Tuesday, 16 August 2016

【℃OP 】 प्रस्तुत करते हैं

नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, परमाणु, कोबी और शक्ति का एक सनसनीखेज विशेषांक

कथा एवं संपादन - *अंकित निगम*
कैलीग्राफी - *गूगल हिंदी फ़ॉन्ट्स*
चित्रांकन एवं रंगसज्जा - *जो करेगा उस पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा होगी* 😜

नोट-: ( ) के अंदर लिखी गयी बात मन में कही जा रही है

पूर्वसार- भाग 1 और भाग 2 में पढ़ें 😉
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*हिमालय की वादी में*

"इसकी पकड़ से तो मेरा अदृश्य रूप भी नहीं छूट पा रहा है"
किरीगी के यौगिक पंजों में फंसा हुआ नागराज छूटने की हर संभव कोशिश कर रहा था

"अगर स्वयं को जीवित देखना चाहता है तो बता दे कि कहाँ भेजा है तूने ध्रुव और शक्ति को, वरना उनका पता मैं तेरी आत्मा से पूछूँगा"

"नागराज की आत्मा इतनी आसानी से नहीं निकलने वाली है किरीगी" नागराज की कलाइयों से सर्प निकलकर गुच्छे के रूप में किरीगी से टकराए

"ये वार मुझे लेश मात्र भी हानि नहीं पहुंचा सकते नागराज"

"किन्तु कुछ पलों के लिए आपका ध्यान अवश्य भटका सकते हैं...और वो कुछ पल काफी हैं मेरे छूटने के लिए"
ध्यान भटकने के कारण यौगिक ऊर्जा की पकड़ ढीली हो गई जिससे नागराज आज़ाद हो गया

"इतना प्रसन्न मत हो नागराज मैं दोबारा भी ऐसा कर सकता हूँ"
किरीगी ने पुनः यौगिक वार किया

"अब नही किरीगी, नागराज एक गलती दोबारा नहीं करता"
नागराज की कलाइयों से सैंकडों सर्प एक दीवार की भांति यौगिक शिकंजे से टकरा गए और उसे रोक लिया

(ध्रुव ने मेरे लिए काफी सोंच समझ के ये जगह और प्रतिद्वंद्वी चुना है, एक तो इस ठण्ड में मेरी इन्द्रियां शिथिल पड़ रही है...दूसरा यहाँ पर मेरी सर्प शक्तियों और विष फुंकार का दायरा भी सीमित है... ऊपर से किरीगी की यौगिक शक्तियां... इसके पास जाकर विष फुंकार का इस्तेमाल करना होगा)

नागराज ने अपनी पूरी शक्ति से उड़कर किरीगी के पेट पर वार किया और वो दूर जा गिरा ... संभल पाने से पहले ही नागराज ने किरीगी के पास पहुँच कर उस पर अपनी तीव्र विष फुंकार छोड़ दी ... पर किरीगी को कोई असर नहीं हुआ

■[नागराज की उड़ने की शक्ति के बारे में जानने के लिए पढ़ें *फ्यूल*]

"मुझे तेरे विष का प्रभाव ज्ञात है नागराज इसलिए मैं तुझसे श्वास रोक कर लड़ रहा हूँ... और अपनी योग ऊर्जा से मैं कई घंटो तक श्वास रोक सकता हूँ"
नागराज के मुंह पर घूंसा मारते हुए किरीगी ने कहा

नागराज ने वायु में ही खुद को संभाला और किरीगी पर नागफनी सर्पों से वार किया जो गोली की तेज़ी से किरीगी के शरीर में कई छेद बनाते हुए पार निकल गए ...
"ये अवश्य ही कोई देव ऊर्जा युक्त सर्प हैं वरना मेरे यौगिक शरीर को यूँ क्षति पहुँचाना असंभव है"

किरीगी अभी संभल भी नहीं पाया था की नागफनी सर्पों ने ध्वंसक सर्पों की बारिश कर दी ... एकाएक हुए इस अप्रत्याशित वार से किरीगी का क्रोध सीमा पार कर गया और उसने अपने खड़ग से नागफनी सर्पों को काट डाला और खड़ग लेकर नागराज पर टूट पड़ा

(ये तो अच्छा है की धमाकों ने वातावरण को कुछ देर के लिए सामान्य कर दिया है अब इतने समय में ही इसे हराना होगा... सर्वप्रथम इसके हाथों से खड़ग गिरानी होगी)
किरीगी के वारों से बचते हुए नागराज ने एक सटीक स्नेक हैण्ड वार किरीगी के हाथों पर किया और उसकी खड़ग जमीन पर आ गई... किन्तु अगले ही पल वो दोबारा किरीगी के हाथों में थी।

"मेरी खड़ग मेरे मानसिक सम्पर्क में रहती है नागराज"
"अगर ऐसा है तो अब नहीं रहेगी"

 इतना कहकर नागराज ने किरीगी की कलाई पर ध्वंसक सर्प छोड़े जिसके धमाके से एक बार फिर उसकी खड़ग जमीन पर आ गई... किन्तु इसबार खड़ग के गिरते ही नागफनी सर्पों ने उसके इर्दगिर्द एक शिकंजा बना दिया... अब किरीगी और उसकी खड़ग का संपर्क टूट चूका था

"ये असम्भव है" आश्चर्यचकित किरीगी ने कहा
"ये सर्प देव कालजयी का वरदान हैं किरीगी... और इनमे हर प्रकार की किरणों को रोकने की क्षमता है चाहे वो तंत्र हो , ऊर्जा हो या फिर... मानसिक"

(नागराज देव ऊर्जा युक्त प्राणी है अर्थात देवों के द्वारा दिए गए लाल हीरे की शक्तियां इस पर व्यर्थ हैं...  )
किरीगी ने अब नागराज पर अपने यौगिक वारों की तीव्रता को बढ़ा दिया... नागराज ने नागफनी सर्पों का प्रयोग किया पर

"मैंने अपने शरीर को यौगिक कवच में धक् लिया है नागराज ... अब तेरा कोई भी वार मुझे छु भी नहीं पाएगा"
दोनों ही अद्भुत योद्धा थे कोई भी हार मानने को तैयार न था

(मेरी शक्तियां इसके कवच पर बेअसर हैं किन्तु इसकी खड़ग अवश्य इस पर असर करेगी... check कर लेते हैं)
किरीगी का अगला वार बचाते हुए नागराज ने सर्प की फुर्ती से अपनी कलाई से नागफनी सर्पों की रस्सी निकाली जो खड़ग पर लिपट गई ... और बिना एक क्षण गंवाए नागराज ने एक झटके से उसे किरीगी पर उछाल दिया... किरीगी की खड़ग जो हर कवच को काटने में सक्षम थी ... इस कवच को भी चीरते हुए किरीगी की नाभि में धंस गई और किरीगी चेतना विहीन हो गया।
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इसी दौरान एक और घटनाक्रम महानगर में भी घटित हो रहा था.... मिसकिलर के निर्देशानुसार रोबो और उसकी आर्मी नागराज विहीन महानगर के म्युज़ियम के बाहर एकत्रित थे जहाँ रखा था

" *नागराज का खजाना* लूटना है हमें... ध्यान रहे एक नग तक नहीं छूटना चाहिए"
रोबो ने अपने आदमियों को आदेश दिया और वो चल दिए
"रुक जाओ... हम तुम्हे चेतावनी देते हैं"
सुरक्षा कर्मी हरकत में आ गए.... लेकिन अगले ही पल रोबो फ़ोर्स के हाईटेक हथियारों ने उस हरकत को हमेशा के लिए शांत कर दिया... रोबो फ़ोर्स आगे बढ़ी ही थी कि ... किरणों के एक घेरे ने उन्हें कैद कर लिया और एक आवाज़ सुनाई दी

"तुम लोग यहाँ से सीधा पुलिस स्टेशन जाओगे"

"अब कौन आ गया "
रोबो आवाज़ की दिशा में पलटा तो
" *शक्तिमान* .... महानगर में"

"शक्तिमान नै को रे बाबा कॉपीराइट का issue है.... *महाकाल* बोल महाकाल"

"महाकाल(सोंचते हुए)...देख क्या रहे हो मारो इसे... ये कोई बहरूपिया है"
रोबो के आदमी महाकाल की तरफ बढ़े लेकिन उसने एक ज़ोरदार फूंक से सबको हवा में बिखेर दिया... जमीन पर गिरते ही रोबो फ़ोर्स ने घातक हथियारों से वार किया और महाकाल का शरीर टुकड़ों में बिखर गया
"चलो अब अपना काम करें" एक आदमी बोला लेकिन अचानक कई सारी गोलियां चल पड़ी ... एक रॉकेट लॉन्चर भी दगा और आधी रोबो फ़ोर्स साफ़ हो गई

"डोगा के सामने बंदूकों की धौंस नहीं दिखाते छछूंदरों" डोगा ने फिर से कई गोलियां चला दी और जवाब में रोबो फ़ोर्स ने भी अपने आधुनिक गन्स से वार किए... एक गोली डोगा के कंधे को चीर गई

"अता माज़ी सटकली(गुस्से से)"

अंधाधुंध गोलीबारी होने लगी ... गुस्साए हुए रोबो ने अपने बचे हुए दो चार आदमियों में से एक के शरीर में पॉवर सीरम इंजेक्ट कर दिया ...
जिससे उसका शरीर अमानवीय रूप से विशाल और शक्तिशाली हो गया और उसने डोगा को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर मसल दिया

"हा हा हा हा..... " बहुत विभत्स अट्टहास था उसका लेकिन ज़्यादा देर न चल सका.... उसी के समान विशालकाय हरे रंग के शरीर वाले एक प्राणी ने उसे एक जोरदार मुक्का जड़ दिया
"अब ये कौन है" परेशान रोबो बोल उठा

" *I am HULK* " भारी भरकम आवाज़ में हरे आदमी ने अपना परिचय दिया और फिर पलटकर जुट गया रोबो के जमूरे की पिटाई करने में .... उसे ख़त्म करके HULK जैसे ही मुड़ा... बौखलाए हुए रोबो की लेज़र आई चमकी और HULK बीच से दो फाड़ हो गया

"ये नागराज क्या गया महानगर से .... सारे सुपर हीरो यहीं आ धमके " परेशान रोबो बड़बड़ाया
"तभी तो मैं नागराज से कहता हूँ ... भाई तुम कहीं मत जाया करो... पर वो मेरी सुने तब ना" किसी ने पीछे से रोबो के कंधे पर हाथ रख कर कहा

"अब कौन" झल्लाते हुए रोबो पलटा
"मैं.... *नागू* .... और ये थे मेरे *FANTASTIC FOUR* "
"4 नहीं ... 3 थे" रोबो के किसी आदमी ने बोला"

"खामोश (शत्रुघ्न सिन्हा style) ... जब बड़े बात करते हैं तो बच्चे नहीं बोलते... और चौथा तो मैं खुद हूँ बे... हाँ तो रोबो भाई कैसी लगी मेरी एक्टिंग"

"वाहियात !!!.... मैं इसे रोकता हूँ तुम लोग खज़ाना लेकर आओ"
इतना बोलकर रोबो नागू से उलझ गया
" जाओ-जाओ... पर किस म्यूजियम में जाओगे"
मणि शक्ति से वहां पर कई और म्यूजियम खडे हो गए थे... हूबहू असली जैसे... और रोबो के आदमी उसी में उलझकर रह जाते मगर

"इधर आओ बेवकूफों... ये रहा असली म्यूजियम और ये असली खज़ाना... उठा कर ले चलो इसे इससे पहले की नागू को पता चले"

"जी कमांडर"

खजाने की चोरी से अनजान नागू अभी रोबो से लड़ने में ही व्यस्त था... किन्तु खज़ाना चुराने के बाद मिसकिलर ने रोबो सहित सबको वहां से टेलीपोर्ट कर लिया... और नागू
"हाँय.... ये कहाँ गायब हो गया... और ... और खज़ाना भी गायब.... क्या मुह दिखाऊंगा मैं नागराज को"

*रोबो के अड्डे पर*
"तुमने असली म्यूजियम कैसे खोज लिया कमांडर ... *नताशा*"

"ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानि... GPS की मदद से... उससे असली म्यूजियम को लोकेट कर लिया... लेकिन ये बताओ की ध्रुव ने नागराज को ख़त्म किया या..."

"नहीं... नागराज ने ना जाने कौन सा जादू किया जिसकी वजह से ध्रुव और शक्ति वहां से गायब ही हो गए ..."
मिसकिलर ने एक स्क्रीन पर नताशा और रोबो को हिमालय में घटे घटनाक्रम दिखाए

"नहींSSSSS.... ध्रुव को कुछ नहीं हो सकता..... नागराज ऐसा नहीं कर सकता... उसे मेरे ध्रुव को वापस लाना होगा.... वरना जैसे उसने ध्रुव को गायब किया है... वैसे मैं उसके महानगर को गायब कर दूंगी इस दुनिया से.... डैड ... हम महानगर जा रहे हैं"
गुस्से से बौखलाई हुई नताशा आँखों में हैवानियत लिए वहाँ से निकल गई और उसके पीछे रोबो भी...

"रुको नताशा ... रोबो.... उफ़... ध्रुव पहले ही न जाने कहाँ गायब है और अब ये दोनों भी चले हैं मौत को गले लगाने.... धनंजय भी नागदीप में अपना काम पूरा नहीं कर पाया है... कोई ख़ुशी की खबर है तो बस ये... कि नागराज का खजाना मेरे पास है।"
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"ये कौन सा स्थान है ध्रुव, और तुम उड़ कैसे पा रहे हो?"
एक अजीब से स्थान पर खड़ी शक्ति ने विस्मित होते हुए पूँछा

दोनों खुले आसमान में उड़ रहे हैं, दूर दूर तक ज़मीन का नामोनिशान भी नहीं ... चारों ओर कुछ अजीब से निशान बने हुए हैं ... एक ओर मद्धिम सूर्य है जिसकी लालिमा चारों ओर बिखरी हुई है।

"पता नहीं शक्ति .... हम कहाँ हैं, मैं उड़ कैसे रहा हूँ और ये भी नहीं पता की जाना कहाँ है"

"यह प्रश्न क्षेत्र है... और तुम उड़ रहे हो क्योंकि मैं तुम्हे उड़ने दे रहा हूँ"
सूर्य के विपरीत दिशा में हवा से प्रकट हुए एक विशालकाय शख्स ने उनकी तंद्रा तोड़ी

"यहाँ प्रश्न उत्तर मिलाओ और आगे की राह पाओ, मैं प्रश्न करूँगा और तुम्हे उत्तर देने होंगे ... किसी एक प्रश्न और उत्तर के मिलने पर आगे का मार्ग प्रशस्त होगा... तुम बीच में चाहो तो मुझसे कोई एक प्रश्न कर सकते हो... पर हाँ ... बस एक प्रश्न"

"उससे पहले मैं तुम्हे परलोक पहुंचा दूँगी"
शक्ति ने उस पर वार करना चाहा किन्तु
"ये क्या मेरे हाथों की ऊष्मा कहाँ गई" शक्ति ने आश्चर्य से अपने हाथों को देखा

"प्रश्न क्षेत्र में तुम्हारी कोई आंतरिक शक्ति कार्य नहीं करेगी"

"अगर हम तुम्हारे सवालों के..."
"रुक जाओ शक्ति... ठीक है तुम प्रश्न करो"
ध्रुव ने शक्ति को बीच में रोकते हुए कहा

"तुमने मुझे रोका क्यूँ?"
"हमारे पास इससे सवाल करने का एक ही मौका है शक्ति और वो हमें सोच समझ के यूज़ करना होगा... मुझे यकीन है की हमें हमारे जवाब नहीं बल्कि ये सवाल ही बचाएगा"

*जैसा बर्तन वैसी काया, नहीं रुकूँगा अगर बहाया, कोशिश करके लाख देख ली, नहीं अभी तक हाथ में आया। बोलो क्या?*

"ये तो बहुत ही आसान है... पानी"
शक्ति ने तुरंत ही उत्तर दिया और उसके बोलते ही उस पर एक जोरदार वार हुआ... ये वार हवा से प्रकट हुए विशाल दानव ने किया था

"मैं बताना भूल गया था की ये खेल उतना भी आसान नहीं है यहाँ पर लगातार ये दानव प्रकट हो कर तुम दोनों को मारने का प्रयास करते रहेंगे ... और प्रत्येक गलत उत्तर पर तुम्हारी कोई बाह्य शक्ति क्षीण हो जायगी जैसे की इस गलत उत्तर के बदले में तुम्हारी खड़ग लुप्त हो गई है"

" *द्रव* यानि Liquid... पानी द्रव का ही एक प्रकार है और द्रव में ये सभी गुण होते हैं"
दानवों से बचते हुए ध्रुव ने कहा

"सही जवाब लड़के... प्रश्न उत्तर मिलाओ आगे की राह पाओ" उस विशालकाय शख्स ने मुस्कान के साथ कहा
*बिन बादल बरसात करा दूँ, सुबह को मैं रात करा दूँ, दुनिया भर की सैर करा दूँ, मीलों तक मैं बात करा दूँ। बताओ क्या?*

(दानवों की संख्या बढ़ती ही जा रही है और इनपर हमारे वार भी बेअसर है... शक्ति का खड़ग भी लुप्त है ... जल्दी ही यहाँ से निकलना होगा)

"इस पहेली का तो कोई तुक ही नहीं है ध्रुव... हर लाइन का अलग जवाब लग रहा है"
"यही मैं भी... अरे हाँ ... *विज्ञान* .. इसका जवाब है विज्ञान ... उसी से ये सब संभव हुआ है"
"अतिउत्तम.... "

पहेलियों का सिलसिला चलता जा रहा था और हमलावरों की संख्या बढ़ती जा रही थी ... शक्ति अपने मुंड से उन्हें रोकने का प्रयास कर रही थी

"प्रश्न उत्तर मिलाओ , आगे की राह पाओ"
*श्याम वर्ण का उजला तारा, दूर करे सबका अँधियारा, पहर-पहर ये राह बदलता, पर स्थिर कहता जग सारा*

" *सूर्य* .. .. सूर्य सबको प्रकाश देता है और वैज्ञानिकों के अनुसार वो एक आदर्श कृष्णिका है, पृथ्वी के घूर्णन की वजह से हर पहर इसकी दिशा बदल जाती है पर वास्तव में ये स्थिर रहता है... यही सही उत्तर ... उत्तर"
ध्रुव ने मन में कुछ सोंचा और

"मैं अब अपना सवाल पूंछना चाहता हूँ"

"अवश्य ... पूंछो जो पूंछना है"

"आपका नाम क्या है?"
"क्या तुम वास्तव में इसी प्रश्न का उत्तर चाहते हो?"
"हाँ..."
"यहाँ जान पर बनी है और तुम्हे इससे जान पहचान बढ़ानी है... क्या हो गया है तुम्हे ध्रुव" शक्ति ने कहा

"प्रश्न... प्रश्न नाम है मेरा"

"Yesss... मुझे पता था की यही नाम होगा... शक्ति हमें इसे उत्तर दिशा में बने उस निशान की ओर धकेलना होगा तभी हम आगे जा पाएंगे"

"जैसा तुम कहो... ये सूर्य के विपरीत खड़ा है अर्थात पश्चिम में .... हमें इसे दाहिनी ओर धकेलना होगा"
शक्ति और ध्रुव ने मिलकर प्रश्न पर प्रहार किया लेकिन उसका शरीर हिला तक नहीं

"हा हा हा... प्रश्न को हिलाना इतना आसान नहीं है"

"तू अभी शक्ति की शक्तियों को जानता नहीं है प्रश्न"
शक्ति ने पूरी शक्ति से उड़ कर प्रश्न को टक्कर मारी और प्रश्न का शरीर उड़ कर दाहिनी ओर चला गया .... किन्तु कुछ भी नहीं हुआ

"हा हा हा....."

"लगता है तुम्हारा सोंचना गलत था ध्रुव"
(ध्रुव भी पहले निराश हुआ लेकिन फिर बोला)

"मेरा सोंचना गलत नहीं है शक्ति... प्रश्न उत्तर मिलाने का मतलब पहेलियाँ हल करने से नहीं बल्कि इस प्रश्न नाम के दानव को उत्तर दिशा में बने इस निशान से मिलाना है...बस दिशा गलत है... वास्तव में ये संध्या का सूर्य है ...  डूबता हुआ ... और उस हिसाब से उत्तर अब प्रश्न के ठीक विपरीत दिशा में है।"

इतना कहकर ध्रुव हवा में कलाबाजी खाते हुए प्रश्न के पीछे जा पहुंचा और उसे स्टार लाइन की सहायता से एक हमलावर दानव के पैरों से बांध दिया... इसके बाद शक्ति उस दानव को अपनी ओर आकर्षित करके उत्तर की ओर उड़ पड़ी... किसी के कुछ समझ पाने से पहले ही वो प्रश्न को लेकर दूसरी दिशा में पहुँच चुका था जैसे ही प्रश्न उत्तर में पहुंचा वहां एक द्वार उत्पन्न हो गया और शक्ति और ध्रुव उसमें प्रवेश कर गए।

"तुमने कैसे जाना की ये संध्या काल था" शक्ति ने पूंछा तो ध्रुव बोला
"मैनें महसूस किया की यहां का वातावरण गर्म है जबकि प्रातः काल का वातावरण ठंडा होता है... उसी से अनुमान लगाया।"
"लेकिन इस वक़्त हम हैं कहाँ?"
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इधर हिमालय की बर्फ में खड़ा नागराज वेदाचार्य से कही गई बात याद कर रहा था

*FLASHBACK*
"दादाजी, आप एक काम करिये... ध्रुव के लिए एक तिलस्म का निर्माण कीजिए, ताकि यदि स्थिति गंभीर हो तो मैं उसे इस तिलस्म के सहारे घटनाक्रम से बाहर कर सकूँ... उसकी अनुपस्थिति में मैं सब ठीक कर सकूँगा"

"लेकिन वो तिलस्म में ही फंस गया तो?"

"ऐसा होगा तो नहीं ... वो अवश्य ही तिलस्म तोड़ लेगा... लेकिन फिर भी अगर ऐसा हुआ तो सब कुछ ठीक हो जाने पर हम उसे तिलस्मघाती की सहायता से वापस ले आएंगे... पर ध्यान रहे की तिलस्म में उसकी मृत्यु नहीं होनी चाहिए"

"ठीक है नागराज... मैं तुम्हारे सर्पों को अभिमंत्रित कर दे रहा हूँ ... तुम जब भी इन्हें एक विशेष आकर बनाने का आदेश दोगे तिलस्म उपस्थित हो जाएगा।"

वर्तमान में
(मैं ध्रुव को तिलस्म में नहीं भेजना चाहता था.... खैर अभी कमज़ोर होने का समय नहीं है...गुरु भाटिकि के संकेत के अनुसार अब मुझे नागदीप जाना होगा... )
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समय एक साथ कई घटनाक्रमों का साक्षी बन रहा था ... जिस वक़्त हिमालय पर नागराज और किरीगी का द्वन्द चल रहा था उसी समय नागद्वीप में इस कहानी का एक अन्य अध्याय लिखा जा रहा था

"अच्छा हुआ तुम स्वयं आ गए कालदूत वरना महारानी नगीना तुम्हे आदेश देकर बुलाती... देख रहे हो ना ये राजदंड... ये मेरे हाथों में है और अब मैं तुम्हारी महारानी हूँ... हा हा हा"
भयंकर अट्टाहास के साथ नगीना ने अपने वाक्य कहे

"इस राजदंड के निर्माता हम हैं ... इसकी शक्तियां भी हमारी दी हुई हैं... तूने इसे छल से प्राप्त किया है... और इस भ्रम में मत रह की तू नागदीप की महारानी है... ना तो तेरा राज्याभिषेक हुआ है... और ना ही अभी विसर्पी ने पद त्याग किया है"

अपनी कुत्सित योजना पूरी ना होते देख नगीना ने कालदूत के सामने से हटना ही उचित समझा

"परमाणु, कोबी तुम दोनों इसे यहीं रोके रखो तब तक हम ये औपचारिकताएं भी पूरी कर लेते हैं"

नगीना, विसर्पी और धनंजय के साथ वहां से भागने लगी ... कालदूत ने कालसर्पि की सहायता से उन्हें रोकना चाहा लेकिन कोबी ने पूँछ से कालसर्पि को रोक लिया

(इसने कालसर्पि को उलझा लिया है और पूँछ में कोई अस्थि भी नहीं है जो कलसर्पि तोड़ सके)

कालदूत स्वयं नगीना के पीछे जाने की चेष्टा करते हैं किन्तु परमाणु रस्सी उन्हें रोक लेती है

"इतनी भी क्या जल्दी है महात्मन्... जरा हमारा युद्ध कौशल भी आज़मा लीजिए"

"तू कालदूत की शक्तियों से परिचित नहीं है मानव... अन्यथा हमें बंदी बनाने का प्रयास भी नहीं करता"
कालदूत ने एक बार में ही परमाणु रस्सी तोड़ डाली और परमाणु पर ऊर्ज़ा वार किया

"बहुत तीव्र वार था ये... अगर मेरी पोशाक इतनी विशेषताओं से युक्त ना होती तो निश्चित ही मैं मर गया होता..."

कोबी ने भी कलसर्पि को पूँछ से ना हारते देख उसपर अपनी गदा से तीन चार प्रहार किये और कलसर्पि खंडित हो गयी .... ये देख कालदूत ने उस पर भी किरण वार किया....
"कोबी की गदा पर ऐसे मामूली वार बेअसर हैं... पर तू इस गदा से कैसे बचेगा"

किन्तु इससे पहले कोबी हरकत में आता कालदूत की शक्तिशाली पूँछ उससे टकराई ... कोबी भी लड़खड़ा गया... अब तक परमाणु संभल चुका था... उसने कालदूत पर एटॉमिक ब्लास्ट की बारिश कर दी

"कमाल है!!! इतने भीषण वार के बाद भी तू खड़ा है"

(ये मानव हम पर आणविक ऊर्ज़ा से वार कर रहा है... ये वार तो हमें हानि नहीं पहुंचाएंगे किन्तु इनसे उत्पन्न विकिरण समस्या बन सकता है)
कालदूत ने परमाणु पर चीरचला चला दिया ...

"ये अस्त्र खतरनाक हो सकता है... इससे बचना होगा" *TRANSMIT*

परमाणु के कणो में बदलकर चीरचला से तो बच गया पर कालदूत ने उसकी चाल भांप ली और अपने मष्तिष्क किरण से उसके कणों को ही बिखेरना शुरू कर दिया
"ओsssssफ... बुरा फंसा... अगर मेरे कण बिखर गए तो मैं कभी सामान्य नही हो पाऊंगा... मुझे मदद चाहिए"

परमाणु की पुकार सुन ली गई क्योंकि कोबी संभल गया और उसने बिना समय व्यर्थ किये कालदूत पर गदा दे मारी और कालदूत लड़खड़ा गए... और परमाणु ने इस मौके का लाभ उठा कर तुरंत ही स्वयं को सामान्य कर लिया

"अद्भुत शक्ति है तेरी गदा में...किन्तु हम भी कालदूत हैं"
कालदूत ने कोबी पर चीरचला चला दिया लेकिन उससे पहले ही परमाणु उसे लेकर आकाश में उड़ गया

"इन बुड्ढों टुढ्ढ़ों ने मेरा जीना हराम कर रखा है... जंगल में फुज़ो... यहाँ पर पहले वो दाढ़ी वाला और अब ये... इसकी तो मैं...गरर्रर्र"
क्रोधित कोबी पूरी ताकत से भिड़ गया कालदूत से और साथ में परमाणु भी था... लेकिन कालदूत भी कालदूत थे ...

(ताकत से तो इनसे जीत पाना असंभव है... बुद्धि प्रयोग करनी होगी... )
परमाणु कालदूत के पीछे की तरफ गया किन्तु विष्या (कालदूत में से एक) ने उसे देख लिया और उस पर अपना त्रिशूल चला दिया ...
"इस बार कणों में बदलने का खतरा नही उठा सकता मैं" परमाणु उड़कर त्रिशूल के मार्ग से हट गया लेकिन त्रिशूल तो जैसे उसके पीछे ही पड़ गया था....
"अब क्या करूँ... हाँ एक काम कर सकता हूँ"
परमाणु घूम कर तेजी से कालदूत की तरफ ही उड़ने लगा और एक दम समीप आकर
*SHRINK*

"ये क्या त्रिशूल हम पर ही प्रहार करने आ रहा है... विष्या ने स्वयं वार करके त्रिशूल को निस्तेज कर दिया (वो श्रिंक हो चुके परमाणु को नहीं देख पाए थे).... तुम दोनों ने हमारे दो परम अस्त्रों को निस्तेज कर दिया .... अब तुम हमारे क्रोध से नहीं बचोगे"
कालदूत क्रोध से काँप उठे

( दिक्कत तो ये है की ये एक में ही तीन हैं ... हर चालाकी पकड़ जाती है)

दूसरी तरफ नागमहल में

"हमने योजना अनुसार नागदीप के ख़ज़ाने की सारी मणियां एकत्रित कर ली हैं धनंजय... अब क्या"

"अब बस देखती जाओ नगीना"
धनंजय उस कमरे में एक बहुत विशाल यंत्र संरचना तैयार करने लगा जिसमे लाखों खांचे बने हुए थे...

"नगीना और विसर्पी तुम दोनों इसके प्रत्येक खांचे में मणियां रखती जाओ... तब तक मैं बुद्धिपलट को लेकर आता हूँ
धनंजय अपनी मस्तक मणि के द्वार द्वारा बुद्धिपलट को ले कर आता है तब तक यंत्र पूरी तरह से तैयार हो जाता है... यंत्र के मध्य भाग, जो की रिक्त था, में बुद्धिपलट नियंत्रक पहन कर बैठता है और नियंत्रक को पूरी संरचना के साथ जोड़ कर धनंजय कहता है
"बुद्धिपलट अब तुम अपनी मानसिक शक्तियों का विस्तार करो"

"ये हो क्या रहा है धनंजय"
नगीना के पूंछने पर धनंजय बताता है

 "नियंत्रक वास्तव में महामानव की मानसिक शक्तियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था ताकि अगर फिर कभी वो स्वर्ण कारागार से छूटे तो हमारे पास भी उसकी शक्तियों का उत्तर हो... किन्तु ये उतना शक्तिशाली नहीं बन पाया ... फिर ध्रुव ने सोंचा की महामानव की मानसिक शक्ति के पीछे उसके शक्तिशाली मष्तिष्क के ऊपर की पारदर्शी खोपड़ी का भी योगदान हो सकता है जो उसकी मानसिक किरणों को एक क्रिस्टल की भांति बहुगुणित कर और शक्तिशाली बना देता है.... इस तथ्य को आज़माने के लिए हमने नियंत्रक की किरणों को एक नागमणि से गुज़ार कर देखा और पाया की इसकी शक्ति में इज़ाफ़ा हुआ.... अब हमने इस यंत्र का निर्माण किया है जिसमे हज़ारों नागमणि इस प्रकार सेट की गयी हैं की नियंत्रक की किरणे प्रत्येक मणि द्वारा बहुगुणित हो कर निकलेगी ..... और अब बुद्धिपलट जैसा शक्तिशाली मस्तिष्क सम्पूर्ण विश्व को अपने अधीन कर लेगा।"

नियंत्रक किरणों का जाल फैलने लगा.... पूरा नागदीप उसकी चपेट में आने लगा...
महात्मा कालदूत जिन्होंने अब कोबी और परमाणु को अपनी कुंडली में लपेट रखा था और उनका वध करने ही वाले थे ... वो भी नियंत्रक के प्रभाव में आ गए....
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महानगर में क्रोध से पागल नताशा ने रोबो और रोबो फ़ोर्स के साथ आतंक मचाया हुआ था

"जब तक नागराज ध्रुव को वापस नहीं लाएगा तब तक उसका प्यारे महानगर को भी चैन से नहीं जीने दूंगी मैं"

"नागू के रहते ऐसा कुछ नहीं होगा मैडम"
नागू अकेला ही उन सब से भिड़ गया

"नागू अकेले इन सबसे नहीं निपट पाएगा दादा जी... फेसलेस को जाना ही होगा"
"नहीं भारती .... नागराज का खज़ाना चोरी किया जाना और उसके बाद रोबो का दोबारा यहाँ आना सिद्ध करता है की रोबो का अगला निशाना वेदाचार्य धाम होगा... यहाँ की सुरक्षा के लिए तुम्हारा होना बहुत आवश्यक है... और रही महानगर की बात तो... नागराज है ना"
"पर दादाजी..."
वेदाचार्य ने इशारे से भारती को शांत कर दिया... पर वेदाचार्य इस बार ये नहीं जान पाए कि नागराज तो नागदीप की ओर जा चुका है

(उफ़... रोबो इस बार बहुत बड़ी सेना के साथ आया है और साथ में ये क़ातिल हसीना... मैं मणि शक्ति से ज्यादा देर तक इन्हें रोक नहीं पाउँगा... मुझे सहायता चाहिए)

नागू सही था... रोबो सेना से लड़ते हुए उसका ध्यान भटका और नताशा की लेज़र गन नागू को धुआं बनाने के लिए चल पड़ी इस वार से नागू का बचना असंभव था ... पर... नागरस्सी ने आकर उसे हवा में उठा लिया... और किरण के ज़मीन में टकराने से वहां पर एक गहरा गड्ढा हो गया।

"जाको राखे साईंयां, मार सके ना कोए"
नागू ने फ़िल्मी स्टाइल में बोला
"जाओ अब तुम रोबो फ़ोर्स से निपटो मैं रोबो और नताशा को देखता हूँ"

"ये सब तुम क्या कर रही हो नताशा ... तुमने तो रोबो को छोड़ दिया था... बंद करो यूँ मासूमो को मारना"

नागू के जाने के बाद नताशा दोनों हाथों में तलवार लेकर नागराज पर टूट पड़ी और साथ ही रोबो भी अपनी नई शक्तियों के साथ सामने आ गया
"और तुमने जो मेरे ध्रुव को गायब किया है उसका क्या.... ध्रुव को वापस कर दो और मैं रुक जाउंगी"

 दोनों के वारों से बचते हुए नागराज ने रोबो को एक जोरदार लात मारी जिससे वो दूर जा गिरा...
"ध्रुव मरा नहीं है बस अभी वो नगीना के वश में है इसलिए मैंने उसे सुरक्षित जगह भेज दिया है"

"उसकी सुरक्षा की चिंता छोडो और अपनी और अपने महानगर की सुरक्षा की चिंता करो नागराज"
रोबो के शरीर से निकली लिक्विड मेटल की तारों ने नागराज को बांध दिया
(धनंजय ने मेरे शरीर के मेटल को लिक्विड मेटल से बदलकर मेरी शक्तियां कई गुना बढ़ा दी हैं)

"ध्रुव पर किए गए एक एक वार का बदला मैं तुम्हारे शरीर के उतने ही टुकड़े करके लूंगी नागराज"
नताशा नागराज पर वार करने के लिए आगे बढ़ी

(ये तार ताकत लगाने पर और भी ज्यादा कसते जा रहे हैं... इच्छाधारी शक्ति का प्रयोग करना होगा)
नताशा का वार होने से पहले ही नागराज कणो में बदलकर आज़ाद हो गया था... प्रकट होते ही उसने रोबो पर विष फुंकार का उपयोग किया पर .... रोबो के मेटालिक हाथ ने एक बड़े पाइप का आकार लेकर फुंकार की दिशा बदल दी

(रोबो की इन नई शक्तियों ने उसे काफी शक्तिशाली बना दिया है... और मैं औरतों पर हाथ नहीं उठता... कैसे जीतूंगा मैं इनसे... उस पर भी नताशा मेरी होने वाली भाभी है उन्हें तो मैं वैसे भी नहीं मार सकता...क्या करूँ)

नागराज अभी सोंच ही रहा था की रोबो की लेज़र आई हरकत में आ गई... उससे बचते हुए नागराज ने सर्पों का प्रयोग किया पर नताशा की तेज़ धार तलवार और रोबो की लेज़र रेज ने उन्हें अपने तक नहीं पहुँचने दिया

"समझने की कोशिश करो नताशा...बेवजह लड़ने से कुछ नहीं होगा"
"समझना तो तुम्हे है नागराज... या तो तुम ध्रुव का पता बताओ... या हम तुम्हे नरक का पता बताएंगे"

"बस बहुत हुआ "
नागराज बोला और इस बार जैसे ही लेज़र आई चमकी नागराज की कलाइयों से निकले ध्वंसक सर्प और रोबो की आँखों के सामने ही धमाका हुआ... रोबो की आँखे कुछ पलों के लिए ही चौंधियाइ लेकिन इन कुछ पलों में नागराज के नागशक्ति युक्त एक मुक्के ने उसके आधे इंसानी शरीर और पूरे इंसानी दिमाग को बेहोशी की नींद सुला दिया

लेकिन नताशा पूरे जूनून के साथ लड़ रही थी
(ये एक कुशल फाइटर है इस तरह बचते रहने से काम नहीं चलेगा... एक काम हो सकता है)
नागराज ने एक कुशल कलाबाज की तरह नताशा के वारों से बचते हुए उसके दोनों हाथों को पकड़ लिया और उसकी आँखों में आँखें डालकर बोला
"नताशा... अब तुम मेरे सम्मोहन में हो, मैं जो कहूँगा वही करोगी"
"हाँ... तुम जो कहोगे मैं वही करुँगी"

अब तक नागू भी पूरी रोबो फ़ोर्स को ख़त्म कर चुका था। नागराज रोबो और नताशा के साथ वेदाचार्यधाम गया और
"नताशा की हिफाज़त की जिम्मेदारी तुम्हारी है भारती... और जब तक मैं वापस नहीं आ जाता रोबो को भी यहीं कैद रखिएगा दादाजी"

"पर तुम कहाँ जा रहे हो"

"नागदीप... मैं वहीँ जा रहा था जब मुझे महानगर में बहुत बड़े खतरे का संकेत मिला और मैं वापस लौट आया... पर अब यहाँ सब ठीक है"

"यहाँ सब ठीक नहीं है... रोबो ने तुम्हारा खज़ाना चोरी किया था पर अभी वो खज़ाना उसके पास नही है... मेरी गणना के हिसाब से वो खज़ाना पहले राजनगर, और अब किसी अनजान स्थान पर ले जाया गया है... और हाँ नागदीप की स्थिति भी काफी अस्थिर है, तुम्हारे पूर्वाभास के बाद मैंने पता लगाना चाहा पर कुछ भी ठीक अनुमान नहीं लग सका"

"कोई बहुत ही बड़ा षड्यंत्र है दादा जी, पहले नगीना और अब रोबो... और न जाने नताशा को मेरे द्वारा ध्रुव को तिलस्म में भेजे जाने का पता कैसे लगा... मतलब कोई और भी है इस षड्यंत्र में... अभी तो मैं नागदीप जा रहा हूँ क्योंकि अगर वहां अस्थिरता है तो वो पूरी मानवता के लिए खतरा है"
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 *तिलस्म के अंदर* की स्थिति और भी विकट थी... चारों ओर, सैंकडों बवंडर इधर उधर मंडरा रहे थे और उनके आस पास कई सारे सफ़ेद और लाल पत्थर के बने बाज़ उड़ रहे थे...

"जहाँ हम खड़े हैं ध्रुव... वह इस पूरे क्षेत्र में खड़े रहने का एक मात्र स्थान है"

"है नहीं... था... ये गोल पत्थर हवा में ही घुलता प्रतीत हो रहा है"

"हाँ.. पर कोई बात नहीं मैं तुम्हे लेकर उड़ जाती हूँ... ओफ़.. पुरे प्रयत्न के बाद भी मैं उड़ नहीं पा रही हूँ ध्रुव.. . कुछ करो"

"मुझे लगता है कि ये बाज़ ही हमें सहारा देंगे ... शक्ति अपने सबसे पास वाले सफ़ेद बाज़ पर कूदो... और इन बवंडरों से बचना"
ध्रुव और शक्ति बवंडरों से बचते हुए सफ़ेद बाज़ों पर कूद जाते हैं...

"पर सिर्फ सफ़ेद बाज़ पर ही क्यों ध्रुव?"

"क्योंकि इतना तो मैं समझ ही चुका हूँ की हम किसी प्रकार की जादुई दुनिया में हैं....अवश्य ही ये वेदाचार्य का तिलस्म है और यहाँ कोई भी वस्तु बेवजह नहीं होगी... दो अलग रंग एक सफ़ेद जो शांति का प्रतीक है... एक लाल..."

"जो खतरे का घोतक है.."
शक्ति ने वाक्य पूरा किया

ध्रुव और शक्ति के बाज़ों पर सवार होते ही उन बाज़ों में हरकत होने लगी और वो अपने स्थान से हटकर बवंडरों के पास जाने लगे.... ध्रुव तो उछलकर तुरन्त अगले बाज़ पर जा बैठा पर शक्ति बवंडर से टकरा गयी और एक जोरदार धमाका हुआ ....

"शक्ति धमाके से उछलकर दूसरे बवंडर में फंसने जा रही है ... मुझे उसे बचाना होगा"
ध्रुव ने स्टार लाइन में लपेटकर शक्ति को सुरक्षित सफ़ेद बाज़ पर उतार लिया

"धन्यवाद ध्रुव... ये बवंडर बहुत खतरनाक हैं... मेरी शक्तियों ने मुझे इस बार तो बचा लिया पर शायद दोबारा..."(मुझे तो कुछ नहीं होगा पर चंदा शायद दोबारा ये वार ना सहन कर पाए)

"अब बहुत ही सावधान रहना होगा शक्ति... न सिर्फ इन बवंडरों से बचना है बल्कि इन लाल बाज़ों से भी बचना है.... ये अब स्थिरता छोड़कर हम पर हमला कर रहे हैं"

"पर यहाँ न कोई व्यक्ति है और न कोई संकेत .... आखिर यहाँ से निकलने का मार्ग क्या है"

"पता नहीं शक्ति... जब तक मार्ग नहीं मिलता इसी प्रकार बचते रहना होगा... और .... और अब मुझे लग रहा है की जैसे मेरा दम घुट रहा है..."

" यहाँ की हवा ख़त्म हो रही है.... जल्दी कोई रास्ता खोजो ध्रुव वरना प्राणवायु के अभाव में हम मर जाएंगे"
ध्रुव और शक्ति अपनी पूरी सामर्थ्य और कौशल लगा कर उन बवंडरों और बाज़ों  की चपेट में आने से खुद को बचा रहे थे

"प्राणवायु(सोंचते हुए)... हाँ ... इन बवंडरों में से कोई एक प्राणवायु यानि ऑक्सीजन का बना हुआ होगा.... वही हमारा मार्ग है"

"पर वो है कौन सा.... ये कैसे पता चलेगा"
चिंतित शक्ति बोल उठी "कुछ ही पलों में बिना ऑक्सीजन हमारी मृत्यु हो जाएगी"

(शक्ति सही कह रही है अगर जल्द ही कोई रास्ता नहीं मिला तो मरना तय है.... वैसे अब मैं ध्यान दे रहा हूँ तो समझ आ रहा है की सभी सफ़ेद बाज़ों के मुह एक ही बवंडर की दिशा में है... बाज़ की निगाह बहुत तेज़ होती है ..)

ध्रुव ख़ुशी से चिल्लाया
"मिल गया मार्ग... शक्ति उस बवंडर पर कूदो वही हमारा मार्ग है"

शक्ति और ध्रुव एक साथ उस बवंडर में कूद गए और....
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पूरा नागदीप नियंत्रक किरणों से घिर चुका था.... प्रत्येक नाग अब नियंत्रक के अधीन था... और उन सबकी रानी थी नगीना।
नागराज ने नागदीप में कदम रखा और

"ये कैसा किरण जाल फैला हुआ है आकाश में"
"यह किसी प्रकार की सम्मोहन तरंगे हैं नागराज जो अपने दायरे में आने वाले हर सजीव दिमाग को अपने काबू में करना चाहती हैं"
नागू ने नागराज के प्रश्न का उत्तर दिया

"अगर ऐसा है तो फिर हम कैसे बचे हुए हैं ?"
"मेरी मणि शक्ति ने मुझे बचाए रखा है... उसी के माध्यम से मुझे ये जानकारी प्राप्त हुई है"
"और मेरा दिमाग शायद मेरी इच्छाधारी शक्ति की वजह से बचा हुआ है... मैं नागदीप के नागों से संपर्क करने की कोशिश करता हूँ"

कुछ देर बाद
"कोई नाग उत्तर नहीं दे रहा है... सावधान रहना होगा"

"नागराज नागदीप में आ चुका है... उसने मुझसे मानसिक संपर्क स्थापित करने की कोशिश की"
विसर्पी ने नगीना को बताया और नगीना बोल पड़ी

"मतलब ध्रुव नागराज को नहीं मार पाया... कहाँ पर है वो"
"नागदीप के दक्षिणी क्षोर पे"
"विसर्पी तुम सभी नागों को लेकर जाओ और नागराज को यहाँ लेकर आओ"
"जैसी आपकी आज्ञा"
विसर्पी सर झुका कर वहां से चली जाती है

"अब अपनों के ही हाथों से मरेगा नागराज... हा हा हा..."

दक्षिणी क्षोर पर
"सावधान नागराज.... तुम्हे हमारे साथ चलना होगा"
"विसर्पी तुम... और सभी इच्छाधारी नाग... तुम सब ठीक तो हो ना"
"हमारी छोड़ और अपनी खैर मना नागराज"
विसर्पी के संकेत पर पंचनाग नागराज पर टूट पड़े

"ये सभी इस किरण के माध्यम से गुलाम बने हुए लगते हैं नागराज"
नागू ने नागराज को सावधान किया
"हम्म... फिर भी मैं इनको हानि नहीं पहुंचा सकता"

नागराज हवा में उड़कर सभी वारों से बच रहा था
(सम्मोहन... हाँ ... सम्मोहन से इनको अपने वश में किया जा सकता है ... और ये मैं पहले भी कर चुका हूँ◆... लेकिन पिछली बार की तरह विशाल लेंस बनाने का न तो समय है और ना ही ये मुझे ऐसा करने देंगे... )
◆[जानने के लिए पढ़ें *मृत्युदंड*]

"नागू... करणवशी ने तुम्हारी मणि का प्रयोग अपने सम्मोहन का प्रभाव बढ़ाने में किया था ◆"
◆[जानने के लिए पढ़ें *सम्मोहन*]

"हाँ... ... तो"
"तो फिर ये मेरे सम्मोहन का प्रभाव भी बढ़ा सकती है"
"हाँ बिल्कुल... मैं समझ गया तुम क्या करना चाहते हो नागराज"

नागराज ने अपने सम्मोहन का प्रयोग करना शुरू किया और नागू ने मणि शक्ति से उसे बहुगुणित कर दिया... कुछ समय बाद

"विसर्पी, पंचनाग एवं नागदीप के सभी सर्पों तुम सब अब मेरे सम्मोहन में हो और अब सिर्फ मेरा ही आदेश मानोगे"
सब एक साथ बोल पड़े
"हम सब केवल तुम्हारा ही आदेश मानेंगे नागराज"

"लेकिन सम्मोहन का प्रभाव हटते ही ये सब फिर से इन किरणों के वश में आ जाएंगे" नागू ने चिंता जताई

"नहीं आएंगे... मैं सभी नागों को आदेश देता हूँ की सब मेरे शरीर में समा जाएं और अपनी समस्त शक्तियां मेरे अधीन कर दें"

इसके बाद जो हुआ वो किसी सपने जैसा था... नागदीप के सभी नाग, विसर्पी सहित नागराज के शरीर में प्रवेश कर गए।

अपने मुंड की सहायता से यह दृश्य देख रही नगीना के माथे पर बल पड़ गए ... वो चीख उठी
"काSSSS लदूत..."
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*स्वर्णनगरी में*

मिसकिलर और धनंजय आपस में बात कर रहे हैं
[धनंजय की मस्तक मणि की सहायता से नियंत्रक किरणों को स्वर्णनगरी तक लाकर सभी स्वर्ण मानवों को भी गुलाम बना लिया गया है]

"नियंत्रक किरणों की मदद से हमने स्वर्णनगरी पर अधिकार तो कर लिया है... अब जल्दी से अपना बाकी काम भी पूरा करना होगा"

"अवश्य महारानी... विशेष कारागृह के सभी नियंत्रण अब आपके हाथ में हैं, नागराज के खजाने की मणियां शोधकक्ष में लगे यंत्र में लगा दी गयी हैं अब बस आपके शोध के सफल होने की देर है"

"होगा... जरूर सफल होगा... मैं यहाँ सबसे खतरनाक हथियार बनाउंगी..."
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*एक एक करके इस षड्यंत्र की परतें तो खुल गयीं पर क्या नागराज रोक सकेगा इन षड्यंत्रकारियों को*

*ध्रुव - शक्ति कैसे बाहर आएंगे इस तिलस्म से*

*कौन सा हथियार बनाएगी मिसकिलर*

इन सभी सवालों का जवाब समेटे है

षड्यंत्र भाग-४

【कृपया पढ़कर अपना अनमोल रिव्यु अवश्य दें】

1 comments :

Ankit Bhai aapne kafi achi and Kasi Hui story likhi hai. Nagraj & Dhurv Apne purane rang me hai. Par baki superheroes ( doga , bheriya etc.) Ka kamjor role hai. But story is going great. Keep it up

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