Monday, 17 October 2016

समीक्षक - मनीष मिश्रा

लेखक - नितिन मिश्रा
चित्रांकन - सुशांत पंडा, हेमंत कुमार
स्याही कार - विनोद कुमार, ईश्वर आर्ट , स्वाति चौधरी
रंग सज्जा - बसंत पंडा, अभिषेक सिंह
शब्दांकन - नीरू , मंदार

लम्बे इन्तेजार के बाद  पाठको के हाथ में सर्वशक्ति आ ही गई, पर जितनी उत्सुकता के साथ इन्तजार किया, उसके बाद यह भाग निराश ही करता है। पिछले भाग में निशाचर की एंट्री ने रोमांच बढ़ा दिया था पर इस बार जितनी आसानी से वो पिटा उम्मीद नही थी। जो निशाचर एक पूरी 96 पन्नों की कॉमिक में फैला था उसे 10 पन्नों में समेट दिया, पर एक नया साया जो निशाचर के शरीर पर कब्जा करता है, अभी भी रहस्य है। डोगा और योद्धा का आर्म रेसलिंग भी युग्म की एक चाल सी थी पर अब मुकाबला होना है भेड़िया और अश्वराज का। पूरी सीरीज में एंथोनी का रोल कुछ खास है, पर कितना अभी यह कहना मुश्किल है।इस सीरीज की सबसे बड़ी बात है रहस्य जो अभी बस बनते ही जा रहे है, पुराने पन्नों से निकल कर विलेन और हीरो दोनों बाहर आ रहे है उन सबके साथ न्याय करना थोडा मुश्किल  होता जा रहा है। तंतंत्रा, किंग लूना सुप्रीम हेड जैसे विलेन वापस आ रहे है। कॉमिक के कूछ फ्रेम गमराज के नाम भी रहे, पर कुछ खास नही  था उसके पास जैसे उन्हें जबरदस्ती घुसेडा गया हो।एक और हीरो जिसकी एंट्री हुई गई वो है अघोरी, पर उसे सिर्फ एक पेज मिला है, सिर्फ यह कहने के लिए की अब वह दुनिया के सामने आएगा।  अंतिम पन्नों में एंट्री हुई है बोदी वाले बाँके की, हमेशा की तरह किसी योजना के साथ। शक्ति, नागराज और भेड़िया के जायंट रोबोट देख कर DC और Marvel की याद आ गई। शायद राज कॉमिक नक़ल में भी अक्ल का इस्तेमाल नही कर रही।
बात करते है आर्टवर्क की  तो RC का स्तर बस गिरता गई जा रहा है, आर्टवर्क दोयम दर्जे का है, फ्रेम्स बर्बाद किये गए हैं। जो बात एक फ्रेम में हो सकती थी उसे पूरे पैनल में दिखा कर सीरीज को खींचा जा रहा है।कुछ पैनेल में काम ठीक हुआ , अंतिम पननो पर बाँके का आर्टवर्क अच्छा बन पड़ा है। पर की जगह आर्टवर्क से निराश होना पड़ता है।ग्लॉसी पेपर कॉमिक देखने में अच्छी है। कॉमिक का कवर पृष्ठ भी कुछ खास नही है, और जल्दी में निपटाने जैसा काम है।
शब्दांकन ठीक ही है, एक दो जगह कुछ गड़बड़ हुई है , कर्तव्यनिष्ठा को कर्तव्यनिष्ठता लिखा गया है और ऐसा कोई शब्द मुझे याद नही पड़ता।
सीरीज अनावश्यक रूप से खिंचती जा रही है। कई  बाते जो पहले के भागों में की गई थी वो अब तक लोग भूल चुके हैं।कौन आया कौन गया सब मिक्स होता सा लग रहा है। एक पाठक के नजरिये से यह कॉमिक निराश करती है।

6 comments

Ye kahan mil rahi hai. Na unki site pe koi update hai na FB page pe.

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Aap bol rhe h ki "aakhirkar pathako ke haath me sarvshakti aa hi gyi"
Is ka kya matlab h? Abhi to ye release hi nhi hui h.

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आप लोगों को शायद पता नही पर ये कॉमिक ऑफलाइन बाजार में आ चुकी है। ऑनलाइन राज कॉमिक्स स्टोर पर नही आई अभी।

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मैंने ये सीरीज शुरू की थी और पहले २० पन्नों के बाद बंद कर रख दी, जब पूरे पृथ्वी के लोगों को ज़मीन के नीचे बसाने का काम ३-४ पन्नों में सिमटा दिया जाए, मतलब लेखक को रीडर्स का कोई सम्मान नहीं | मैंने आज तक नितिन मिश्र की एक भी ढंग की कहानी नहीं देखी

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पता नहीं लेखकों ने इसका ड्राफ्ट तैयार करने में कहाँ चूक की.. अभी एक सिरा निकला नहीं कि दूसरा किनारा मिल जाता है, जो एक-दूसरे से जुड़े भी नहीं मिलते !

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