Saturday, 15 October 2016



।"अब तेरे बिन जी लेंगे हम..." कार के FM पर गाना बज रहा था, और ड्राइविंग सीट पे बैठा रितेश गाने के बोल और खुद की मनः स्थिति के बीच सम्बन्ध ढूंढ रहा था!

"हाँ जी लूंगा तुम्हारे बिन, क्या ले के गयी तुम कुछ भी नहीं, मैं यहीं हूँ !" उसने खुद से कहा।

सनम तोड़ देता मै चाहत के वादे, अगर जान जाता मैं तेरे इरादे..." गाना आगे बढ़ा और साथ में रितेश के मन की कड़वाहट भी।

"काश पता होता, उस गिरीश को चाहने लगी तुम! हह, मुझे उस दिन ही समझ लेना चाहिए था, जब ऑफिस पार्टी के नाम पे तुम्हे पिक करने आया था वो, कितनी frank हो रही थी तुम" एक बार फिर झुंझलाहट भरी आवाज़ रितेश के गले से निकली!

गाना ख़त्म हो चुका था, और RJ love गुरु बना, चबड़ चबड़ कर रहा था!

"So Here we go...the hurt song...हर टूटे दिल की आवाज़ ये सुपरहिट गाना only on...."

आगे रितेश ध्यान नहीं दिया उसका ध्यान "टूटे दिल" वाले शब्द पे ही अटक गया था।

"जा बेवफा जा हमें प्यार नहीं करना"

जैसे ही गाने के स्वर गूँजे रितेश का मन लमहातो और हालातो के संयोग पर खीज उठा..."ये fm वालों को किसने मेरे हाल का पता बता दिया.." उसने सोचा।

''मैंने तेरी पूजा की, मैंने तुझको रब माना..." गाना बढ़ता गया और गाड़ी भी, जयपुर अब भी बहुत दूर था।

कल सुबह जयपुर हाईकोर्ट में रितेश का अपनी पत्नी प्रज्ञा से तलाक़ होना था।

दिल्ली से जयपुर के रास्ते में वो शाम बहुत ख़ाली सी लग रही थी उसे लेकिन दिल में भावनाओं का गुबार भरा था, जिसमे ज्यादातर गुस्सा भरा था!

गाना ख़त्म हो चुका था...

"तो दोस्तों एक और दर्द भरा नग़मा खत्म हो चुका है... अगर आप कोई ख़ास फरमाइश चाहते हैं सुनना या किसी ख़ास से कोई ख़ास बात कहना तो डायल करें नम्बर 9798121272,,हम बनेंगे जरिया आपके दिल की बात का..."

इतना सुनते ही रितेश की हंसी छूट गयी!

"Yeah right! radio से दिल की बात! दिल की बात दिल ही समझ नहीं पाता हहा ये radio लवगुरु.."

"What..I think its kind of cute..जो बात खुल के नहीं कह सकते वो रेडियो की आड़ में कह लो...दिल की बात दिल में तो नही रहेगी"

"फायदा क्या अगर जिसे सुनाना हो वो ही न सुने?"

"सच्चे दिल की पुकार सब सुनते हैं, खासकर चाहने वाला" प्रज्ञा की इस बात का जवाब फीकी हंसी से दिया था रितेश ने।

कुछ साल पहले हुई इस मीठी झड़प के वक़्त भी रितेश इस बात को नहीं समझ सका था..और "शायद" आज भी नहीं समझ पा रहा था।

प्रज्ञा की इस बात को याद कर के रितेश का मन फिर से कड़वा हो चला, गाडी अब भी सड़क पे बढ़ रही थी।
FM अब भी बज रहा था, किसी नवेले आशिक़ की फरमाइश पे कोई गाना बज रहा था,

"चोरी चोरी दिल तेरा चुरायेंगे...अपना तुझे हम बनाएंगे"

रितेश के दिल की कड़वाहट बरक़रार थी मगर निकलने का रास्ता नहीं पाकर थोड़ी बिखर सी गयी थी, और उसके पीछे से याद की एक बूँद टपकी, रितेश का मन भीग उठा।

प्रज्ञा को पहली दफ़ा देख कर उसने कैसे "कितनी हसरत है हमें तुमसे दिल लगाने की" गाया था ठीक उसके पीछे वाली बेंच पे बैठ के, उसके बाद भी कई दफ़ा, और लाख बुरा गाने के बावजूद हर बार प्रज्ञा उसकी तारीफ़ करती थी, ये कह कर की," मेरे लिए गाया है न"। और वो मुस्कुरा देता, वैसी ही मुस्कुराहट आज फिर उसके होठों पे फैली, की तभी उसका मोबाइल बज उठा...

प्रज्ञा के घर से फ़ोन था, उसने न चाहते हुए भी उठाया, उधर से प्रज्ञा की बहन अदिति ने जवाब दिया!

"दीदी ने कल कोर्ट टाइम से पहुँचने के लिये कहा है इसलिए फोन किया"

"हम्म, मतलब वो फ़ोन भी नही कर सकती!" रितेश के शब्द शायद खुद के लिए ही थे।

कड़वाहट का कोहरा फिर गहराने लगा! उसकी आँखें भी धुंधला गयीं पर प्रज्ञा का चेहरा बिलकुल साफ़ था उसकी नज़रों में! उसका सर भारी होने लगा और पैर हल्के, जब accelerator ने और दबने से इनकार कर दिया तो उसने गाड़ी सड़क के किनारे मोड़ दी।

रितेश गाड़ी से उतरा और दरवाज़ा खुला छोड़ कर गाड़ी के सहारे खड़ा होकर सिगरेट सुलगाने लगा...

"मत पियो मर जाओगे" प्रज्ञा के बोल उसके ज़हन से टकरा गए..सिगरेट हाथ से नही छूटी पर लबों से कुछ लफ्ज़ छूट गए...खुद ब खुद

"ऐसे भी साल भर से कौन सा जी रहा हूँ"


"वो पहली मुलाक़ात की मीठी सी चांदनी..." FM पर गाना बज रहा था...और रितेश, प्रज्ञा से हुई अपनी पहली मुलाक़ात की चांदनी से लेकर Divorce के ग्रहण तक के सफर को बस याद ही कर रहा था!

क्लासरूम, रेस्ट्रॉन्ट, पार्क फिर सात फेरों से होकर ये सफ़र अदालत तक पहुंचेगा...ये उसने न तो गाने गाकर प्रपोज़ करते हुए सोचा था, न शादी का वीडियो देखते हुए, 4 साल की शादी में गिरीश को लेकर हुए एक साल पहले, झगड़े के वक़्त तो बिलकुल नहीं।। उसे लगा था हर झगड़े की तरह ये झगड़ा भी बीतेगा,,मगर यह झगड़ा नहीं बीता और करीबियों के बीच sweetest couple कहलाने वाली इस जोड़ी की मिठास कहीं खो गयी...रह गयी तो बस फीकापन, रूखापन और खाली जगह,

"क्यों?" सवाल; इसबार रितेश के लब खामोश थे, सवाल अंतर्मन का था!! और जवाब भी उसके पास था मगर वो स्वीकार नहीं करना चाहता था की ग़लती उसी की है।

पसोपेश में उलझे उसके मन की तन्द्रा FM के संगीत से ही टूटी..."ये जो मोहब्बत है, ये उनका है काम.." कुछ याद कर के रितेश एक खोखली सी हंसी हँस पड़ा...

"ये जो मोहब्बत है..ये अपना ही काम...महबूब का जो...रहने दो छोड़ो भी जाने दो यार...हम तो करेंगे प्यार"

रितेश को खुद का बनाया version याद आ गया जो वो प्रज्ञा के लिए अक्सर कॉलेज में गाया करता था।

अचानक उसका मोबाइल बज उठा, रोहित का फ़ोन था, रोहित उसका दोस्त भाई हमदर्द सब रहा था...बचपन से!!!

"हाँ सुन मैं कल 10 बजे तक जयपुर पहुंचूंगा तू निकल गया न?"

"ह ह...हाँ" गला साफ़ करते हुए रितेश ने जवाब दिया।

"जब हो नहीं रहा तो क्यों कर रहा है?"

"उम् क्या?"

"खुद से हो चुका है अब मुझसे अनजान मत ही बन, तुझे भी पता है तू प्रज्ञा के बिना रह तो पायेगा नहीं.."

"रह लूँगा एक साल से तो रह रहा हूँ"

"किस हाल में ये देखा है?"

" देख रोहित, छोड़ कर वो गयी मुझे...मैं"

"तो तू ले आ ना भाई"

"मैं क्यों? गलती उसने की घर भी उसने छोड़ा, मै क्यों..."

"क्योंकि तू गलत है, तुझे भी पता है प्रज्ञा तुझे धोखा नहीं दे सकती..गिरीश या कुछ भी नाम हो उसका, उसे लेकर तुझे गलतफहमी हुई तुझे, तो ज़रा ये ego वाला कम्बल है न उसे फेंक और समझ वाली टोपी पहन...ज़रा सोच तुमलोग sweetest couple हो यार!! ये हो ही नहीं सकता...ज़रा जोर लगा दिमाग पे अभी भी वक़्त है..जयपुर दूर नहीं है..!!"

"एक साल से उसने बात तक नहीं की" रितेश खुद से ही बोला

"और तूने?" रोहित की आवाज़ गूंजी।

"मैं क्या बात करता भाई?"

"यही की तूने गलती की, माफ़ी माँगता..बात करने को हज़ार हैं तुझे जरुरत है तो किसी ज़रिए की! देर नहीं हुई ज़रिया ढूंढ ले"

रोहित ने फ़ोन रख दिया। एक अजीब सी खामोशी ने रितेश को घेर लिया था..जो खामोश हो के भी उससे बातें कर रही थी..कह रही थी की आज खामोश रहे तो फिर शायद कुछ कह नहीं पाओगे...जो कहना है कह दो!!

"झुकी झुकी सी नज़र...इंतज़ार है की नहीं...प्यार है की नहीं" FM अब तक चालू था।

थोड़ी देर तक रितेश सुनता रहा और फ़िर प्रज्ञा का नम्बर उसने dial कर दिया!!

फ़ोन की घण्टी बजी..एक बार ...दो बार..फिर खामोश हो गयी। जब उसने फिर से नम्बर घुमाया तो प्रज्ञा का नम्बर ऑफ़ था!!

अपने कहे ताने, उलाहने सब घूम कर रितेश के ही मस्तिष्क को सालने लगे!!

"तो जाकर उसी के साथ रहो, मुझे कोई ज़रूरत नहीं तुम्हारी" गुस्से में कहे साल भर पहले के ये शब्द आज नश्तर बन कर उसके सीने में गड़ने लगे!

आज जब बात करने को वो ज़रिया ढूंढ रहा था हर रास्ता...हर ज़रिया उसे अपने मुंह पे बन्द होता सा दिखा, ठीक वैसे ही जैसे प्रज्ञा की आँखें बन्द हुई थीं, रितेश के तानों को सुनकर..!!

उस खामोशी ने फिर से रितेश के कानों में कहा आज नहीं तो कभी नहीं!!!

"जी हाँ, दिल कुरेद देती हैं यादें किसी की....आपको भी किसी से है प्यार तो न करो इंतज़ार झट से फ़ोन उठाइये और लगाइये मेरा यानी RJ Om का नम्बर 9797121272...और कह डालिये अपने दिल की बात,,अपने इस शो में जिसका नाम है Direct Dil se...और हम हैं आपके दिलों की हर अनकही कहानी का ज़रिया"

FM में फिर से बनावटी लव गुरु की बनावटी आवाज़ गूंजी, मगर आखिर में कहे शब्द रितेश के लिए उम्मीद से कम नहीं थे...कुछ  ही देर में रितेश ने एक नम्बर घुमाया, उसपे थोड़ी देर बात करने के बाद उसने एक और नम्बर डायल किया...

"हलो अदिति, मेरी बात सुनो please.."

रितेश की आवाज़ की कसक ने शायद अदिति के मुंह से "हाँ जीजू.." शब्द निकलवा लिए। कुछ देर तक अदिति को समझाने के बाद रितेश ने फोन रख दिया और FM बन्द कर के बस कार की सीट पर बैठ गया...सिगरेट हाथ से छूट चुकी थी...मन में कड़वाहट गायब हो चुकी थी..अब बस इंतज़ार था...

*जयपुर*

प्रज्ञा खिड़की पे बैठी बाहर देख रही थी, शायद रितेश के अचानक आये फ़ोन के बारे में सोच रही थी...कोई बात नहीं करनी थी उसे...कुछ नहीं कहना था!! तभी कमरे में अदिति आई और उसके लाख मना करने के बाद भी उसने stereo में FM on कर दिया..एक ख़ास frequency सेट कर के वो प्रज्ञा को देखने लगी।

प्रज्ञा के चेहरे पे निराशा गुस्सा और सवाल के मिश्रित भाव थे...

"आप सुन रहे हैं Direct Dil se और अब बारी है हमारे अगले कॉलर की..जो की हैं रितेश, शिरोइ से और ये अपना message देना चाहते हैं अपनी पत्नी प्रज्ञा को अपनी ही आवाज़ में...so here we go..we hope की प्रज्ञा जी सुन रही हैं"

प्रज्ञा के चेहरे के भाव में बस सवाल ही था!

"कितनी हसरत है हमें,तुमसे दिल लगाने की, पास आने की तुम्हे ज़िन्दगी में लाने की....मै दिल की बात भला कैसे कहूँ...कैसे कहूँ" रितेश की आवाज़ गूंजी शायद गला भर आया था इसलिए इतना ही गाया..


*जयपुर हाईवे*

कार की सीट पे बैठा रितेश हाथों में हाथ थामे बस इंतज़ार कर रहा था..सांस काफी तेज़ चल रही थी...साथ ही...बीच बीच में आँखें बन्द कर के भगवान से कुछ दरख़ास्त भी चल रही थी!! ऐसी ही छोटी सी प्रार्थना के बीच उसका मोबाइल बजा उसने देखा...


"Pragya Calling"

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