Monday, 19 September 2016

COP प्रस्तुत करते हैं

सूरज और सोनू (भाग 3)
मुम्बई

रात के 2:30बज रहे थे,जब डोगा दिव्या पाटिल के घर में दाखिल हुआ।अभी उसे अंदर घुसे ज्यादा वक़्त नहीं हुआ था कि एकाएक गोली की आवाज ने सन्नाटे को भंग किया।गोली दिव्या के कमरे से चली थी।
डोगा चुपचाप कमरे की तरफ बढ़ा।रोबिन तेजी से सीढियां चढ़ता चला गया।उसने डोगा को नहीं देखा था।डोगा ने उसका पीछा किया और दिव्या के कमरे तक पहुंचा।अंदर का नजारा देख उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ।
अंदर बिस्तर पर दिव्या सिर्फ एक चादर लपेटे बैठी थी,हालांकि वो उसके शरीर को ढँकने के लिये अपर्याप्त थी,पर उसके बैठे रहने का अंदाज बता रहा था कि उसे इसकी कोई परवाह नहीं थी।उसके एक हाथ में गन थी,जिससे धुँआ निकल रहा था और दूसरे हाथ में सिगरेट।
उसी बिस्तर पर एक 25 वर्षीय युवक का शव पड़ा था।जिसके सिर में गोली लगी थी।
रोबिन हड़बड़ाता अंदर पहुंचा।
"क्या हुआ मैम?"वो अनजान बनता बोला।
"साले,सूअर के बच्चे।"एकाएक गालियों की बौछार हुई।"ये किस नामर्द को यहाँ लाया तू।साले ,पूरी रात ख़राब कर दी मेरी।उठा इस नामर्द की लाश को और जाकर कोई मर्द ला।समझा?"
"मर्द को ढूंढने कही जाने की जरूरत नहीं,आज वो खुद यहाँ आ चूका है।"डोगा अब अंदर आ चूका था।
रोबिन के लिये वो स्वर नया था।वो पीछे पलटा और डोगा को देखते ही चौंका।तेजी से उसका हाथ गन के होल्स्टर पर गया,पर तब तक डोगा की गन ने बारूद उगल दिया था,जो सीधे रोबिन के सिर में जा घुसा।
डोगा सीधे दिव्या के सिर पर जा खड़ा हुआ।
"बताओ,सोनम शर्मा कहाँ है?"उसने गन की नाल दिव्या की कनपटी पर टिका दी।
"न बताऊँ तो..."वो उठ खड़ी हुई।
डोगा ने एक गोली दागी,जो उसका कान छीलती हुई निकल गई।
"आउच"वो वापस जा गिरी।
"मुझे पता है, उसे तुमने ही किडनैप कर रखा है।क्यों?ये मै नहीं जानता,पर अगर उसे कोई नुकसान हुआ,तो तुम्हे बहुत नुकसान होगा।"डोगा सिर्फ एक वार्निंग के साथ गेरेज की तरफ बढ़ा,जो उसके कमरे के पिछले दरवाजे से सीधे गैरेज में खुलता था।डोगा ने कुछ देर पहले छिपकर उसकी भौगोलिक जांच कर ली थी।
दिव्या झपटकर उसके सामने जा खड़ी हुई।
"तुम वहाँ क्यों जा रहे हो?"दिव्या ने दरवाजे पर हाथ रख लिया था।
"बताता हूँ।"डोगा ने उसका हाथ थामा और उसे एक तरफ झटक दिया।वो सीधे बिस्तर पर जा गिरी।
हवा की गति से डोगा ने दरवाजा खोला।एक कार उसे बाहर निकलती दिखी।उसे कार पहचानने में देर न लगी।ये कार तो वही थी,जिसमे कल उसने सोनम को देखा था।
डोगा ने बाहर झलांग लगाने की कोशिश की ही थी,कि अचानक दिव्या ने उसे पीछे से वापस कमरे में खींच लिया।
डोगा ने इस वार की उम्मीद नहीं की थी।नतीजन वो सीधे फर्श पर जा गिरा।उसकी गन एक तरफ जा गिरी।
दिव्या ने बिजली की गति से गन थामी और सीधे डोगा के सीने पर जा सवार हुई।
"अपना मास्क उतार।"गन की नाल डोगा की तरफ थी।
डोगा ने कोई कोशिश नहीं की।
डोगा के दोनों हाथ उसने अपने पैरों के नीचे दबा रखे थे,जिसके चलते वो अपने हाथ नहीं हिला पा रहा था।लगता था,जैसे कभी दिव्या भी मार्शल आर्ट में माहिर रही होगी।
"क्यों बे,कुत्ते के पिल्ले।सुना नहीं,मैने क्या कहा?उतार अपना मास्क।"इस बार उसकी आँखों में हिंसकता नजर आई।
इसबार डोगा ने हाथों पर जोर लगाया,तो उसे ध्यान आया कि डोगा के हाथ उसके पैरो के नीचे दबे है।वो उठ खड़ी हुई।
डोगा भी उठा।
"चल,जल्दी कर।"गन की नाल अब भी डोगा की तरफ थी।
"न उतारूँ तो....."डोगा ने जानबूझकर वाक्य अधूरा छोड़ दिया।
वो मुस्काई।करीब आई,डोगा के सीने पर गन टिकाई।धीरे धीरे गन सरकती हुई नीचे गई।एक जगह ठिठकी।वो फिर मुस्काई।
"कहाँ गोली मारूँगी?समझ गया न।"मुस्कान अब भी उसके चेहरे पर थी।
दिव्या पीछे हटी।"चल मर्द।मास्क उतार।"
डोगा के पास कोई चॉइस नहीं थी।दिव्या के हाथ में हथियार था।उसके हाथ में नहीं।कोई भी हथियार हाथ में आने तक वो गोली चला सकती थी।
वो आगे बढ़ा।"खुद देख लो।"
दिव्या आगे बढ़ी।दोनों के बीच का फासला अब ख़त्म था।दिव्या ने मास्क उतारना शुरू किया।उसके दायें हाथ में गन थी।
मास्क आधा उतर चूका था।सूरज के होंठ अब नजर आने लगे थे।दिव्या ने उसके होंठो को अपने अंगूठे से छुआ।अपनी आँखे बन्द की और अपने होंठो को उसके होठो के करीब लाने लगी।
तभी मौका देखकर डोगा ने उसका दाहिना हाथ मोड़ा और गन उसके हाथ से निकल गई।डोगा ने चाकू निकाला और दिव्या की गर्दन पर रखा।
"काम की मारी औरत।फंस गई तू।"उसे वापस बिस्तर पर पटकता वो बोला।"अब तू मरेगी, अगर तुरंत जवाब न दिया तो।"
"क्या?'दिव्या के तो होश उड़े हुए थे।
"कहाँ है सोनम शर्मा?'
"उसे गोआ ले जाया गया है।"कांपती आवाज में बोली दिव्या।
डोगा ने गन निचे कर ली।
अचानक डोगा ने दिव्या के बदलते हाव भाव नोटिस किये।दिव्या ने एक नजर डोगा के पीछे डाली और वापस उसपर जमा ली।
उसे समझते देर न लगी कि कोई उसके पीछे।पलटने की बजाय वो नीचे झुक कर बायीं तरफ लुढ़क गया।
हथियार घूमने की तेज आवाज उसने सुनी।डोगा पलटा।सामने 9 फ़ीट लंबा आधे जानवर और आधे इंसानका समावेश खड़ा था।उसके हाथों में लोहे का मोटा पाइप था।डोगा हतप्रभ सा उसे देखता रह गया।
"डोगा अब तुम्हारा सामना "वेरा"से है।ये आधा जानवर और आधा इंसान है।"दिव्या बोली।मुस्काती हुई।"ये 14 साल का है और मेरा बेटा है।"
डोगा के नेत्र फैले।
"सोच रहे हो इसकी ये हालत कैसे हुई।"दिव्या बोलती रही।"मेरे कारण।उस वक़्त मै ड्रग एडिक्ट थी,जब ये पैदा हुआ।अब इसकी हालत ये है कि इसके शरीर में खून नहीं,ड्रग दौड़ता है।"
दिव्या ने नकली जम्हाई ली।"अब पता चलेगा तुम कितने बड़े मर्द हो।"
वेरा गुर्राया और डोगा पर झपटा।डोगा तेजी से पीछे हटा और पूरी ताकत से एक मुक्का वेरा पर जमा दिया।वेरा कुछ कदम पीछे लड़खड़ाया।इसबार वो और जोरों से गुर्राया।डोगा को उसने हाथों में थामा-हालांकि डोगा ने बचने की कोशिश की थी,पर नाकाम रहा-और जोर से कमरे के पिछले दरवाजे पर दे मारा।डोगा दरवाजा तोड़ते हुए,सीधे गेरेज के दरवाजे पर जा गिरा।(दिव्या का कमरा पहले फ्लोर पर था)
12 फ़ीट नीचे गिरकर डोगा खड़ा हो पाता, उसके पहले वेरा सिर पर आ खड़ा हुआ।
उसने डोगा को थामा, पर एक जोरदार किक ने उसे डोगाको छोड़ने पर मजबूर कर दिया।इसबार डोगा ने उसे सम्भलने का मौका नहीं दिया।और उसके चेहरे पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिये।हालांकि लगा नहीं की उसे कोई फर्क पड़ा हो।
उसने फिर डोगा को पकड़ा और कई फ़ीट दूर फेक दिया।
डोगा एकमात्र बनी दिवार को तोड़ता हुआ बाहर आ गिरा।
एडा
निकल पड़ी थी वापसी की राह पर।सूरज का उसके आसपास होना अब उसे बेचैन करने लगा था।दिल एक घबराहट महसूस कर रहा था।
एअरपोर्ट अभी दूर था।तो बीती यादें एक बार फिर जोर मारने लगी।उसने उन्हें हावी होने दिया।
Flashback
नम्रता ने 6 साल कीएडा को चेक किया कि कही उसे चोट तो नहीं लगी है।उसे तो नहीं लगी थी।पर नम्रता की कार जरूर एडा से टकराकर बुरी तरह डैमेज हो गई थी।
नम्रता ने पुलिस को कॉल करके वहाँ हुए वारदात की जानकारी दी।लाशों को हॉस्पिटल ले जाया गया और एडा को नम्रता लेकर हॉस्पिटल चली आई।
रस्ते में एडा से बात करने की कोशिश की,जिसमे एडा ने वहाँ हुए वाकये की डिटेल उसे दी,जिसमे डेविड का भी जिक्र था।
हॉस्पिटल में एडा का मेडिकल टेस्ट हुआ ,जिसमे कोई चोट सामने नहीं आई।
नम्रता सामने आ बैठी।"तुमसे एक बात पूंछू?"
ऐडा ने सहमति में सिर हिलाया।
"तुम अडोप्टेड हो?"नम्रता के सवाल पूछते ही एडा ने उसे यू देखा,जैसे उसे अभी मार ही डालेगी।
"क्या हुआ?मैने जो सवाल पूछा,उसकी उम्मीद नहीं थी तुम्हे"नम्रता का स्वर शांत था।
"आपने ऐसा सोचा भी कैसे?"एडा का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
"सोचो।"नम्रता का स्वर अब भी संयमित था।"मै बताती हूँ।कुछ देर पहले तुम मेरी कार से टकराई थी।तुम्हे क्या हुआ?कुछ नहीं,लेकिन मेरी कार की हालत ये है कि बिना क्रेन के अब उसे उठा पाना मुमकिन नहीं।"
एडा परे देखने लगी।
"तुम्हारे पास ये पॉवर कहाँ से आई?"एडा ने कोई जवाब न दिया,तो नम्रता आगे बोली।"जाहिर है माँ बाप से और अगर तुम्हारे माँ बाप ही मर गए,तो..."आधे शब्द उसने जानबूझकर छोड़ दिये।
"मै जा रही हूँ।"एडा उठ खड़ी हुई।
"बैठो वापस"नम्रता का स्वर उखड़ा।"जबतक न कहूँ, बैठी रहो।"
एडा चुपचाप बैठ गई,गुस्सा अब भी उसके चेहरे पर था।
"तुम्हे पता है, मै कौन हूँ।इक लॉयर।तुम्हारी मदद करने की कोशिश कर रही हूँ मै।"नम्रता अब टहलने लगी।"कोई जानता है कि तुम अडोप्टेड हो।"
"मै अडोप्टेड नहीं हूँ।"एडा चीखी।
नम्रता मुस्काई।"तो तुम मेरी कार से टकराकर कैसे बची और तुम्हारे माँ बाप एक ही गोली में कैसे मर गए।"
एडा से जवाब देते न बना।
"डेविड को पता होगा कि तुम अडोप्टेड हो,तुम्हारे माँ बाप को मारकर वो तुम्हारी कंपनी हथियाना चाहता है।"
Flashback Over
उसकी कार टकराते बची सामने आते ट्रक से।तेजी से उसने ब्रेक लगाया।
रेलवे ट्रेक्स के करीब आ रुकी थी वो।
कार रुकी तो एडा बाहर निकली।उसने एक लंबी सांस ली।
"सूरज,तुम्हारे कारण ही मुझे जाना पड़ रहा है।मै हारने जा रही हूँ।"बड़बड़ा उठी एडा।
एक ट्रेन जो वही से गुजर रही थी,निकली,तब एडा की नजर उस जगह मौजूद सायों पर पड़ी।
एक "डोगा"था और दूसरा था"वेरा"।
वेरा ने डोगा को जमीन पर गिरा रखा था और सामने से आ रही ट्रेन को देख रहा था।डोगा की हालत काफी ख़राब थी,ये एडा को दूर से ही समझ आ गया।
वो ट्रैक पर चढ़ी और उनकी तरफ बढ़ी।करीब ही लोहे का पाइप पड़ा था,जिसे उसने उठाया।
डोगा मुँह के बल पड़ा था और वेरा उसकी पीठ पर सवार था।सामने से ट्रेन आ रही थी और वेरा के मुताबिक उसे डोगा को छोड़कर हट जाना था।सामने से एक ट्रेन आ रही थी और अगले ट्रैक पर पीछे से।
एडा वेरा के सामने आई।उसके सिर पर उसने पाइप ठकठकाया।"ए सूअर।"
वेरा ने जैसे ही उसकी तरफ देखा,एक जोरदार वार उसकी गर्दन पर हुआ।वो पीछे की तरफ कई फ़ीट हवा में उछला।और पीछे से आती ट्रेन से जा टकराया।
एडा डोगा की तरफ पलटी।
"अब तू बोल कुत्ते के बच्चे।याद है मैने क्या कहा था?कि एक दिन मुझपर किये वारों का बदला जरूर लुंगी।"एडा ने पाइप को तेजी से घुमाया।डोगा ने बचने की कोशिश नहीं की।
लेकिन पाइप नीचे नहीं आया।उसके पहले ही दूर कही शंख की आवाज सुनाई दे गई।
एडा ठिठकी सी देखती रह गई उसे।
"अगर मै भगवान को न मानती होती तो आज तू इस धरती पर बोझ बना न रह पाता।"कहते हुए उसने डोगा को पीछे से थामा और खाली ट्रैक पर डाल दिया।
साथ ही उस ट्रैक पर ट्रेन निकल गई,जहाँ कुछ देर पहले डोगा था।
अगला दिन
Lion's gym
सूरज हॉस्पिटल न जाकर सीधे जिम चला आया।
रात में हुई मुठभेड़ की बाबत उसने सभी को बता दिया था।वेरा सच में एकचुनौती था उसके लिये।जिसे निपटा दिया एडा ने ।अब भी वो बेहद थका नजर आ रहा था और उसके शरीर पर घाव आसानी से देखे जा सकते थे।
अभी वो लोग बात कर ही रहे थे कि जिम का एक मेंबर अंदर आया।
"सूरज भैया।कोई लड़की आपसे मिलने आई है।"अर्णव नाम था लड़के का।
"नाम क्या बताया उसने?"चीता ने पूछा।
"जी"अरनव कुछ सोचकर बोला।"एडा रॉश"
"मै आता हूँ।"सूरज बाहर निकला।बाहर आते ही वो चकराया।चीता, जो पीछे ही आ रहा था,ने उसे संभाला।
"आराम से सूरज।"अदरक चाचा आगे बढे।"मेरे ख्याल से तुम्हे उसे अंदर बुला लेना चाहिए।"
दोनों ने मिलकर सूरज को संभाला।
"नहीं,मै उससे बात करता हूँ।"सूरज खड़ाहोता बोला।
सूरज एडा के पास पहुंचा।उसकी आँखे खुली रह गई।
सामने एडा मौजूद थी।लाल रंग के गाउन में,जिसमे वो इतनी अच्छी लग रही थी कि जिम के हर लड़के की नजर उसपर टिकी थी। वो चुपचाप सूरज को देखती रही।दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी।सूरज धीरे धीरे उसके करीब आया।
"कहिये,मै आपकी क्या मदद कर सकता हूँ।"सूरज ने कहा,तो एडा चोंकी।
"ह..हां,सूरज,मुझे तुम्हारी मदद चाहिए थी।"एडा हड़बड़ाती बोली।
"किस मामले में.."सूरज का दिल बैठने लगा।कही इसे पता तो नहीं चल गया कि यही डोगा है।
"अ..कही बाहर चले।"एडा आसपास देखती बोली।
"अंदर चलो।सबके सामने बात करते है।"सूरज ने कमरे की तरफ इशारा किया।
एडा ने उसे आगे चलने का इशारा किया।
सूरज कमरे में दाखिल हुआ।
वहाँ अदरक चाचा,चीता और मोनिका पहले ही मौजूद थे।
सूरज ने उन सभी का परिचय करवाया।
आखिर में एडा बोली।"मेरा नाम एडा रॉश है।मै सीआईए की तरफ से हूँ।एक अमेरिकन रॉकस्टार सोनम शर्मा का शो 10 दिन पहले यहाँ था।मुझे पता चला है कि 3 दिन पहले तुमने"सूरज की तरफ थी वो ऊँगली।"उसे देखा था।मुझे ये भी पता चला है कि तुम्हे पता है, वो लोग कौन है।और उन्होंने ही तुम्हारी शक्लोसूरत का नक्शा बदला है।"
सूरज चुप रहा।
"तुम क्या चाहती हो?"मोनिका ने पूछा।
"उसका पता,जिसने पकड़ रखा है सोनम को।"एडा बेबाक बोली।
"दिव्या पाटिल नाम है उसका।"सूरज ने मोनिका को रोकना चाहा पर वो बोलती चली गई।"पुणे की विधायक है।अब बोलो क्या करोगी।"
"अखबार में पढ़ना।थैंक्स.."एडा तुरंत ही पलटकर बाहर निकल गई।
"ये तुमने क्या किया।"पीछे सूरज मोनिका से बोला।"उसे क्यों बताया दिव्या पाटिल के बारे में।"
"ताकि वो तुम्हारी जान छोड़े।मेरे सूरज की जान छोड़े।"कहते वक़्त प्यार नजर आ रहा था उसकी आँखों में।
सूरज झुंझलाया।
"चीता,जरा मेरे साथ आओ।"सूरज डोगालिसिस लैब की तरफ लपका।
कुछ ही देर में सूरज बाहर निकला।उसे पता चला कि वो कार आखिरी बार पणजी में देखि गई थी।
वो बाहर निकला तो सामने ही उसे एक टेक्सी स्टैंड नजर आया।वो वहाँ पहुंचा।साथ ही कोई और भी था,जो उसपर नजर रख रहा था।
सूरज उस टेक्सी में सवार हुआ और चल पड़ा।
कुछ ही देर में एक और कार उनके पीछे लग गई।
पणजी,गोआ
"थैंक यू, भापाजी।"सूरज उतरता बोला।साथ में कोई सामान नहीं लाया था सूरज,ताकि कोई उसपर नजर रख रहा हो तो उसे शक न हो कि वो सीधे गोआ जा रहा था।
"ओ,कोई नहीं काके।"टेक्सी ड्राईवर मुस्कराते बोला।"मेनू एक गल दस्स,पुत्तर।"
"बोलिये।"सूरज पेमेंट करता बोला।
"तू मुम्बई से खाली हाथ इत्ती दूर क्यों आया।थ्वाडा सामान कित्थे है?"हाथ हवा में हिल रहे थे सरदार जी के।
"दरअसल मै एक दोस्त से मिलने आया हूँ।कल ही लौट जाऊंगा।"सूरज ने बात टाली।
"जनानी है?"ड्राईवर ने एक आँख दबाई।
"सतश्रीअकाल भापाजी।"सूरज पलटकर चल दिया।
"ज्यूंदा रह पुत्तर।"सरदारजी ने गाड़ी स्टार्ट की।
Hotel Panorama
सूरज अंदर दाखिल हुआ।
उसकी सरसरी निगाह हर तरफ फिरि।वो एक 60 फ़ीट लंबा और 45 फ़ीट चौड़ा हॉल था।दाई तरफ रिसेप्शन पर कुछ लोग खड़े थे।बायीं तरफ लाइन से 30 फ़ीट लंबी सोफा चेयर्स लगी थी।सूरज चलता हुआ सोफे की चेयर पर बैठ गया।सामने टेबल पर पड़ी एक मैगजीन उसने उठाई और उसे पढ़ने का उपक्रम करने लगा।
जल्द ही रिसेप्शन खाली हुआ,तो सूरज तेजी से वहाँ पहुंचा।
रिसेप्शन पर मौजूद युवती ने मुस्कुरा कर उसका स्वागत किया।
"हेल्लो सर।हाउ कैन आई हेल्प यू?"चेहरे पर मुस्कान बिखेरती वो बोली।
"यस यू कैन,"सूरज धीमे शब्दों में बोला।"ओन्ली यू कैन मिस..?"
"सिल्विया..सिल्विया परेरा.."मुस्कान अब भी उसके चेहरे पर थी।
'क्या मै इस होटल के मेनेजर या ओनर से बात कर सकता हूँ?"सूरज के शब्दों पर उसके चेहरे के भाव बदले।
"कोई प्रॉब्लम है सर।"अनिश्चय के भाव थे अब उसके चेहरे पर।
"नहीं,मुझे उनकी मदद चाहिए।"सूरज बोला।
"आप ओनर से ही बात कर रहे हैं।"मुस्कान उसके चेहरे पर वापस छाई।"आइये।"उसने एक कमरे की तरफ इशारा किया।
"डोल्सी मेरी जगह संभालो।"एक लड़की ने तुरंत उसकी जगह ली।
(सिल्विया परेरा:-26 वर्षीया, एक गोरी और 5'10" ऊँची लड़की।बेहद मेहनत से कभी उसके भाई "पाल्बो"ने इस होटल को खड़ा किया था,पर कुछ ईर्ष्यालु प्रवित्ति के लोगों का शिकार हुआ वो और होटल की और घर की जिम्मेदारी आ पड़ी सिल्विया पर।)
दोनो आमने सामने बैठ गए।
वो एक बेहद सुव्यवस्थित ढंग से सजा कमरा था।
"अब कहिये।"वो सूरज से मुखातिब हुई।
"मेरा नाम सूरज है, सूरज गांधी।"सूरज ने बोलना शुरू किया।
"महात्मा गांधी के वंशज हो?"सिल्विया ने टोका।
सूरज ने इंकार में गर्दन हिलाई।
"मुम्बई से एक लड़की को किडनैप करके गोआ लाया गया है।"सूरज ने फिर बोलना शुरु किया।
"पुलिस वाले हो।"सिल्विया ने फिर टोका।साथ ही एक वेटर काफी सर्व कर गया।
सूरज ने इंकार में सिर हिलाया।
"आर्मी?"
फिर जवाब नहीं में मिला।
"रॉ के एजेंट हो?"
"नहीं"
"तुम्हारी बहन किडनैप हुई है क्या?"शांत स्वर था सिल्विया का।
सूरज ने अखबार,जो मुम्बई का था,उसकी तरफ बढ़ाया।
अखबार पर नजर पडते ही वो चौंकी।
"सोनम शर्मा?यानि दिव्या पाटिल?"
चौकने की बारी सूरज की थी।
"तुम उसे जानती हो।,उठ खड़ा हुआ वो।
उसने हाथ के इशारे से सूरज को बैठने को कहा।
"मुझसे क्या चाहते हो?"संजीदा हो गई थी अब वो।
"मुझे पता करना है वो लोग सोनम को कहाँ रखे है ।"सूरज ने काफी का घूंट भरा।
"मुझे पता है।"सिल्विया बोली।"लेकिन निकालना आसान नहीं होगा।"
"वो मुझपर छोड़ दो।"सूरज ने लापरवाही से कहा।
"तो ढूंढ भी खुद ही लो।"कहते हुए उसने दरवाजे की तरफ इशारा किया।
सुरज कुछ देर बैठा रह,फिर बाहर चल दिया।
कहाँ थी आखिर सोनम और आखिर कब मिलेंगे सूरज और सोनू
सूरज और सोनू (भाग 4)

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