Tuesday, 20 September 2016

COP प्रस्तुत करते हैं

सुरज और सोनू

 [भाग 5]

सूरज तस्वीर देखते ही चौंका।सिल्विया ने भी ये बात नोटिस की।
"क्या हुआ?"उसने सुरज की तरफ देखते पूछा।
सूरज से जवाब देते न बना।उसका दिल तो अनजान आशंकाओ से धड़कने लगा था।क्या सोनम ही सोनू हो सकती है?क्या वो उसे ही याद करती है?
"तुम चीता की बहन को कब से जानती हो?"सूरज के लिये इस सवाल का जवाब बहुत अहम था।
"सुनो,"सिल्विया ने बोलना शुरू किया।
उसके लिये तो वक़्त में वापस लौटने के समान था ये।
Flashback
"चीता और मै एक ही स्कुल में पढ़ते थे।वो शुरू से ही पढाई में तेज और खेलकूद में अव्वल था।हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे।
एक दिन वो स्कुल नहीं आया।मै बेचैन रही।कुछ दिन और ऐसे ही बीते तो मै उसके घर गई।
मैने देखा कि उसके घर पर एक 6 7 साल की लड़की घायल अवस्था में थी।पूछने पर पता चला कि वो लड़की उसे नदी में डूबते मिली।उसकी हालत इतनी ख़राब थी कि कई दिन उसे होश नहीं आया।
2 हफ्ते बाद जब उसे होश आया,तो उसने अपना नाम सोनू उर्फ़ सोनीका बताया।
हलकान सिंह नाम के एक डाकू ने उसका किडनैप किया था और एक लड़के ने उसे वहाँ से आजाद कराया।
भागते भागते वो दोनों नदी में गिर गए और बिछड़ गए।"
Flashback Over
"बस तब से मै उसे जानती हूँ।"सिल्विया ने बात खत्म की।
"क्या ये लड़की थी वो।"सूरज ने पहली बार फोटो उसकी तरफ घुमाई।
सिल्विया उछल कर खड़ी हुई।
"यही तो थी।"उसने फ़ोटो झपटी।
"और उसे देखा कब था आखिरी बार।"सूरज का स्वर शांत था।
"कोई 8 साल पहले।"सिल्विया फ़ोटो वापस लौटाती बोली।
सूरज ने पर्स से मोनिका की फ़ोटो निकालकर उसे दिखाई।"यही थी?"
अब सिल्विया का जवाब सूरज के लिये जीवन मरण के बराबर था।
सिल्विया ने कुछ देर फ़ोटो देखी, फिर सिर सहमति में हिला दिया।
सूरज की जान में जान आई।
फिर भी ये फ़ोटो सोनम के पास कैसे थी?
जवाब सोनम के ही पास था।
पोंडा,गोआ
Hotel Daffodil
दिव्या एक रूम में बन्द थी,लेकिन बाहर निकलने की उसकी तरकीबें जारी थीं।
उसने फोन उठाया और रिसेप्शन पर लगाया।रिंग जाती रही।
"हेलो.."दूसरी तरफ से कॉल रिसीव की गई।
"मुझे भूख लगी है।"दिव्या ने अपनी आवाज को कमजोर बनाते हुए कहा।
"10 मिनट रुको।"निकोल बोली।
उसने रिसीवर रखा।फिर होटल की एक वेट्रेस के पास गई।
दिव्या पूरी तरह तैयार थी।
कुछ ही देर में बेल बजी।
दिव्या ने दरवाजा खोला।जैसे ही वेट्रेस अंदर आई,उसकी गर्दन पर कराटे का हमला हुआ।
कड़ाक की आवाज के साथ उसकी गर्दन टूट गई।
कुछ देर बाद दिव्या कमरे से बाहर निकली।अब वो वेट्रेस की ड्रेस पहन चुकी थी।चलती हुई सीधे वो किचन में पहुंची और बाथरूम में घुस गई।
आसपास उसकी निगाह घुमी।बाहर जाने का कोई रास्ता नजर नही आ रहा था।
"क्या मतलब ऐसीआजादी का?"वो बड़बड़ा उठी।
वेरा आगे बढ़ा।
एडा की कार पलट चुकी थी और अब उसमे आग भी लग चुकी थी।
एकाएक कार का दरवाजा उखड़ कर बाहर आ गिरा।और एडा बाहर निकल आई।उसे एक भी खरोंच नहीं आई थी।
वेरा करीब पहुंचा ही था कि एडा को सही सलामत बाहर निकलता देख ठिठका।
एडा ने खा जाने वाली नजरो से वेरा को देखा।उसके जबड़े भींचे।
वेरा गुर्राया।वो एडा पर झपटा।
एडा नीचे की ओर झुकी,वेरा लड़खड़ाता हुआ आगे निकल गया।दूसरी तरफएडा ने झुकते ही कार का टुटा दरवाजा थामा।वेरा पलटा ही था किएडा ने तेजी से दरवाजा उसके सिर पर दे मारा।वेरा चकराया सा कई कदम पीछे हटा।एडा तेजी से दौड़ती आई और अपने कंधे की मजबूत ठोकर उसके पेट पर जमा दी।वो यही नहींरुकी,बल्कि उसके सीने पर बैठकर ताबड़तोड़ मुक्के उसके चेहरे पर ज़माने शुरू कर दिये।कुछ सेकंड बाद वो उठी।वेरा का मस्तिष्क अवचेतन में खो चूका था।एडा ने उसका एक पैरपकड़ा और उसके शरीर को घसीटती पैदल ही चलने लगी।
कुछ दुरी पर ही हाइवे नजर आने लगा।
तेज रफ्तार वाहन आ जा रहे थे।
एडा रुकी।उसने एक निगाह सामने आते कंटेनर ट्रक पर मारी और वेरा को उसके सामने फेक दिया।वेरा का शरीर घिसटता ट्रक के सामने आ गिरा।
एडा पलटकर चल दी।वो नहीं मुड़ी।
दूसरी तरफ परेशान थी दिव्या।
अबतक उसने वेट्रेस का ड्रेस उतार लिया था और अपने ड्रेस में वापस आ गई थी,जो उसने अंदर ही पहन रखा था।
अभी वो किसी की नजर में नहीं आना चाहती थी।इसलिए अंदर ही अंदर घूम रही थी।धीरेधीरे बढ़ती वो निकोल के कमरे तक पहुँच ही गई।
निकोल अपनी चेयर पर टिकी आँखे बन्द किये थी,जब दरवाजे की आहट पर जाग गई।
सामने दिव्या मौजूद थी।
"तुम?तुम बाहर कैसे आई?"निकोल उठ खड़ी हुई।
"बताती हूँ.."कहते हुए दिव्या उसपर झपटी।
एडा ने निकोल को कॉल लगाई।
उसे नई गाड़ी की जरूरत थी अब।
"हेल्लो.."सामने से जवाब मिला।एडा ने एक सेकंड में उस आवाज को पहचाना।
"दिव्या?"एडा की आँखे सिकुड़ी।
"हां,एडा।दिव्या बोल रही हूँ।"दिव्या नाटकीय स्वर में बोली।"मुझे पता है कि तुम पणजी के करीब तो पहुंच ही गई होगी।पर क्या ये नहीं जानना चाहोगी कि निकोल जिन्दा है या मर गई।"
एडा के जबड़े भींचे।
"जानना है तो वापस आ जाओ.."कहते हुए दिव्या ने फ़ोन काट दिया।
एडा के जबड़े भींचे हुए थे।
हाथ दिखाकर उसने टेक्सी रोकी।
"सिरोदा चलो।"शांत स्वर था उसका।
टेक्सी चल पड़ी।साथ ही एडा की दिमागी हलचलें भी।
निकोल को कोई नुकसान पहुंचे,ये वो सोच भी नहीं सकती थी।आखिर आज वो यहाँ थी उसका कारण निकोल ही तो थी।
Flashback
"अगले दिन कोर्ट में निकोल की बदौलत नम्रता ने एक वसीयत पेश की,जिसके मुताबिक एडवर्ड रॉश की सारी जायदाद की वारिस सिर्फ और सिर्फ एडा होने वाली थी।डेविड के हिस्से के 25% शेयर्स का जिक्र कही नहीं था।डेविड का भड़कना लाजिमी था।उसने सरेआम उस वसीयत को नकली बताया,हालांकि साबित कर पाना टेढ़ी खीर साबित हुआ।लेकिन उसके वकील ने असली वसीयत सामने लाने की बात कही,जो उनके मुताबिक उनके पास सलामत थी।नम्रता ने कोई हुज्जत नहीं की।
कोर्ट के बाहर नम्रता की मुलाकात देविका से हुई।(देविका कौशल,जिससे आप reveal must die सीरीज में मिल चुके हैं।)
देविका के पुराने और आज के चेहरे में कोई फर्क नहीं आया था।आखिरकार वो एक इच्छाधारी नागिन थी।
"तो,मिस एडवोकेट के दिमाग में क्या चल रहा है?"अपनी प्रसिद्ध मुस्कान के साथ पूछा देविका ने।
"कभी स्टिंग ऑपेरशन किया है?"बदले में नम्रता ने पूछा।
देविका का सिर सहमति में हिला।
"एकबार और करोगी?"नम्रता ने पूछा।
डेविड अपने घर पर मौजूद था और अपनी रिवॉल्विंग चेयर पर लेटा सिगरेट के कश लगा रहा था।सोच केंद्रित थीं कि किस तरह केस जीत लिया जाये।
एक आहट से उसका ध्यान भंग किया।
वो ऐडा थी।
"तुम यहाँ क्या कर रही हो?"नाखुशी साफ़ उसके चेहरे पर नजर आई।
"बस एक सवाल आपसे पूछना है।"मासूम सी ऐडा बोली।
"क्या?"सिगरेट का कश लिया उसने।
"क्या मेरे माँ बाप की जायदाद हड़पने के लिये आपने उनका कत्ल करवाया?"ऐडा उसकी तरफ बढ़ी।
डेविड टहलने लगा।टहलने के पीछे उसका मकसद ये जानना था कि क्या ऐडा किसी को अपने साथ लाई है।लेकिन उसे कोई नजर नहीं आया।
आखिरकार वो वापस बैठा।
"बैठो.."उसने सामने सोफे की तरफ इशारा किया।
"किसी कातिल के साथ?सवाल ही नहीं उठता।"ऐडा का स्वर अब भी शांत था।
"कोर्ट मुझे कभी कातिल साबित नहीं कर पायेगा ऐडा।न तुम।"ख़ुशी उसके चेहरे पर झलक रही थी।
"लेकिन कातिल तो तुम्ही रहोगे।"एडा के स्वर में गुस्सा नजर आया।
"हां,हूँ मै कातिल।"वो भड़का।"क्या कर लोगों तुम?कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।"
"ये घर मेरा है।इस घर में रहने वाले लोग मेरा परिवार हैं।"एडा बोली।"तुम्हे जाना होगा।"
"जाना तो तुझे होगा।"डेविड के हाथ में गन चमकी।"तेरे परिवार के पास।"
इससे पहले की वो गोली चला पाता,एक गोली उसके हथेली को छीलती निकल गई।
"खेल ख़त्म।"गोली चलाने वाले हाथ निकोल के थे।
"और रिकॉर्डिंग है यहाँ।"देविका सामने आई।उसके हाथ में एक सीडी चमक रही थी।"तुम्हारे इकबालेजुर्म की।"
डेविड की आँखों में अंगारे नाच उठे।उसने ऐडा को थामा और उसके हाथ एडा की गर्दन पर जम गए।
"अगर कोई आगे बढ़ा,तो इसकी गर्दन तोड़ दूंगा।"कहर बरपा उसके शब्दों मे।"जाने दो मुझे यहाँ से।"
निकोल ने हाथ नीचे किया।"जाओ।"
डेविड धीरे धीरे वहां से निकला।
बाहर निकलते ही उसकी कमर से ठंडी चीज़ टकराई।वो गन थी।
"लड़की को छोडो।"उसने तुरंत एडा को छोड़ा।
वो पीछे पलटता,,उसके पहले ही उसके सिर पर जोरदार वार हुआ और वो बेहोश होकर लुढ़क गया।
गन से हमला करने वाली कैरोलिन थी।एक सीआईए एजेंट।
एडा ने तेजी से गन लपकी और डेविड को शूट करने ही वाली थी कि कैरोल ने उसे थामा और ऊपर की ओर उसके हाथ उठा दिया।
गोली की तेज आवाज हुई।
"पागल हुई हो।"कैरोल ने उसे डांटा।
"शट अप।यू ब्लडी ****"ऐडा चीखी।"जो मारे गए,वो मेरे परिवार थे,तुम्हारे नहीं।मैनेखोया उन्हें,तुमने नहीं।दर्द मुझे हुआ है,तुम्हे नहीं।"कहते कहते रो पड़ी एडा।"और आज उन्हें मारने वाला मेरे सामने है और तुम्हे मै पागल नजर आ रही हूँ।पागल तुम हो,वो लोग हैं, जो अपने बदले के लिये कानून पर निर्भर हैं।मै उनकी तरह नहीं हूँ।"
कैरोलिन चुपचाप खड़ी रही।
नम्रता आगे बढ़ी।उसने एडा को गले लगाया।फिर बोली।
"सुनो एडा।मुझे पता है तुम क्या महसूस कर रही हो।"उसने एडा को समझाना शुरू किया।"हम सभी ने अपनी जिंदगी में कुछ न कुछ खोया है।हम तुमसे अलग नहीं। कैरोल ने,जिसे तुमने इतना कुछ कहा,क्या कुछ नहीं खोया।जिसे तुमने छिना,वो खिलौना नहीं था।अगर इसने कुछ नहीं खोया,तो क्यों ये आज कोई अच्छा काम न करके वो काम करती है,जिसमे इसकी जान को हरपल खतरा होता है।इसने भी अपने माँ बाप खोये हैं।मैने भी।"
ऐडा के नेत्र फैले।
"आपके भी?"
"हम सभी एक दिन मरेंगे एडा।"कैरोल बोली।"डेविड ने तुम्हारे माँ बाप को नहीं मारा।लेकिन जिसने भी माराहै।अब उसे मै पकडूँगी और बदला लोगी तुम।वादा है।"
Flashback over
एडा भागते हुए अंदर पहुंची।उसके दिल की धड़कन अब सारे रिकॉर्ड तोड़ चुकी थी।
निकोल टेबल पर लुढ़की पड़ी थी।
एडा ने उसे हिलाया।वो तुरंत उठी।
एडा की जान में जान आई।
"भाग गई?"एडा कुर्सी पर टिकी।गिलास,जो पानी से भरा था,निकोल की तरफ बढ़ाया।
"हां यार।"उसने घूंट भरा।
"कोई बात नहीं।"एडा ने पैरटेबल पर टिकाये।"अक्षय पाटिल कहाँ मिलेगा अभी?"
अगला दिन
दिव्या पाटिल पणजी पहुंच चुकी थी।
वहाँ पहुँचते ही उसे सारी जानकारी दी गई।
सूरज नाम का आदमी सोनम को लेकर गायब था।और सोनम के इंटरव्यू की सीडी भी वो देख चुकी थी।
उसने सूरज की सारीजानकारी निकलवाई।
थोड़ी देर बाद उसने पैनोरमा फोन लगाया।
उसने सूरज से बात करनी चाही,जो करा दी गई।
"हेल्लो सूरज।दिव्या पाटिलबोल रही हूँ।"सूरज चुपचाप उसे सुनने लगा।
"मुझे पता है कि तुम ही डोगा हो।"
सूरज चोंका।फिर भी चुप रहा।"वर्ना ये कैसे मुमकिन था,कि जहाँ सूरज पहुंचा, उसी जगह अगली रात डोगा पहुंचा।खैर,मुझे सोनम चाहिये।वो तुम्हारी कुछ नहीं लगती।अपने चारों चाचाओं और मोनिका,चीता के सामने उसे तरजीह मत दो।"सूरज के जबड़े भींचे।"24 घंटे में,अगर वो मेरे पास नहीं पहुंची तो अगले मिनट में इनकी सलामती की दुआ करना।फिर तुमसे से अपने तरीके से निपटूंगी।"
उसने रिसीवर रखा।
सूरज के जबड़े भींचे हुए थे।फैसले की घड़ी थी।वो पलटा।सामने सोनम खड़ी थी।
"मेरे लिये अपने परिवार को मुसीबत में मत डालना सूरज।"वो पलटकर चली गई।
दूसरी तरफ दिव्या ने रिसीवर रखा ही था।कि घण्टी बज उठी।
"हेल्लो?"वो बोली।
"दिव्या पाटिल?एडा बोल रही हूँ।"एडा की सर्द आवाज गूंजी।"गलत पंगा लिया तूने।तेरा भतीजा अक्की,मेरे पास है।"
कुछ ही देर में उसके कानों में अक्षय की आवाज गूंजी।"चाची प्लीज बचाओ मुझे।"
वो कुछ बोल पाती, की वापस एडा की आवाज कानों में पड़ी।
"अब तू सुन।24 घंटे में अगर सोनम मेरे हाथों में नहीं आई,तो ये सूअर यमराज के हाथों में होगा।"
दिव्या के मुँह खोलने से पहले फोन काटा जा चूका था।
सब एक दूसरे पर भारी थे,पर कौन जीतने वाला था?

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