Friday, 24 June 2016




THE GOOD WITCH: Evolution


द गुड विच: उद्भव


विचानिंग



(C.O.P. ब्रह्माण्ड)
(लेख़क- Shariq )





वर्ष:1990
स्थान: किलुपूंजी गांव, असम

असम के घने जंगलों के बीच बसा हुआ एक छोटा सा गांव। यूँ तो आमतौर पर ये गांव शांत पड़ा रहता है, पर आज इसमें मौजूद एक कच्चे घर में काफी शोर शराबा हो रहा था। कुछ औरतें घर में इकठ्ठा थीं। साथ ही बाहर ज़ोरों से बारिश हो रही थी।
"बधाई हो सिलगुन! बेटी हुई है!" वहां मौजूद एक औरत ने पास ही खड़े एक आदमी से कहा।
सिलगुन के चेहरे पर अजीब सी मुस्कराहट आ गयी। अपनी बेटी को उस औरत से अपनी गोद में ले लिया।
"मेरी बेटी.." अपनी बच्ची को देखते हुए वो बोला।
"देखो मारिया हमारी बच्ची...कितनी प्यारी है" पास ही बिस्तर पर लेटी अपनी पत्नी मारिया से उसने कहा।
"हाँ। ऊपरवाले का बहुत शुक्र है" मारिया अपनी बच्ची को प्यार से देखते हुए बोली। उसकी आँखों में ख़ुशी के आँसू थे।

सिलगुन और मारिया पति पत्नी थे। उस गांव में रहने वाले कई लोगों में ये भी शामिल थे। पर उनसे अलग थे, क्योंकि दोनों विल्टन समुदाय से संबंध रखते थे। पर वो ये बात गुप्त रखते थे क्योंकि विल्टन समुदाय जादू टोना करने वालों का माना जाता है, और उससे संबंधित लोगों को खुलेआम दूसरों के साथ रहने की अनुमति नहीं थी।
लोगों का मानना था कि विल्टन समुदाय की औरतें डायन होती हैं। वो अपने जादू और तंत्र से इंसानों को मारती हैं, उनका खून पीती हैं, उनके खेत की फसलों को ख़राब कर देती हैं। भयानक बीमारियां लाती हैं और और भी न जाने क्या क्या। इसलिए वो दोनों चुपचाप वहां अपनी गुज़र बसर कर रहे थे ताकि किसी को उनके बारे में पता ना चल सके।
पर आज उनके यहाँ जन्म लिया था एक बच्ची ने!

"इसका नाम क्या रखें पर" सिलगुन अपनी पत्नी से बोला।
मारिया ने अपनी बेटी को प्यार भरी नज़रों से देखा। वो अब सो रही थी।
"मेरी चाँद के टुकड़े जेसी बेटी का नाम होगा......... समायरा"




वर्ष: 1990
स्थान: किलुपूंजी गांव, असम

उसी घर में एक झूले में लेटी हुई छोटी बच्ची रो रही थी।
"चलो मारिया जल्दी करो। आज समायरा को पैदा हुए 2 महीने हो गए। और तुम तो जानती ही हो के विल्टन परंपरा के अनुसार हमें इसकी विचानिंग कराने जाना होगा। और वो भी ख़ामोशी से" सिलगुन ने हल्के स्वर में मारिया से कहा।
"हाँ। बस ज़रा अपनी छड़ी ले लूँ" मारिया ने उसी स्वर में जवाब दिया।
फिर थोड देर बाद ही वो दोनों अपनी बेटी को सीने से लगाए दबे पांव घर से चल पड़े।

विचानिंग- एक ऐसी प्रक्रिया जिसमे विल्टन समुदाय के नए जन्मे बच्चों को आधिकारिक रूप से विल्टन घोषित किया जाता है। हर नवजात को इस प्रक्रिया से गुज़रना आवश्यक है।

सिलगुन बड़ा चौकन्ना था। रात का अँधेरा तो आ ही चूका था, साथ ही घना जंगल भी था। जंगली जानवरों की आवाज़ें आ रही थीं।
पर सिलगुन को उनका कोई डर नहीं था। बल्कि वो घबरा रहा था कि कहीं उनको कोई देख न ले।
थोड़ी देर बाद वो जंगल के अंदर एक पुराने खंडहर में पहुंचे। वहां पहले से ही काफ़ी चहल-पहल थी। कुछ 10-12 आदमी और औरतें वहां मौजूद थे जिनमें से कुछ अजीब सी दिखने वाली भी थीं।

ये सब विल्टन समुदाय से ही संबंधित लोग थे जो कि अलग अलग अलग दूर गांव में रहते थे और सिलगुन-मारिया के बुलाने पर यहाँ इकट्ठा हुए थे। ये काम बड़ा ही गुपचुप तरीके से होना था।

"कोई परेशानी तो नहीं हुई आने में" वहां मौजूद एक विल्टन औरत ने मारिया से पूछा।
"नहीं ओरा। पर कुछ कह नहीं सकते।" मारिया बोली।
"हाँ। ये माहोल बहुत ख़राब चल रहा है। परसों विच हंटर्स ने मेरे गांव में एक निर्दोष औरत को जला डाला । जबकि पिछले हफ्ते ही हमें सायना के मरने की खबर मिली थी।" एक दूसरी औरत बोली। उसने एक बड़ा हैट लगाया था।
"हाँ डेसिना। खतरा बहुत है। हंटर्स के अलावा इरुका और शाउला का भी डर है। ऐसे में तुम्हारे बच्चा होना काफ़ी खतरनाक है मारिया।" ओरा बोली।
"मैं समझती हूँ हालातों को" मारिया ने कहा।
"पर घबराओ मत। हम सब यहाँ पर हैं। उम्मीद करते हैं कुछ बुरा ना हो" जूली, एक और औरत दिलासा बंधाते हुए बोली।
"ठीक कहा जूली। पर अब अंदर चलो। सब लगभग तैयार है। जितनी जल्दी पूरी प्रक्रिया हो जाये अच्छा है।" ओरा ने उनको बताया।
वो लोग अंदर चल दिए।

जल्द ही विचानिंग की रस्में शुरू हो गयीं। समायरा को एक झूले में लिटा दिया गया। सिलगुन और मारिया पास ही खड़े हो गए। पीछे बाकि के लोग थे।
सामने एक विल्टन पुजारन थी। काफ़ी अजीब सी दिख रही थी। काला चोगा पहने, सर पर लंबा हैट लगाये। उसके हाथों में भी एक छड़ी थी।
उसके पास पांच प्याले रखे हुए थे। उनमे अलग अलग रंग के द्रव थे।

"विकड् हु डलो अवो परस.."
बुढ़िया पुजारन अजीब सा मन्त्र पढ़ने लगी। साथ ही उसने छड़ी भी घुमाना शुरू कर दी। फिर उसने बच्ची को छड़ी से छुआ और एक प्याले में थोड़ा सा द्रव लेकर उसके ऊपर छिड़क दिया। और फिर बाकि के द्रव को झूले के चारों ओर छिड़का।

"सीह् मकु दुबसल शो गिनी..." उसने दूसरा मन्त्र पढ़ना शुरू किया। उसने फिर छड़ी घुमाई और दूसरे प्याले से कुछ हरा रंग का द्रव लेकर बच्ची के ऊपर छिड़क दिया।
फिर वही प्याला उसने सिलगुन और मारिया की तरफ बढ़ाया। उन्होंने वो द्रव अपने माथे पर लगा लिया और उसमे से थोडा सा द्रव लेकर अपनी बेटी पर छिड़क दिया।

"तीसरे मंत्रित द्रव के प्याले को डालने से पहले अब तुम दोनों भी अपनी छड़ी निकाल लो" वो पुजारन उन दोनों से बोली।
उन्होंने वैसा ही करा।

"क्रिम दुक सुओष पक मिल्न तम..."
बुढ़िया छड़ी घुमाने लगी। फिर उसने सिलगुन और मारिया को भी इशारा किया और वो भी उसके साथ मन्त्र दोहराने लगे।

"फ्रस हिकोर तः बिलो मतह नू दुलो शो..."
"फ्रस हिकोर तः बिलो मतह नू दुलो शो..."

उन तीनों ने अपनी छड़ियां बच्ची के पैरों पर छुआ दीं। पुजारन ने अब तीसरा प्याला उठाया और उसमें मौजूद लाल रंग का द्रव उसने अपने हाथ में लेकर उन दोनों की तरफ बढ़ा दिया और उन्हें द्रव अपने हाथ में लेने को कहा। उन्होंने उसे हाथ में ले लिया।
फिर तीनों ने एक साथ द्रव बच्ची के ऊपर छिड़क दिया।
अब बुढ़िया ने उस प्याले को वहीँ रख दिया और कुछ मन्त्र बुदबुदा कर उस प्याले क ऊपर अपनी छड़ी रखी। प्याले का द्रव आग से जल उठा।

"अब चौथे प्याले की रस्म होगी। इसके लिए पांच और जादुगरनियां आ जाएँ।"
ओरा, जूली समेत पांच औरतें आगे आ गयीं।
अब बुढ़िया ने अपने, मारिया और उन सभी बच्ची के चारों तरफ गोल घेरा बना लिया।
"ध्यान रहे ये घेरा टूटने न पाये" पुजारन बोली।

"साटों गिटून् जव गृ तस मे विक् माटी दरी..."
सातों उन मन्त्रों को दोहराते हुए बच्ची के चारों और चक्कर काटने लगीं। उनकी छड़ियां हाथ में थीं।
पुजारन ने प्याला उठाया और वो द्रव छिड़कने ही वाली थी कि तभी.....




"धड़ाक..." की आवाज़ के साथ वहां पड़ी मेज़ किसी धमाके के साथ गिर पड़ी।
सामने से दो औरतें अंदर आयीं। वो लंबे हैट पहने थीं, हाथों में एक छड़ी और लाल चोगे पहने। उन्ही में से एक ने धमाका किया था।
"अरे यहाँ तो दावत चालू है और हमें बुलाया भी नहीं"
"कोई बात नहीं। पर दावत का मज़ा तो अब आएगा। ईहीहीहीही.."
सब लोग चौंक पड़े।

"इरुका और शाउला!" वहां मौजूद एक आदमी घबराया हुआ सा बोला।
"क्यों आई हो तुम यहाँ पर"
सिलगुन आगे आते हुए बोला।
"अरे भाई हमारी भतीजी पैदा हुई है। कैसे न आते" इरुका हंसी।
"आखिर आशीर्वाद भी तो देना है। ईहीहीहीही" शाउला ने भी ठहाका लगाया।
"नहीं। चुपचाप चली जाओ तुम दोनों। वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।" सिलगुन अपनी छड़ी निकालते हुए बोला।
"चुपचाप। ओओ... नहीं नहीं। कुछ पटाखे तो फोड़ लें" इसी के साथ शाउला ने अपनी छड़ी हिलाई और एक दीवार पर धमाका कर दिया।

विल्टन लोगों में हंगामा मच गया। कई विल्टन भागने लग गए पर कुछ उन दोनों से टक्कर लेने लग गए।
दोनों तरफ से छड़ियों से हमला होने लग गया।

इधर बुढ़िया पुजारन बुरी तरह चौंक गयी पर उसने प्याले के द्रव को छोटी समायरा के ऊपर छिड़क दिया।
मारिया के साथ ही बाकी की विचेस यानि जादुगरनियां भी घबरा गयीं थीं क्योंकि इन्हें मालूम था कि इरुका और शाउला दोनों ही बहुत खतरनाक और बुरी जादुगरनियाँ हैं।
वो सातों समझ गयी थीं कि जल्दी से रस्में पूरी करनी होंगी। उन्हें अपनी से ज़्यादा छोटी समायरा की जान बचानी थी जिसके लिए वो दोनों आयी थीं।

"अब बस आखिरी प्याला बचा है पर उसके लिए सिलगुन और तुम्हे दोनों को मन्त्र पढ़कर ये मंत्रित काढ़ा बच्ची पर छिड़कना है और उसे पिलाना है। और ये काम जल्दी ही करना होगा वरना प्रक्रिया बेकार हो जायेगी और दोबारा विचानिंग नहीं हो पायेगी। साथ ही इसका बुरा असर भी पड़ सकता है" वो मारिया से बोली।

तभी इरुका का छड़ी से किया एक ऊर्जा वार उनकी ओर बढ़ा। पर मारिया ने उसे अपनी छड़ी से रोक लिया।
शाउला ने बाकी सबको संभाला हुआ था और इरुका उन लोगों और छोटी समायरा की ओर वार करते आ रही थी।
वो सब भी इरुका से लड़ने लग गयीं।
इधर से उधर छड़ी से ऊर्जा वार होने लग गए।
पर इरुका काफी शक्तिशाली थी। वो सब मिलकर भी उसके सामने टिक नहीं पा रही थीं।

तभी इरुका ने समायरा की ओर एक वार किया। पर उसे बीच में ही रोक लिया सिलगुन ने। वो भी वहां आ चुका था।
दूसरी तरफ शाउला के सामने भी कोई टिक नहीं पा रहा था। उसने वहां आग भी लगा दी थी। सब विल्टन लोग घायल होते जा रहे थे और भाग रहे थे।
"सिलगुन अब हमें आखिरी प्याले का मंत्रित काढ़ा समायरा के ऊपर छिड़कना होगा और उसे पिलाना होगा।" मारिया इरुका के ऊपर वार करते हुए बोली, पर वो बचा गयी।
"तुम लोग जल्दी करो। हम इसे संभालते हैं।" डेसिना ने उनसे कहा।

पुजारन फिर हवा में छड़ी घुमाकर जल्दी जल्दी मन्त्र पढ़ने लगी।

"लास हेडन ग्रम नह जुग सलो पाबा..."
"लास हेडन ग्रम नह जुग सलो पाबा..."

अब उसने आखिरी प्याला उठाया पर तभी वहां आई शाउला ने उसपर वार किया। पुजारन के हाथ से प्याला छूट पड़ा।
पर तभी सिलगुन ने उसे लपक लिया और मारिया के साथ फ़ौरन ही उसका काढ़ा बच्ची के ऊपर छिड़क दिया और मारिया ने समायरा को जल्दी से थोड़ा काढ़ा पिला दिया।

इतने में शाउला ने उनपर वार किया और सिलगुन की पीठ जल उठी।
मारिया पलटी और फौरन ही शाउला पर छड़ी का वार किया जिससे वो छिटक कर दूर जा गिरी।
इधर इरुका भी ओरा, जूली और डेसिना का सामना कर रही थी। जूली काफी घायल हो गयी थी।

तभी इरुका लपकी और उसने समायरा को उठाना चाहा पर जैसे ही उसने बच्ची को छुआ उसे तेज़ झटका लगा और वो पीछे की ओर गिर पड़ी।

"विचानिंग पूरी हो गयी" नीचे गिरी पड़ी पुजारन बोल पड़ी।
"तूने मेरी बेटी को हाथ लगाया.." बहुत गुस्से में मारिया बोली और साथ ही उसने इरुका पर एक ज़ोर का वार किया। इसके बाद लगातार वार करने लगी।
सिलगुन अपनी आग अपने जादू से बुझा चूका था, और वो शाउला की तरफ लपका और छड़ी का ऊर्जा वार किया।
ओरा और डेसिना उनका साथ दे रही थीं।
पांसा पलट गया था। अब इरुका और शाउला कमज़ोर पड़ रही थीं। वो पीछे की ओर भागने लगीं।

"इरुका जल्दी भाग चल। विचानिंग पूरी हो गयी और हम नाकाम" शाउला बोली।
"नहीं। हम नाकाम नहीं होंगे। हम वापस आएंगे। और तुम अच्छी जादुगरनियों को ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे और ना ही इस बच्ची को। हम वापस आएंगे।" भागते हुए इरुका बोली।
इसी के साथ वो दोनों वहां से भाग उठीं।

"येहह। हमनें उन्हें भगा दिया" अंदर ओरा चैन की साँस लेते हुए बोली। वो लोग खुश हुए कि खतरा टल गया और विचानिंग भी पूरी हो गयी।
मारिया ने फ़ौरन समायरा को गोदी ले लिया। सिलगुन भी आ गया।


उन्होंने देखा, छोटी समायरा मुस्कुरा रही थी।




[समाप्त]

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