Wednesday, 31 August 2016

COP प्रस्तुत करते हैं

दिमाग के जादूगर

राजनगर
राजनगर की सुबह के 6 बजे राजनगर के स्पोर्ट्स क्लब में सुबह सुबह कई बच्चों की मार्शल आर्ट ट्रेनिंग चल रही थी ।
बच्चों को एक लंबा चौड़ा आदमी समय समय पर द्वन्द कला की बारीकियां सीखा रहा था ।
ठीक 8 बजे
सभी बच्चे ट्रेनिंग लेने के बाद अपने घर जाने लगे।।वह आदमी जो उन बच्चों को ट्रेन कर रहा था थक के अपने चेयर के पास बैठ जाता है और न्यूज़ पेपर उठा लेता है ।।
Newspaper का पहला पन्नें का न्यूज़ इस प्रकार होता है
मुम्बई,डेल्ही और अब महानगर अपने रक्षको को खो चुकी है क्या अब बारी राजनगर की है या राजनगर का टूटा सितारा क्या जल्द आकाश में दिखेगा ???क्या होगा अब राजनगर का।
न्यूज़ पढ़कर वह आदमी थोडा परेशां हो जाता है और चेयर से उठ कर क्लब के बाहर चला जाता है।
उसके दिमाग में कुछ सनसनी मचने लगती है ।ये था ध्रुव जो अब क्राइम फाइटिंग छोड़ चुका है ।
डेल्ही (विनय के घर)
भारत और विनय ड्राइंग रूम में साथ बैठे हुए होते है ।दोनों काफी चिंतित होते है।।
विनय थोड़े देर बाद कहता है -" भारत !काली शक्तियों के आगे हमें झुकना पड़ा क्योंकि अगर हम ऐसा न करते तो हमारे परिवार को वो नुकसान पहुच तो देता ही साथ ही साथ दिल्ली के भी नागरिको को नुकसान पहुँचता।
भारत "-एक बात मुझे परेशां कर रही ही की अज्ञात ने हमें क्यों नहीं मारा ,,,क्योंकि वह बड़ी आसानी से हमें मार सकता था ,या शायद हमें रोकना चाह रहा था न की मारना ,,,खैर विनय तुम महानगर चलो नागराज के पास मुझे कुछ पता लगाना होगा ।
ओके चलो मैं अपनी कार निकाल लेता हूं ,,,विनय सोफे से उठकर कहता है ।
भारत भी उठते हुए कहता ही -" शिप्रा भाभी और आकृति कहाँ है?
विनय -" मैंने उन्हें मामा के पास भेज दिया है वहां कुछ दिन कम से कम सेफ होगी ,,वहां की सिक्योरिटी से मैं थोड़ा संतुस्ट रहूंगा। भारत चलो फिर महानगर जल्दी इस कालिशक्ति का तोड़ जल्द से जल्द निकलना ही हमें "।।
फिर दोनों महानगर निकल जाते है ।कुछ समय बाद जब वो राजनगर और महानगर को जोड़ने वाले हाईवे पर होते है ।तभी विनय को एक कॉल आता है ।विनय कार को साइड में रोकता ही और कॉल को होलोग्राफिक मोड में रखता है।।कॉल में ध्रुव होता है।
ध्रुव तुम -आश्चर्य से विनय कहता हैं।इस समय कैसे याद किया ।
ध्रुव चिंतित स्वर में - तुम लोगो के साथ हुई घटना का पता चला मुझे ।डोगा लापता है ।नागराज भी जड़ हो चूका हैं।।
क्या ?? नागराज जड़ हो गया । भारत चौक गया ।
" हाँ ।सौडांगी ने मुझे बताया ।मुझसे मदद मांग रही थी "। ध्रुव कहता है ।
विनय-" क्या कहा तुमने फिर?
वहां की सिचुएशन के बारे में मुझे बता दिया है सौडांगी ने ,,महात्मा कालदूत भी वहां ही वो दोनों कुछ समय तक स्थिति को संभल लेंगे ।।पर मुझे तुम दोनों से पूरी कहानी सुननी है इसलिये दोनों राजनगर के मेरे कॉटेज में मिलो "-ध्रुव कहता है।
"ठीक है 20 min में वहां मिलेंगे "विनय होलोग्राफिक इमेज को बंद करते हुए कहता है ।।फिर दोनों कार स्टार्ट कर राजनगर को ओर चल देते है।
महानगर से नागराज को रास्ते से हटाकर अज्ञात असम की और उड़ते हुए सोचता है-"डोगा ,परमाणु,तिरंगा और नागराज तो रस्ते से हट गए है ,,शक्ति देवलोक में देव सेना का नेतृत्व कर रही है असुरो के खिलाफ युद्ध में ,,जिसके वजह से मुझे उससे खतरा नहीं है । अब 3 बचे हुए है ।जिनमे सबसे शक्तिशाली है भेड़िया ।खैर इस भेड़िया को भी जल्द काबू में लाना होगा ।क्योंकि नागराज के बाद सबसे शक्तिशाली सुपर हीरो भेड़िया ही है"।।
कुछ समय पश्चात अज्ञात घने असम के जंगलों में पहुँच चुका होता है। थोड़े देर मे वह भेड़िया के पुराने किले के पास पहुच जाता है ।
" भेड़िया इसी किले में है उसकी शक्ति का एहसास हो रहा है मुझे"। अज्ञात उडकर ठीक किले के ऊपर पहुचता है और परछाई बनकर छत के नीचे समा जाता है।
अंदर एक बहुत बड़े हाल में सिहांसन पर भेड़िया बैठा रहता है ।जेन का फोटो लिए हुए। भेड़िया के आँखों से आंसू जेन के फोटो पर चली जाती है ।"तुम्हे बचा न सका जेन ,,,इतना शक्तिशाली होकर भी अपनी पत्नी को खो दिया मैंने।सुकन्या के बाद तुम भी मुझे छोड़ गयी लगता ही प्रेम मेरे भाग्य में भी नहीं ही "कहता हुआ भेड़िया फोटो को नीचे रखता है कि सामने उसे जेन खड़ी दिखती है ।
जेन !तुम ? भेड़िया चौक जाता है ।
" हाँ भेड़िया मैं तुम्हारी जेन ,,जन्म जन्मान्तर से तुम्हरा इंतेजार कर रही हु तुम्हे अपना बनाने के लिए ।भेड़िया मेरे साथ चलो मेरी दुनिया में तुम इतना प्यार दूंगी की तुम सब कुछ भूल जाओगे " - आँखों में प्रेम भाव लिये जेन कहती है ।
भेड़िया जेन को गले लगाने आगे बढ़ता है जैसे ही वह जेन को बाँहों में लेता है कि तभी जेन के शरीर का स्पर्श भेड़िया मुख पट्टिका से होता है ,,जो तंत्र शक्ति को शोख़ लेता या काट देता है।।जिस वजह से जेन का शरीर स्याह होता दीखता है और वह कोई शैतान बन जाती है ।
सामने 9 फुट लंबी ,बड़ी बड़ी लाल आँखे,बड़े बड़े नुकीले दांत 2 बड़े सिंघ और पैने नाखून लिए 1 खतरनाक स्त्री में परिवर्तित हो जाती है ।
" ओह्ह ये कौन भयानक शैतान है जो जेन के वेश में आयी थी "-भेड़िया सोचता है ।
हर्रररर गुरर । चौक गया भेड़िया मेरा असली रूप देख कर ,पता नहीं मैं कैसे अपने असली रूप में आ गयी ,,पर अच्छा ही हुआ इसी रूप में मैं तेरा शिकार करूँगी ,मैं हैवानी हर्रर।
"जेन का रूप धर कर तूने जो गलती की उसकी सजा तो भुगतेगी ही "।भेडिया गुस्से में आकर कहता है ।
भेडिया इससे पहले जंग का आगाज करता हैवानी कुलाचे मार के भेड़िया के ऊपर हमला कर देती है ,,हर बार हैवानी भेडिया पर हमला करने के लिए छलांग लगती मगर भेडिया बाख ही जाता 2 -3 बार यही सिलसिला होता है और भेड़िया हर बार की तरह हैवानी का वार बचा लेता है ।
हैवानी थोड़े देर के लिए रूकती है और रोकती है - " ये ऐसे मेरे चंगुल में नहीं आयेगा छल से काम लेना होगा "।तब हैवानी अपनी मुह से गाढा हरा पदार्थ फेकती है ,उस गाढ़े पदार्थ के फैलने से फर्श और चिकना हो जाता है । जिसके कारण भेड़िया फिसल जाता है ।हैवानी इसी पल के इंतेजार में होती है वह भेड़िया क ऊपर कूदती है और छाती पर पंजो से भरपूर वार करती है ।भेड़िया का फौलादी शरीर लहूलुहान हो जाता ।
इससे पहले की हैवानी भेड़िया का काम तमाम कर दे भेड़िया अपनी पूँछ बढ़ाता है और हैवानी को चारों तरफ से लपेट लेता है और एक झटका देता है ।हैवानी लट्टू की तरह घूमते हुए काफी दूर जाकर गिरती है।
उफ़ अब इसे शैतान को और मौका नहीं दे सकता "- भेडिया उठता है और दौड़ते हुए हैवानी के तरफ जाता है और पुकारता है " हे भेड़िया देवता मदद ।।और गदा भेड़िया के हाथों में आ जाता है ।इधर हैवानी खडी होती ही है कि भेड़िया गदा का वार उसके पैरो पर करता है ,,कड़ाके से पैर की हड्डियां टूटती है तभी अगला वार छाती पर होता है हैवानी की एक चीख निकलती है अगला वार सर पर होताा हैं ।और दर्दनाक चीख के साथ हैवानी ख़त्म हो जाती है ।
राजनगर
विनय और भारत राजनगर के समुद्री तट के बीच बनी कॉटेज पर पहुचते है ।कार से दोनों उतारकर काटेज का दरवाजा खोलते है और अंदर जाते है ।सामने ध्रुव सोफे पर बैठा होता है ।
"बैठो !ध्रुव बैठने को कहता है।
"हम युही यहाँ बैठने नहीं आये ध्रुव ।हम सब बहुत बड़ी मुसीबत से गुजर रहे है तुम जानते हो "भारत कहता है ।
" मुझे पता है भारत उर्फ़ तिरंगा फिलहाल तुम दोनों विस्तार से मुझे बताओ की हुआ क्या है "गंभीर स्वर में ध्रुव।
फिर विनय और भारत अपनी आप बीती विस्तार से ध्रुव को बताते है ।
सब कुछ सुनकर ध्रुव कहता है"हम्म तोह उस अज्ञात ने भावनात्मक रूप से तुम दोनों को मजबूर किया है सुपरहीरो न बनने के लिए मगर तुम दोनों को किसी तरह नुक्सान नहीं पहुचाया है। डोगा के साथ हुए घटना के बारे में कोई निस्कर्ष नहीं निकला है मगर इतना पता है कि डोगा भी सही सलामत है ।दूसरी तरफ नागराज का शरीर जड़ पड़ा हुआ है स्नेक आईज headquarter में ।
"हां ।।इसका मतलब है कि अज्ञात हमें जान से नहीं मारना चाहता उसका कोई लक्ष्य है क्या ये हमें नहीं पता अगर दहशत या दुनिया पर हुकूमत करना होता तो वह हम सुपरहीरो को मार चूका होता " भारत कहता है ।
विनय भी बिच में अपनी राय रखता है "हाँ मैं भारत से सहमत हूं ,,अज्ञात हमें आसानी से मार सकता था ,और जहाँ तक मैं जानता हूं कोई न्यूज़ नहीं मिली की कही भी कोई अप्राकृतिक घटना घटी हो।
" हम्म सारे सूत्र अब हमें या तो मुम्बई में मिलेगा या महानगर में ?? विनय तुम और भारत मुम्बई जाओ मैं महानगर जाता हूं इस मामले को सुलझाने "ध्रुव उठ खड़ा होता है ।
धरती के किसी अनजान जगह में एक अद्भुत नील रंग के शरीर वाली लड़की तपस्या कर रही होती है "ॐ नमः शिवाय की ध्वनि चारो और गूंजती होती है ।कि तभी एक चीख उस लड़की की तपस्या को भंग कर देती है ।
"यह चीख तो हैवानी की है मतलब वह मर चुकी है ।कब ,कैसे ? मगर वह तो अज्ञात के साथ थी ।मुझे पता करना होगा । तभी अज्ञात का मानसिक सन्देश आता है ^^"शिवारी तुम्हारी बहिन हैवानी को एक भेड़िया मानव् ने मार दिया है ।
शिवारी आश्चर्य से -"क्या ??ऐसा कैसे हो गया?
" हाँ जो तुम सुन रही हो वो सब संहि है तुम असम के जंगलों में आओ यही मिलेगा तुम्हारी बहिन का हत्यारा" ।
"अज्ञात मगर तुम भी अगर असम में हो तो मेरी बहिन को क्यों नहीं बचाया ।शिवारी क्रोधित होकर कहती है।
" मैं अभी बता नहीं सकता फिलहाल उस भेड़िया मानव को ख़तम करना होगा तुम जल्दी आओ "।अज्ञात अपनी बात पूरी करता है और संपर्क काट देता है ।
" मेरी बहन के हत्यारे भेड़ियामानव मैं आ रही हु बदला लेने " तभी शिवारी तन्त्र से एक द्वार बनाती है और उसमें समां जाती हैं ।
असम
भेड़िया लहूलुहान किले से बहार निकलता है ,,की
ठीक,तभी हवा में एक लड़की की आकृति वहां उभरने लगती है ,जैसे जैसे आकृति बनती है वातावरण में चीख गूंजने लगती है ।आकृति जो अब स्त्री रूप धारण कर लेती है ,,तब उसकी चीख और भयानक हो जाती है ।उसकी भयानक कंपन से किले के आस पास की सारे चट्टानें धूल बन जाती है ।जगह जगह पेड़े उखड़ जाती है । भेडिया भी उस चीख के आवेग में दूर गिर जाता है ।
भेडिया के सामने शिवारी आ चुकी होती है। शिवारी गुस्से से "तूने मेरी बहिन हैवानी को मारा है ...भेड़िया मानव शिवारी तुझे जीवित नहीं छोड़ेगी"।
इधर इन सब मोहरो को चलने वाला अज्ञात किले से बाहर आता है ।और शिवारी और भेड़िया को आमने सामने देखता है ।"तो शिवारी आ ही गयी अब भेड़िया की मौत निश्चित है क्योंकि शिवारी को वरदान है कि उसकी चीख की शक्ति के वार का कोई काट नही"अब होगा जंगल के जल्लाद का अंत"।
इधर भेड़िया पर शिवारी का अद्भुत चीखो का वॉर होता है ,,,भेडिया का शरीर थरथराने लगता है ,,उन चीखो से बचने के लिए अपनी नयी शक्ति का उपयोग करता है ।तंत्र भेडिया मानवो की 1 टुकड़ी भेड़िया पट्टिका से निकलती है और शिवारी पर टूट पड़ती है ।मगर भगवान् शिव के वरदान स्वरुप उस अद्भुत आवाज के शक्ति का सामना तंत्र रुपी भेड़िया टुकड़ी भी नहीं कर पाती ।पहली लड़ाई जीत कर फिर शिवारी चीखना चालू कर देती है ,,भेडिया का शरीर फिर कांपने लगता है ।
हे भेड़िया देवता मदद।भेडिया पुनः गदा का आवाहन करता है ।गदा हाथ में आते ही शिवारी के शक्ति शाली चीखो को भेडिया गदा से रोकने लगता है और शिवारी के पास जाकर गदा का भरपूर वार करता है ।मगर शिवारी पर गदा का पूरा वार नहीं हो पाता क्योंकि शक्तितरंग गदा के वार को काफी सोख लेती है।मगर फिर भी वार का असर शिवारी पर होता है ।शिवारी लड़खड़ा कर गिर जाती ही की तभी भेडिया भी जमीन पर गिर जाता है ।हैवानी की नाखून का विष उस पर असर कर रहा होता है ।
"आह !मुझे क्या हो रहा है ।बेहोशी सी छा रही है ।अगर मैं बेहोश हो गया तो शिवारी मुझे छोड़ेगी नहीं ।भेड़िया चिंतित होकर सोचता है ।तभी अचानक उसे कुछ याद आता है ।
चले आओ मेरे भेड़िया फ़ौज के सिपाहियों !चले आओ ।तभी भेडिया फ़ौज के कई दर्ज़न सिपाही आने लगते है ।तभी भेड़िया सबसे सामने खड़े भेडियो को आदेश देता है " मोती,वुल्फ़ो, गुर्रा तुम लोग भेडिया चक्रव्यूह बनाना जानते हो जो मैंने तुम सबको सिखाया था ,,तुम अब यही चक्रव्यूह इस शैतान स्त्री के इर्द गिर्द बनाओ ताकि मुझे सँभालने का अवसर मिले!
गुरर गर्र !!(ठीक है भेड़िया मैं आगे से भेडिया सेना का नेतृत्व करूँगा चक्रव्यूह बनाने में ) मोती नाम का भेडिया कहता हैं ।
फिर सभी भेडिया शिवारी के इर्द गिर्द चले जाते है और चारो तरफ से घेर लेते है।शिवारी को तब तक कुछ होश आता ही है कि भेडिया फ़ौज का आक्रमण होता है ।।चक्रव्यूह इस प्रकार का होता है कि सभी भेडिया बारी बारी शत्रु पर वार करेंगे और अपनी जगह बदल देंगे जिससे उन्हें अगर चोट भी लगा तो अगले तरोताज़ा भेडिया उसकी जगह पूरी कर दे।
अब भेडिया फ़ौज एक एक करके घूम घूम कर शिवारी पर हमला करते है कोई शिवारी पर पंजे से हमला करता तो कोई दांतो से भभोड़ देता था ।मगर शिवाली भी कुछ भेडियो पर तरंगों का वार कर के उन्हें घायल कर देती या मार देती ।मगर चक्रव्यूह के वजह से ज्यादातर वार शिवारी को ही नुक्सान पंहुचा रही थी ।
इधर भेडिया पट्टिका हैवानी की दिए चोट को पूरी तरह ठीक नहीं कर पा रहा था मगर 40% चोट भर चुके थे।
भेडिया चक्रवुह में शिवाली और घायल हो चुकीहोती है "ये भेड़िये बड़े फुर्तीले है और प्रशिक्षित लगते ही ।अब इन्हें मौका नहीं दे सकती अब इन्हें मेरा विकराल रूप का दर्शन देना होगा ।तभी शिवाली के सोचते ही उसका शरीर बढ़ने लगता है और बाल बदल कर सर्प नुमा केश बन जाते है ।पाताल सर्पराक्षसी की वंसज थी शिवाली जो अज्ञात के अधीन थी ।
"ही ही अब तुम्हे बताती हु की शिवाली क्या बला है ।।शिवाली मुड़ती है भेडियो की तरफ और उसके सर्प नुमा केश और मुह से कर्कश आवाज की तरंगे निकलते है ।बेपनाह शक्ति वाली तरंगे सभी भेडियो को धूल में बदल देता है।जो भेडिया कुछ समय पूर्व शिवाली को चोट पहुच रहे थे वह अब सब खत्म हो चुके थे ।।
अचंभित भेड़िया देखता है ये नजारा "उफ़ इतना बड़ा नरसंहार कुछ ही क्षणों में ताजुब है ।अब यह मेरी तरफ ही आयेगी इस विकराल रूप मे मुझे घायल ही इससे लड़ना होगा "।
धम धम आवाज करते हुए विशालकाय शिवाली भेडिया के पास आती है ।
तेरा भी हाल अब तेरे भेड़िये जैसा होगा भेडिया बहुत सताया है तूने मुझे ।क्रोधित शिवाली कहती है और ध्वनि तरंगे भेडिया पर छोड़ देती ही भेडिया तब बड़े मुश्किल से कलाबाजी खाकर बचता है ।की खून का स्त्राव और भी बढ़ जाट है भेडिया कराहता है "आह । इस जखम के साथ लड़ना मुश्किल हो रहा ही इस राक्षसी से बचने का कोई उपाय सोचना होगा " ,की तभी शिवारी भेडिया को अपने सर्प केशो से जकड लेती है ।भेडिया छटपटाता है मगर छूट नही पाता की शिवारी उसे जोर से वापस पटक देती है जमीन पर ।
भेडिया सर के बल जमींन पर गिरता है उसका बढ़ती कमजोरी और चोट उसे निढाल करने लगती ही की शिवाली का कर्कश आवाज का वार भेडिया पर होता है ।और इस बार भेडिया और भी कुछ नहीं कर पाता क्योंकि सर्प केश के सर्पो का जहर का असर भी भेडिया पर होता है । थोड़े ही देर में भेडिया का शरीर विखंडित्त हो जाता है ।
और जंगल का जल्लाद भेडिया मारा जाता है ।तभी शिवारी का अट्टहास जंगल में गूंजती है " हा हा हा मर दिया मैंने अपने बहन के हत्यारे को ।हा हा इधर छिपा हुआ अज्ञात भी खुस हो जाता है आखिर भेडिया मारा ही गया ।अगर हैवानी मेरे इस चाल का मोहरा न होती तो शिवाली कभी भेडिया को न मरती ।हैवानी को पाताल से मैंने ही बुलाया था ताकि उसे भेडिया से मरवा दू ताकि शिवाली बदले की भावना से भेडिया को मार डाले और वही हुआ।
तभी अज्ञात के पास शिवाली आती है "अज्ञात तूने हैवानी को क्यों नहीं बचाया बता वरना।।
वरना क्या तू मुझे मर देगी ,,सपने में ।वास्विकता में तू मुझे कभी नहीं मार सकती ।जब पातळ में नाग्रक्षस नगरी नागया में तेरे पति को मारकर तुझे अपनी अधीन बनाया तेरे राज्य को अपना बनाया तब तू कुछ न कर सकी तो अब तो तू मेरी गुलाम है ।अज्ञात कुटिलता से हँसकर जवाब दिया।
शिवाली अप्पने सामान्य रूप में आती है और गुस्से से पास रखे चट्टान को तोड़ देती है ।
"खैर शिवाली तेरी जरुरत मुझे पड़ेगी पर फिलहाल अब एक जिन्दा मुर्दे को मुझे सच का मुर्दा बनाना है ।तो मैं चला रूपनगर"।
वुल्फानो
गुरुराज भाटिकी को इस बात का पता चलता है कि भेडिया का शरीर कण रूप में बिखर गया है ,तब वो खुद असम आते हैं।
आगे की कहानी ज़ारी

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