Sunday, 14 August 2016

COP प्रस्तुत करते हैं

अभिशप्त योद्धा

लेखक - निशांत मौर्य

अध्याय - 5


RBI राजनगर :

बैंक के सभी कर्मचारी और ग्राहक समर्पण की मुद्रा में अपने घुटनों के बल बैठें थे और अपने हाथों को सिर पर रखे हुए थे ।
" अगर कोई एक भी अपनी जगह से इंच भर भी हिला तो यहां से सभी की लाश बाहर जाएगी ",  एक नकाबपोश जो देखने से लुटेरों का 'लीडर' लग रहा था ने सभी को धमकाया।
पर बैंक मैनेजर की अपने बैंक को लुटने देने की इच्छा नही थी। मैनेजर ने टेलीफोन का रिसीवर उठाकर लीडर के सिर पर मारने की कोशिश की पर उसकी ये छोटी सी कोशिश नाकाफी थी।
एक गोली ने दूर से ही उसके हाथ में रिसीवर के चीथड़े उड़ा दिए,  कैश काउंटर के बगल में खड़े लुटेरे ने वो गोली चलाई थी।
सारे लुटेरे सधे हुए निशानेबाज थे।
लीडर बैंक मैनेजर की ओर मुड़ा और रिवॉल्वर उसकी कनपटी पर तान दी।
" मैंने कहा कि कोई भी ज्यादा समझदार नहीं बनेगा पर तूने बात नहीं मानी अब अपने परिवार को अनाथ करने का जिम्मेदार तू खुद होगा।"
अगले ही पल लीडर के मुंह पर एक जोरदार किक पड़ी,  और उसे दिन में तारें नजर आने लगे।
" क्यों,  लोगों को अनाथ करने का ठेका ले रखा है तूने?  तू कभी नहीं समझ सकता कि अनाथ होने का दर्द आखिर होता क्या है। "
गैंग लीडर ने सिर उठाकर ऊपर देखा तो मानो कोई भूत देख लिया हो पीली नीली पोशाक में एक लड़का खड़ा था।
अनायास ही उसके मुँह से निकल गया
" सुपर कमांडो ध्रुव.... तु... तुम?  "
"  हां मैं, मैंने इस दुनिया से अपराध खत्म करने की कसम खाई है और जब तक तेरे जैसा एक भी अपराधी मौजूद है मैं कहीं नहीं जाने वाला। "
 " शूट हिम टू किल "
ये सुनते ही लुटेरों ने ध्रुव पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी। पर भला गोलियां ध्रुव का कभी कुछ बिगाड़ पाई है?
2 मिनट के अंदर सभी लुटेरे जमीन पर पड़े कराह रहे थे।

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असम -
"  बाबा शायद बाहर जंगल पर कोई विपत्ति आई है....
हमें देखना चाहिए ", ध्रुव के स्वर में चिंतित था।
 "हां पुत्र ध्रुव जंगल में मैं पाप तरंगों का अनुभव कर सकता हूं। तुम दोनों की नई शक्तियों को आजमाने का समय आ चुका है "
 इतना बोलकर योगी ध्रुव और ऋचा को लेकर अदृश्य हो गए।
उधर भेड़िया सभी नरपिशाचों से अकेला जूझ रहा था।परन्तु उनकी संख्या टिड्डियों के दल की तरह बढ रही थी। पिशाचों ने भेड़िया को चारो तरफ से घेर लिया था।
और चारो ओर से लगातार वार कर रहे थे। एक नरपिशाच के वार से भेड़िया की कमर पट्टिका और कंठहार खुल कर जमीन पर गिर गए और उसका शरीर लहुलुहान होने लगा। कमर पट्टिका खुलने के कारण अब उसके घाव अपने आप नहीं भर रहे थे। अब भेड़िया निशस्त्र था और उस पर मूर्छा हावी हो रही थी।
 निशस्त्र होने के बाद भी भेड़िया के पास उसकी सबसे बड़ी ताकत उसके नाखून और दांत उसके पास थे। घायल और निशस्त्र भेड़िया नरपिशाचों को अपने नाखूनों से फाड़ना शुरू कर दिया।
 परंतु योद्धा कितना भी शक्तिशाली और जांबाज हो अगर दुश्मनों की तादाद बहुत ज्यादा हो तो दुश्मन उस पर हावी हो जाते हैं। नरपिशाच भी भेड़िया पर हावी हो रहे थे।
भेड़िया जिस जंगल के लिए आज तक लड़ता आया था उसकी मृत्यु के बाद वो जंगल शायद तबाह हो जाना था।

  इधर जंगल खतरे में था और उधर शायद शहर पर आने वाले सभी खतरें समाप्त हो गए थे क्योंकि राजनगर का हीरो लौट आया था....
उनका ध्रुव लौट आया था....
क्या सच में?

राजनगर :

गुंडों को पीटने के बाद ध्रुव अपने पीछे देखा जहां उसे  चंडिका दिखाई दी, स्तब्ध मुद्रा में खड़ी हुई,  कुछ भी बोलने में असमर्थ।
" वाह क्या परफेक्ट एंट्री मारी एकदम फिल्मी पुलिस की तरह काम निपटने के तुरंत बाद "

ध्रुव की आवाज सुनकर चंडिका को होश आया।
एक पल के लिए वो भूल गयी कि वो चंडिका है और अपने भाई को गले लगाने के लिए 2 कदम आगे गयी पर तुरंत ही उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।
चंडिका ने आखिरअपनी भावनाओं को काबू की और ध्रुव से पूंछा
"कहाँ गायब थे तुम इतने दिनों तक? "

" मैं कहाँ गायब हुआ था ये तो नहीं बता सकता पर अब मैं आ गया हूँ और मेरे रहते राजनगर की ओर कोई आंख उठाकर भी नहीं देख सकता "
इतना बोलकर ध्रुव अपनी बाइक स्टार्ट करके वहां से चला जाता है और चंडिका सोच में पड़ जाती है कि आखिर ध्रुव का व्यवहार इतना बदला हुआ क्यों है?
तभी चंडिका का ट्रांसमीटर बीप करने लगा।
"  हैलो चंडिका करीम हियरस्!  हमें ध्रुव से रिलेटेड कुछ इंपोर्टेंट क्लूस् मिले है"
आई होप की तुम उन्हें जरूर चैक करना चाहोगी..."
दूसरी तरफ से आवाज आई।
(अगर ध्रुव भैया वापस आ गया है तो आई डोंट नीड तो चेक थे क्लूज)
चंडिका असमंजस में पड़ गयी।

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असम :

भेड़िया मूर्छावस्था के अत्यंत निकट था।
 तभी एक आंखें चौंधिया देने वाला प्रकाश प्रकट हुआ और उसमें से तीन आकृतियाँ बाहर आई जो योगी बाबा ध्रुव और ऋचा की थीं।
ध्रुव को देखकर भेड़िया को एक सुखद आश्चर्य हुआ जो उसके शरीर में एक नई जान लाने के लिए काफी था। वनरक्षक एक बार फिर उठ खड़ा हुआ।
चारों मिलकर नरपिशाचों से युद्ध करने लगे और अब पलड़ा दोनों ओर से बराबर था।

तांत्रिक की गुफा :

" हाहाहाहा 21 नरबलियां देकर मैंने हासिल कर ली है रात्रि के सभी जीवों को अपने वश में करने की ताकत एक अंतिम बलि ध्रुव की शेष है उसके बाद ये संसार मेरे कदमों तले होगा"
 "ध्रुव चाहे कहीं भी छुपा बैठा हो मेरे भेजे नरपिशाच उसे जंगल के किसी भी कोने से भी ढूंढ कर निकाल लेंगे।"

"  ध्रुव को तूने क्या गाजर समझ रखा है जो तू जब चाहे काट देगा "

"  प्रणाम शैतान देव काल भैरव"
आपका अनायास आगमन कैसे हुआ?  "
"तेरी आंखें खोलने आया हूँ मैं।"
"तुझे बताने की वो कोई साधारण व्यक्ति नहीं है उसके पास ब्रह्मांड का सबसे तेज दिमाग है और अब तो कई मानसिक शक्तियों का स्वामी है"
" शैतान देव मैंने ध्रुव की बलि के लिए सबसे खतरनाक नरपिशाचों को भेजा है....
ध्रुव अब जीवित नहीं बच सकेगा "
"  तू अपनी सफलता के प्रति इतना आश्वस्त है क्योंकि तू नहीं जानता कि ध्रुव है कौन?"
अरे मूर्ख जिसे देवता भी नहीं हरा सके उसे तू इतनी आसानी से हरा देगा?  "

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कमांडो फोर्स हेडक्वार्टर राजनगर :

  " ये इमेजिस् हमें सेटेलाइट से मिली हैं ज्यादा क्लियर नही हैं पर इनमें साफ देखा जा सकता है कि कैप्टन की लड़ाई इस पहाड़ जैसे बंदे से हुई और हमेशा की तरह कैप्टन ने उसे हरा दिया"
करीम चंडिका को तस्वीरें दिखा रहा था।

" कुछ देर बाद वहां।सफेद कपड़ों में कुछ योगी आते हैं कैप्टन उनसे कुछ बात करता है और फिर सभी गायब हो गए।"
"हम जहाँ से शुरू हुए थे वहीँ पहुंच गए।", चंडिका कुछ सोचते हुए बोली।
"सिर्फ इतना पता चला कि कैप्टन किसी महात्मा टाइप व्यक्तियों के साथ है लेकिन कहां है इसका कोई आईडिया नहीं है|"

"  क्या..... तुम्हें नहीं पता कि ध्रुव वापस लौट आया है " चंडिका ने आश्चर्य से कहा।

"  कैप्टेन लौट आया है? ये कब हुआ आई मीन.....
ओह मुझे लगता है सेटेलाइट हैकिंग में इतना ज्यादा बिजी हो गए कि हमें होश ही नहीं था कि क्या रहा है आसपास"
मैं अभी टीवी अॉन करता हूँ "
इतना बोलकर करीम ने टीवी चालू की।

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असम :

भेड़िया ध्रुव ऋचा और योगी नरपिशाचों से जूझ रहे थे परंतु रात्रि की वजह से इन निशाचरों की ताकत बहुत बढ गई थी।
" ये तो खत्म ही नहीं हो रहे हैं जितने मारो उससे ज्यादा पैदा हो रहे हैं और हमारे मानसिक वार ज्यादा असर नहीं कर पा रहे हैं ", ध्रुव ने कहा।
भेड़िया जिसने फिर से अपने आभूषण पहन लिए थे उसकी गदा भी ज्यादा कुछ नहीं बिगाड़ पा रही थी नरपिशाचों का।
"  ये तो जोंक की तरह चिपक जाते हैं कोई तो तरीका होगा इन्हें पूरी तरह खत्म करने का? " ऋचा ने चिढ़कर बोली।
" लगता है तुम इन्हें काफी पसन्द आई हो तभी तमसे चिपक रहे हैं, वैसे मुझे नहीं पता था कि तुम किसी से लड़ भी सकती हो।"
"व्हाट डू यू मीन? तुम मुझे अबला समझते हो मि. ध्रुव मैं कोई अबला नारी नहीं हूँ ",  रिचा ध्रुव पर गुस्सा करने लगी।
उसकी जरा सी लापरवाही का गहरा नुक्सान हुआ
एक पिशाच के वार उस पर हुआ और रिचा जख्मी होकर गयी।

अध्याय 5 समाप्त

To be continued.....

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