Friday, 19 August 2016


जाति-इक्षाधारी  नागिन
पिता -मणिराज
माँ - (विषप्रिया) नगीना
भाई - विषप्रिय   ,,विषांक
  कार्यक्षेत्र   -नागमणि द्वीप
उद्देश्य -  नागजाति व नागद्वीप की भलाई व रक्षण।


  विसर्पी जैसे अतिसुन्दर  व मनमोहक  नागिन की रचना तरुण कुमार वाही जी ने की थी ।विसर्पी  नागराज की कॉमिक्स " प्रलयंकारी मणि" से पर्दापण की थी ।।

शक्तियां और युद्ध कौशल -

विसर्पी इक्षाधारी नागिन  है जिससे वह कोई भी रूप धारण कर सकती है व इक्षाधारी सर्पो की गुण रखती है ।।नागदंड की धारक होने के कारन विश्व के सभी नाग विसर्पी की आज्ञा मानने में बाध्य है ।।
विसर्पी  कुछ वर्षो तक मुम्बई में पढ़ी है और उसी वक़्त  आधुनिक बोलचाल ,रेहन सहन और युद्ध कला से भी वाकिफ है।।
   

संशिप्त कहानी

 नागद्वीप इक्षाधारी नागो का एक द्वीप है  जिसे महात्मा कालदूत ने बसाया था ,,कालदूत ने एक योग्य नाग मणिराज को नागद्वीप का कार्यभार सौंप।।मणिराज की शादी नगीना के दूसरे रूप विषप्रिया से हुई जिससे विषप्रिय और विसर्पी का जनम हुआ ।।दोनों की जनम के बाद विषप्रिया नागद्वीप छोड़कर चली गयी ।वासुकि  वन्स में जन्मी विसर्पी का पालन पोसन एक योद्धा की तरह ही हुआ था।बचपन से ही विविध शास्त्रो को चलने में पारंगत हो चुकी थी।नागद्वीप की कुछ वर्षो पश्चात नागद्वीप में बाहरी मनुसयो के आने के कारन व कुलदेवी की मणि चोरी करते हुए लुटेरे मणिराज की हत्या कर देते है और नागद्वीप को छोर का भाग जाते है ।।मणिराज की मृत्यु का बदला लेने को विषप्रिय शेहर जाता है मगर वह वहां मारा जाता है ।नागराज वह मणि प्राप्त कर लेता है और मणि को नागद्वीप पंहुचा देता है ।।तभी विसर्पी और नागराज की पहली मुलाकात होती है और साथ ही मित्रता भी{प्रलयंकारी मणि,शंकर शहंशाह) ।।नागराज  विसर्पी को आधुनिक समाज में घुलने मिलने व ज्ञान प्राप्त करने के लिए बम्बई लाता है ।।बम्बई में विसर्पी आधुनिक ज्ञान व बोलचाल सीखती है ।(नागराज और बुगाकु) नागराज से धीरे धीरे मिलने व उसके प्रबल वीरता व आकर्षण से विसर्पी मन ही मन नागराज को चाहने लगती है ।जब विसर्पी का स्वम्बर की घोषना होती है तो कोई भी नागयोद्धा  नागराज जितना शक्तिशाली  व विसर्पी के पति बनने के काबिल नहीं होता। नागराज स्वयम्वर जीत जाता है  पर लंगारा जाति के सांपो के विद्रोह के कारण व नागद्वीप में सदा न रहने की विवशता के कारन नागराज नागद्वीप छोर देता है ।(विसर्पी की शादी,शकूरा का चक्रव्युह)। जिस वजह से विसर्पी नागराज से रूठ जाती है मगर विसर्पी और नागराज का प्रेम यहाँ  खत्म नहीं होता। समय आगे बढ़ता है और विषाला के नागद्वीप से आतंक का सफाया करने के बाद से  नागराज  नागद्वीप में पुनः आना जाना प्रारम्भ कर देता है (प्रलय)।।समय गुजरता है और विसर्पी का प्यार भी ,,और जव वह प्रेम बढ़ जाता है तो विसर्पी अपना राज पाट छोड़कर नागराज के पास जाना चाहती है और शादी के बंधन में बंधना चाहती है ।तब विसर्पी महानगर जाती है नागराज से मिलने तब उसका सामना तक्षक वंश् की  भारती से होता है ।भारती और विसर्पी की यही से एक अटूट रिश्ता बन जाता है जब भारती उसे दीदी कहती है ।इसी वक़्त नागराज के प्रति भारती के प्रेम का पता चलता है तो वह अपने रिश्ते पर  सोचने पर मजबूर हो जाती हैऔर शादी की बात को आगे नहीं बढाती (फन)।फिर से कुछ वर्षो बाद ही नागपाशा और गुरुदेव के षड़यंत्र के कारन नागद्वीप की बागडोर विसर्पी के हांथो से जाने ही वाली होती है तब महात्मा कालदूत नागराज व् विसर्पी को शादी करने को कहते है मगर यहाँ भी शादी नहीं हो पाती ।इसी दौरान नगपाशा  और गुरु देव   मणिराज के भसम और नागपाशा के  कोशिकाओ से शिशु का निर्माण करता है जिसके कारन  विसर्पी को विषांक के रूप में एक भाई भी  मिल जाता है । तब तक वेदाचार्य नागपाशा के कोशिकाओ को तिलिसम के द्वारा नस्ट कर देता है और विषांक पूर्ण रूप से मणिराज का पुत्र बन जाता है ।( त्रिफना सीरीज)
अब विसर्पी का सारा ध्यान अपने भाई के देख रेख पर होता है,,  इसी बिच वह नागराज से भी समय समय पर मिलती है ।
विषांक के थोडा बड़े होने पर जब विषांक का राज्याभिषेक होने की घोषणा होती है तब कालदूत विसर्पी की शादी की घोषणा करते है और विसर्पी की सगाई नागराज से कर देते है । मगर फिर भाग्य के उलटफेर होने की वजह से तीसरी दफा नागराज और विसर्पी की शादी नहीं होती ,,।(शेषनाग)
   कुछ समय बाद कई आयाम के केंद्र बदलने के कारन नागरानी नामक एक इक्षाधारी  नागकन्या दूसरे आयाम से महानगर आती है ।नागरानी का सामना नागराज से होता है ।नागराज से मोहित होकर नागरानी उससे शादी करना चाहती है मगर विसर्पी के हस्तछेप के वजह से शादी संभव नहीं होता ।।परंतु नागरानी के आयाम में विष का संतुलन बनाये रखने के लिए नागराज की जरूरत होती है तब वेदाचार्य नागराज के अंश को नागरानी के गर्भ में स्थापित कर देते है ।।इस कारन विसर्पी नागराज से रुष्ठ हो जाती है और अपनी सगाई तोड़ देती है और वापस नागद्वीप  जाकर राजपाठ संभालती है (फुंकार)।
नागराज के कहानी के 3 भाग होने के वजह से विसर्पी के रोल भी काफी हद तक बदल गया है ।।


Post a Comment: