Saturday, 17 September 2016



COP प्रस्तुत करते हैं


राजनगर
ध्रुव के घर पर सभी ब्रह्माण्ड रक्षक मौजूद हैं, पर कोई भी एक दूसरे से बात करना नहीं चाह रहा था।सभी इधर उधर बैठे थे।
नागराज महानगर में ही रुक गया था।
"इतनी बेइज्जती पहले कभी महसूस नहीं की।"डोगा ने सन्नाटे को भंग किया।
"मेरी तो रोज होती है।"कहते हुए परमाणु किचन से बाहर निकला।साथ में रजनी देवी थीं।
सबकी नजरें उसकी तरफ उठ गई।वो रजनी देवी से बात कर रहा था।
सब वापस अपनी जगह टिक गए।
"क्या हुआ,सबके चेहरे क्यों उतरे हैं?"परमाणु उनके सामने सोफे पर ढेर हुआ।रजनी देवी श्वेता के कमरे में चल दीं।
कोई कुछ नहीं बोला।
"कम ओन गाइस।हमने रिवील को हरा दिया और महानगर वासियो को भी बचा लिया।अब तो खुश हो जाओ।" परमाणु के चेहरे पर संतुष्टी नजर आ रही थी।
"खीर खा ली सारी या हमारे लिये भी छोड़ी है।"तिरंगा ने उसके मुँह की तरफ इशारा किया।
"है न यार,खैर मै बोल रहा था कि ध्रुव बताओ तो सही कि श्वेता जैसी दिखने वाली उस लड़की ने तुम्हे उस हालत तक पहुँचाया कैसे?"परमाणु बोला।
ध्रुव, जो अबतक चुप ही था,बोला "मुझे लगा कि वो श्वेता ही है।जब मैने उसे होटल Hilton America's से निकलते देखा, तो मैने उसे रोकने की कोशिश की,पर वो नहीं रुकी।मैने टेक्सी ली और उसका पीछा किया।जब मैने उसे रोका, तो वो मुझे देखकर साफ़ कंफ्यूज लगी।मै समझ तो गया कि ये कोई और हो सकती है।या शायद कातिल ही हो,पर मैने उसके करीब जाने की कोशिश की,तो वो भाग खड़ी हुई।
भागते हुए वो बीच के करीब पहुँची और एक टूरिस्ट बोट पर चढ़ गई।मैने कोशिश की बोट पकड़ने की पर वो निकल चुकी थी।लेकिन मै पानी में सांस ले सकता हूँ, इसलिए मेंने तैरकर उसतक पहुँचने की योजना बनाई।डॉल्फ़िन मित्रों की मदद से मै जल्द ही उसके करीब पंहुचा।पर अचानक शार्क्स ने हमपर हमला कर दिया।जो कि आश्चर्यजनक था।
खैर,मै जैसे ही बोट पर पहुँचा।बोट खाली नजर आई।
एक हाथ मेरे दिल पर जमा महसूस हुआ।मैने एक आवाज सुनी,जो मेरी समझ में नहीं आई।
"Non si deve seguire me. Ora morto"
(तुम्हे मेरा पीछा नहीं करना चाहिये था,अब मरो।)
मेरा दिमाग अंधेरे में खोने लगा।जब मुझे होश आया,तो मैने खुद को बाबा गोरखनाथ और नागराज के साथ पाया।"
"ओह्ह"ध्रुव चुप हुआ तो परमाणु बोला।"वो इतनी खतरनाक थी,फिर भी चुपचाप चली गई।कैसे?"
"वो नहीं गई,उसे मजबूर किया गया।"दरवाजे पर खड़ा नागराज बोला।
"किसने?"ध्रुव बोला।सभी की नजर उसकी तरफ उठ गई।
"एडा ने।"कहते हुए वो अंदर दाखिल हुआ।"मेरे ख्याल में दोनों ही एक दूसरे को काफी वक़्त से जानते हैं, दोनों की काफी गहरी दुश्मनी है।एडा ने उसे मेंटली परेशान किया।उसके पिता को लेकर, जिसके कारण वो लौट गई।"
एडा का नाम लेने की देर थी कि उसने दरवाजे से आवाज दी।"may I come in?"
सबकी नजरें उसकी तरफ घुमी और पलकों ने झपकना ही छोड़ दिया।
"ओह्ह,माय गॉड."परमाणु बड़बड़ाया।
"हां,आइये।"रजनी देवी अब तक पहुँच चुकी थीं।
"मेरा नाम "एडा रॉश"है।"वो अंदर आई।"मै सीआईए से हूँ।आपकी बेटी श्वेता की हालत की जिम्मेदार भी मै ही हूँ।ये गलती मुझसे ही हुई है।"
सभी हतप्रभ से उसे देखने लगे।एडा के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे।जबकि रजनी देवी के चेहरे पर गुस्सा नजर आ रहा था।
"मुझे पता है कि आपको कितना गुस्सा आ रहा होगा!"एडा ने आगे कहा।"बल्कि मुझे भी आता,अगर आपकी जगह मै होती।हां,बस फर्क ये होता कि आपने कुछ नहीं किया और मैने उसे तोड़कर रख दिया होता।खैर,श्वेता के साथ जो हुआ,उसके लिये मै शर्मिंदा हूँ।जब तक वो ठीक नहीं हो जाती,उसका सारा खर्च मेरी कंपनी उठाएगी।"
एडा चल दी।एकाएक ही पलटी।
"और हां,वो जिस कंपनी में काम करने के लिये अमेरिका जाने वाली थी,वो मेरी हो कम्पनी है।वो जब चाहे तब ज्वाइन कर सकती है।"वो वापस चल दी।
उसकी नजर ब्रह्माण्ड रक्षकों पर पड़ी,जो उसे ही देख रहे थे।एकाएक वो ठिठकी।
नजरें चंडिका पर थीं।
एडा आगे बढ़ी,चंडिका पीछे हटी।
आखिर वो चंडिका के सामने खड़ी थी।एक झटके से उसने चंडिका का मास्क खिंचा और सामने थी।
"निशा"
सारे ब्रह्माण्ड रक्षक देखते ही रह गए।
"तुम चंडिका हो?"ध्रुव आश्चर्य में डूबा बोला।
"क्या?"निशा बोली।"तुम्हे किसने कहा?तुम्हे लगता है, मै अमेरिका से आती हूँ, तुम्हारी मदद करने?ये ड्रेस तो मुझे यहीं मिली।एडा ने मना किया था यहाँ आने को,इसलिए छुपने के लिये इसे पहना।"
"और अब इसे उतारो।यहीं पर।"एडा ने जैसे फैसला सुनाया।
"यहीं?"निशा ने प्रश्नसूचक नेत्रों से उसकी तरफ देखा।
एडा ने हाथ फैलाकर एक कमरे की तरफ इशारा कर दिया।
निशा कमरे की तरफ चल दी और एडा बाहर को मुड़ी।एकाएक ही ठिठकी।
"डोगा?हह्"वो डोगा की तरफ बढ़ी।"मुम्बई का बाप।मर्द।हह"अपनी कनपटी पर हाथ रखकर बोली।"किसी दिन इस चोट का बदला जरूर लूंगी।बचना मुझसे।"
एडा बाहर चल दी।साथ ही सबकी नजर डोगा पर जम गई।
सभी ब्रह्माण्ड रक्षकों को विदा किया जा रहा था।हालांकि वो रुकना चाहते थे।क्योंकि महानगर की शक्लोसूरत बदल चुकी थी और उसे वापस ठीक होने वो मदद करना चाहते थे।पर नागराज ध्रुव ने उन्हें ये कहते हुए विदा किया कि राजनगर और महानगर पर आने वाले हमले के लिये नागराज,ध्रुव और स्टील ही काफी है, पर तुम्हे अब अपने शहरों की रक्षा पर ध्यान देना है।
वक़्त बीत रहा था।
महानगर
वेदाचार्य के सामने मौजूद था नागराज।
वेदाचार्य के हाथों में मौजूद था वो कागज का टुकड़ा,जो उस किताब से निकल गया था,जब एक विशाल सर्प उसे मुँह में दबाकर ले भागा था।
"मैं नहीं जानता कि इसे लिखने वाला है कौन, पर मुझे लगता है कि इस मामले में फिलहाल सिर्फ गोरखनाथ ही मदद कर सकते हैं।"वेदाचार्य ने कागज नागराज की तरफ बढ़ाया।
"मैं खुद भी सिर्फ यही पढ़ पा रहा हूँ कि इसका शीर्षक "विषनगरी"है, पर कौन सी और है कहाँ ये?"नागराज के चेहरे पर चिंता की लकीरें छाने लगी थी।"और ध्रुव की जिंदगी से उसका क्या कनेक्शन।"वो बड़बड़ा उठा।
"जवाब हैं,बाबा गोरखनाथ।"वेदाचार्य ने नागराज के कंधे पर हाथ रखा।
दिल्ली
विनय अपने घर पहुंचा ही था कि तेज आती बदबू उसे घेरती चली गई।
चारों तरफ दीवारों और शीशों को खरोंचने के निशान बने हुए थे।वो लपककर अपने कमरे में पहुंचा, जहाँ खिड़की खुली देखकर उसे किसी अनहोनी का अंदेशा होने लगा।
सामने डेस्क पर रखा एक खत हवा के चलते फड़फड़ा रहा था।उसने खत उठाया।
"प्रिय विनय,
रोमा हियर,
मुझे पता है तुम शीना से कितना प्यार करते हो।उससे कही ज्यादा मै तुमसे करती हूँ।मेरे इस तरह लौट आने पर तुम्हे आश्चर्य तो हो रहा होगा,पर प्यार को रोक सकने की हिम्मत तो प्रकृति में भी नहीं।
मैने वापस आकर साबित किया कि मै तुमसे सच्चा प्यार करती हूँ।अब तुम्हारी बारी है।अगर तुम भी शीना से सच्चा प्यार करते हो,तो मुझसे मिलने जरूर आओगे।डरना मत,मै उसे कुछ नहीं करुँगी।
तुम्हारी
रोमा
खत वापस रख विनय बाहर को चल दिया।
(परमाणु से अगली मुलाकात होगी "हायना"में)
दिल्ली
भारत अब अपने ऑफिस पहुँच चूका था।एक उड़ती हुई नजर उसने सामने रखे अखबार पर डाली।उसे थामा।उसके पन्ने पलटे।वापस रख दिया।
वो अपनी चेयर पर टिका ही था,कि अचानक वापस बैठ गया।उसने वापस अखबार उठाया और पेज 2 ओपन किया।
"मानसी?"उसके मुँह से निकला।
(मानसी,जो विषनखा है।)
तेजी से पूरी खबर को पढता चला गया वो।
"ओह्ह्ह,मानसी।ये किस चक्रव्यूह में फंस गई तुम।"
(तिरंगा से आपकी अगली मुलाकात होगी "द किलर्स"में)
मुम्बई
सूरज लौट रहा था कि रास्ते में ही इंतजार करती मोनिका नजर आ गई।उसने गाड़ी रोकी।
"यहाँ क्या कर रही हो?"वो उसे डपटता बोला।"मै घर ही तो आ रहा था न।"
"कोई ऐसी बात है, जो मै नहीं चाहती कि मेरे सिवाय तुम्हे कोई और बताये।"मोनिका तो ख़ुशी से चहक रही थी।जिसे देखकर सूरज भी खुश हो गया।
"अरे बताओ भी।"सूरज भी हंसने लगा था अब।
"बात ये है कि.."मोनिका ने बेहद धीरे बोलना शुरू किया।"3 सप्ताह में हमारी शादी है।"आखिरी शब्द उसने चिल्ला कर कहे थे।साथ ही वो सूरज से लिपट गई।
"आई लव यू सूरज।आई रियली लव यू।"मोनिका के शब्द गूंज रहे थे।
(डोगा से आपकी अगली मुलाकात होगी"सूरज और सोनू"में)
असम
भेड़िया भी लौट आया था,साथ ही लौट आया था जंगल का कानून।अगर कोई नहीं था,तो वो थी जेन।
आज हर जगह नजर आ रही थी उसे जेन।
उसका ख्याल रखने वाली।वो तो उसे बेहद प्यार करती थी न।तो उसे छोड़कर कैसे जा सकती है।
"जेन"वो हलक फाड़कर चिल्लाया।पुरे जंगल में भेड़िया की आवाज गूंज गई।
सच्चे प्यार की आवाज कौन नहीं सुनता।
दूर तक सुनी गई ये आवाज।
लेकिन क्या जेन ने भी सुनी ये आवाज।क्या सच में वापस आएगी जेन।या फिर होगी "सुकन्या की वापसी"
(भेड़िया से अगली मुलाकात होगी "सुकन्या की वापसी"में)
स्वर्णनगरी
भेडिया का रुदन यहाँ तक सुनाई दिया था।
"ये क्या था?"नागराज उस आवाज को सुनता बोला।
"ये भेड़िये का रुदन है, जो प्रेम ऋतु के लौटने का संकेत है।"बाबा गौरखनाथ बोले।"खैर,ये पन्ना किसी खास शास्त्र से सम्बन्ध रखता है, जो इस दुनिया में मौजूद नहीं है।"पन्ने को गौर से देख रहे थे गौरखनाथ।"परन्तु ये बेहद खास है।ध्रुव का सम्बन्ध इससे क्या है, ये हमें तभी पता चल सकता है, जब वो किताब हमें मिल सके।'
कुछ देर सोचने के बाद वो पुनः बोले।"एक विषनगरी है, जिसे मै जानता हूँ।वो बादलों के बीच और स्वर्ग के रास्ते में छिपी एक दुनिया है।जहाँ देवपुत्र रहा करते है।लेकिन वहां तक पहुँचने के लिये तुम्हे किसी की आज्ञा लेनी होगी।"
"किसकी?"नागराज बोला।
"महर्षि देव।"गौरखनाथ उठ खड़े हुए।"वो और मै एक ही गुरु के शिष्य हुआ करते थे।युवा होने पर मुझे स्वर्णनगरी की रक्षा का भार मिला और उन्हें मिला "स्वर्णक्षेत्र"।विषनगरी उसी का हिस्सा है।"
नागराज उठ खड़ा हुआ।"अब वो जगह स्वर्ग के रास्ते में हो या नर्क के।ध्रुव के लिये मै कही भी जाऊंगा।"
(नागराज से अगली मुलाकात होगी "महर्षि देव"में)
राजनगर
गुप्त लैब
रोबो शॉक्ड था,साथ ही नताशा भी।
ध्रुव निकला भी,तो वापस क्यों नहीं लौटा।
"ध्रुव,कहाँ गया मेरा ध्रुव।पापा, कहाँ है ध्रुव?"नताशा का पागलपन अब चरम पर था।वो अब बुरी तरह रोने लगी थी।
"कहीं नहीं गया है।बात सुनो मेरी।"रोबो उसे संभालने की कोशिश कर रहा था,पर वो सम्भलने का नाम नहीं ले रही थी।
"वो तुम्हारा ध्रुव नहीं था,न वो जो मारा गया था अमेरिका में।"
नताशा को उसकी बात पर यकीन न हुआ।ये इंसान तो हर दिन एक नया ध्रुव बना रहा है।
"आओ मेरे साथ।"रोबो नताशा को पकड़कर ले चला।
"ये देखो।"उसने नीचे की तरफ इशारा किया।
नताशा ने नीचे देखा।
"ओह माय गॉड"सामने 7000 ध्रुव खड़े थे।
(नताशा और रोबो से अगली मुलाकात होगी "ब्रह्माण्ड भक्षक"में)
सच ही तो था।कहाँ गया था दूसरा ध्रुव?और कैसे?
क्या रोबो की चिप नाकाम हो गई थी।और हां,तो कैसे?
जवाब था "प्यार"
और वो थी "धरा"
(धरा से आपकी मुलाकात होगी "स्वर्णक्षेत्र"में)
रूपनगर
आज फिर प्रिंस एंथोनी को जगाने में लगा था।
ध्रुव वही से गुजर रहा था,क्योंकि उसे तो किसीभी हालत में पहुंचना ही था"क्षितिजनगर"।
"धरा"आखिर उसके प्यार की सिमा आ ही गई।
पुरे जंगल में वन्य प्राणियों की आवाजें गूंज उठी।
साथ ही बढ़ गई कुछ पिशाचों की हलचलें।तो क्या ध्रुव बनने जा रहा था शिकार।या फिर
(ध्रुव और एंथोनी से अगली मुलाकात "The vampire love"में)
Brooklyn
एडा अपने ऑफिस की टेबल पर ही टीकी हुई थी,जब तक्षिका ने अंदर कदम रखा।एडा के हाथ में एक फ्रेम था,जो तक्षिका के अंदर आते ही उसने छिपा लिया।
"कॉन्गो,"आते ही तक्षिका चहकी।"तो रिवील को मार भगाया।"
"तुम्हे किसने कहा?"एडा के चेहरे पर कोई भाव नहीं था।
"मैने सुना,कि तुमने रहम किया उसपर और उसे उसके पिता का पता भी बता दिया।"उसके बगल में आ खड़ी हुई वो।
"फिर पता बताया तो एक बेटी अपने पिता से अलग न हो,इसलिए उसे छोड़ भी दिया।"
"वो आदमी मेरे माँ बाप का हत्यारा है।समझी?"एडा वहां से आगे चल दी।
"तो तुमने रिवील को उसका पता क्यों बता दिया?"तक्षिका की समझ में नहीं आया।
"क्योंकि"एडा वापस पलटी।"मेरी तैयारी में काफी खामियां थीं।ये बात उससे भिड़ने के बाद मुझे पता चली।उसके 1 नहीं करोड़ों रूप हैं।और वो किसीभी रूप में मुझ तक और मेरे परिचितों तक पहुँच जाती।उसे बिजी रखना था।और उस वक़्त मेरे दिमाग में यही ख्याल आया।"
"ओह्ह्ह"तक्षिका ने ठंडी सांस छोड़ी।
"और जब मै ब्रह्माण्ड रक्षकों से लड़ रही थी,तब उसने किसी परावैज्ञानिक शक्ति से मेरे दिल पर वार किया था,जिसके कारण मेरा दिल अंदर ही अंदर सिकुड़ने लगा था।ये बात मुझे बाद में पता चली,जब मै उससे लड़ने निकल चुकी थी।खैर।छोडो वो किस्सा।अब अगला सामना हुआ तो मेरे भी हजारों रूप उसके सामने होंगे।"
(एडा से अगली मुलाकात होगी "सूरज और सोनू"में)
The poison
"समझ नहीं आ रहा तुम्हे बधाई दूँ या तुम्हारा गला दबा दूँ।"मैथिली काफी गुस्से में बोली।
"ये मेरे एक बेवकूफ सर्प के कारण हो गया।सोर्री"देविका के लफ्ज थे ये।"मै उसे दोबारा कोई काम नहीं दूंगी।"
"और मै तुम्हे।"मैथिली बोली।"अगर नागराज नाम का वो नागमानव विषनगरी पहुँच गया,तो वो तो मरेगा ही।हम भी और पृथ्वी के अस्तित्व पर भी संकट आ जायेगा।"
देविका चुपचाप सुनती रही।
"अब उसपर नजर रखो।अगर कुछ भी अनिष्ट की सम्भावना लगे,तो मुझे.बताना।"
देविका बाहर निकल गई।
(नागराज और नागिनों का टकराव"महर्षि देव"में)
Verona, Italy
अपने पिता के पास बैठी थी रेवेल,जब अचानक ही उसकी तन्द्रा टूटी।न जाने कितनी ही देर वो इस बारे में सोचती रही कि एडा ने उसके पिता के बारे में उसे क्यों बताया।
जवाब एडा के पास था।
अभी वो कुछ भी न करने के लिये मजबूर थी,क्योंकि उसके पिता की जान अभी एडा के हाथ में थी।
"डोंट वरी डैड।आप जल्दी ठीक होने वाले हैं, क्योंकि अब विज्ञान नहीं।पराविज्ञान आपके साथ है।"उसके आँखों की चमक कुछ और ही इशारा कर रही थीं।
"इन नागिनों ने मुझसे बेकार ही भिड़ंत मोल ली है।मेरी किताब छीनकर।अब इनके भी दिन पुरे हुए।और जहा आप ठीक हुए,उसी दिन एडा के दिन भी खत्म होंगे।"
(रिवील से अगली मुलाकात "महर्षि देव"के आखिरी भाग "नागप्रतिज्ञा"में)

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