Thursday, 25 August 2016



मेरी पहली कॉमिक अधूरी थी और ये अधूरापन दिल के कोने में इस कदर बैठ गया, कि जितनी भी कॉमिक्स पढ़ लूँ तृप्ति नही मिलती।" -NISHANT MAURYA

स्थिरता और बचपन ये दोनों एक साथ शायद ही किसी बालक के पास पाए जाते हो। बचपन बच्चो के कल्पनाओं का अक्षय स्त्रोत है और मसतियों की अमूल्य निधि भी। हर पल मन में उठती जिज्ञासा बच्चो को स्थिर नही रहने देती और वास्तव में यही से बच्चे विकास मार्ग में कदम रखते हैं।कुछ जिज्ञासा का हल वो अपने अनुसार निकाल लेते हैं और कुछ जिज्ञासाएं एवं  अनुत्तरित ही रह जाती है।इन जिज्ञासाओं और मस्तियों की वृद्धि करने वाले कई मनोरंजक स्त्रोत भी हैं।विडियो गेम्स,tv ,कार्टून्स,कॉमिक्स आदि  सबसे प्रमुख हैं। जहाँ आज बाल्यकाल की प्रथम पसंद विडियो गेम्स और tv बन चुकी है वहीँ लगभग 15 वर्ष पहले बच्चे और बड़े सभी कॉमिक्स को अपना पहला प्यार कहने में गौरव महसूस करते थे। तकनिकी विकास में जितना आगे जाते जा रहे है वहीँ मानवीय मूल्यों में पीछे भी।कॉमिक्स के सन्दर्भ में एक बात कही जाती है "कि यदि आपने बचपन में कॉमिक्स नही पढ़ी है तो आपके पास अधूरा भारतीय बचपन है।"बातों में सत्यता भी है। एक समय हर शहर में कोमिक्स की कितनी ही सारी दुकानें हुआ करती थी और युवाओं और बच्चो की जनसँख्या का बहुत बड़ा प्रतिशत कॉमिक्स पढ़ा करता था और बच्चे बच्चे की हाथ में सुपरकमांडो ध्रुव ,नागराज और चाचा चौधरी की कॉमिक्स हुआ करती थी। आज इस प्रतिशत में इतनी गिरावट आई है कि जिसने भारतीय कॉमिक्स को हान्शिये पर ला कर खड़ा कर दिया है।
           आज भी जितने कॉमिक्स प्रेमी हैं वो चित्रकथा को एक वरदान की तरह समझते हैं और अपनी इसी निधि पर आज भी उन्हें गर्व है। हर एक के पास कॉमिक्स से जुडी अनगिनत यादें हैं जिन्हें वो न सिर्फ कहना,व्यक्त करना चाहता है अपितु उनका एक संग्रह बनाकर अपनी आत्मकथा  का नाम सर कॉमिक्स ही देना चाहता है।परन्तु फिर यही सोचकर रुक जाते हैं की इस साधारण सी बात में कौन रूचि लेगा।कॉमिक्स से जुडी इतनी बातें हैं की उसको शब्दों की सीमा में समेटना संभव नहीं पर जब हमारे ज्ञात शब्दों की ही सीमा ख़तम  हो जाए तो कोई क्या करे।सभी फैन के कॉमिक्स से जुडी यादो को समेटने का एक लक्ष्य निर्धारित हुआ है जिसमे एक एक फैन से बात की जायेगी और उनकी बात को सबके द्वारा पढ़ी भी जायेगी। संक्षिप्त में कहूं तो ये एक साक्षात्कार होगा। कॉमिक्स कंपनी के आर्टिस्ट,लेखकों,colourist और अन्यों का साक्षात्कार आपने पढ़ा होगा और कई बार मन में कल्पनाएँ भी उठती होंगी की काश हमारा भी साक्षात्कार होता और उसे भी पढ़ा जाता। तो अब आप तैयार हो जाइये अपना साक्षात्कार देने को। आपका ये साक्षात्कार करवाऊंगा मैं ,अभिषेक कुमार,और आपके साक्षात्कार को सभी कॉमिक्स ग्रुप्स,बहुत सारे पेजेज आदि पे पोस्ट की जायेंगी जहाँ बहुत सारे लोग इसे पढ़ पायेंगे। हर साक्षात्कार में बाद उसे एक बहुचर्चित ब्लॉग "कॉमिक्स आवर पैशन" पर पोस्ट किया जाएगा जहाँ यह साक्षात्कार सुरक्षित भी रहेगा और लोग वहां पर पढ़ेंगे भी।

       साक्षात्कार का शुभारम्भ होगा, बहुत चर्चित ब्लॉग "कॉमिक्स आवर पैशन", FB पेज, और COP के  Whatsapp Group के परिकल्पना करने वाले  माननीय निशांत मौर्य जी का।उनके द्वारा बनाये गए इन ग्रुप्स ने न जाने कितने लोगो को जोड़ रखा है जो मिलकर कहानियां लिखते हैं, चित्रकारी करते हैं एवं एक उच्च स्तरीय मंच भी देते हैं।आज के टैलेंट के समेटकर उसे एक सही दिशा में बढ़ाने में भी निशांत जी ने एक सम्मानजनक कार्य किया है इनके लिए सबकी ओर से ये बधाई के पात्र हैं। तो आइये..मिलते हैं निशांत जी से और जानते हैं इनका "कॉमिक्स की यादो से भरा अंतहीन सफ़र"


अभिषेक- "नमस्कार निशांत भैया जी ,आपका स्वागत है"
निशांत मौर्य -  _धन्यवाद छोटे भाई, आपका आभार कि आपने मुझे इस साक्षात्कार के योग्य समझा।

अभिषेक-  'निशांत जी,क्या आप अपने सफ़र पर ले जाने से पूर्व कुछ कहना चाहेंगे?"

 निशांत मौर्य - _मैं सिर्फ इतना कहूँगा कि ये साक्षात्कार एक सच्चे कॉमिक्स प्रेमी के दिल की आवाज है, यदि आप जानना चाहते हैं कि वो कैसे सोचता है तो इसे जरूर पढ़िए_


अभिषेक- "बड़ी अच्छी बात कही आपने। तो चलिए सवाल जवाबों का दौर शुरू करते हैं।
  पहला प्रश्न  -  कॉमिक्स जगत से जितने भी लोग जुड़े हुए हैं,उनसब में हर एक की मजेदार कहानी होती है। प्रथम कॉमिक्स को हर किसी ने एक अलग ढंग से पाया है। आपको इस प्रथम कॉमिक्स की ख़ुशी कब और कैसे मिली..??"

निशांत मौर्य - कॉमिक्स इस शब्द से पहली बार कब रूबरू हुआ मुझे खुद नही याद क्योंकि मैं ऐसे परिवार से हूँ जहां पाठन को ज्ञान का सबसे बड़ा स्त्रोत माना जाता है।  मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे जिले हरदोई के बिलग्राम नामक कस्बे से हूँ और वहां उस समय कोई कॉमिक्स नही उपलब्ध थी पर ये शब्द मैं पहले ही जान चुका था क्योंकि  मैंने लोगों को बातें करते सुना था बच्चों के पढ़ने के लिए जो चीज़ होती है उसे कॉमिक्स कहते हैं। 4 वर्ष के बालक के मन में एक दबी हुई इच्छा जन्म ले चुकी थी कॉमिक्स को जानने की और ये इच्छा तब पूरी हुई जब मुझे हरदोई शहर जाने का मौका मिला जहां मेरे ताऊ जी का परिवार रहता था। जैसा मैंने पहले ही कहा था पाठन हमे विरासत में मिला है पूर्वजों से तो सौरभ भैया ( ताऊ जी के पुत्र) के पास खूब सारी किताबें थीं उनमे से कुछ कॉमिक्स भी थीं। मुझे अभी भी वो क्षण याद है जब मैंने पहली बार वो शीर्षक पढ़ा था "मृत्युबीज", एक अजीब सी सिरहन दौड़ गयी शरीर में पर मैं उसे पढ़ नही पाया क्योंकि हमे लखनऊ जाना था और सिर्फ आधे घण्टे के लिये रुके थे वहां हम।पर वो रंगबिरंगी किताब मेरे दिल में कहीं ठहर गयी थी। कुछ महीने बीत गए फिर मुझे पता चला मेरे एक दोस्त के पास एक कॉमिक है, बस फिर क्या था प्यासे को कुआँ मिल गया मैं झट से वो कॉमिक उठा लाया। वो मेरे जीवन की प्रथम कॉमिक थी  आलराउंडर  मुझे ये बाद में पता चला कि वो किंग कॉमिक्स के सुपरहीरो वक्र की प्रथम कॉमिक थी। कॉमिक तो मैं ले आया पर उसके आखिरी के पन्ने गायब थे इसलिए क्लाइमेक्स ना पढ़ सका। मेरी पहली कॉमिक अधूरी थी और ये अधूरापन दिल के कोने में इस कदर बैठ गया कि जितनी भी कॉमिक्स पढ़ लूँ ये तृप्ति नही मिलती।_

अभिषेक-  "फिर से आज कॉमिक्स से जुड़ाव की एक अलग कहानी मिली निशांत जी।

 दूसरा प्रश्न..

 1st impression is important ये काफी प्रचलित कहावत है। पहली कॉमिक्स में आपको कौन सी चीजें ऐसी लगी जो इतनी अद्भुत थी की अन्य चीजो से ज्यादा अच्छी लगी जिससे कॉमिक्स आपका पैशन बन गयी और ये पैशन आज भी वैसा ही है..अपितु कुछ ज्यादा ही..??"

 निशांत मौर्य  - _मैंने पहले ही बताया कि कॉमिक्स पढ़ने से पहले ही मैं इसके बारे में जान  चुका था। मेरे लिए सबसे खास था कॉमिक्स में भरे हुए वो रंग और वो चित्र। उस समय ब्लैक एंड वाइट टीवी का दौर था पर कॉमिक्स में रंग थे। पहली कॉमिक पढ़कर लगा मानो कोई फ़िल्म देख ली है वो भी रंग बिरंगी। बस यही चीज़े दिल में बैठ गयीं। वो जादू की दुनिया, अजब कारनामे, कल्पना लोक, एक ऐसी दुनिया जिसमे सब कुछ सम्भव था, वो सब भी जो असल दुनिया में हमे कभी नही मिल सकता।जूनून तो छोटा शब्द है कॉमिक्स मेरे लिए नशा बन चुकी है_

अभिषेक -  कॉमिक्स के साथ आपका सफ़र अब तक कैसा रहा है?कौन कौन सी ऐसी बातें हुई हैं जो आप कभी न भूल सकेंगे..? कृपया दुसरे कॉमिक्स प्रेमियों के साथ भी साझा करने की चेष्टा करें


 निशांत मौर्य  - _कॉमिक्स मेरे जीवन का सिर्फ हिस्सा नही रही बल्कि एक प्रेरणास्रोत रही है। मनोरंजन से लेकर शिक्षा हर ख़ुशी मिली मुझे कॉमिक्स से।
 कॉमिक्स का मेरे व्यक्तित्व के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान है। मैं क्या हूँ क्या करता हूँ क्या सोचता हूँ सब पर कॉमिक्स की छाप है।इस सफर का सबसे बड़ा पड़ाव तब मिला जब मैं इंटरनेट से जुड़ा। फेसबुक के द्वारा उन सभी रचनाकारों से बात करना जिनसे मिलने के सपने देखता था मैं। अलग अलग ग्रुप्स में जुड़ा, नए नए दोस्त मिले। ये सब कुछ बिलकुल एक सपने जैसा था जिसे भूलना इस जीवन में तो सम्भव नही।_

अभिषेक-  बचपन एक ऐसी अवस्था होती है जिसमे  बच्चो को सिर्फ चोकलेट बिस्कुट के ही पैसे मिलते हैं। कॉमिक्स के लिए शायद ही कोई पाता होगा। परन्तु कॉमिक्स का जूनून सर चढ़ के इतना बोलता है कि हम कॉमिक्स के लिए सब चीजो को अनदेखा कर पैसे बचाते हैं और कभी तो चोरी भी कर लेते हैं। क्या आपने चोरी की है..??

 निशांत मौर्य  -_हाहाहा चॉकलेट के पैसे तो आजकल के बच्चों को मिलते हैं हमे तो चवन्नी अठन्नी मिलती थी फिर एक रुपया मिलने लगा। मैं उन रुपयों को जोड़ता था फिर उससे कॉमिक्स किराये पर लाता था। कभी कभी पैसे नही होते थे तो मन मारना पड़ता था। गर्मी की छुट्टियों में मैं अलग से पॉकेट मनी कमाने के लिये चिकन की कढ़ाई कर लेता था( मेरी मम्मी लखनऊ से हैं इसलिए उन्हें आती थी और मैंने भी सीख ली क्योंकि मुझे नई नई चीजे सीखने में अच्छा लगता है)। फिर उस पॉकेट मनी से कॉमिक्स लाता था किराये पर। इस समय मेरी उम्र लगभग 10-11 साल थी।
कॉमिक्स चुराई तो नही कभी पर हाँ किराये वाले  के पैसे  नही देता था कभी कभी_

अभिषेक -  "बचपन में बच्चो पर पढ़ाई का दवाब बनाया जाता है ताकी भविष्य में ये आदत बन जाए। इसके लिए गेम्स,कॉमिक्स आदि से परहेज करवाते है अभिभावकगण खासतौर पे कॉमिक्स से। आप पे ये दवाब कितना था पर फिर भी इस दौरान आपने कैसे अपना प्रेम बनाये रख्का.?कभी किताबो के बीच कॉमिक्स पढ़ते हुए पकडे जाने पे पिटाई का सामना करना पड़ा..? 😂😂"

 निशांत मौर्य  - _इस मामले में मुझसे ज्यादा खुशनसीब कोई नही क्योंकि कॉमिक्स को लेकर कभी किसी ने कुछ नही कहा जो भी पिटाई हुई वो मेरी पढ़ाई ना करने की आदत से। मेरे घर में 4 सदस्य है उनमे से 3 (मैं पापा और मेरी छोटी बहन वैशाली) कॉमिक्स पढ़ते हैं। स्कूल में कॉमिक्स कभी नही ले गया क्योंकि डर था कि बच्चे मेरी कॉमिक्स चुरा ना लें।


अभिषेक-  "निशांत जी, बचपन में जब हम कॉमिक्स आदि पढ़ते हैं तो उनके रंगबिरंगे चित्र,हैरतअंगेज भाते कारनामे ,रहस्य रोमांच से भरी कहानियां आदि देखकर हमें भी इन सब कामो को करने का मन होता है परन्तु हम जब करते हैं तो अनुभवहीनता सामने आ जाती है और परन्तु फिर भी उसमे प्रयासरत रहते हैं और सीखजाने की कामना करते हैं। ऐसे कितने विचारों से आप घिरे हुए हैं और उनको सीखने की दिशा में आपने कितना मेहनत किया..?कृपया ये भी बताएं कितने चीजों में आप उस मुकाम पर पहुंचे भी जिसपर की आप संतुष्ट हो सकें..?"

 निशांत मौर्या  - _जिस उम्र से कॉमिक्स पढ़ रहा हूँ उसी उम्र से मुझे आर्ट का भी शौक है। अक्सर मैं अपने विचार पेंसिल के माध्यम से कागज पर उकेरता था पर वो विचार कच्ची मिटटी के बर्तन जैसे होते थे क्षणभंगुर। धीरे धीरे पढ़ाई और व्यस्तता की वजह से चित्रकारी लगभग भूल गया था फिर 10th के बाद एक नया शौक जागा फोटोग्राफी का जिसके लिए मैंने फोटोशॉप सॉफ्टवेयर सीखा। फिर एक दिन पता चला कि फोटोशॉप से कॉमिक्स के चित्रों में रंग भी भर सकते हैं। तभी से रंगाई का काम जारी है। खैर मेरी एक बहुत बुरी समस्या है मैं कभी भी किसी चीज़ से पूरी तरह संतुष्ट नही हो पाता तो इसलिए मैं निरंतर सीखता रहता हूँ। संतुष्टि अभी दूर दूर तक कहीं नही है शायद भविष्य में कभी मिले।_

अभिषेक -  "कहानी लेखन के क्षेत्र में अपने द्वारा कृत कार्यों के बारे में भी बताएं.!!"

 निशांत मौर्य  - कभी कभी कहानी भी लिखता हूँ जब विचार मन की गगरी से छलकने लगते हैं तो उन्हें शब्दों का रूप दे देना बेहतर होता है।यहां पर कहानी लेखन और कहानी चिंतन दोनों में अंतर समझना बहुत जरूरी है। लेखन ना के बराबर है पर चिंतन बचपन से है दर्जनों अधपकी कच्ची कहानियाँ दिमाग में है आलस्य की वजह से उन्हें शब्दों का रूप ना दे सका। लेखन की बात की जाए तो सबसे बड़ी कहानी जो लिखी वो है अभिशप्त योद्धा जो कि अभी भी लिख रहा हूँ उसके अलावा रिश्ता' लाइन और एक प्रेम कथा जिसे कभी किसी से शेयर नही किया।आजकल अपने एक सुपरहीरो पर काम कर रहा हूँ।

अभिषेक -  " निशांत जी ये एक सामान्य सा मानवीय गुण है कि हम अपने जैसो के साथ घुलना मिलना अपेक्षाकृत ज्यादा पसंद करते हैं और कितनो को ही अपने रंग भी घोल देते हैं।आपने कॉमिक्स जैसी अनुपम चीज के प्रति अन्य मित्रो में भी जिज्ञासा पैदा की.?"

 निशांत मौर्य  - हाँ मेरे साथ ये समस्या है मैं सबसे बात करता हूँ पर अंदर से घुल मिल नही पाता। पहले मैं कॉमिक्स को अपने मित्रो से दूर रखता था पर अब महसूस हुआ कि ये गलत कर रहा हूँ। अब उनसे कॉमिक्स पर बात कर लेता हूँ पर वो पढ़ते नही। मैंने एक डाई हार्ड कॉमिक फैन जरूर तैयार किया है वो है मेरी छोटी बहन वैशाली


अभिषेक -  "निशांत भाई आपके कथनानुसार आप लगभग 20 वर्षो से कॉमिक्स संस्कृति से जुड़े हुए हैं। आप अपने प्रारंभिक दौर में इस संस्कृति को किस प्रकार पाते थे मध्य में ये कैसा हुआ और अब इसमें क्या देखते हैं..?"

 निशांत मौर्य  - 20 वर्ष पहले बच्चा था इसलिए संस्कृति वगैरह की कोई समझ नही थी। 4 साल के बच्चे को संस्कृति जैसे शब्द से क्या मतलब वो तो बस चित्र देखकर ही खुश हो जाता है। 10 साल बाद जब ये सब समझने लायक हुआ कॉमिक्स का पतन शुरू हो चुका था। कंपनियां बन्द हो चुकी थीं। बच्चे कॉमिक्स से इंटरनेट गेम्स मूवीज कार्टून की ओर मुड़ रहे थे। लोगों को आधुनिकता दिखी पर उन्हें ये नही समझ आया कि ये सुपरहीरो गेम्स मूवीज एनीमेशन सबका आधार कॉमिक्स है।इस आधुनिकता का भारतीय कॉमिक्स पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा और आज भारतीय कॉमिक्स रसातल में पड़ी अपनी अंतिम साँसे गिन रही है। विदेशों में ये संस्कृति फल फूल रही है जबकि यहां बिल्कुल इसका उल्टा है। अब समय है कि हम जैसे फैन्स इसके उत्थान के लिए कार्य करें


अभिषेक -  "जी निशांत जी ये बड़ी अच्छी बात कही आपने। हम सभी fans को मिलकर कॉमिक्स को सपोर्ट करना होगा तभी हम कॉमिक्स का सुनहरा दौर पुनः वापस पा सकेंगे। इस दिशा में आपके सराहनीय प्रयास हैं जिनको आज सब जानते हैं। पर कुछ ऐसे भी इस दिशा में आपका योगदान है जो अब तक सिर्फ आपको ही पता है..?"
 निशांत मौर्य  -  _यदि आप किसी चीज़ के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं तो कोई भी प्रयास सिर्फ खुद तक नही सीमित रखना चाहिए। प्रयासों की एक श्रृंखला से ही परिवर्तन होता है। आपने सुना होगा कि अकेला चना भाड़ नही फोड़ सकता। हम सभी प्रयास सम्मिलित रूप से करते हैं। हाँ कुछ चीज़े हैं जो सोच रहा हूँ  कि इन पर काम करना चाहिए पर अभी उन चीजों पर कार्य शुरू नही किया। जब भी शुरू होगा वो भी एक सामूहिक प्रयास होगा_


अभिषेक -  "साथ ही ये भी बताएं जो लोग इस दिशा में काम कर रहे हैं उनके लिए आपका क्या सन्देश है.?"


 निशांत मौर्य  - जो लोग इस दिशा में काम कर रहे है। सबको यही सन्देश। आइये हम सब मिलकर काम करें और भारतीय चित्रकथा को बुलंदियों तक पहुचाएं


अभिषेक -  "कॉमिक्स क्षेत्र में आपके पसंदीदा चित्रकार,लेखक,स्यहिकार,सुपरहीरो आदि..??कभी हमारी इच्छा होती है कि काश हम इन सबसे बात कर पाते। पर आज डिजिटल वर्ल्ड ने सब आसान कर दिया। उन सबसे बात करके कैसा लगा..??"

 निशांत मौर्य  - पहली बात तो ये है कि मैंने सपने में भी नही सोंचा था कभी बात कर पाउँगा सबसे। दिल बाग़ बाग़ हो गया उनसे मिलकर। एक पल भी नही लगा मैं फैन हूँ और वो सेलिब्रिटी। सबसे एक ही बात सीखी कि जिन्दगी में कहीं भी पहुँच जाओ जमीन से जुड़े रहो। मेरे पसंदीदा चित्रकार ललित सिंह और गोविन्द राम सर हैं और दोनों ने मुझे बहुत मदद की आर्ट सीखने में

अभिषेक-  "आप लोगो ने मिलकर कई प्रोजेक्ट्स पर भी काम चालू किया है। क्या भविष्य में कॉमिक्स लाने जैसी कोई योजना है?"

 निशांत मौर्य  - बिलकुल!!बचपन से सपना है काश एक कॉमिक लिख पाता। मौका मिला तो जरूर निकालेंगे। अभी हाल में ही हमने एक छोटी सी ऑनलाइन सीरीज शुरू की है कॉप केतुज़ जो कॉमिक्स जगत से जुडी समसामयिक घटनाओं पर एक व्यंग होगी।आगे की बहुत सारी योजनाएं हैं धीरे धीरे सब करेंगे

अभिषेक-  "निशांत जी आप कॉमिक्स के इतने बड़े दौर से गुजरे हैं। आपने कई बदलाव देखे है और अब कौन सा बदलाव देखना चाहते है। कॉमिक्स में अब कितनी आशा देखते हैं..?"


 निशांत मौर्य  - बदलाव नही सिर्फ पतन देखा है। हर एक कॉमिक प्रेमी की तरह सिर्फ एक ही आशा है कि एक दिन आएगा जब माँ बाप अपने बच्चों के मनोरंजन के लिए  उनके हाथ में गेम्स और कार्टून डीवीडी के बजाए कॉमिक्स थमायेंगे।

अभिषेक-  "आप सभी कॉमिक्स प्रेमी से क्या सन्देश बांटना चाहेंगे..??"


 निशांत मौर्य  - सन्देश नही सिर्फ गुज़ारिश।दोस्तों मैं आशा करता हूँ आप खुद तो कॉमिक्स। तो पढ़िए ही और कोशिश कीजिये अपने छोटे भाई बहन और बच्चे भी मनोरंजन के लिए कॉमिक्स पढ़ें।


 धन्यवाद निशांत जी अपना कीमती वक़्त देकर इतनी  बातें हमारे साथ साझा करने के लिए। दोस्तों आप सभी से उम्मीद है कि निशांत भाई द्वारा कहे बातों पे अमल करेंगे शायद आपलोग भी करते हों। कॉमिक्स हमारा एक अद्भुत वैभव है अपने इस वैभव की सुरक्षा करें। आज के इस इंटरव्यू को यहीं समाप्त करते हैं जल्द ही मुलाक़ात होगी एक नए फैन के साथ।

और हाँ एक आवश्यक बात..COP ग्रुप के तहत कई प्रक्रियाएं चलाई जाती है। कहानी लिखना, colouring आदि। यदि आपके पास कोई कहानी आदि हो पर आप उसे अकेले होने के कारण चित्रकथा का रूप नहीं दे पा रहे तो संपर्क कर सकते हैं और हमारे इस परिवार में आप सभी सादर आमंत्रित हैं। जुड़ने के लिए whatsapp कर सकते हैं - 7280828823..
  धन्यवाद

1 comments :

Bahut Shandaar hai !!!!
Keep it up...

Reply