Saturday, 13 August 2016

COP प्रस्तुत करते हैं

अभिशप्त योद्धा

लेखक - निशांत मौर्य

अध्याय 4


स्थान : कमांडो फोर्स हेड क्वार्टर, राजनगर

" कैप्टन को सर्च करने के लिए आप हमारी क्या हेल्प कर सकती है चंडिका? ", करीम ने चंडिका से पूछा।
 "करीम एक्चुअली बात यह है कि मैं वहाँ गई थी जहाँ ध्रुव को आखिरी बार देखा गया था, और मुझे वहाँ कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जिससे पता चलता है कि वहाँ पर ध्रुव की किसी से काफी भयंकर लड़ाई हुई है। मुझे जानना है कि आखिर वहाँ पर हुआ क्या था? "
 "जानना तो हम सब को है पर कोई तरीका नहीं सूझ रहा"
करीम के चेहरे पर निराशा स्पष्ट झलक रही थी।
"तरीका है मेरे पास, काफी सिंपल थ्योरी है।
हमारी पृथ्वी के चारों ओर सेटेलाइट्स का जाल बिछा हुआ है और वो 24 घंटे पृथ्वी के चक्कर लगाते है तो कोई भी घटना इनमें लगे HD कमरों से नहीं छिप सकती।
 "तो प्लान ये है कि हम वर्ल्ड के सारे सेटेलाइटस हैक करेंगे और 5 दिन पुराने डाटा से पता करेंगे कि एक्चुअली वहां पर हुआ क्या था? हालांकि ये काम Illegal है और तस्वीरें उतनी साफ़ नही होंगी फिर भी हमे एक आईडिया मिल जायेगा। "
 " और यह महान काम करेगा कौन", करीम की आँखें फैल गयीं।
" मुझे पता होता तो मैं दो तमाचे मारकर खुद करवा लेती, तुम्हारे पास क्या अचार लेने आई हूँ", चंडिका खीज गयी।

" एक ही इन्सान हैकिंग में इतना माहिर है और वो है रिचा पर कैप्टन के साथ वो भी गायब है इसलिए ये उम्मीद भी जाती रही " करीम ने कहा ।
" क्या तुम्हारे पास कोई भी ऐसा नहीं है जो ये काम कर सके ?"
"कोई तो होगा? "

" पीटर ये काम कर सकता है पर एक बहुत बड़ी दिक्कत है।"
"क्या?", चंडिका ने पूंछा।
 " समस्या ये है कि हमें सेटेलाइटस के मेन सर्वर से कनेक्ट होने में महीनों का टाइम लगेगा क्योंकि वहाँ पर ट्रैफिक इतना ज्यादा होता है कि कोई सुपर कंप्यूटर ही उसे अॉपरेट कर सकता है।"
"हमारे पास हाई स्पीड कंप्यूटर है बट सुपर कंप्यूटर
नहीं "
 "अरे यही तो मैं बताने आई हूँ कि मेरे पास हाई स्पीड कनेक्शन इंटीग्रेशन डिवाइस है,  ये किसी भी सर्वर के ट्रेफिक को कम करके हमें मेन सर्वर में एक्सेस दिला सकता है वो भी कुछ ही मिनट्स में "
(मुझे लगा ही था कि इस काम में ये डिवाइसेस जरूर काम आएंगी कहीं न कहीं।)
चंडिका मन ही मन सोच रही थी।
"तब तो काम बन जाएगा, वैसे ये डिवाइस तुम्हें कहाँ से मिली?",  करीम चंडिका को शक भरी नज़रों से देखते हुए बोला।
 " वहीं से जहां से मुझे हर गैजेट मिलता है.... श्वेता माय फ्रैंड "
( थैंक यू सो मच भैया आपने मुझे मेरा बर्थडे गिफ्ट के रूप में ये डिवाइस दी थी वो भी इंपोर्ट करके। मुझे मेरे प्रोजेक्ट के लिए इसकी बहुत जरूरत थी। लेकिन अब मैं इसका यूज आपको ढूँढने लिए ही करने जा रही हूँ।
वैसे कुछ तो बात है आप  जाते-जाते भी एक रास्ता छोड़ जाते हो)
चंडिका मन ही मन अपने भाई के लिए गर्व महसूस कर रही थी।
चंडिका के विचारों को विराम करीम के उस 'अनाउंसमेंट' मिला।
" अॉल कैडेट अलर्ट रिजर्व बैंक अॉफ इंडिया की ब्रांच पर अटैक किया है। बैंक के पास मौजूद कैडेट्स तुरन्त वहां की सिचुएशन के बारे में इन्फॉर्म करें।"
" करीम....  यू डोंट नीड टू वरी।"
तुम अपना ध्यान सेटेलाइटस् पर दो इन लोगों से मैं निपट लूंगी " यह बोलकर चंडिका काफी तेजी से हैड क्वार्टर से चली गई ।

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स्थान : तांत्रिक की गुफा

" कहाँ मर गया ये सुपर कमांडो ध्रुव !"
"सारे तरीके आजमा लिए फिर भी कुछ पता नहीं चल पा रहा है उसका।"
कुछ होता न देख तांत्रिक ने पास में पड़ा खंजर उठाकर अपना हाथ काट लिया और खून की 21 बूंदें कुंड में टपका दी।
 कुंड से अचानक धुंआ निकलने लगा। कुछ क्षण बाद वो धुआं एक मानवीय आकृति में परिवर्तित हो गया और गुफा एक भीषण अट्ठाहस से गूंजने लगी ।
" हाहाहा बोल किसलिए याद किया मुझे ?"
तांत्रिक ने आकृति को दंडवत प्रणाम किया और बोला
" हे काल भैरव मैंने संभव प्रयत्न किया उस लड़के को ढूंढने का पर समझ ही नहीं आता कि उसे धरती लील गई या आसमान निगल गया?
"अगर वो नहीं मिला तो मैं अपनी साधना पूरी नहीं कर पाऊंगा"
"मुझे उसका खून चाहिए,  संसार की सबसे बड़ी पुण्यात्मा है वो। उसका खून मुझे इस संसार का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बना देगा।"
"अपराजेय हो जाऊंगा मैं "

काल भैरव ने फिर से अट्ठाहस लगाया।
 "मूर्ख है तू जब तुझे पता है कि वो इस संसार का सबसे पुण्यवान व्यक्ति है तो तुझे उसे नहीं ऐसे स्थान को ढूंढना चाहिए जहाँ पर सबसे ज्यादा पुण्य हो, ध्रुव भी वहीँ मिलेगा।"
यह बोलकर वह साया फिर से धुएं में विलीन हो गया।
कालपुत्र ने फिर से एक बार ध्यान लगाया और जब उसकी आंखें खुली तो उसके होंठो पर एक कुटिल मुस्कान थी।

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असम भूतकाल :

  तो इस प्रकार अक्षांश ने राजकुमारी का अपहरण कर लिया और उसे यक्षों के गुप्त निवास लेकर जाने लगा जो हिमालय की तराई में था।
  यक्ष भूमिगत होकर रहते थे उनका निवास धरती से 100 फुट नीचे था और वहाँ तक जाने के लिए गुप्त गुफाएं थीं जो वन क्षेत्र में खुलती थीं। उनमें से एक गुफा का द्वार उस झरने से होकर गुजरता था जहाँ से राजकुमारी ने अक्षांश को पहली बार मूर्छित देखा था।
 अक्षांश ने सीधे उसी झरने में छलांग लगा दी और सीधे यक्षलोक में प्रवेश कर गया। उस समय यक्षराज अपने दरबार में बैठे थे और कुछ आवश्यक मंत्रणा में व्यस्त थे।
 अक्षांश को अचानक से सामने देखकर यक्षराज का ह्रदय हर्ष मिश्रित आश्चर्य से भर गया।
उन्होंने तत्काल अपने पुत्र का आलिंगन किया और दरबार को उसी समय स्थगित कर दिया ।
पिता और पुत्र का वो मिलन अत्यंत भावपूर्ण होता यदि उसमें राजकुमारी यक्षांशी की उस चीख ने विघ्न ना डाल  देती।
  " कायर है आपका पुत्र यक्षराज"

" कौन है ये उद्दंड बालिका और इतने वर्षों तक तुम कहाँ थे पुत्र? "
यक्षराज के मन में अनेको पृश्न एक साथ घर कर गए थे।
"  ये कन्या यक्षनगर के महाराज धर्मपुत्र की पुत्री यक्षांशी है और इनका अपहरण किया है मैंने।", अक्षांश ने बताया।

यक्षराज ने आश्चर्य से अक्षांश की ओर देखा ।
" असम्भव.....आप किसी का अपहरण नहीं कर सकते।
अपने ऐसा क्यों किया वो भी यक्षनगर के साथ जिसे हमारा आश्रय प्राप्त है "
 " हां, नहीं कर सकता था यदि सम्राट धर्मपुत्र ने हमारे साथ विश्वासघात ना किया होता "

" क्या विश्वासघात,  ऐसा कैसे हो सकता है आपको अवश्य कोई भ्रम हुआ है ", यक्षराज का आश्चर्य बढता जा रहा था ।
" हां पिताश्री विश्वासघात ",
 अक्षांश ने बताना शुरू किया, " असुर राज कृपाण पर विजय प्राप्त करने के पश्चात...............

नोट- अक्षांश के साथ विश्वासघात की कथा जानने के लिये 'An Accursed Warrior : Lost Year श्रृंखला पढ़ें।

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वर्तमान समय असम :

योगी ध्रुव को कहानी सुना रहे थे कि तभी उनका एक शिष्य पास आया।
 "बीच में विघ्न डालने के लिए अत्यंत खेद है गुरुवर परंतु बाहर का माहौल अत्यंत भयावह हो चला है ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ अघटित घटित होने वाला है, कुछ अपशकुन"
इस बात को सुनकर योगी ने ध्यान लगाया
" मैं जंगल की ओर बढती हुई पाप तरंगों का अनुभव कर सकता हूं। सम्भव है कि उसे पता चल गया हो कि ध्रुव यहां पर है।"
"हमें सावधान रहना होगा"

जंगल के वातावरण में वीरानी छाई हुई थी शेर चीते जैसे हिंसक जंतु भी दुबक कर बैठ गए थे। पूर्णिमा की रात्रि थी परंतु चन्द्रमा बादलों में छिप गया था। योगी बाबा की गुफा से दूर जंगल में सन्नाटे को चीरती हुई आती एक आदिवासी की आवाज गूंजी।
 "सभी छिप जाओ नरपिशाचों का हमला हुआ है"
ये सुनते ही चारो और खलबली मच गयी।
जिसको जहां ओट मिली दुबक गया। परंतु कुछ को छिपने का मौका नहीं मिल सका और वो नरपिशाचों का शिकार हो रहे थे।
इसी अफरा-तफरी में एक बच्ची अपने माता-पिता से बिछड़ गई और एक नरपिशाच की नज़र उस पर पड़ गई ।
नरपिशाच को आसान शिकार मिल गया और उसने बच्ची का गला पकड़ लिया।
इससे पहले वह उस बच्ची को नुक्सान पहुंचा पाता, एक गदा के प्रहार ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया।
"ये भेड़िया का जंगल है और यहां सिर्फ एक ही जल्लाद रह सकता है, वो है खुद भेड़िया "।

अध्याय 4 समाप्त

To be Continued.....

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