Wednesday, 31 August 2016

COP प्रस्तुत करते हैं

नागसम्राट

मुम्बई :
डोगा के कुत्ते मोनिका और चीता को ढूंढने में नाकामयाब हो जाते है ।सूरज लगभग हर तरह से उन्हें ढूंढने की कोशिश करता है मगर सफलता उसे हासिल नहीं होती।।तभी अचानक सूरज को कुछ याद आता है ,,"पार्सल" वह उस पार्सल के टुकड़े को ढूंढता है जल्द ही वह पार्सल के टुकड़े उसे मिल जाता है और सुरज उसे पॉलिथीन में रखता है । फिर थोड़े देर कुछ सामान बैग में रखने के बाद सूरज अपनी बाइक निकालता है और महानगर हाईवे की ओर रवाना हो जाता है ।।
अज्ञात का रहस्यमयी किला
अज्ञात डार्क कोड के साथ प्लानिंग करने में व्यस्त होता है ।
Darkcode " -आपका अगला शिकार नागराज बहुत शक्तिशाली है मालिक।उसके शक्तियों को analyize कर लिया गया है ।काफी शक्तिशाली है नागराज।।
अज्ञात मुस्कुराकर " हा डार्क कोड पर ,,तुझे क्या लगा मैं नागराज से प्रत्यक्ष रूप से लड़ूंगा नहीं ।पर उसकी सारी शक्तियों को विफल कर उसे सामान्य इंसान बना दूंगा ।।तुम बस देखो।मेरे दिमाग का कमाल।"
**************************** महानगर।। भारती कम्युनिकेशन का हेड ऑफिस जहाँ मैडम भारती अपने ऑफिस में काफी व्यस्त थी ।तभी सेक्रेटरी मिनी का फ़ोन आता है "मैडम कोई mr सूरज मुम्बई से आये है खास आपसे मिलने ।
भारती अपने टेबल पे मौजूद एक बटन दबाती है सामने दीवाल पे एक स्क्रीन नजर आती है सामने सूरज बैठा रहता है ।" हम्म जाना पहचाना सा लग रहा है,,ओह प्रसिद्ध लायन किंगडम जिम का मालिक ,"सूरज ",मिनी उसे अंदर भेज दो "भारती फ़ोन पे बोलती है ।
सूरज अंदर आता है ....भारती सूरज को बैठने को बोलती है ।
भारती मुस्कुराकर कहती है " लायन किंगडम जिम के शेर कहे जाने वाले mr सूरज आपकी क्या मदद कर सकती हु मैं"।।
सूरज गंभीर होकर कहता है -" अपना कीमती वक्त देने के लिए थैंक्स मैडम भारती,,वैसे मुझे आपके दादा वेदाचार्य जी से काम है ।।मुझे उनसे मदद चाहिए कहा जाता है की वे ज्योतिष्य के बहुत बड़े ज्ञानी है ।।
भारती-" ओह तो आपको दादा जी से काम है " भारती टाइम देखती है सुबह के 11 बज चूका होता है ।।ओके दादा जी वेदाचार्य धाम में ही होंगे चलिये आपसे मिलके उनको खुशी होगी ।।।
फिर दोनों ऑफिस से निकलते है भारती सूरज के साथ अपने कार से वेदाचार्य धाम की तरफ निकलते है ।।
वेदाचार्य धाम में वेदाचार्य उस समय कुछ गणना करते होते है ।।
वेदाचार्य चिंतित होकर सोचता है " आज विक्रमी संवत का पहला दिन है एक बार फिर दुनिया पे काली शक्तियों का आतंक होगा "
तभी कुछ कदमो की आहट होती है और वेदाचार्य ध्यान मुद्रा को छोड़ कर साधारण अवस्था में आ जाते है तभी उसे भारती के साथ सूरज सामने आते हुए दिखाई देते हैं ।।सूरज का aura वेदाचार्य को जाना पहचाना लगता है मन ही मन में वेदाचार्य -"ये तो डोगा है ,,और आज अचानक बिना डोगा का रूप धारण किये मुझसे मिलने आया है ,क्यूँ????
तभी सूरज और भारती वहां बैठते है ।।
" कहो भारती क्या हुआ "? वेदाचार्य अनजान बने हुए पूछते है ।
भारती -" दादाजी mr सूरज की कोई दिक्कत है जो सिर्फ आप ही सोल्व कर सकते हैं "
वेदाचार्य -" बोलो सूरज क्या बात है??"
सूरज गंभीर होकर कहता है - "वेदाचार्य जी अगर अकेले में बात हो सके तो बेहतर होगा" ।
वेदाचार्य भारती को बाहर जाने को कहते है ।भारती के बाहर जाने के बाद ।
वेदाचार्य " बेटा सूरज कुछ समय पहले ही विक्रम संवत का आगमन हुआ है ,इस योग के कारन पृथ्वी पर काली शक्ति अधिक प्रबल हो जाती है ,, और मुझे तुम्हारे पास रखे बैग से एक प्रबल काली शक्ति का प्रभास हो रहा है ।।
सूरज निश्चिन्त होकर जवाब देता है - "वेदाचार्य जी ये एक पार्सल है जिसके अंदर से एक विचित्र कालीशक्ति निकली थी ,जो मेरे मुसीबतो का कारण है।।
सूरज पार्सल वेदाचार्य को देते है ।।वेदाचार्य उसे छूते है और उनकी तिलिस्मी शक्ति उन्हें उस शक्ति का अभास् करा देता है ।।
"सूरज ये कोई ऐरी गैरी शक्ति नहीं है इस शक्ति से टकराना तो बड़ा विध्वंसकारी होगा"चिंतित स्वर में बेदाचार्य कहते है ।
सूरज-"इस शक्ति के कारन मेरी जान से प्यारी मोनिका और उसका भाई चीता खतरे में है ,,पता भी नहीं वह कहाँ है ,जिन्दा है की नहीं"।
वेदाचार्य -" हम्म,, तो तुम डोगा बनकर इस समस्या से टकराना चाहते हो" ?
"मैं और डोगा बनकर न न वेदाचार्य जी"।आश्चर्य से सूरज कह उठा।
"बेटा मैं तुमसे कई बार मिल चूका हु जब तुम डोगा के रूप में होते थे ,,मैं अँधा जरूर हु मगर मेरी तिलिस्म की शक्ति मुझे कुछ ऐसा दिखाती है जो सामान्य आँख नहीं देख सकता है" ।।मुस्कुराते हुए वेदाचार्य बोल उठते है ।।
सूरज - "जी वेदाचार्य जी मुझे आपकी शक्तियों पर संदेह नहीं है ,,मगर मेरे जिद और दृढ़ता के आगे भला कौन सी शक्ति ठहरी है" ।
वेदाचार्य - "तो सुनो तुम्हारी मंगेतर और साला इस लोक में नहीं है वे उस जगह कैद है जिसे हम पाताल कहते है "।
"पाताल "!आश्चर्य से सूरज कह उठता है।
वेदाचार्य-" हाँ इस शक्ति का अवतरण वही से हुआ है ।और आंशिक रूप से तुम्हारा वहां पहुचना मुश्किल है ,,मगर मेरा सेवक फेसलेस तुम्हे वहां ले जायेगा उसके लिये तुम आधे घंटे बाद महानगर के समुद्री छोर में मिलो वही फेस लेस मिलेगा"।
"जी धन्यवाद् वेदाचार्य जी वह जो भी शक्ति हो उसको नेस्तनाबूद जरूर करेगा सूरज "।कहते हुए सूरज वेदाचार्य धाम से निकल जाता है ।
भारती तभी अंदर आती है ।।
वेदाचार्य "भारती फेस लेस की जरुरत आन पड़ी है तुम जरुरी सामान लेके तुरंत निकलो"!
"जी दादाजी मैं जाती हु" भारती तुरंत अपने घर निकल जाती है।
नागद्वीप का वीरान उत्तरी छोर ।।
एक बड़ी सी बाम्बी बनी हुई होती है।। बाम्बी के अंदर से एक तेज प्रकाश बाहर की ओर आ रही थी।उसकेअंदर एक इक्षाधारी नाग बड़े वर्षो से वहां तप कर रहा था।यह नाग पातळ के नाग सम्राट वासुकि के पराक्रमीे सेनापति विषबल थे।।इनकी मणि से ही तेज़ प्रकाश आ रही होती है।
कुछ समय बाद वहां पानी में तैरता हुआ एक काला द्रव द्वीप के किनारे रुकता है ।और वह द्रव देखते ही देखते मानवाकृति रूप धारण कर अज्ञात बन जाता है ।
अज्ञात मुस्कुराते हुए -" मुझे आभास होरहा है की वह इक्षाधारी नाग यही कही तप कर रहा है ।मुझे उसकी मणि चाहिये।तभी मेरा प्लान सफल होगा। अज्ञात तभी आस पास के दृश्यों को देखता है ,उसे एक लंबी बाम्बी दिखती है वो उस तरफ बड़ जाता है ।।
उस तरफ जाते ही अज्ञात को मणि का आभास हो जाता है ।।अज्ञात उस बाम्बी के पास पहुचता है की मणि की तेज़ किरणे उसे विचलित करने लगती है ।
" आह ये मणि की किरणे तो मुझे तड़पा रही है मतलब इसका पुण्य बल की शक्ति के कारन मई छीन नहीं सकता।अब क्या करूँ?"- कराहते हुए अज्ञात कहता है।।
तभी वहां कुछ दुरी पर महात्मा कालदूत आकाश मार्ग से उतारते हैं ।।महात्मा को देखकर अज्ञात झट से छाया रूप में आ जाता हैं,और पास झाड़ी में छुप जाता है।
कालदूत उस बाम्बी के पास जाता है और नतमस्तक होता है ।।
कालदूत हाथ जोड़कर-" हे नागबल आप इस नागद्वीप में आकर तप कर रहे है ,जिससे हमारे नागद्वीप की धरती और पवित्र हो गयी हैं।धन्य है प्रभु।।"
इधर अज्ञात कुछ सोचता रहता है" इस तीन शरीर वाले नाग की अंदर अतुलनीय शक्ति है ,अगर मैं इसे काबू में कर लू तो इसके हाथो ही मणि छिन सकता हु "
तभी अज्ञात महात्मा कालदूत के परछाई में समां जाता है ।। और परछाई को वष में कर लेता है जिससे कालदूत अज्ञात के वस् में आ जाता है।
कालदूत को वष में करते ही अज्ञात बाम्बी पर अपने पुंछ से वार करता है ।
पुंछ के प्रचन्ड वार से बाम्बी टूट जाती है ।
नागबल का शरीर दिखाई देने लगता है ,जिसके मस्तक पर दिव्य मणि होती है ।
कालदूत नागबल को ललकारता है-" उठ तूच नाग इस नागद्वीप में बिना मेरे आज्ञा के तू यहाँ कैसे रह रहा है ।
कालदूत की कटु वाणी का असर नहीं हुआ नागबल को वह तो बड़ी तन्मयता से तपस्या कर रहा था, की विश्या ने कालसर्पि को भेज दिया ।।कालसर्पि ने नागबल को कस कर जकड लिया ।जकड़न प्रतिपल तेज होता जा रहा था तब कही जाकर नागबल का तप टुटा ।
नागबल का नेत्र खुलता है वह गुस्से में आकर उठ जाता है।नागबल गुस्से से " ऐ पापी नाग तूनेमेरा तप भंग किया, मुझे जकड़ने की कोशिश की ,,अब तू अपनी किये की सजा भुगतेगा।
कहते ही नागबल ने अपना विष कालसर्पि पे उगल दिया ,,कालसर्पि तड़प के अपनी कुंडली हटा देता है और वापस विश्या के पास चला जाता है ।
नागबल आश्चर्य से " अद्भुत है तेरा शस्त्र ,,जो मेरे विष को सह सका ,,इसका मतलब तुम भी कोई मामूली नाग नहीं हो"।
" मुर्ख! मुझसे युद्ध कर मेरे पास तेरे बातो के लिए समय नहीं है " -कहते ही कालदूत अपनी शस्त्र त्रिशूल को फेकता है ।। नागबल के नेत्र से किरणे निकलती है जिससे त्रिशूल बिच हवा में टकरा कर रुक जाता है ।
" हम्म तुम भी कोई बलशाली नाग हो ,,लो मेरा अगला वार चिरचला " कालदूत चिरचला फेकता है। चिरचला अद्भुत गति से नागबल के पास जाता है की नागबल अपने दोनों हाथो को समेटकर ध्यान लगता है तभी एक मुग्दल हवा में प्रकट होता है और चिरचला से टकरा जाता है ।। चिरचला नस्ट हो जाता है
कालदूत हैरान हो जाता ही क्योंकि उसके प्रलयंकारी शस्त्र को नागबल बड़ी आसानी से नस्ट कर रहा है ।।
नागबल मुस्कुराते हुए- "और कोई शस्त्र है तो उसका भी उपयोग कर लो हो सकता है तुम मुझे परास्त कर लो ।"
पर कहते है शक्ति का घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि क्या पता सामने वाले के तरकश में कोई अचूक बाण हो ।यही हाल नागबल का भी हो सकता है ।
क्योंकि कालदूत भूत बविष्य और वर्तमान के समय काल का योद्धा है उसके पास शस्रों या शक्तियों की कमी नहीं और ऊपर से उसके अंदर समाये अज्ञात नाम की काली शक्ति का ज्ञान भी उसे था । तब कालदूत त्रिघात नामक शस्त्र को बुलाता है ।
कालदूत " इस त्रिघात का वार सह के बता नागबल ,,अगर सह गया तो मैं कालयोद्धा कालदूत कहलाने लायक नहीं ।"
कालयोद्धा कालदूत आप काल्योद्धा का....इससे पहले नागबल कुछ और कह पाते ।त्रिघात को कालदूत छोड देते है त्रिघात को नागबल रोकने की कोशिश करते है मगर त्रिघात रुकता नहीं क्योंकि उस शक्ति को सिर्फ 3 काल में सफ़र करने वाला व्यक्ति ही रोक सकता था।त्रिघात का वार को नागबल सह नहीं पाते।।मगर उनके शरीर को मणि बचा लेता है परंतु तभी मणि भी मस्तक से निचे गिर जाती है ।
अट्ठहास लगते हुए कालदूत मणि के पास जाता है और उसे उठा लेता है ।तभी कालदूत अचानक से बेहोश हो जाता है ।। क्योंकी अज्ञात कालदूत की कुण्डलिनी को सुप्त कर देता है ।और वापस अपने वास्तविक रूप में आ जाता है ।
अज्ञात "- बहुत ही मुश्किल काम था मणि हासिल करना ,,ये युद्ध कुछ और समय चलता तो कालदूत जैसा योद्धा मेरे वस् से बाहर हो जाता । खैर डार्ककोड मुझे वह शक्ति मिल गयी जिससे मैं नागराज को रोक सकता हु साथ ही उसकी शक्तियों को भी।
डार्ककोड का इमेज वहां उबरता है -
डार्ककोड " मगर मालिक इस मणि की खासियत क्या है जो आपको इसे पाने के लिए इतना कस्ट झेलना पड़ा "
अज्ञात " ये सप्त मणि है डार्ककोड ये किसी भी बलशाली की शक्तियों को नियंत्रण करता है ।सप्त इंद्री को भी ।यह मणि जब तक नागबल के मस्तक में था तब उस तपोबल के प्रकाश के वजह से मैं उसे छिन नहीं सकता था न उसे छु सकता था ।।मगर कालदूत जैसा पुण्यात्मा के वजह से ये मणि को काबू में कर सका । अब बस इस मणि को नागराज के मस्तक में लगाना है ।। ये मणि नागराज के सभी इन्द्रियों को सुप्त कर देगा ।और वो चिरनिद्रा में चला जायेगा
डार्ककोड। " वाह मालिक कमाल की चाल है ।
अज्ञात - अब इस मणि में अपने श्याम तंत्र भर दूंगा तब ये काली सप्त मणि बन जायेगी ।और नागराज के समस्त इन्द्रियों को सुला देगी ,,डार्ककोड । अब मुझे नागसम्राट नागराज को काबू में करना है ।।
फिर अज्ञात नागद्वीप से चला जाता है ।

कुछ समय बाद नागबल उठ जाता है ।
नागबल कराहते हुए " उफ़ बड़ा जोरदार शक्ति का प्रयोग किया था कालदूत ने ।
तभी मणि को न पाकर नागबल चिंतित हो जाता है" -मेरी मणि कहाँ गयी ।लगता है कालदूत ने मणि छीन ली है ।।
अचानक नागबल की नजर कुछ दुरी पर गिरे कालदूत के अचेत शरीर पर पड़ती है ।
नागबल " कालदूत तो यहाँ बेहोश है ,,मणि की शक्ति तरंगे भी यहाँ कही नहीं मिल रही ।।मुझे शक्ति तरंगे को भाप कर उस तक पहुचना होगा।हो न हो वह कोई शक्ति थी जो कालदूत को वष में कर मुझसे मणि छिन ली ।वरना कालदूत यहाँ अचेत न होता।
फिर नागबल मणि की शक्ति तरंगो को भाँपते हुए उड़ जाता है ।
मणि की शक्ति तरंगे महानगर की तरफ बढ़ती है ।

नागसम्राट
महानगर के समुद्री तट पर
सूरज वहां पहुचता है ।कुछ समय समुद्री तट के आस पास घूमता है ।चारो तरफ शांति थी ।तभी फेसलेस भी वहां पहुचता है ।फेसलेस को देखकर ।
तुम कौन हो। ?? सूरज पूछता है।
"फेसलेस वेदाचार्य जी का सेवक मुझे उन्होंने ही भेजा है ,तुम्हारी मदद के लिए । बाकि वेदाचार्य जी ने मुझे सब कुछ बता दिया है सूरज।। साथ ही ये पोशाक भी दिया है , जो तुम्हे पाताल लोक के सफ़र में तुम्हारे शरीर की रक्षा करेगा "।
सूरज " यह सब तो ठीक है मगर हम पातळ कैसे पहुचेंगे ।
फेस लेस- "कुछ समय में मेरा बनाया तिलिस्म हमे पातळ मार्ग में ले जायेगा ।तब तक तुम ये पोशाक पहन लो" ।
फिर फेसलेस रेतीले जमीन में 4 छोटे बिछुनुमा यन्त्र छोड़ता है जो एक तिलिस्म का निर्माण करने लगती है ।।
कुछ ही देर में यन्त्र से एक किरण निकलती है ।सूरज तब तक पोशाक पहन चूका होता है। सूरजऔर फेसलेस उस किरण से बने द्वार के अंदर कूद जाते है ।

महानगर
अज्ञात सप्त मणि लेकर महानगर आ जाता है ।
अज्ञात-" अब बस मुझे कोई ऐसा बन्दा चाहिए जो नागराज को चित कर सके ताकि ये सप्त मणि उसके शरीर में स्थापित कर सकूँ।पर फिलहाल मुझे स्नेक आईज सिक्यूरिटी के headquarter जाना है नागराज के पास।
अज्ञात फिर आगे बढ़ता है।
महानगर स्थित स्नेक आईज सिक्यूरिटी एजेंसी ।
नागराज और सौडांगी अपने केबिन में बैठे होते है ।
सौडांगी " आज ऑफिस में काफी शांति है ।
नागराज- " हाँ क्योंकि न नागु हैं और ना शीत् नाग सभी अलग अलग जगह सिक्यूरिटी की कमान संभाल रहे है।
"तोह फिर क्या कहते हो प्यार भरी 2 -4 बातें हो जाये " रोमांटिक स्वर में सौडांगी बोली !
"ओह सौडांगी मजाक मत करो क्या पता ये शांति थोड़े देर की हो "- नागराज बात टालते हुए कहता है ।
शयद नागराज की बात सच होने वाली थी क्योंकि नागबल सप्त मणि ढूंढने महानगर आ चूका होता है ।
नागबल अचंभित होकर "पृथ्वीलोक काफी उन्नति में है ,,इस वृहद् लोक के बारे में योगमाया द्वारा मुझे सब कुछ जानना होगा।
नागबल अपना नेत्र बंद करता है तभी पृथ्वीलोक की सारी जानकरी योगमाया द्वारा उसके दिमाग में समां जाती है ।
" अब मैं ,उस मणि को चुराने वाले को ढूंढता हु । नागबल महानगर के ऊपर उड़ता हुआ मणि के शक्ति को आभास करता है।
इधर अज्ञात मणि को लेकर स्नेक आईज सिक्यूरिटी के ऑफिस पहुचता हैं।
ऑफिस के अंदर जाने से पहले वह इक्षाधारी सर्प का रूप धारन करता है।और रिसेप्शन की तरफ बढ़ता है
अज्ञात -" मुझे mr नागराज शाह से मिलना है ।
बाहर में बैठी रिसेप्शनिस्ट कहती है" क्या आपका अपॉइंटमेंट है ??
नहीं पर मुझे कुछ विशेष काम है - अज्ञात कहता है ।
"ठीक है आप सामने वाले केबिन में चले जाए वही मिलेंगे नागराज शाह "सामने इशारा करते हुए रिसेप्शनिस्ट कहती है ।
अज्ञात केबिन में जाता है ।सामने नागराज शाह खिड़की से बाहर के नज़ारे देखता रहता है ।
" Mr नागराज शाह मैं विष राज हु। "अज्ञात बड़ी चालाकी से अपना नाम बदल के बोलता है ।
" जी कहिये स्नेक आईज सिक्यूरिटी आपकी क्या मदद कर सकती है -"नागराज शाह पलटते हुए बोलता है।
"मैं आपके बारे में जानता हु नागराज शाह उर्फ़ नागराज ,, मैं एक इक्षाधारी सर्प हु ,मैं काफी दूर से आपकी मदद लेने के लिए महानगर आया हु - विष राज बना हुआ अज्ञात कहता है ।
नागराज शाह - "ओह् ठीक है बताइये क्या काम था आपका "।
"इस मणि को संभाल के रखिये ,,इसको पाने के लिए पातळ का एक शक्तिशाली इक्षाधारी सर्प मेरी जान का दुश्मन बना हुआ है" ,,अब इसकी सुरक्षा तुम ही कर सकते हो -" मणि देते हुए अज्ञात नागराज को कहता है ।
"ठीक है ,,उस इक्षाधारी सर्प को मैं संभल लूंगा "- नागराज शाह कह्या है ।
"ठीक है नागराज तुम इसे संभल के रखो ,,, इससे पहले अज्ञात कुछ और कह पाता एक तेज़ आवाज वहां गूँजती है ।
"ए ! दुष्ठ ,,पापी मणि चोर कहाँ इस भवन में छुपा हुआ है ,मेरी मणि वापस कर मुझे - बाहर नागबल चिल्लाते हुए स्नेक आईज के headquarter में पहुचता है ।नागबल मणि की शक्ति का पीछा करते हुए वहां पहुचता है ।
" वो आ गया नागराज तुम उसको संभालो मैं उसका सामना नहीं कर सकता - विषराज बना अज्ञात कहता है ।
" ठीक है ,,अब तुम और तुम्हारी मणि मेरे संरक्षण में है ,उस दुष्ठ को मैं सबक सिखाता हु -"नागराज शाह नागराज बनके निकलता है ।
बाहर निकलते ही नागराज को नागबल दीखता है।
"मणि तुम्हे नहीं मिलेगी दुष्ठ ,"-नागराज गरजते हुए बोला
"तो तुम भी उस मणि चोर के साथी हो ,तुम्हे भी उसका साथ देने का सबक सिखाना होगा " ग़ुस्से से नागबल बोला।
नागबल नागराज को सामान्य मनुस्य जानके अपने बल का प्रयोग करने की सोचता है ।
नागबल यही सोचते हुए नागराज पर घुसे का वॉर करता है मगर नागराज उसे डॉज कर देता है ,,मगर घूंसे का वॉर पास वाली बिल्डिंग पर पड़ती है तो बिल्डिंग चरमरा जाता है ।
नागराज का ध्यान गिरते हुए बिल्डिंग पर चला जाता है तभी नागबल का दूसरा घूँसा उसके चेहरे पर पड़ता है ।
नागराज कई फुट दूर गिर जाता है ।
सामने बिल्डिंग देहने ही वाली होती है की सौडांगी अपने तंत्र किरण से बिल्डिंग को बाँध देती है ।
नागराज -" आह बहुत करारा वॉर था ,ओह सौडांगी ..... सौडांगी ने आज बचा लिया लोगो को ,,वरना आज मैं इस दुष्ट को नहीं छोड़ता।सौडांगी सभी लोगो को बिल्डिंग से निकालो।।।
सौडांगी "ओके नागराज फ़िक्र मत करो ।
नागराज तेजी से नाग् रस्सी से झूलते हुए नागबल के पास पहुचता है और उसकी छाती पे किक जड़ता है मगर नागबल तस से मस नहीं होता ।
नागराज आश्चर्य चकित हो जाता है और दूसरा वॉर नागबल के चेहरे पर करता है ।पर फिर भी कुछ नहीं होता ।
नागबल। हँसते हुए " हा हा मेरा नाम नागबल यू ही नहीं पड़ा मनुस्य पातळ के राजा वासुकि का सेनापति हु ।तुझ जैसे मानव से मेरा क्या सामना ।
"ओह ऐसा है तो झेल मेरा विषफुंकार" ।नागराज क्रोधित होकर विष फुंकार छोड़ता है ।
"आह बड़ा ही भयंकर विष है तेरा " विचलित होते हुए नागबल कहता है ।
नागबल "-तो तुम भी इक्षाधारीनाग हो और इक्षाधारी नाग होकर भी मेरा साथ नहीं दे रहे ।
नागराज"- इक्षाधारी नाग अगर अपराध करने लगे तो नागराज क्या महाकाल भी उसका साथ नहीं देगा नागबल,,और मैं इक्षाधारी मानव नाग हु ।
" हम्म वह तो वक्त बताएगा की तेरा साथ महाकाल देंगे की नहीं ।ले झेल मेरा विष" नागबल अपना विष नागराज पर छोड़ता है।
नागबल का विष तेजी से नागराज के तरफ बढ़ता है की तभी नागराज नागफनी सर्पो का ढाल बना लेता है और अपने आपको धक लेता है चूँकि नागफनी सर्प दिव्य सर्प होते है इसलिए नागबल के विष को झेल लेता है ।
तब नागराज उठा ढाल को नागबल के ऊपर फेक देता है ।तेज़ गति से नागफनी सर्पो का ढाल नागबल के सीने से टकराता है ।
इधर सौडांगी टूटे हुए बिल्डिंग से लोगो को निकल लेती है ।नागराज यह देखकर अपने आपको जंग के लिए और तैयार कर लेता है।
" तू जरूर किसी नागशक्ति धारक देवता का आशीर्वाद से जन्म मनुस्य है वरना ऐसे प्रहार तो कोई नहीं कर सकता ।विस्मय से उठता नागबल कहता है ।
" ले मेरे विध्वंसकारी शक्ति पाषाण नागो की सेना से लड़ । जिससे मैंने पाताल में बड़ी बड़ी लड़ाई जीती है।
तभी नागबल के शरीर से पाषाण नागो की सेना निकलटी है और नागराज को घेर लेती है।
"तुम मेरी सेना से लड़ो नागराज मैं उस दुस्ट शैतान से अपनी मणि हासिल करता हु जो इस बिल्डिंग में छुपा है "कहता हुआ नागबल बिल्डिंग में घुसता है ।
नागराज -"सौडांगी इस नागबल को किसी तरह तंत्र शक्ति से रोको या कोशिश करो तब तक इसकी सेना को मैं देखता हु "।
"ठीक है नागराज "-सौडांगी भी हामी भरते हुए नागबल के पीछे जाती है ।
पाषाण सर्प की सेना नागराज को घेर लेती है और ताबड़ तोड़ चट्टानी मुक्कों का वॉर करते हैं ।
"आह ! उफ़! अगर कुछ और वॉर हुए तो मैं मारा जाऊंगा ।।ये सब पत्थर के बने हुए है इसलिये मेरी विष शक्तियां विफल होगी । सिर्फ शारीरिक शक्ति ही सफल होगी "-सोचता हुआ नागराज पाषाण सर्पो पर तेज मुक्कों लातो की बारिश करता है ।।सभी पाषाण सर्प टूटने लगते है मगर धरती से टकराते ही फिर से अपने मूल रूप में आ जाते है ।
नागराज उनको तोड़ते जाता है और पाषाण सर्प जुड़ते जाते है ।
नागराज चिंतित होकर-"ऐसा करते करते पूरा दिन गुजर जायेगा मगर एक भी सर्प मरेंगे नहीं,, कैसे मरू इन्हें की इनका स्पर्श धरती से न हो । ओह ।
तभी नागराज कुछ सूक्ष्म सर्प जमीं में छोड़ता है ।और दूसरी तरफ नाग रस्सी से एक सैनिक को जकड लेता है और जोर से घूमता है ।।तेज़ गति से घूमने के कारन काफी सैनिक टूटने लगते है पर जब वह गिरते है तो निचे सर्पो के बड़े से गद्दे पर गिरते है ,,धरती पे स्पर्श न होने के वजह से कुछ देर बाद सभी पाषाण सर्प मर जाते है ।।नागराज सर्पो को समेत लेता है।
"वाह! पुराणी तरकीब काम आई ,,ओह सौडांगी क्या रोक पायी नागबल को - नागराज सोचते हुए तेज़ी से भागता है ।
अंदर के गलियारे में सौडांगी अपने egyptian तंत्रो के सहारे कुछ देर नागबल को रोके रखती हैं।
नागराज वहां पहुचता है ।।सौडांगी -"ओह नागराज ये तंत्र शक्ति से रुक तो जा रहा है मगर काबू में नहीं आ पा रहा " ।
" नागराज हमें कोई न कोई तरकीब तो सोचनी ही होगी क्योंकि मेरी लगभग हर शक्ति नागबल सेह ले रहा है।
" सौडांगी याद है तुमने एक तंत्र पिरामिड बनाया था इस ऑफिस की सुरक्षा के लिए"- नागराज कुछ याद करता हुआ कहता है।
सौडांगी याद करते हुए "हाँ नागराज मगर उस पिरामिड को बनाने से ये जगह नहीं बचेगी ।।
"कोई बात नहीं बनाओ उस तंत्र पिरामिड को वरना नागबल से हम मणि नहीं बचा पाएंगे" ।नागराज कहता है ।
"मगर उसके लिए तुम्हे कम से कम नागबल को थोडा कमजोर करना होगा तब तक मैं पिरामिड बनती हु "।सौडांगी बोली ।
नागराज एक बार फिर नागबल से सीधे युद्ध करने लगा । घूंसों लातो का उपयोग किया मगर नागबल तस से मस न हुआ ।
नागराज ध्वंसक सर्प छोड़ता है नागबल हड़बड़ा जाता है ।
तभी यह द्वखकर नागराज ध्वंसक सर्पो को लगातार छोड़ने लगता है ।।ध्वंसक सर्पो के विष के गंद् और विस्फोटक वॉर से नागबल थोडा कमजोर हो जाता है ।
सौडांगी चिलाती है नागराज हट जाओ !! तभी तन्त्र पिरामिड नागवल को जकड लेता है ।।
नागराज काफी मात्रा में ध्वंसक सर्प छोड चूका होता है जिसके कारन वह कम जोर हो जाता है ।।
इधर पिरामिड के अंदर से कुछ काली रूहे नागबल से लड़ती रहती है ।।जिससे देखकर नागराज अचंभित हो जाता है ।।
नागराज -" सौडांगी तुम्हारे तंत्र पिरामिड के अंदरसे ये काली रूह निकल रही है ये सब क्या........
इससे पहले नागराज अपने वाक्य पूरा कर पाता सौडांगी नागराज के मस्तक पे सप्त मणि रख देती है।।
नागराज तुरंत जड़ हो जाता है ।।
हा हा हा सौडांगी का स्वर बदल जाता है ।एक और छदम रूपधारी दुश्मन मेरे रास्ते से हट गया । मैं अज्ञात हु जो समय रहते सौडांगी के शरीर के अंदर समां चूका था जब सौडांगी अंदर नागबल से लड़ रही थी ।उसी वक़्त मै इसके अंदर समा गया था।
हा हा अब नागराज भी जड़ हो गया जिसे सिर्फ नागबल बचा सकता है मगर नागबल को कौन बचाएगा हा हा ।।
अब मैं बे रोक टोक अपने काम को अंजाम दे सकता हु क्योंकि अब जो superhero बचे है वो छदम रूप नहीं रखते है उन्हें आराम से खत्म किया जा सकता है - अज्ञात कुटिल हँसी लिए हुए वहां से चला जाता है ।।।

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