषांक

 षड्यंत्र भाग-5

लेखक - अंकित निगम


कथा एवं संपादन - अंकित निगम
कैलीग्राफी - गूगल हिंदी फ़ॉन्ट्स
चित्रांकन एवं रंगसज्जा - चार पार्ट्स की नहीं की किसीने इसकी क्या होगी 😞

नोट-: ( ) के अंदर लिखी गयी बात मन में कही जा रही है

पूर्वसार- भाग 1, भाग 2, भाग 3 और भाग 4 में पढ़ें 😉
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

स्थान - स्वर्णनगरी

मिसकिलर ध्रुव की वापसी से पुनः संतुलित हो गई थी और वो अब अपने मूल कार्य में लग गई ।
" ध्रुव अवश्य ही नागराज को मार डालेगा इसलिए अब मुझे वो काम करना चाहिए जिसके लिए मैं यहाँ आई हूँ।"

मिसकिलर वहां से निकलकर एक खास कक्ष में प्रवेश कर गई.... वहाँ पर रखी वस्तुओं को ध्यान से देखते हुए उसने एक वस्तु को उठाया और उसे लेकर धनंजय और स्वर्ण मानवों द्वारा निर्मित एक विशेष संयंत्र में फिट कर दिया।

नागमणियों से सुसज्जित वो संयंत्र चमक उठा और पूरा कमरा मिसकिलर के अट्टाहास से गूँज उठा।

मिसकिलर का कार्य जारी था लेकिन उसकी योजना का सफल या असफल होना यहाँ से बहुत दूर नागदीप में निर्धारित होना था।

●◆●◆●◆●◆●◆●

स्थान - नागदीप
जो इस समय जंग का मैदान बना हुआ था, जहाँ योद्धाओं का शक्ति प्रदर्शन जारी था।

"ये मामूली सा कवच मुझे कैद नहीं कर सकता नागू"
नगीना ने एक ही वार से नागू की बनाई कैद को बिखेर दिया

"लगता है मेरी मणि की माइलेज ख़राब हो गई है, सर्विसिंग करानी पड़ेगी, मैं अभी आया पर तब तक के लिए HOLD TIME"
नागू ने नगीना को अपने वार से जड़ कर दिया पर नगिना एक बार फिर आज़ाद हो गई और नागू पर वार कर दिया

"ये तो चीटिंग है नगीना, होल्ड टाइम मतलब रुकना होता है"

"रुकेंगी तो अब तेरी सांसें"
नगीना ने एक और घातक वार किया जिससे नागू का बचना असंभव था.... पर नगीना का वार बीच में ही कट गया

"असंभव, किसने काटा मेरा वार" नगीना चिल्लाई

"मैंने, थोडा बहुत तंत्र तो मुझे भी आता है"

"सौडांगी!! तो तुझे होश आ गया... पर तू मेरे सामने एक तिनके से ज्यादा कुछ नहीं" नगीना ने फिर वार किया पर एक बार फिर सौडांगी ने उसका वार बीच में ही काट दिया

"गलत नगीना, मैं भी तेरी तरह ही एक नागिन हूँ और जिस तरह इन मणियों ने तेरी शक्तियों को बढ़ाया हुआ है उसी तरह इनसे मेरी शक्तियां भी बढ़ गई हैं।"
सौडांगी ने नगीना के वारों का जवाब देते हुए कहा

"पर तेरा तंत्र ज्ञान है ही कितना"
नगीना ने मुस्कुरा कर कहा

"उतना तो है ही की तुझे तब तक रोक सकूँ जब तक नागराज के सर्प सारी मणियों को तुझसे दूर किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दें"

सौडांगी के बोलने पर नगीना ने देखा की ढ़ेर सारे नाग मणियों को अपने मुंह में भरकर वहां से ले जा रहे थे... नगीना ने साँपों पर वार करना चाहा पर नागों का एक गुच्छा उसके हाथों से टकराया और उसके वार की दिशा बदल गयी।

" नागराज अभी जिन्दा है नगीना" नागराज ने कहा

नागराज के सर्पों ने एक एक कर सभी मणियों को वहाँ से हटा दिया और सौडांगी एवं नागू के संयुक्त वार नगीना को नुकसान पहुँचाने ही वाले थे कि तभी उनके वार भीषण ऊष्मा की 1 दीवार से रोक लिए गए। ये वार शक्ति ने किया था।

"बहुत उत्पात मचा लिया तुम लोगों ने नागराज, अब बस"
शक्ति ने अगला ऊष्मा वार तीनों पर एक साथ किया पर नागू ने अपने मणि कवच से उसे रोक लिया।

 "ये तो 70s की फिल्मों वाला हाल बना रखा है, एक विलन कम होता नहीं, दूसरा चला आता है"

"सिर्फ दूसरा नहीं नागू तीसरा भी, शक्ति तिलस्म से बाहर आ गयी, मतलब ध्रुव भी साथ होगा।"

"बिल्कुल ठीक समझे नागराज"
धनंजय के साथ खड़े ध्रुव ने कहा, और धनंजय को कोई इशारा किया...
ध्रुव का इशारा मिलते ही धनंजय ने गरुणास्त्र का प्रयोग किया, कुछ ही पलों में ढ़ेर सारे बाज़ों ने नागू और सौडांगी को घेर लिया और मुख्य गरुड़ ने नागराज पर आक्रमण कर दिया

"मुझे पहले ही शक था कि इस सब में धनंजय भी शामिल है"

"शक बाद में करना नागराज पहले इन बाज़ों का कुछ करो"
सौडांगी ने तंत्र वार करते हुए कहा

(गरुड़ साँपों के स्वाभाविक शत्रु हैं, और इन्हें रोक पाना सामान्य सर्पों के बस की बात नहीं, पर मेरे पास असामान्य सर्प भी हैं)
नागराज ने ढेर सारे ध्वंसक सर्प छोड़े और बाज़ों ने आदत अनुसार उन्हें चोंच में पकड़ लिया... एक साथ सभी सर्प फट पड़े और साथ ही सारे बाज़ भी

(बस अब ये मुख्य गरुड़ बचा है जो इस वार से बच गया)
गरुड़ ने नागराज पर हमला कर दिया और शक्ति, ध्रुव एवं नगीना नागू और सौडांगी से भिड़ गए.... नगीना ने सौडांगी पर तंत्र वार किया

नगीना के तंत्र वार को तो सौडांगी ने रोक लिया पर शक्ति की खड़ग उसके प्राण ले लेती अगर नागू ने उसे ना बचाया होता।

"इस कैट फाइट में रैट का क्या काम आओ हम अलग से दो दो हाथ कर लें"
ध्रुव ने नागू को एक जोरदार किक लगाकर सौडांगी से दूर कर दिया

"ध्रुव सर शायद आप भूल रहे हैं की हम दोनों के पास ऑलरेडी दो-दो हाथ हैं (अपने हाथ दिखाते हुए) ... हाँ चार करने हो तो वो मैं कर सकता हूँ"
नागू ने मणि शक्ति से चार हाथ बनाये और ध्रुव पर वार करने लगा... पर ध्रुव भी ध्रुव है उसने फुर्ती से बचते हुए उन हाथों पर एक चट्टान गिरा दी।

"ऐसे वारों से अगर मुझे कुछ होना होता तो जाने कब का हो चुका होता नागू"

"हम्म .... परंपरा, प्रतिष्ठा और अनुशासन वाली बात की है आपने... पर आज आपके सामने कोई ऐसा वैसा विलन नहीं बल्कि नागू आर्यन मल्होत्रा खड़ा है,जो आपके घमंड की ईमारत एक एक ईंट हिला कर रख देगा... हम्म्म्म्म"[SRK Style]
नागू ने ध्रुव के चारों ओर घूमते हुए कहा और दोनों में एक जोरदार द्वन्द शुरू हो गया

एक तरफ नागू और ध्रुव उलझे हुए थे, दूसरी तरफ सौडांगी के लिए नगीना और शक्ति को एक साथ संभालना मुश्किल होता जा रहा था
और नागराज अभी भी गरुड़ और धनंजय से लड़ने में व्यस्त था

(जल्दी ही कोई तरीका निकालना होगा पर पहले सौडांगी को सहायता देनी होगी.... शीतनाग!!)

शक्ति ने सौडांगी पर ऊष्मा वार किया ही था पर उसे शीतनाग ने रोक लिया
"अब मैं तुम्हे सौडांगी पर और कोई वार नहीं करने दूंगा"
शीतनाग ने शक्ति को ललकारा

इधर प्रतिद्वंद्वी बराबर हो गए थे और उधर गरुड़ और धनंजय के वारों ने नागराज को लहू लोहान कर रखा था

"इस गरुड़ के चोंच और पंजे इतने लंबे हैं की ये आसानी से मुझे नोंच ले रहा है और मेरा विष इसके शरीर में भी नहीं जा रहा, अगर ये लगातार ऐसे ही वार करता रहा तो अधिक मात्रा में खून बह जाने के कारण मुझे कमजोरी भी आ सकती है, विष फुंकार को इसके पंख बिखेर दे रहे हैं और इसकी मोटी खाल पर विषदंत भी नहीं गड़ेंगे....(कुछ सोंचकर) एक काम हो सकता है"

अगली बार गरुड़ जैसे ही नागराज के पास आया, नागराज ने बचते हुए उसके पंख उखाड़ लिये... गरुड़ तड़प उठा ... अब नागराज ने पंख उखड़े हुए स्थान पर अपने दाँत गड़ा दिए... देखते ही देखते गरुड़ का शरीर पिघल गया।
नागराज अभी ठीक से संतुलित भी नहीं हुआ था कि धनंजय ने अगला वार कर दिया

"गुरुङ्अस्त्र से तो बच गए पर कम्पक अस्त्र से नहीं बच पाओगे"

तीर सीधे नागराज की नाभि में लगा और नागराज का शरीर पत्ते की तरह कांप उठा।

(आह्ह.... इस स्थिति में मैं ध्यान भी नहीं केंद्रित कर सकता की कणों में बदल सकूँ और अगर जल्दी कुछ नहीं किया तो कम्पन से मेरे शरीर के सूक्ष्म सर्प भी मरने लगेंगे)

नागराज ने ध्वंसक सर्पों का प्रयोग किया जो बेकार गया

"समर्पण कर दो नागराज, क्योंकि जब तक ये कम्पन करता रहेगा तुम इसे बाहर नहीं निकाल सकते, और ऐसा कोई भी अस्त्र शस्त्र बना नहीं है जो इसका कम्पन रोक दे"
धनंजय ने कहा

(ये कम्पक वास्तव में एक प्रकार का वाइब्रेटर है जो शरीर में वाइब्रेशन पैदा कर रहा है अगर मैं इसके वाइब्रेशन के असर को कम कर सकूँ तो मेरा काम बन जाएगा)
नागराज ने अपनी कलाइयां एक बार फिर खोली और उसमें से कुछ विशेष प्रकार के सर्प निकलकर कम्पक से लिपटने लगे।

"जिस कम्पक को बड़े से बड़ा योद्धा भी बाहर नहीं निकाल सकता नागराज, तुम्हे लगता है उसे तुम्हारे ये सांप बाहर निकाSSSल.....  असंभव ...... ये असंभव है... ये तुमने कैसे किया"

नागराज ने कम्पक को शरीर से बाहर निकाल दिया था और ये देखकर धनंजय के आश्चर्य की कोई सीमा ही नहीं थी.... उसके सवालों के जवाब नागराज ने ही दिए।

"इसका कम्पन सच में काफी कमाल का था पर इसके जितना ना सही किन्तु थोडा बहुत कम्पन तो मेरे शरीर में उपस्थित रैटलर सर्प भी कर लेते हैं और मैंने उनके माध्यम से कम्पक की विपरीत फ्रीक्वेंसी का वाइब्रेशन करवाया जिससे कम्पक का असर इतना कम हो गया की मैं उसे अपने शरीर से बाहर कर सकूँ।"

धनंजय ने फिर से धनुष साधा पर अब नागराज तैयार था उसने एक ही वार से धनुष तोड़ दिया।
●●●●●●●●●●●●●

इसी समय दूसरी तरफ

"अब मैं ज्यादा देर तक नगीना के तंत्र का सामना नहीं कर पाऊँगी शीतनाग"
सौडांगी ने शीतनाग से मानसिक तरंगो के माध्यम से कहा

"मेरे लिये भी शक्ति को हरा पाना असंभव है, पर मेरे पास नगीना के लिए एक योजना है, तुम बस मेरे कहे अनुसार करो"
शीतनाग ने सौडांगी को कोई योजना समझाई और नगीना ने जैसे ही अगला वार किया सौडांगी उसके मार्ग से हट गयी और तंत्र वार शीतनाग के फनों में समा गया... नगीना के कुछ भी समझने से पहले ही उसकी किरणे दुगनी तीव्रता से शीतनाग के फनों से निकलीं और नगीना से जा टकराई... नगीना ने पहले कभी अपनी ही तंत्र किरणों का वार नहीं खाया था... वो बुरी तरह से जख्मी हो गयी

"पापी, तुने शक्ति के सामने एक स्त्री पर प्राणघातक वार करने का दुःसाहस किया है, तुझे तो मैं मृत्युदंड दूंगी"

◆●◆●◆●◆●

उधर शक्ति का स्त्री क्रोध जाग चुका था और इधर नागू ध्रुव की लड़ाई अपने चरम पर थी

(ये नागू उतना बेवकूफ है नहीं जितना लगता है, इसकी सबसे बड़ी शक्ति इसकी मणि है उसे इसके माथे से हटाना होगा)
ध्रुव सोंच में था कि नाक पर अंगूठा फिराते हुए नागू ने कहा

"मेरे बारे में इतना मत सोंचिये सर, मैं दिल में आता हूँ, समझ में नहीं"

" अभी मेरे इतने बुरे दिन नहीं आये नागू कि तुम्हे दिल में लाना पड़े "
ध्रुव ने पास पड़े एक हथियार से नागू की मणि पर प्रहार किया और ध्रुव की ही चीख निकल गयी

"ओ तेरी, मैं तो भूल ही गया था कि आपको पता है की मेरी समस्त शक्तियां मणि के कारण हैं। लेकिन ये मेरी मणि है ध्रुव सर कोई बच्चों का खिलौना नहीं जो किसी भी लकड़ी से टूट जाए "
नागू ने हँसते हुए कहा

(ये सही कह रहा है, इस आसानी से इस मणि को नहीं निकाला जा सकता है, दोबारा ऐसी कोशिश की तो शायद उठ भी ना पाऊं... ये... ये क्या... बन गया काम)
ध्रुव ने उठकर एक कलाबाजी खायी और नागू को पार करते हुए दीवार के किनारे तक चला गया, फिर उसने वहाँ पड़ी कोई वस्तु उठाकर नागू पर फेंकी, निशाना हमेशा की तरह सटीक था

"मुझे नहीं पता था ध्रुव सर कि अब आप कंकर-पत्थर का.... आअह्ह्ह्ह"
नागू की मणि उसके माथे से निकल गयी और जमीन पर गिरने से पहले वो ध्रुव के हाथों में थी

"क्यों नागू चकरा गए... ये कोई कंकर नहीं बल्कि एक नागमणि थी जो शायद नागराज के साँपों की दृष्टि से बच गयी और यहीं रह गयी... अब एक मणि दूसरी मणि की शक्ति की बराबरी तो कर ही सकती है ना"

 मणि विहीन नागू को ध्रुव ने कुछ ही पलों में बेहोशी की नींद सुला दिया

"और हाँ... DON'T UNDERESTIMATE THE POWER OF A COMMON MAN"
ध्रुव ने निगाहें तरेर कर कहा और मणि को जमीन में फेंककर चल दिया।
●◆●◆●◆●◆●◆●

शक्ति और शीतनाग का द्वन्द भी चरम पर था
सौडांगी को शक्ति ने अपने ऊष्मा कवच में कैद कर दिया था और अब उसका लक्ष्य शीतनाग ही था क्योंकि उसी ने नगीना को आहत किया था, पर शीतनाग भी कोई साधारण शिकार नहीं था...

"शक्ति मैं तुझे मारना नहीं चाहता था पर तूने मेरे पास और कोई उपाय नहीं छोड़ा है, अब मैं अपने सबसे घातक वार का प्रयोग करूँगा"
शीतनाग ने अपने मुह से कोई वाष्प निकाली जिसने शक्ति के आस पास की हवा तक को जमा दिया और उसके हाथों से निकलती बर्फ ने शक्ति के पूरे शरीर को जड़ कर दिया

"तुम मेरे आस पास की प्राणवायु को जमा कर मुझे मारना चाहते हो.... हा हा हा.... शक्ति के शरीर में इतनी ऊष्मा है की वो चाहे तो ध्रुवों को भी पिघला दे, अब तू मेरे तीसरे नेत्र की शक्ति देख"

शक्ति का तीसरा नेत्र खुला और अग्नि की एक लहर शीतनाग की ओर लपकी
शीतनाग ने अपनी समस्त शीत शक्ति से उसे रोकने का प्रयत्न किया किन्तु अग्नि लहरें शीत शक्ति की सभी बाधाओं को पार करती हुई शीतनाग तक पहुंचने ही वाली थीं....

(शीतनाग को शक्ति से सिर्फ नागराज ही बचा सकता है) "नागरआआआज..."
सौडांगी ने बिना समय व्यर्थ किए नागराज को पुकारा

सौडांगी की चीख सुनकर नागराज उसकी तरफ लपका और धनंजय ने उसे रोकने का प्रयास किया...
"इस समय शीतनाग को बचाना आवश्यक है वरना अनर्थ हो जाएगा... "

नागराज ने धनंजय को अपनी समस्त नागशक्ति युक्त एक जोरदार घूँसा धर दिया और उसका शरीर कई फ़ीट दूर जा गिरा। ये दृश्य उसकी ओर बढ़ते हुए ध्रुव ने भी देखा।

"नागराज की शक्तियाँ अधिक हैं पर इतनी भी नहीं की वो तुम जैसे देव योद्धा को तिनके के समान उड़ा दे, आखिर उसकी शक्तियाँ इतनी बढ़ कैसे गयीं हैं धनंजय।"
ध्रुव ने धनंजय को सँभालते हुए उससे पूँछा

"तुमने शायद ध्यान नहीं दिया ध्रुव कि पूरे नागदीप में एक भी इच्छाधारी सर्प नहीं दिख रहा है..."

ध्रुव ने जब इस बात पर ध्यान दिया तो उसके माथे पर भी बल पड़ गए
"तो क्या ???"
"हाँ... नागदीप के समस्त सर्प इस वक़्त नागराज के शरीर में हैं और इसीलिए उसकी शक्तियां इतनी बढ़ी हुई हैं"

"उन सर्पों को नागराज के शरीर से बाहर लाने का कोई उपाय?"
ध्रुव ने पूँछा तो धनंजय ने बताया
"कम्पक शायद ऐसा कर सकता था पर अब जब तक नागराज स्वयं नहीं चाहता तब तक उन सर्पों का उसके शरीर से निकलना असंभव है"

"असंभव मात्र एक शब्द है मित्र। स्वयं से बहुत ज्यादा ताकत वाले शत्रु को हराने के लिए उसकी शक्तियाँ कम करनी होगी और अपनी शक्तियों को बढ़ाना होगा।"
ध्रुव ने घायल धनंजय को सावधानी पूर्वक लिटाते हुए कहा

"मिसकिलर..." मिसकिलर, जो स्वर्णनगरी से यहाँ नज़र रखे थी, को ध्रुव ने कोई योजना समझाई।

●●●●●●●●●●●●●●

शक्ति के तीसरे नेत्र की ऊष्मा शीतनाग को भस्म करने ही वाली थीं की उन्हें स्वयं में रुक जाना पड़ा....

"असंभव सामने इतनी सारी स्त्रियां कहाँ से आ गयीं ...  वो शीतनाग कहाँ गया"
शक्ति ने जैसे ही तीसरा नेत्र बंद किया उसने देखा उसके सामने खड़ा था
"... नाआआआगराज...."
जो उसकी आँखों में आँखें डालकर कहने लगा

"शांत शक्ति शांत... अब तुम मेरे सम्मोहन में हो और मैं तुम्हारे दिमाग को प्रत्येक बाहरी नियंत्रण से बाहर आने का आदेश देता हूँ"

शक्ति शांत पड़ गई। अब उसके मस्तिष्क से नियंत्रक का प्रभाव हट चुका था।

"ओह नहीं.... ये मैं क्या करने वाली थी... धन्यवाद नागराज... पर इतनी स्त्रियां कहाँ से आईं?"

"ये सभी मेरे शरीर में वास करने वाली इच्छाधारी नागिनें हैं। अब तुम बताओ कि ये किसका षड्यंत्र है जिसने पूरी दुनिया को गुलाम बना लिया है।"

"दुनिया की चिंता बाद में करता नागराज.... पहले अपने प्यारे नागदीप को तो बचा लो"
शक्ति कुछ बताती उससे पहले ही ध्रुव वहां आ गया था

नागराज ने देखा पूरे नागदीप पर स्वर्ण मानवों ने आक्रमण कर दिया था जो स्वर्ण द्वारों के माध्यम से वहां पहुंचे थे

"स्वर्ण मानवों का आक्रमण (यानि जो भी ये कर रहा है वो स्वर्णनगरी से इस युद्ध का संचालन कर रहा है)... हमे इन्हें रोकना होगा नहीं तो ये असुरक्षित नागदीप को तहस नहस कर देंगे"

शीतनाग, सौडांगी और नागराज जाने के लिए पलटे पर ध्रुव ने नागराज को स्टार लाइन से बांध दिया....
"तुम कहाँ चले नागराज, तुम गए तो मैं क्या करूँगा।"

स्टारलाइन??? वो तो तिलस्म में ख़त्म हो गई थी ना??... फिर ये... ये तो...

".... परमाणु रस्सी... ध्रुव के पास"
नागराज चौंक उठा

"होश में आओ ध्रुव...."
शक्ति ध्रुव की तरफ लपकी पर ध्रुव ने अपना बायां हाथ सीधा किया और एक ब्लास्ट से शक्ति दूर जा गिरी

"माना की तुम दोनों बहुत शक्तिशाली हो पर इस वक़्त मैं भी कम शक्तिशाली नहीं हूँ।"

उन्होंने ध्यान से देखा तो पाया कि ध्रुव का शरीर परमाणु और कोबी के आभूषणों से सुसज्जित था

(ध्रुव मुझे जाने नहीं देगा, अब नागदीप की सुरक्षा का एक ही उपाय है)
नागराज ने अपनी कलाइयां सीधी कीं और उससे नागदीप के नाग योद्धा बाहर आने लगे।

"तुम सब जाओ और सौडांगी, शीतनाग के साथ स्वर्णमानवों को रोको"
नागराज ने परमाणु रस्सी तोड़ते हुए कहा।

नागदीप के नाग निकल जाने के बाद अब नागराज और ध्रुव की शक्तियां लगभग बराबरी पर थी

"उपाय अच्छा था ध्रुव, लेकिन मैं और नागराज मिलकर रोकेंगे तुम्हे"

"पहले तुम मुसीबत में फंसी नारियों को बचाओ शक्ति...ऐसा न हो की उनके प्राण चले जाएं"

ध्रुव ने अपने तीव्र दीमाग का प्रयोग करके वहीँ पर धनंजय की मस्तक मणि से (जो इस समय उसके मस्तक पर शोभायमान थी) हज़ारों स्वर्ण द्वार बना दिए और उसमे से दुनिया भर में मिसकिलर के गुलाम मानवों द्वारा नारियों के ऊपर अत्याचार के दृश्य दिखने लगे। उनके चीखने की आवाज़ें शक्ति के कानों में गूँजने लगीं और शक्ति के शरीर से सैंकडों प्रतिरूप निकलकर वहां से जाने लगे और शक्ति शक्तिहीन हो गई।

"...नारी शक्ति... जो तुम्हारी शक्ति है, वही तुम्हारी कमजोरी भी है.....शक्ति अब इतनी शक्तिहीन हो चुकी है कि वो तुम्हारी कोई सहायता नहीं कर सकती नागराज। (पलट कर नागराज की तरफ देखते हुए)"

उन दृश्यों ने नागराज के क्रोध को भी जगा दिया था, उसने अपनी कलाइयां खोलीं और नागों का एक गुच्छा ध्रुव से टकराने के लिए बढ़ गया।

"सहायता की जरुरत तुम्हे होगी ध्रुव, मुझे नहीं, जिन परमाणु और कोबी के आभूषणों के दम पर तुम उछल रहे हो वो दोनों भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सके थे।"

"मत भूलो नागराज कि मैं पहले भी तुम्हे धूल चटा चुका हूँ,वो भी बिना शक्तियों के,इस बार तो इतनी शक्तियों के साथ तुम्हारे सामने हूँ।"
ध्रुव ने हवा में गदा का आह्वान् किया और गदा के एक ही वार ने नागों के गुच्छे को तोड़ दिया और अगला वार नागराज पर कर दिया

"अपनी हद में रहो ध्रुव... तुम आज तक सिर्फ इसलिए जीतते आये हो क्योंकि मैंने कभी तुम्हे हानि नहीं पहुंचानी चाही... मुझे ऐसा करने पर मजबूर मत करो।"
नागराज ने उसके वार को अपने हाथों से रोक लिया और ध्रुव पर ध्वंसक सर्प प्रयोग किये। ध्रुव ने एक बार फिर परमाणु छल्लों का इस्तेमाल किया और धमाका हानि रहित रहा।

"तुम जो करना चाहो वो करो ताकि बाद में कोई कसक न रह जाए मन में"
ध्रुव नागराज को ललकार रहा था

"बस बहुत हुआ ध्रुव.... आज मैं दिखा दूंगा की मेरे सामने तुम एक तिनके से अधिक कुछ नही हो।"
नागराज, जो पहले से ही क्रोध में था, और भड़क उठा।

"तिनका जब फांस बन जाता है तो बड़े बड़े सूरमा भी दर्द से कराह उठते हैं नागराज।"
ध्रुव ने जवाब दिया
●●●●●●●●●

स्वर्णनगरी में बैठी मिसकिलर भी नागदीप में हो रहे घटनाक्रम पर नज़रें गड़ाए हुए थी।

"हा हा हा!!! ....  ध्रुव बिना शक्तियों के बड़े बड़ों के लिए आफत है तो शक्तियों के साथ तो ये नागराज को अवश्य ही मार डालेगा...."
●●●●●●●●●

ध्रुव लगातार ब्लास्ट करते हुए नागराज के करीब आया और तेज़ी से गदा चलाई, ध्वंसक सर्पों से धमाकों का जवाब देते हुए नागराज ने कलाइयां ऊपर करीं, उनसे निकले सर्प X के आकार में आगए और गदा उसमे फंस गई। तुरंत ही नागराज ने ध्रुव पर एक किक जड़ने के लिए पैर चलाए लेकिन ध्रुव ट्रांस्मिट हो गया। वो नागराज के पीछे प्रकट हुआ और उसे परमाणु रस्सी से बांध लिया, नागराज ने भी एक घुटना मोड़कर उसी रस्सी के सहारे उसे धोबी पछाड़ देनी चाही पर ध्रुव फुर्ती से रस्सी से अलग होकर हवा में आ गया, वो तीव्र गति से उड़कर नागराज की तरफ बढ़ा, इस बार गायब होने की बारी नागराज की थी,ध्रुव आर पार निकल गया।

गजब का द्वन्द था ये जिसमे संसार के दो सबसे बड़े योद्धा लड़ रहे थे, दोनों की फुर्ती काबिले तारीफ थी।  वो बहुत देर से लड़ रहे थे पर अभी तक दोनों का एक भी वार दूसरे को नहीं लगा था।

(ये लगातार गतिशील है, अगर कुछ पल के लिये मुझे इसकी आँखों में देखने का मौका मिले तो मैं इसे सम्मोहित कर सकता हूँ)
इस विचार के साथ नागराज ध्रुव की ओर उड़ चला। कुछ ही देर में दोनों के शरीर हवा में ही एक दूसरे में उलझ गए। नागराज ने मौके का फायदा उठाकर अपनी आँखों का जादू चलाना चाहा .... लेकिन...

(ये मेरे नजदीक आकर मुझे सम्मोहित करना चाहता है... मुझे अधिक समय तक इसकी नज़रों के दायरे से बचना होगा)
ध्रुव ने नागराज की आखों के आगे ही परमाणु ब्लास्ट कर दिया, खतरा भांप कर नागराज पीछे हटा और ऐसा करके उसने अपनी आँखें घायल होने से तो बचा लीं पर तीव्र रौशनी से उसकी आँखें चौंधिया गईं।

"ये मैन्ड्रेक वाले तरीके बच्चों पर आज़माना नागराज।"
ध्रुव ने नागराज पर वार करना चाहा लेकिन नागराज उसके वार से ना सिर्फ बच गया बल्कि उसने ध्रुव को एक साथ कई मुक्के जड़ दिए। ध्रुव ने ऐसे किसी हमले की अपेक्षा नहीं की थी शायद इसलिए बच नहीं सका और उसके चेहरे से रक्त की कुछ धारें बह निकलीं, जो चंद पलों में ही गायब भी हो गयीं।

"तुम शायद भूल रहे हो ध्रुव की मैं एक नाग हूँ, देखने के लिए मैं आँखों का मोहताज नहीं।"
इतना बोलकर नागराज ने तीव्र विष फुंकार का प्रयोग किया...

"और शायद तुम भूल गए कि मेरी नाक में फिल्टर लगा हुआ है।"
इस जवाब के साथ ही ध्रुव ने दाएं हाथ से गदा और बाएं हाथ से परमाणु छल्लों के लगातार वार करने शुरू कर दिए।
नागराज ने भी धमाके का जवाब धमाके से और गदा का जवाब सर्प गदा से देना शुरू कर दिया। नागराज के वार ध्रुव को जो जख़्म दे रहे थे वो कोबी की बेल्ट के प्रभाव से तुरंत ही भर जाते थे और यही हाल नागराज पर लगने वाले घावों का भी था।

"देखो नागराज कुछ ही समय में स्वर्ण सेना पूरे नागदीप को धूल में मिला देगी और ये सब होगा तुम्हारे सामने... ऐसा देखने से पहले तुम्हारा मर जाना ही ठीक रहेगा।"
ध्रुव के वक्तव्य कुछ हद तक सही भी थे, नागदीप के सर्प अमर स्वर्ण सैनिकों को बहुत देर तक रोक पाने में असमर्थ थे।

"बस बहुत हुआ! अभी तक मैं तुम्हे रोकने का प्रयास कर रहा था पर अब नहीं... अब तुम्हे चोट देना मेरी मजबूरी है ध्रुव"

इस बार नागराज ने ध्रुव के वार का जवाब देने की जगह बचाव किया, वो गायब हो गया और तीन पलों के बाद हवा में ध्रुव के ऊपर प्रकट हुआ फिर हवा में ही उसे ढकेलते हुए ज़मीन पर ले आया, ध्रुव ने उससे अलग होकर ब्लास्ट के लिए हाथ बढ़ाया और नागराज ने ध्वंसक सर्प, इस बार ब्लास्ट ध्रुव के हाथ के एकदम पास हुआ जिसके बैकशॉक उसका हाथ कुछ पलों के लिए सुन्न पड़ गया और इन कुछ पलों में नागों ने परमाणु ब्रेसलेट उसके हाथ से अलग कर दिया। ध्रुव कोई और हरकत करता उससे पहले ही नागराज ने उसे ज़मीन पर गिरा दिया और इतनी गति से मुक्के मारने लगा मानों वो भूल गया हो कि ध्रुव कौन है। ध्रुव का सर जमीन में धंस गया और चेहरा खून से लथपथ हो गया था। वार इतनी तीव्र गति से हुए कि घाव भरने की गति भी कम पड़ रही थी। ध्रुव की शक्ति जवाब देने वाली थी पर उसने भी हारना कहाँ सीखा था। पूरी ताकत बटोर कर उसने अपना बांया हाथ हिलाया और घसीटते हुए बेल्ट तक ले गया.... एक खास बटन दबा फिर नागराज के अगले कुछ वार ज़मीन पर हुए क्योंकि ध्रुव ट्रांसमिट हो चुका था।

(अगर नागराज को मारना है तो इसे खुद से कमजोर करना पड़ेगा.... बर्फ के अतिरिक्त नागराज की कमजोरी है ..... पानी... और वही एक ऐसा स्थान भी है जहाँ नागराज मुझसे कमजोर पड़ेगा)

लड़खड़ाता हुआ ध्रुव थोड़ी दूरी पर प्रकट हुआ और ध्वनि के वेग से उड़ते हुए नागराज के शरीर से टकराया। नागराज इस वार का कोई जवाब देता उससे पहले ही ध्रुव ने हवा में द्वार बना लिया जो सीधे समुद्र की गहराइयों में जा खुला, ध्रुव नागराज के शरीर के साथ ही अथाह जल राशि में प्रवेश कर गया। अब तक उसके जख्म भी भर गए थे।

"ये एक ऐसा स्थान है नागराज, जहाँ पर मैं भी अमानवीय शक्तियां रखता हूँ। परमाणु की बेल्ट तो मैंने मणि कवच में सुरक्षित कर ली पर तुम यहाँ अपनी सुरक्षा नहीं कर पाओगे।"

नागराज ने सतह की तरफ तैरने का प्रयास किया पर ध्रुव ने धनंजय की मस्तक मणि की किरणों से 1 दैत्य बनाया जिसने नागराज को पकड़ लिया।

"मुझे पता है कि तुम इसे परास्त कर लोगे नागराज,  पर ऐसा करने में तुम अपनी ऊर्ज़ा खर्च करोगे और तब तक मैं तुम्हे यहीं रोके रखने का कोई और उपाय कर लूंगा, धीरे धीरे तुम्हारे फेफड़ों में प्राणवायु समाप्त हो जाएगी और यहीं तुम्हारी जल समाधी बन जाएगी।"

(पहले बर्फ और अब पानी... ध्रुव से लड़ने में यही समस्या है, ये अपनी ताकत से ज्यादा दूसरे की कमज़ोरियों का इस्तेमाल करता है.... जल्द ही मेरे फेफड़ों में हवा ख़त्म हो जाएगी.... पर मैं इसका उपाय कर सकता हूँ... मेरे जल सर्प सतह से हवा यहाँ तक ले आएँगे*)
विचारमग्न नागराज किरण दैत्य से लड़ते हुए अपने शरीर से कई जल सर्प निकाल दिए जो सतह की तरफ तैर गए।

【*नागराज पहले भी ऐसा कर चुका है “बाम्बी” में】

नागराज का आईडिया सही तो था पर वो ये भूल गया था कि इस बार सामना ध्रुव से है.... सतह से लौटते साँपों को देखकर ध्रुव ने नागराज की चालाकी भाँप ली
“उपाय अच्छा था नागराज पर मैं इन्हें तुम्हारे शरीर में प्रवेश ही नहीं करने दूंगा।”

नागराज ने किरण दैत्य को हरा लिया पर इससे पहले वो सतह की तरफ बढ़ता ध्रुव ने मणि किरणों से उसे बांध लिया और फेफड़ों में वायु समाप्त होने की वजह से नागराज कोई प्रतिरोध भी नहीं कर पा रहा था।

“अब यहीं तेरी जल समाधि बनेगी नागराज”

उसकी सांसे डूबती जा रही थीं और आँखें बंद
क्या यही अंत था संसार के इस महान रक्षक का....

"मर नागराज मर... बहुत परेशान किया है तूने" स्वर्णनगरी से ये दृश्य देख रही मिसकिलर की ख़ुशी अपने शिखर पर थी।

(नहीं... मैं मर नहीं सकता... कम से कम अभी तो नहीं... मुझे दुनिया को बचाना है... नागदीप को बचाना है)
नागराज ने अपने फेफड़े में बचे आखिरी वायु कण से प्राण सिंचित किये और कलाइयाँ सीधी कीं... उसमे से नागफनी सर्प तीर की गति से निकलकर सीधे ध्रुव के सर पर बंधी धनंजय की मस्तक मणि से टकराए और उसे तोड़ते हुए ध्रुव के दिमाग के आर पार निकल गए। ध्रुव का शरीर तड़पने लगा और नागराज अपनी पूरी क्षमता के साथ सतह की ओर तैर गया।

"हाआआआह्!!!..... "
नागराज की जान में जान आई और वो उड़ चला नागदीप की ओर .... पर ध्रुव... उसका क्या हुआ...
ध्रुव का शरीर निस्तेज होकर गहराईयों में समा गया
●●●●●●●●●●●●

नागदीप में स्वर्ण मानवों ने आतंक मचाया हुआ था और धनंजय उन्हें निर्देश दे रहा था। नागराज के वहाँ आते ही स्थिति पलट गई। नागराज को देखकर नाग जोश से भर गए और ध्रुव को ना पाकर स्वर्णमानवों सहित धनंजय भी सकते में आ गया।
●●●●●●●●●●●●

स्वर्ण नगरी में
"हाह... ध्रुव भी इसे नहीं मार सका... अब मुझे ही कुछ करना होगा"
क्रोध से भरी मिसकिलर स्वर्ण द्वार बनाकर नागदीप जा पहुंची और पहला वार हुआ नागराज पर, हवा में उड़ता नागराज सीधा जमीन पर जा गिरा

"मिसकिलर!! .... तो तुम हो असली षड्यंत्रकारी... या तुम भी किसी की गुलाम हो"
नागराज एक बार फिर आश्चर्यचकित था

"अभी ऐसा कोई पैदा नहीं हुआ जो मुझे गुलाम बना सके"
मिसकिलर की आवाज़ घमंड से भरी हुई थी

"अच्छा हुआ कि तुम यहीं आ गई... वरना मुझे स्वर्ण नगरी आना पड़ता"
नागराज ने सर्पों से उसके वारों का जवाब देते हुए कहा

"तुम मौत के पास जाओ या मौत तुम्हारे पास, एक ही बात है।"
मिसकिलर ने जवाब देने के साथ साथ हमला भी जारी रखा, किरणों ने नागों को धुंए में बदल दिया

(मिसकिलर इतने घातक किरण वार नहीं कर सकती अवश्य ही इसके वारों में स्वर्ण नगरी का विज्ञान शामिल है)
नागराज का सोंचना सही था मिसकिलर स्वर्ण नगरी की शक्तियों का इस्तेमाल कर रही थी

(मैं या तो मिसकिलर से लड़ सकता हूँ या स्वर्ण सेना से... और मिसकिलर को छोड़ना मतलब तबाही को खुला निमंत्रण... फिर स्वर्ण सेना???)
नागराज अभी सोंच ही रहा था कि बाज़ी पलटने लगी, मिसकिलर सहित सभी के शस्त्र निस्तेज हो गए।

"ये क्या हुआ??.... मेरी शक्तियां ...."
मिसकिलर बौखला उठी

"इसका मतलब है कि...."

".... सुपर कमांडो ध्रुव ने अपना काम कर दिया"
ध्रुव ने, जो अभी अभी उड़ता हुआ वहां आया था, नागराज के वाक्य को पूरा किया।

"ध्रुव होश में आओ....  तुम शायद भूल गए की नागराज हमारा दुश्मन है"
मिसकिलर चिल्लाई

"होश में आ गया हूँ मिसकिलर इसलिये पता है कि कौन दुश्मन है और कौन दोस्त"
ध्रुव ने मिसकिलर को जवाब दिया

"ये सब कैसे हुआ? और तुम्हे तो नागराज ने मार दिया था"
मिसकिलर ध्रुव से ही पूछने लगी और उसने बताना शुरू किया

"अरे ऐसा भी हो सकता है भला, उसे तो पता था की चाहे कैसा भी घाव लगे कोबी की बेल्ट उसे ठीक कर ही देगी। दरअसल नागराज जब मुझे बेतहाशा मार था उसी समय उसने मुझे सम्मोहित करके तुम्हारे नियंत्रण से मुक्त कर दिया था लेकिन हम फिर भी लड़ते रहे ताकि तुम्हे शक ना हो और हम कोई प्लान बना सकें।"

"फिर ध्रुव ने योजना बनाई की वो मरने का नाटक करके स्वर्णनगरी जाएगा और तुम्हे बहाने से बंधक बना लेगा।"
नागराज ने ध्रुव की बात को आगे बढ़ाया

"हाँ, पर मेरे वहां पहुँचने से पहले ही तुम नागदीप आ गई थी... तब मैंने स्वर्णनगरी के उन विशेष संयंत्रों को बंद कर दिया जो सभी स्वर्ण मानवों को शक्ति सम्प्रेषण करते हैं, इसीलिए तुम और ये सेना शक्तिहीन हो गई।"
ध्रुव ने अपनी बात ख़त्म की

"नहीं.... अपने सपने के इतना पास आकर मैं हार नहीं मान सकती.... मैं सभी स्वर्ण योद्धाओं को आदेश देती हूँ की लड़ो जब तक..."
मिसकिलर ने बात शुरू ही की थी कि धनंजय बोल पड़ा।

"रहने दो मिसकिलर, तुम जब ध्रुव से अपना पराजय पुराण सुन रही थी तब नागराज ने अपने सम्मोहन से सबको तुम्हारी अधीनता से मुक्त करा दिया है।"

"अगर ऐसा है तो फिर अब तुम सब अपने अंतिम युद्ध की तैयारी कर लो"
मिसकिलर ने हवा में हाथ घुमाया और वहां एक छोटा सा यंत्र प्रकट हो गया जिसमे 9 मणियों के बीच में एक अत्यधिक चमकदार मणि स्थापित थी। मिसकिलर ने उसे मुकुट के जैसे सर पर पहन लिया और सबके मुह से एक साथ निकला

“.......अमृत मणि ........”

"अ...हाँ, नवम् कोटि अमृत मणि, यानि 9 विशेष मणियों के संयोग के साथ रखी अमृत मणि... और इसकी शक्ति का मुकाबला देवता भी नहीं कर सकते"
मिसकिलर ने विजयी अट्टाहास के साथ वार करने शुरू कर दिए, हर वार की शक्ति भीषण थी, सभी बचने के लिए इधर उधर भागने लगे

"ये क्या बेवकूफी कर दी मैनें, इसे अमृत मणि के बारे में बता दिया। "
धनंजय बोल पड़ा

"इसके सामने वही टिक सकता है जो अमर हो पर .... देव ना हो।"
नागराज ने बताया

"तब तो एक उपाय है, धनंजय आओ मेरे साथ, जब तक हम आते हैं तुम इसे संभालो नागराज।"
कहकर ध्रुव धनंजय के साथ वहां से चला गया

"जल्दी आना भाई... पता नहीं मैं इसे रोक भी पाउँगा या नहीं।"
चिंतित नागराज उतर गया मैदान में

अमृत मणि का प्रकाश इतना था की मिसकिलर तो नज़र भी नहीं आ रही थी। नागराज उड़कर थोडा पास पहुंचा और विष फुंकार का प्रयोग किया। मिसकिलर हल्का विचलित हुई पर इस समय उसकी शक्ति इतनी अधिक थी की वो कुछ ही पलों में संभल गई और एक घातक वार कर दिया। नागराज कंकर की भांति ज़मीन पर आगया। अगला वार नागराज के स्थान पर किसी और ने अपने ऊपर ले लिया।

नागराज ने उसे देखा  "विषांक.... "
ध्रुव और धनंजय विषांक को स्वर्णचक्र से मुक्त करा कर ले आए थे

"हाँ इस वक़्त यही एक अमर है यहां पर"
ध्रुव ने कहा

विषांक और मिसकिलर का द्वन्द शुरू हो गया अमृत मणि और अमर विषांक, हर वार पहले से घातक होता जा रहा था

"पता नहीं विषांक इसे कब तक रोक पाएगा"
नागराज ने कहा

"जब तक मिसकिलर अमृत मणि की सम्पूर्ण शक्ति से अंजान है"

"ओह शक्ति.... अच्छा हुआ तुम आ गई"
नागराज और ध्रुव ने शक्ति के आने पर थोडा खुश होते हुए कहा।

"क्या करें, ध्रुव ने भेजा ही ऐसी जगह था, सबको ठीक करने में समय लग गया, पर इसे अमृत मणि कहाँ से मिली"
धनंजय ने शक्ति को सब बातें संक्षेप में समझाई

"हम्म... एक तरीका है... अमृतमणि की शक्तियों को पृथ्वी पर सीमित किया गया था, अगर कोई मिसकिलर को जमीन पर ला सके तो उसकी शक्तियाँ घट जाएँगी और तब शायद हम इस मुकुट को अलग कर सकें... पर ऐसा होगा कैसे क्योंकि हवा में रहते हुए कोई भी जीवित चीज़ नवम् कोटि अमृत मणि को छू नहीं सकती"
शक्ति की बात पूरी हुई और ध्रुव बोल उठा

"देव शक्तियाँ भी प्रकृति के नियमों से बंधी हैं, अगर सजीव इसे नहीं छू सकते तो निर्जीव शक्तियाँ काम आएँगी"

ध्रुव ने अपनी योजना समझाई और शक्ति अपनी ऊष्मा से सागर को गर्म करने लगी और नागराज अपने नागों से एक विशाल पाइप का निर्माण करने लगा जिसका मुँह सागर के पास बड़ा और आगे की ओर क्रमिक रूप से छोटा था। पाइप का दूसरा सिर मिसकिलर के एकदम ऊपर खुला और उससे एक तेज़ स्टीम बाहर निकली जिसके वेग से मिसकिलर का शरीर जमीन पर आ गिरा। मिसकिलर के जमीन पर आते ही ध्रुव की गदा और नागराज के संयुक्त वार ने मिसकिलर का मुकुट ज़मीन पर गिरा दिया जिसे तुरंत ही विषांक ने उठा लिया।

अब तेरा सारा षड्यंत्र ख़त्म हुआ मिसकिलर"
शक्ति ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया

"अभी तो मैं जा रही हूँ, लेकिन मैं फिर वापस आऊँगी, एक नए षड्यंत्र के साथ"
इतना कहकर मिसकिलर वहां से गायब हो गई।

"ये कैसे गायब हुई?" सभी चौंक गए

"अवश्य ही इसने स्वर्ण नगरी के विज्ञान से बहुत चीज़ें सीख लीं हैं... इससे आगे भी सावधान रहना होगा।"
धनंजय ने सबको शांत करते हुए कहा

"लेकिन एक बात नहीं समझ आई, शक्ति का तो ठीक है पर तुम दोनों अमृत मणि के बारे में कैसे जानते हो, इसकी जानकारी तो सिर्फ देवताओं को है, वो भी सबको नही।"

"पता नहीं, बस उसे देखते ही ये नाम आ गया जेहन में।"
धनंजय के प्रश्न पर नागराज और ध्रुव ने एक साथ उत्तर दिया
【*अमृत मणि और इसकी विशेषताओं के बारे में विस्तार से फिर कभी बात करेंगे।】

कुछ देर बाद धनंजय के स्वर्णद्वारों और नागू की मणि की सहायता से नागराज ने उन सभी लोगों को सम्मोहित कर ठीक किया जिन्हें मिसकिलर ने अपने अधीन किया हुआ था। साथ ही हिमालय की घाटियों में पड़े किरीगी के शरीर से भी उसकी खड़ग बाहर निकालकर उसे भी ठीक किया।

सभी के ठीक होने के बाद

"तुम्हारे शरीर का हिस्सा बनने के बाद तुमसे अलग होना कितना कष्टप्रद है, काश मैं सदा सदा के लिए तुम्हारे शरीर में वास कर सकती।"
विसर्पी ने अश्रु भरे नेत्रों से कहा

"वो दिन भी आएगा, जल्दी"
नागराज ने भावुक विसर्पी को समझाते हुए कहा

कालदूत - "तुमने अपनी बुद्धि और शक्ति का परिचय देते हुए पूरे संसार को इस मुसीबत से बचाया है नागराज।"

ध्रुव, शक्ति, परमाणु - "इस बार तुमने अकेले ही सबकी रक्षा करी है नागराज संसार की भी और हमारी भी"

नागराज - "आप सब मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं।"
फिर सब वहां से जाने को तैयार हुए और

परमाणु- "मेरा हाथ पकड़ लो ध्रुव"
ध्रुव - "फ़िलहाल तो तुम मेरा हाथ पकड़ो, तुम्हारी बेल्ट अभी भी मेरी ही कमर में है।"
सब लोग हंस दिए।
●●●●●●●●●

राजनगर - राजन मेहरा के घर पर।

नागराज - मैंने अपना वचन पूरा कर दिया माँ

रजनी मेहरा - मुझे पता था, एक तू ही है जो मेरे बेटे को बचा सकता है। और तू... कहाँ चला गया था मुझे छोड़ कर, माँ की ज़रा भी फ़िक्र है तुझे।

नागराज की आंखों में एक बार फिर से आँसू थे।

समाप्त।।

अरे नहीं

ट्रिन ट्रिन
कमिश्नर राजन फोन उठाते हैं

कमिश्नर राजन फ़ोन पर - व्हाट रबिश!
ध्रुव - क्या हुआ पापा?
राजन - इंस्पे. स्टील सारे राजनगर में तोड़ फोड़ कर रहा है।
ध्रुव - क्या!!

नागराज और ध्रुव वहां से निकलते हैं और उस जगह पहुँचते हैं जहां स्टील बबाल मचाए है।

ध्रुव - रुक जाओ स्टील ये सब क्यों कर रहे हो।
स्टील - मैडम मिसकिलर का आर्डर है, and u know I always follow the orders.

नागराज - ये क्या मज़ाक है, मैंने तो सबको ठीक कर दिया था।
ध्रुव - सम्मोहित करके.... इसकी तो आँखें ही नहीं हैं.... अब कैमरे को कैसे सम्मोहित करोगे????

समाप्त।।

2 comments

Oosssmmm story h bro....maza aagya read krke

Reply

कुछ बातें,, परिणाम,, तथ्य,, विश्लेषण,, घटनाएँ शब्दों से परे होती हैं,, ऐसे ही एक कहानी है
अंकित निगम भाई की लिखी "षड्यंत्र"।
आज पूरा पढ़ पाया ।
review देने के लिए उस महान कहानी के सामने मेरे पास शब्द नहीं हैं,, पर कुछ लेखकों के कहे अनुसार (और अंकित भाई के भी) review से लेखक को आत्मबल मिलता है,, अपने सही, गलत, हड़बड़ी, कमज़ोरी को समझने में मदद मिलती है...
इसलिए उस महान कहानी, उसकी लेखनी,उसके लेखक को इस तुच्छ मानव का प्रणाम है ,, कुछ भी कह पाने का या उसके बारे में प्रतिक्रिया का मेरा सामर्थ्य नहीं ।
बहुत ही अच्छे लड़ाईयाँ और दिमाग का उपयोग,
ध्रुव के oversmart वाली फीलिंग जो rc द्वारा दी जा रही है आजकल कि भैया तू तो हीरो नहीं सुपरहीरो है सब पहले से पता रहता है, कभी इंसान है ही नहीं तू,,
ऐसी वाली फीलिंग को हटा कर उसे सच में सुपरहीरो की तरह पेश किया गया।
विषाँक को अमर शख़्स के रूप में लाना बहुत ही बढ़िया लगा,, एक बार तो नागपाशा का ध्यान आता है उस जगह पर।
बहुत ही बढ़िया कहानी।

इस पूरी कहानी में rc की शैली की झलक दिखाई पड़ी।

परमाणु के बेल्ट को पानी से ख़तरा है तो वो आज के युग में भी वाटर प्रूफ नहीं ? जिस कॉमिक्स में वो दिखाया गया उसका उल्लेख भी करिये।

क्या परमाणु बारिश में लड़ या उड़ नहीं सकता?

अमृत मणि के लिए सस्पेंस नहीं छोड़ना चाहिए था।
यदि कहानी एक या दो पार्ट में है तो ऐसे पार्ट छोड़ सकते हैं
पर ऐसी लंबी श्रृंखला में कभी नहीं।

इंस्पेक्टर स्टील को साधारण रूप से निष्क्रिय करके डॉक्टर अनीष द्वारा ठीक कर दिया जायेगा।

अंत में..... बहुत ही शानदार कहानी है।।।।

Reply