Monday, 15 August 2016

COP प्रस्तुत करते हैं

अभिशप्त योद्धा

लेखक - निशांत मौर्य

अध्याय 6


राजनगर कमांडो फोर्स हेडक्वॉर्टर :

टीवी में न्यूज़ फ्लैश हो रही थी - लौट आया राजनगर का रखवाला। सुपर कमांडो ध्रुव ने बिल्कुल सही समय पर वापस लौटते हुए राजनगर में एक बड़ी वारदात होने से रोका। रिजर्व बैंक अॉफ इंडिया में लूट का प्रयास करते हुए लुटेरों के हौसले पस्त किये पस्त

" कैप्टन को वापस आते ही सबसे पहले हमसे कॉन्टैक्ट करना चाहिए था, ये बात कुछ अजीब सी लग रही है ",  करीम ने चंडिका की ओर सवाल भरी नजर से देखा।
 " हो सकता है कि इतने दिनों बाद वापस आने के बाद ध्रुव सीधे अपने घर गया हो।"
"अभी मुझे एक जरूरी काम है? "
चंडिका ने अजीब तरह से प्रतिक्रिया दी और सेटेलाइट से मिली डिटेल की सीडी उठाकर वहां से चली गयी।

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असम :

नरपिशाच के वार से ऋचा बेहोश होकर गिर पड़ी।
" रिच्च्च्च्च्चा..... "
ध्रुव की चीख से मानो पूरा जंगल कांप उठा।
ध्रुव ने रिचा के प्रति इतना आकर्षण कभी महसूस नहीं किया था जितना वो आज कर रहा था।
ऋचा के शरीर पर लगने वाले घाव ने मानो उसका दिल चीर दिया हो।

( मेरी वजह से रिचा इस हालत में है।
मैंने उसे अपने साथ लाकर बहुत बड़ी गलती कर दी )
सुपर कमांडो ध्रुव का मन आत्मग्लानि से भर उठा।

अगले ही पल ध्रुव की नजर एक नरपिशाच पर पड़ी जो भेड़िया पर पीछे वार करने जा रहा था। चेहरे पर प्रेम और ग्लानि के स्थान पर क्रोध के भाव आ गए और ध्रुव के मानसिक वार से उस पिशाच का शरीर हवा में ही जल उठा।
अब ध्रुव का क्रोध अपने चरम पर था। क्रोध के कारण ध्रुव की मानसिक शक्तियां अनियंत्रित हो गई और चारों ओर तबाही मचने लगी। ध्रुव की इन अनियंत्रित शक्तियों का सामना करना नरपिशाचों की सेना के लिए भी संभव नहीं था। सारे पिशाच भयभीत होकर भागने लगे।
 ध्रुव की शक्तियों से रिचा और भेड़िया भी आहत हो जाते यदि योगी बाबा उन्हें अपने मानसिक सुरक्षा कवच में सुरक्षित ना करते।
 कुछ ही देर में अधिकांश पिशाच नष्ट हो चुके थे और जो बचे थे वो वापस भाग गए थे।
इतने भीषण मानसिक दबाव के बाद ध्रुव के लिए भी अपने होश कायम रखना संभव नहीं था।

योगी की गुफा असम :

" रिच्च्च्च्च्चा"
ध्रुव की मूर्छा उस चीख के साथ टूटी। उसका सारा शरीर पसीने से नहाया हुआ था। चेहरे पर चिंता और भय के भाव थे।
सुपर कमांडो ध्रुव के चेहरे पर आज से पहले भय तो क्या किसी ने एक शिकन भी नहीं देखी थी परंतु रिचा को खोने के 'भय' ने ध्रुव को भी डरा दिया था।

" चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है पुत्र रिचा अब सामान्य है।"
"तुम चाहो तो उससे मिल सकते हो,  वह एक दूसरे कक्ष में विश्राम कर रही है ।"
 ध्रुव के कानों में योगी बाबा की शांत ध्वनि पड़ी।
इससे पहले ध्रुव कुछ बोल पाता, कक्ष में भेड़िया ने प्रवेश किया।
" बाबा ये नरपिशाच कौन थे, उन्होंने जंगल पर हमला क्यों किया और ये ध्रुव असम में क्या कर रहा है?" इसके पास इतनी भंयकर मानसिक शक्तियाँ कहाँ से आई? इतने वर्षों में इस जंगल में रहने के बाद भी मुझे आप लोगों के बारे में क्यों नहीं पता चला?  " भेड़िया ने एक साथ कई सवाल पूछ डाले।
"  अधीर मत हो।"
"सभी प्रश्नों के उत्तर तुम्हें विस्तार से मिलेंगे पुत्र ", योगी का स्वर अभी भी शांत था।
"  मामला जब जंगल की सुरक्षा का हो तो अधीरता दिखानी जरूरी हो जाती है " भेड़िया की आवाज में दृढ़ता आ गयी।
 " मैं तुम्हारी अधीरता समझता हूँ परंतु इस बार तुम्हारा सामना किसी साधारण शत्रु से नहीं है पुत्र कोबी "
बाबा की बात पूरी होने से पहले ही कक्ष में रिचा भी ने भी प्रवेश किया।
 रिचा और ध्रुव की नजरों का आलिंगन होते ही दोनों की आंखें इस नम हो गई मानो प्रेम की सारी प्यास इन आंसुओं से बुझेगी।
 अचानक ध्रुव को एहसास हुआ कि वो एक रक्षक है और एक रक्षक का कर्तव्य उसकी भावनाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
" तुम ठीक तो हो ना",  ध्रुव की आवाज भरभराई हुई थी।
" हां ध्रुव मैं बिल्कुल ठीक हूँ और मेरे ठीक होने से ज्यादा जरूरी है कालपुत्र को रोकना।
बाबा हमें आगे बताएँ क्या हुआ था ताकि हम कालपुत्र का अतीत जान सकें ",  रिचा ने भी अपनी भावनाओं पर काबू पा लिया था।
"  ठीक है पुत्री आगे की कथा भी मैं अवश्य सुनाऊँगा परंतु इससे पहले मैं कोबी की शंकाओं का समाधान कर देता हूँ।"
"  हम सत्य के रक्षक है कोबी। हजारों वर्षों से असम का ये जंगल हमारा निवास स्थान है।
यहाँ रहकर हम इस संसार में हो रहे पाप और पुण्य पर दृष्टि रखते हैं और जब भी पाप का सर्प अपना फन उठाता है उसे कुचलने के लिए हम तुम्हारे, ध्रुव और नागराज जैसे योद्धाओं का मार्गदर्शन करते हैं। भगवान् विष्णु ने मुझे और गोरखनाथ को यह दायित्व कलयुग के आरंभ में दिया था।
 गोरखनाथ ने ही तुम्हारे मित्र नागराज का मार्गदर्शन उस समय किया था जब वह आतंकवाद के हाथ की कठपुतली बनने वाला था "
योगी की बात सुनते ही सबके नेत्र जिज्ञासा से गोल हो गए।
अपना संक्षिप्त परिचय देने के बाद योगी ने एक बार फिर से यक्षनगर की कथा सुनाना शुरू किया।
" अक्षांश के मुख से कालपुत्र के विश्वासघात का विवरण सुनते ही यक्षराज के नेत्र क्रोध से लाल हो गए थे।

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राजनगर (एक अज्ञात घर )

" हैलो मि.  ध्रुव आपकी कमांडो फोर्स आपको काफी मिस कर रही है और आप यहाँ अज्ञातवास बिता रहे हैं।"
चंडिका की आवाज कमरे में गूंज पड़ी।
" तुम यहाँ क्या कर रही हो?  यहाँ तक कैसे पहुंची? ",  ध्रुव की आवाज लड़खड़ा गई।

अध्याय 6 समाप्त

कहानी जारी है......

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