Wednesday, 31 August 2016

COP प्रस्तुत करते है

शैतान का बेटा

सौडांगी को होश आया,लेकिन तब तक तो पांशा ही पलट चूका था।एक तरफ उसी का तंत्र नागबल को घेरे हुए था,जिसकेअंदर नागबल एक से बढ़कर एक ताकतवर काली शक्तियों से टकराने में लगे थे तो दूसरी तरफ नागराज को जड़ अवस्था में देखकर उसके मुंह से बोल न फुट पा रहा था।
"नागराज,क्या हुआ तुम्हें?"सौडांगी ने नागराज को छुआ,तो उसका शरीर सौडांगी को पत्थर का महसूस हुआ।
उसकी आंखें आश्चर्य से फ़टी रह गईं।अचानक उसकी नजर मणि पर पड़ी।
"ये मणि तो शायद वही है, जिसे लेकर वो आतताई हमसे लड़ रहा था।जरूर यही कारण है नागराज को जड़ करने के पीछे।"सौडांगी ने मणि को निकालने के लिए जैसे ही उसे छुआ,एक तेज झटके ने उसे कई फुट दूर उछाल दिया।उसका सिर तेजी से दिवार से टकराया,पर तुरंत ही उसने खुद को संभाला।
"उफ्फ, अब मै क्या करूँ?"सौडांगी परेशां होकर दोबारा नागराज की तरफ बढ़ी ही थी कि अचानक किसी जोरदार आवाज ने उसका ध्यान खींचा।
उसकी तंत्र शक्ति को तोड़ दिया था किसी ने।जो नागबल से लड़ते हुए उसने इमारत के आसपास बना दिया था, ताकि बाहर से किसी को नजर न आये कि अंदर क्या हो रहा था।महात्मा कालदूत थे वो।
सौडांगी ने झुककर उनका अभिवादन किया।एकाएक कालदूत बरसे।
"ये क्या किया है तुमने,सौडांगी?"
इशारा उसकी तंत्र शक्ति में बंद नागबल की तरफ था।"आप शांत हो जाइये,महात्मा।"सौडांगी ने अनुनय किया।"मै आपको सारी बातें बताती हूं।"
सौडांगी ने नागबल के वहाँ आने और नागराज के साथ नागबल की भिड़ंत का एक एक किस्सा कालदूत को सुनाया।
"ये तुमने बहुत गलत किया है सौडांगी,"कालदूत गरजती आवाज में बोले।"तुमने जिसे अपनी तंत्र शक्ति में कैद किया है, वो कोई और नही।विषनगरी के महान रक्षक नागबल हैं।"
"माफ़ कीजियेगा ,मै इस बारे में नही जानती।"सौडांगी सिर झुकाकर बोली।
"अब इन्हें इस तंत्र से आजाद करो"कालदूत का हुक्म सुनाई दिया।"क्योंकि कुछ देर पहले हुई लड़ाई और तुम्हारे तंत्र को तोड़ने में मेरी काफी शक्ति खर्च हो गई है।उसे लौटने में वक़्त लगेगा।"
"माफ़ कीजियेगा महात्मा कालदूत,"सौडांगी बोली।"पर इस तंत्र को मै तो क्या,आप भी नहीं तोड़ सकते।ये तंत्र कभी ख़त्म नही होता और अंदर फंसे नागबल भी कभी बाहर नही निकल सकते ,क्योंकि इसे सिर्फ बाहर से खोला जा सकता है।"
"और इसे खोलने की शक्ति सिर्फ नागदेव ने नागराज को दी है, दो वर्ष पूर्व हुए नागयज्ञ में।"कालदूत बड़बड़ाये।
कालदूत(मन में)अगर मैने नागराज के सिर पर लगी मणि को छुआ,तो सारी सत्य शक्तियां खत्म हो जाएंगी मेरी ।कोई और रास्ता निकलना होगा।

90 लाख वर्ष पूर्व
स्थान:-स्वर्ण क्षेत्र(विषनगरी)
वो एक बेहद खूबसूरत लड़की थी,जिसे उस शैतान ने चुना था खुद के लिए।
कारण था,देवों के खिलाफ एक ऐसा योद्धा खड़ा करना,जो उन्हें परास्त करके विष नगरी को उनके कब्जे में करवा सके।जिसके लिये उन्हें आवश्यकता थी,एक ऐसे बालक की, जो शैतान का पुत्र हो,पर जन्म एक देवों के बनाये नगरी,विषनगरी की कन्या के गर्भ से ले।
शैतान ने एक छद्म रूप रखकर उसके पिता से मुलाकात की।
वो युवक बेहद खूबसूरत था,जिसे देखते ही लतिका मोहित हो गई।उसके पिता इस वक़्त बेहद थके हुए जंगल से लौटे ही थे।कि युवक सामने आ खड़ा हुआ।
"प्रणाम"बेहद विनम्र तरीके से वो आदरपूर्वक झुका।
"कहो युवक,कौन हो तुम?"लतिका के पिता को उसका विनम्र स्वाभाव भा गया।
"मेरा नाम आर्द्र है और मै क्षितिजनगर का निवासी हूं।"मुस्कान थिरकी उसके होंठो पर।"मै वहाँ महाराज आदित्य की सेवा में कार्य करता हूँ।मुझे यहाँ किसी कार्यवश आना पड़ा।"बेहद आराम से उसने कहना शुरू किया।"मै यहाँ से गुजर रहा था कि मेरी नजर आपकी पुत्री की तरफ पड़ी।"
लतिका के पिता चौंके।
"बात ये है कि मुझे आपकी पुत्री पसन्द है।"आर्द्र ने बात पूरी की।"यदि आपको मेरी बात से एतराज़ न हो तो मै आपकी पुत्री से विवाह करना चाहता हूँ।"
लतिका के पिता ने पलटकर लतिका की तरफ देखा।वो शर्मा के घर के अंदर चली गई।फिर वो मुस्करा कर आर्द्र की तरफ पलटे।"मुझे इस रिश्ते से कोई एतराज नहीं।"
शैतानों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई।
कुछ दिनों पश्चात् लतिका और आर्द्र का विवाह हो गया।परंतु आर्द्र तो एक शैतान था,महर्षि देव और महाराज आदित्य के होते वह क्षितिजनगर में प्रवेश करने की सोच भी नहीं सकता था।
शैतानों ने मिलकर एक दिव्य नगरी का निर्माण किया, जो किसी स्वर्ग की भांति लगती थी।हालाँकि ये पृथ्वी के बेहद करीब थी,पर स्वर्णक्षेत्र से इसकी दुरी काफी लंबी थी।
वक़्त बीतता गया।लतिका गर्भ से हो गई थी।सभी शैतान उसके होने वाले बच्चे के लिए उसकी हर तरह से देखभाल करने में लगे थे।वो वहाँ बेहद खुश थी,हालांकि उसे ये नही पता था कि वो शैतानों के बीच फंसी है।
दूसरी तरफ, लतिका की कोई खबर न होने पर उसके पिता को उसकी चिंता हुई और वो उसे देखने क्षितिज़नगर चल दिये।
क्षितिजनगर पहुंचने पर उनके सामने आर्द्र की सच्चाई खुल गई।
उन्हें समझ आ गया था कि अब लतिका शायद नही लौटेगी।पर वो कर भी क्या सकते थे।तभी उन्हें महर्षि देव का ध्यान हो आया।"उन्होंने और महाराज आदित्य ने तो आजतक न जाने कितने ही शैतानों का अंत किया है।"यही सोचकर उनके कदम वापस पलट गए।
आदि आश्रम
वर्षों से वहाँ रह रहे एक ऋषि का नाम पुरे राज्य में काफी प्रचलित है।खुद महाराज आदित्य भी इनका सम्मान करते हैं।इन्होंने ही महाराज आदित्य को युद्ध कला में निपुण किया और कई अचूक औषधि की जानकारी ये रखते हैं।साथ ही कई दिव्यास्त्र के भी ये ज्ञाता हैं।इन्हें राज्य में महर्षि देव के नाम से जाना जाता है।
लतिका के पिता ने आते ही उन्हें प्रणाम किया।
"कहो कणिक, आज परेशान होने का कारण क्या है?"महर्षि देव के मुंह से बोल निकले।
"महर्षि,आप तो सब जानते हैं।"कणिक के मुंह से बोल न निकल पा रहे थे।
महर्षि देव ने गौर से उसके मस्तक की तरफ देखा, और अब तक उसके और उसकी पुत्री के साथ घटी सारी कहानी उनके सामने आ गई।
"इन सारे कार्य के लिए तो नागबल अकेले ही उन सारे शैतानों से निपट सकते हैं।"महर्षि देव के चेहरे पर मुस्कान के साथ एक तेज था।"क्या तुमने उनसे संपर्क किया?"
कणिक का सिर असहमति में हिला।
"मै उनसे सम्पर्क करता हूँ।तुम निश्चिन्त रहो"महर्षि देव नागबल से सम्पर्क बनाने लगे।
शैतानों के बनाये इस छद्म रूप का आवरण जल्द ही उतरने वाला था।आर्द्र अब भी गर्भवती लतिका के करीब था।जब मानसिक संकेत से उसे पता चला कि विष नगरी का रक्षक नागबल उनके करीब आ चुका है।
नागबल जो बेहद तेजी से अपनी असीमित शक्तियों के बल पर शैतानों को कैद करते जा रहे थे।शैतानों के वार महर्षि देव के दिये हुए कवच के पार जाकर नागबल को नुकसान पहुंचा पाने में असफल थे।अब आर्द्र को वहाँ आना ही था।
आर्द्र ने आते ही घातक काली शक्ति का वार नागबल पर किया।पर महर्षि देव के कवच को तोड़ पाना आसान नहीं था।
"ओह्ह,तो तुम हो इनके नायक?"नागबल का गुस्सा भड़का।
आर्द्र ने कोई जवाब नहींदिया,बल्कि पहले से भी घातक शक्ति का हमला नागबल पर कर दिया।नतीजा शून्य ही निकला।
नागबल हवा की गति से आर्द्र के पास पहुंचे और उसे गर्दन से थाम करऊपर उठा दिया।आर्द्र का दम घुटने लगा।साथ ही वो अपने शैतानी रूप में आ गया।
"रुको नागबल,"आवाज की दिशा में देखा नागबल ने तो विनाशिका थी,जो आर्द्र की माँ थी।"छोड़ दो मेरे पुत्र को, अन्यथा इस युवती के सिर को धड़ से अलग कर दूंगी।"उसकी पकड़ में लतिका थी,जो स्तब्ध सी आर्द्र की तरफ देख रही थी।
नागबल ने आर्द्र को छोड़ दिया।आर्द्र की सांस में सांस आई।
एक साथ कई शैतान नागबल की तरफ लपके।और महर्षि देव के बनाये कवच को तोड़ने में लग गए,परंतु सारी काली ऊर्जा मिलकर भी उस कवच को तोड़ पाने में असफल हो रही थी।
विनाशिका चीखी।"अपना कवच हटाओ नागबल,अन्यथा इस युवती की मृत्यु का कारण तुम ही बनोगे।"
लतिका स्तब्ध थी कि आर्द्र ने एक बार भी उसकी मां की बात का विरोध नही किया।
एकाएक तेज प्रकाश चमका।इतना तेज कि लतिका के साथ नागबल की आँखे भी मुंद गई।कुछ ही पलों में रौशनी गायब हो गई।
नागबल और लतिका ने सामने देखा।अब शैतानों के स्थान पर महर्षि देव खड़े थे।उनके चेहरे पर मुस्कान थी।
"प्रणाम महर्षि ।"नागबल और लतिका साथ में बोले।जवाब में महर्षि ने दोनों की तरफ मुस्कुरा कर आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ उठा दिये।"चिरंजीवी भवः।"
"सारे शैतान,जो आपके आने से पूर्व सैकड़ो की संख्या में यहाँ मौजूद थे, आपके आते ही कहाँ गए?"नागबल ने उत्सुकता से पूछा।
"इसमें कोई शक नहीं, कि तुम महान योद्धा हो नागबल और उन्हें समाप्त भी कर सकते हो।"महर्षि बोले।"परन्तु तुम्हारा पहला चरण लतिका को बचाना था,जिसे उन्होंने ढाल बना लिया था।"
महर्षि ने एक चमकदार मणि नागबल की तरफ बढ़ाई।"ये लो।"
नागबल ने प्रश्नसूचक नेत्रो से महर्षि की तरफ देखा।
"ये सप्त मणि है,"महर्षि बोले।"मैने सारे शैतानों को इसमें कैद कर दिया है।वो सारे जीवित तो है,परन्तु इस मणि से तब तक बाहर नहीं आ सकते ,जब तक कोई नागशक्ति धारक मानव इसे धारण नही करता।"वो आगे बोले।"आज से तुम इसे अपने मस्तक पर धारण करोगे।तुम्हारी सत्य शक्ति इसे बाहर निकलने नही देगी।साथ ही तुम्हारी शक्तियों को ये संयमित करेगा।यदि किसी नागशक्ति ने इसे धारण किया तो वो जड़ हो जायेगा।"
नागबल ने झुककर उस मणि को स्वीकार किया।(क्योंकि नागबल विष नगरी का रक्षक है,इसलिये विषनगरी में नागों की उससे जान पहचान है)
"परन्तु लतिका का क्या महर्षि ?"सवाल अब भी थे।"यह तो गर्भ से है और यदि ये वापस स्वर्णक्षेत्र गई।तो इसके गर्भ में पल रहे शिशु की पाप ऊर्जा स्वर्णक्षेत्र में फैल जायेगी।"
"उपाय मेरे पास है।"लतिका को लेकर महर्षि गायब होने लगे।नागबल भी मणि धारण करके वापस विष नगरी लौट आए।
वो स्थान था नर्क में।यहाँ सबसे गहराई में, जहाँ नर्क में रह रहे शैतानो की ऊर्जा चरम सीमा पर होती थी,महर्षि देव ने एक छोटे से दिव्य ज्योति नाम का लोक बनाया ,जिसमे गर्भवती लतिका रहने लगी।इस लोक पर बाहर से होने वाले हमलों का कोई असर नहीं होता था, न ही बाहर से कोई अंदर प्रवेश कर सकता था।इस लोक से बाहर जाने के लिए इसे अंदर से खोला जा सकता था।
वक़्त बीतता गया और लतिका ने बालक को जन्म दिया, परन्तु पाप ऊर्जा को वो संभाल नही सकी और प्रसव पश्चात् ही उसकी मृत्यु हो गई।
बालक उस लोक के आसपास की काली ऊर्जा को ग्रहण करते हुए बड़ा होने लगा।बाहर की काली शक्तियां उसे रिझाने की हर संभव कोशिश करती,पर वो बाहर नहीं गया।हजारों वर्ष बीत गए और बालक अब युवा हो चूका था।वक़्त ने अब तक बाहर की दुनिया का लालच भर दिया था उसमे।एक दिन वो बाहर निकल गया।
बाहर निकलकर उसकी मित्रता जलयक्ष और सौराद्र नाम के दो शैतानों से हो गई।जिन्होंने आर्द्र और लतिका की प्रेम कहानी उसे सुनाई और उसे सत्य बता दिया।इस कहानी में उन्होंने महर्षि देव और नागबल को ही बुरा बताया,पर छद्म रूप धारण करके उसकी मां से धोखा करने के कारण उसे नफरत आर्द्र से ही हुई।
जलयक्ष और सौराद्र ने उसे काली शक्तियों में निपुण बना दिया और उदय हुआ"अज्ञात"।
जिसे नफरत थी छद्म रूप से और छद्म रूप धारण करने वालो से।

सूरज और फेसलेस का सफर शुरू हो चूका था पाताल तक पहुंचने का,पर ये आसान नहीं होने वाला था।
पाषाण इलाके से गुजर रहे थे इस वक़्त फेसलेस और सूरज,जब पाषाण सैनिकों की नजर उन पर पड़ी।
"वहाँ देखो,"एक सैनिक ने दूसरे को बताया।"अवश्य ही ये दोनों कोई हमलावर हैं।चलो सेनापति को बताये।"
इन बातों से बेखबर फेसलेस और सूरज बढ़े जा रहे थे कि अचानक हुए पाषाण वार ने उनका ध्यान खींचा।एक जोरदार वार ने उनके तंत्र ऊर्जा से बने सवारी के चीथड़े उड़ा दिए।दोनों तेजी से नीचे की तरफ गिरने लगे।वो जमीन से टकराने ही वाले थे कि फेसलेस ने एक पाषाण सैनिक को पकड़ लिया।नतीजा वो उसके ऊपर ही गिरा।पर चोट फिर भी लगी उसे।दूसरी तरफ सूरज सीधे जमीन से जा टकराया।पर इस वक़्त उसके सिर पर गुस्सा सवार था,इसलिये वो तुरंत उठा और एक जोरदार मुक्का पास ही खड़े सैनिक को जमा दिया।सूरज के इस वार से सैनिक का सिर धड़ से अलग हो गया।दूसरा सैनिक ये देखकर भाला लेकर सूरज की तरफ लपका।उसने भाला सूरज के सीने में घुसाने के लिए फेंका पर सूरज ने उसे थामा और वापस उसी सैनिक के सिर में घुसा दिया।तब तक पहला सैनिक ,जिसे सूरज ने तोड़ दिया था, वापस खड़ा हो गया था।
"जब तक ये जमीन से जुड़े हैं, ये मरेंगे नही।"फेसलेस चीखा।"इन्हें मारो मत,इनसे बात करने की कोशिश करो।"
"मुझे नहीं लगता।"सूरज अब भी गुस्से में था।उसका गुस्सा पाषाण सैनिकों पर निकल रहा था।वो टूटकर जुड़ते जा रहे थे,पर सूरज को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।पर आखिर कब तक वो दोनों टिक पाते।फेसलेस तो एक तरफ हवा में तंत्र की सहायता से उड़ रहा था, पर सूरज उनका आसान निशाना था।सूरज के जूनून में कोई कमी नही आई थी, जब तक उसे बुरी तरह मार मार कर बैठा नही दिया गया।दूसरी तरफ फेसलेस को भी उसके आसपास पहाड़ के रूप में चट्टानें खड़ी करके पकड़ लिया गया।
"तो यही है वो दोनों घुसपैठिये?"सामने एक सैनिक कुछ ज्यादा ही साज सज्जा के साथ नजर आया।
"हम घुसपैठिये नही है।"फेसलेस ने प्रतिवाद किया।"हम यात्री हैं, जो सिर्फ पाताल लोक जाना चाहते हैं।"
"क्यों?"शायद वो सेनापति था।"क्या तुम लोग वही के रहवासी हो।अगर हां,तो भूलोक से कैसे जा रहे थे?"
जवाब में फेसलेस ने उन्हें सारा किस्सा सुनाया।जिसके बाद:-
"हम सभी माफ़ी चाहते हैं, जो कुछ भी हुआ।दरअसल हम भी भूलोक वासियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।इस लोक के कुछ नाग भूलोक के महान योद्धा नागमानव नागराज के साथ काम करते हैं।"एक रथ की तरफ इशारा करते हुए उसने कहा।"आप लोगों का जो समय व्यर्थ हुआ,उसे आप इस रथ के द्वारा पूरा कर सकेंगे।"
दोनों ने सिर नवाकर उनका शुक्रिया अदा किया और रथ से आगे का सफर तय करना शुरू किया।
अभी वो ज्यादा दूर नही निकले थे कि फेसलेस बोला।"एक जंग और लड़नी है सूरज।"
"मतलब?"सूरज नही समझा उसका मतलब।
"आगे वो नगरी आने वाली है, जहाँ निगेटिव्स को धकेल दिया गया था।" फेसलेस की बात ख़त्म हुई ही थी कि एक वार ने उनके रथ के टुकड़े कर दिये।
दोनों तेजी से जमीन पर जा गिरे।उनके उठ पाने से पहले हीदोनों की गर्दन पर शिकंजे आ कसे।सूरज ने उसे पकड़ने के लिए हाथ पीछे घुमाया,पर परछाई कभी पकड़ में आ सकी है, जो उस वक़्त आ जाती।चारों तरफ अँधेरे की चादर फैली थी।
"फेसलेस,कही ये हम पे काबू न कर लें।"सूरज बोला।
"नही सूरज,जो सूट हमने पहन रखा है उसके चलते ये हम पर काबू नहीं कर सकते।"फेसलेस बोला।"तुम्हारे सूट में नाईट विजन है,उसे चालू करो और इनके वारों से बचो।"
नाईट विजन में परछाई नजर तो नही आती,पर अँधेरे में हलचल नजर आने लगी।सूरज के समझ पाने से पहले ही एक जोरदार मुक्का उसके चेहरे पर पड़ा।
सूरज दूर जा गिरा।
गुस्से में वो उठा ही था कि जोरदार रौशनी से उसकी आँखे चौधिया गई।
ये फेसलेस का तिलिस्म था,जिसने एक नए सूरज को जन्म दिया था।"चलो सूरज,हमे निकलना चाहिए।"फेसलेस का इशारा रथ की तरफ था,जो जमीन से टकराने के कारण फिर जुड़ गया था।
दोनों रथ में सवार हुए।फेसलेस ने एक तिलिस्म का निर्माण किया ताकि वो उनके पीछे न आ सके।
सफर चलता रहा।
"मुझे लगा नही था ये इतना आसान होगा।"सूरज बोला।
"कुछ भी आसान नहीं है सूरज,"फेसलेस बोला।"निगेटिव्स में एक योद्धा ऐसा भी था,जो वहाँ मौजूद नही था।मतलब वो हमारे आसपास हो सकता है।"
सूरज और फेसलेस चौकन्ने हुए।
"ये डरावनी आवाजें कौन निकाल रहा है?"सूरज बोला।
"शैतान..."फेसलेस बोला।"लगता है, हम पाताल लोक पहुँच गये हैं।"

इन बातों से बेखबर अज्ञात अपने अगले शिकार की तरफ बढ़ रहा था।
"आपका ये शिकार तो नाग सम्राट से भी ज्यादा खतरनाक है।"डार्ककोड बोला।
"जानता हूं डार्ककोड।इसलिये इसके लिए मै अपने दिमाग का इस्तेमाल पूरी तरह करूगा।"अज्ञात के चेहरे पर मुस्कान थी।

होने वाला था सबसे बड़ा टकराव।

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