Saturday, 11 June 2016

कॉमिक अवर पैशन प्रस्तुत करते हैं...
" मौत का खेल"
....कार्तिक अय्यर ( वेदाचार्य) की तिलिस्मी कलम से.

दिमाग का सबसे बड़ा खिलाड़ी, सुपर कमांडो ध्रुव...जिसको आजतक कोई अपराधी हरा न सका.मगर वो कभी अपनी छोटी बहन से बहस में न जीत पाया!

" थोड़ा सलीके से खाओ कमांडो साहब, आवारागर्दी करने लिये ताकत भी तो चाहिये!"
" मैं आवारागर्दी हीं करता, राजनगर की रक्षा करता हूं.और तू जब से विदेश में पढ़ रही है बड़े मैनर वैनर सीख गई है!"
" ओह! तो मिस्टर मैनरलैस को मैनर्स पसंद नहीं!"
" चुप कर बंदरिया.चाहे तू जहां भी पढ़ ले, कितनी भी बड़ी साइंटिस्ट हो, अपने भाई से बड़ी नहीं हो सकती!"
" एंड यू मिस्टर आवारू! तुम चाहे कितने भी बड़े बन जाओ मगर श्वेता द जीनियस से कभी बहस में जीत नहीं सकते!"
मां को इस बहस को यहीं रोक दिया
" अब बस बहुत हो गया! शांत रहो तुम दोनों! चुपचाप खाना खाने दे भैया को ! उसे थोड़ी देर बाद गश्त पर जाना है!"
" काहे की गश्त? रक्षक बनने का ठेका बस इसने लिया है..."
तभी डोरबेल बजती है.

ट्रीं ट्रीं ट्रीं....

ध्रुव: मैं देखता हूं.

 ध्रुव ने दरवाजा खोला

" लोरी तुम!"
" हां ध्रुव, तुमसे बहुत जरूरी काम था दरअसल..."
" अरे कौन है बेटा?".

" अंदर तो बुलाओ उनको..मैनर लैस!"

 "ध्रुव मैं तुमसे एक जरूरी सिलसिले मे..."
" पहले अंदर आओ लोरी, आराम से बात करते है!"

ध्रुव लोरी को अंदर बिठाता है.
" नमस्ते आंटी जी!मैं लोरी.तंत्रसाधिका.."
" ओ हां हां, ध्रुव ने बताया था तुम्हारे बारे में.तुम लोगों ने उन निगेटिव्स की मुसीबत का अंत किया था!वैसे सही समय पर आई हो.आओ मैं खाना लगाती हूं!"

श्वेता-(ओह! लोरी! तंत्रसाधिका .इसने जान पर खेलकर निगेटिव्स का सफाया करने में मदद की थी)

लोरी- थैंक्यू आंटी जी, मगर बात बहुत जरूरी है.ध्रुव, मुझे तुमसे बहुत जरूरी बात करनी है, मुझे एक खतरनाक पापात्मा के पाप संकेत राजनगर में मिले हैं .मैं तुम्हारी मदद लेने आई थी.मगर तुम कमांडो हैडक्वार्टर में नहीं मिले तो मैं यहां चली आई"
ध्रुव- " पूरी बात बताओ लोरी!"
लोरी"- ये बात मैं तुमको अकेले में बताऊंगी"
ध्रुव लोरी को अपने कमरे में ले गया.
" हां अब बोलो!"
लोरी-" ध्रुव! वो पापशक्ति टीवी के जरिये लोगों पर वार करती है और उनको मार डालती.उसकी ताकत में आश्चर्यजनक वृद्धि हो रही है!"
ध्रुव-" मगर टी वी से कैसे?"

लोरी-" हां ध्रुव! एक चैनल है.चैनल भूतहा.अभी नया ही निकला है.इस पर एक शो आता है." मौत का खेल" .

ध्रुव-" मगर वो तो एक भूतहा शो है.अरे सब हाथ की सफाई है! मैंने भी देखा है!"
लोरी-" यदि ये होता तो मैं यहां न आती.इस शो की संचालक एक महिला है.मैडम विक्टोरिया .वो एक प्रतियोगिता कराती है.वो एक नर्सरी राइम को पांच पर गाती है.इस दौरान प्रतियोगी को एक गुप्त हीरा ढूंढना होता है.यदि वो तय समय में ढूंढ नहीं पाता तो वो ..."
" हार जाता है! अरे ये तो बस एक खेल है."
" नहीं ध्रुव.खेल से ही नहीं वो व्यक्ति जिंदगी से हार जाता है "
" ओह! काफी दिनों से राजनगर में भी गुमशुदगी की वारदातें बढ़ रही हैं."
" ये उसी का काम है!"
" लोरी, यदि कोई और यह कहता मैं इसे गप्प समझता.पर तुम कहती हो तो मान लेते हैं.वैसे अभी दस बज रहे हैं.ये शो आता ही होगा!श्वेता का पसंदीदा शो है!"
कोई दोनों की बातें सुन रहा था.ये कोई और नहीं, बल्कि श्वेता ही थी!
श्वेता( ओह! तो ये माजरा है ." मौत का खेल! पर इस नाटक पर श्वेता नहीं चंडिका पर्दा डालेगी!
)
" ध्रुव, उस मैडम विक्टोरिया में गड़बड़ है."
" ठीक है लोरी.यदि ऐसा है तो मैं वो शो चलाकर देखता हूं!"
ध्रुव टी वी ऑन करता है ..

" दोस्तों! मैं मैडम विक्टोरिया स्वागत करती हूं आपका " मौत के खेल " में.
आज हमारे शो में ९९वीं प्रतियोगी खेलेंगी मौत का खेल " हांटेड कैसल" में."

लोरी-" हां ध्रुव यही है वो ."
" ओह!"
" अब ये औरत आज के प्रतियोगी का नाम लेगी!"

" और आज की हमारी कंटेस्टेट हैं.........मिस लोरी!"

लोरी के पांव तले जमीन खिसक गई-" ये...ये क्या बक रही है ये! मैंने अपना नाम तक नहीं दिया शो के लिये.ये मेरा नाम कैसे जानती है?"

टी वी से आवाज आई-" मैं केवल ये नहीं जानती कि तुम्हारा नाम क्या है.मैं ये भी जानती हूं कि तुम एक संत की वंशज और तंत्रसाधिका हो.और अब तुम खेलोगी मौत का खेल!"
ध्रुव- ये..ये तुमसे बात कर रही है जैसे तुम्हारे सामने खड़ी हो.."
" यही नहीं कमांडो.मैं इसको यहां से ले भी जाऊंगी!".

विक्टोरिया का हाथ टीवी से निकलकर लोरी की ओर लपका और लोरू टी वी में खिंचती चली गई!
" आहहहहह छोड़ मुझे डायन!"
" नहीं ..लोरी!"

ध्रुव ने लोरी को खींचना चाहा मगर खुद टीवी में खिंचता चला गया.
और दोनों ने खुद को एक नये जंजाल में पाया.
" ये..ये कौन सी जगह है?"
पीछे से आवाज आई " तुम हांडेट कैसल में हो.और तुम्हें खेलना है मौत का खेल."
" तुम...मैं जानती थी तुम ही वो शैतान हो जो निर्दोषों को मार रही है."
' हां, और तुम भी उनमें से एक होगी..यदि मौत का खेल खेलने से इंकार किया!"
" चुपचाप आत्मसमर्पण कर दो मैडम.वरना मैं तंत्र साधिका हूं.तुमजैसी चुड़ैलें को तो कच्चा खा जाती हूं"
" हा हा हा हा .नादान लड़की! तुम भूल रही हो कि आज अमावस है और आज की रात हमारी शैतानी शक्तियां चरम पर होती हैं.तुमको खेलना ही पड़ेगा.मेरे गायब होते ही एक नर्सरी राइम बजेगी उसके पांच बार दोहराने तक तुमको हीरा ढूंढना है.तो शुरु होता है...मौत का खेल....!"

मैडम विक्टोरिया के गायब होते ही हम्टी डम्टी राइम बजने लगी.

किले के बाहर...

" ओह! मैं किले के बाहर आ गया हूं.पर लोरी कहां है? और ये किला राजनगर में कब पैदा हो गया?"

पीछे से आवाज आई
" ये किला अदृश्य है.यहां केवल टीवी के जरिये आया जा सकता है.और बिन बुलाये मेहमान को पहले किले के रक्षक काकभगौआ को पार करना पड़ता है!"
ध्रुव मन में-" ओह! ये किले के आसपास ये अजीब सा खेत और ये काकभगौआ!

ध्रुव के घर में....
" ओह! ध्रुव के कमरे से चीखने की आवाज़! ये श्वेता कहां गई? लहता है सो गई है.ओफ! मैं जाकर देखती हूं!"
रजनी देवी ध्रुव के कमरे की ओर बढ़ीं.
" ये दरवाज क्यों बंद है?"

दरवाज का हैंडल छूते ही रजनीदेवी को जोरदार ऊर्जा का झटका लगा.उनके होश कायम न रह पाये.
" ओह! मम्मी! लहता है मुझे चंडिका बनने में समय लग गया."
चंडिका ने रजनी देवी को झटका खाते देख लिया था.

चंडिका ( लगता है किसी शैतानी शक्ति ने दरवाजे पर सुरक्षा जाल बिछाकर रखा है.उफ! पापा भी शहर से बाहर किसी काम से गये हैं.मम्मी को संभालती हूं!)
चंडिका रजनीदेवी को उठा कर अपने कमरे में ले गई और बिस्तर पर लिटा दिया.
चंडिका-( मैं बहुत दिनों से सुपरनेचुरल थिंग्स पर रिसर्च कर रही हूं .इनसे कई बार भैया का सामना हुआ है इसलिये.मेरी पाउच बेल्ट में कई सामग्रियां है जो परामानवीय ताकतों से निपट सकती है.अब जरा भैया और लोरी की खबर लूं...)

चंडिका इस बार सावधान थी.
चंडिका-( इस दरवाजे में शैतानी शक्ति है.मेरी स्पेशल वॉटर गन जिसमें पवित्र गंगाजल भरा है शायद इस शक्ति को नष्ट कर दे)
वॉटर गन की फुहार सच में रंग लाई.
चंडिका-( वाह! झटका नहीं लगा, और ये दरवाजा खुल गया!)
अंदर आते ही...
( ओ माई गॉड! भैया और लोरी टी वी में! लोरी मौत के खेल में .यानी लोरी सच कह रही थी.भैया किसी स्केयर क्रो से लड़ रहा है.मुझे उसे बचाना होगा!)

कुले के बाहर..

" तू जरूर महान पुण्यात्मा है इसलिये टी वी के जरिये यहां आ गया.मगर तू काकभगौआ के गंडासे से नहीं बचेगा"

ध्रुव , गंडासे का वार बचाते हुये-" मुझे मारना इतना सरल नहीं है भूसे की बोरी."
" ओ! तू फुर्तीला बहुत है मगर काकभगौआ से बच नहीं सकता."
ध्रुव ने उछलकर फ्लाइंग किक काकभगौये के मुंह पर जड़ दी.
ध्रुव( ओह! इसके भूसे के शरीर पर कोई वार असर नहीं कर रहा है.ऐसा लग रहा है कि रेत के ढेर पर वार कर रहा हूं)

काक-" मुझ पर तेरे वारों का असर नहीं होगा लड़के.देख मेरा शैतानी कहर!"

काकभगैआ का मुंह खुला और बुरादे का गुबार ध्रुव की आंखों में आ पड़ा.ध्रुव जरा विचलित हुआ.गंडासा उसकी गर्दन की ओर बढ़ चला .मगर ध्रुव के दुश्मन सैकड़ों हैं तो दोस्त भी कई हैं.
तभी ध्रुव को एक आकृति लेकर गंडासे से दूर उछाल गई.
" बचो ध्रुव!"
" ये..ये तो चंडिका की आवाज है.पर तुम यहां कैसे?"
" श्वेता ने तुम दोनों की बात छुपकर सुनी और गड़बड़ जानकर मुझे बुला लिया!"
" तू कौन है ल़ड़की? मेरे काम में अड़ंगा डालकर अपनी मौत बुला ली है तूने."

" इतनी जल्दी नहीं शैतान.ध्रुव की बहन से कई गैजेट तुझ जैसे शैतान के लिये ही ले आई हूं"
काकभगौआ वार करता तभी चंडिका की वॉटर गन ने उस पर फुहार छोड़ी.
" आहहहह!
ये क्या है?"
" पवित्र गंगाजल.अब तू नहीं बचेगा!"

ध्रुव अब तक संभल गया था
" ओह चंडिका! यू आर जीनियस!"
" जीनियस श्वेता है ध्रुव.देखा, एक वार में टें बोल गया है"
" इतनी आसानी से नहीं कीड़ो.गंगाजल ने केवल मुझे जरा कमजोर किया है.मगर ये हमारा इलाका है यहां पुण्यशक्ति इतनी कारगर नहीं है.अब मरोगे तुम दोनों!"

...

किले के अंदर...
लोरी-(लगता है प्रतियोगिता खेलनी ही पड़ेगी.यहां मेरी शक्ति कमजोर हो रही है.और कोई विकल्प नहीं.दो बार राइम बज चुकी है.मुझे खेलना ही होगा.)
लोरी कई कमरे छानती है.मगर हीरा नहीं मिलता.
( ओह! हीरा नहीं मिल रहा.लगता है कुछ करना होगा)
लोरी ने आंखें बंद की.और...
( ओह! किसी तीव्र ऊर्जा का आभास हो रहा है.शायद यही हीरा है)
लोरी एक कमरे की ओर बढ़ चली.

किले के गुप्त कमरे में मैडम विक्टोरिया एक जादुई ग्लोब में सारा प्रकरण देख रही थी.

" हा हा हा! आखिर ये लड़की खेलने पर मजबूर हो गई.कोई पुण्यात्मा ही हीरा तलाश सकता है.आज मेरी तलाश पूरी होगी और मेरे सरताज लॉर्ड कैंटरविल को पुनर्जीवन मिलेगा!और काकभगौआ उन दो घुस पैठियों का काम तमाम करेगा!"

मैडम विक्टोरिया का कहना सच हो रहा था.
किले के बाहर

" ओह! वाटर गन बेअसर रही "
चंडिका बैक फ्लिप खाते हुये बोली.
" तुमने अपनी कोशिश कर ली अब मैं अपनी कोशिश करता हूं.ये शैतान रोशनी से जरूर विचलित होगा.और ये करेंगे मेरे सिग्नल फ्लेयर!"

सिग्नल फ्लेयर काकभगौआ की आंखों को चौंधियाने लगे.और चंडिका व ध्रुव के वार उस पर बारिश की बूंदौं की तरह बरसने लगे.

" आह! तुम कीड़ो की बचकानी हरकतों से मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा.मैं भले आंख नहीं खोल सकता पर तुम्हारी तरंगे महसूस करके वार कर सकता हूं.
"
काकभगौआ का मुंह खुला और नुकीले तिनके बाणों की तरह चंडिका और ध्रुव की तरफ लपके.
" ये तिनके यदि तुमको लग गये तो तुम कुछ देर के लिये बेहोश हो जाओगे.यदि तुम्हारे शरीरों में अत्यंत शक्तिमान पुण्यात्मा न होती तो तुम मौत से बच न पाते!"

चंडिका और ध्रुव उछलकर तिनकों से बचने लगे.
तिनकों के तूफान में एक तिनका चंडिका को लग गया.

" बचो चंडिका"
ध्रुव चंडिका को तिनकों से दूर ले गया.
ध्रुव-( ओह! चंडिका को संभलने में वक्त लगेगा.तब तक मुझे इसका सामना करना होगा.इसके शरीर में स्टार ब्लेड भी धंसकर बेकार हुये जा रहे हैं .एक काम करता हूं.इसका गंडासा छीनने की कोशिश करता हूं.पर इसका मुंह बंद करना होगा.)
ध्रुव ने एक पत्थर उठा कर काकभगौआ की ओर उछाला.और तिनकों की स्पीड पर ब्रेक लग गया.ध्रुव ने लपककर गंडासा छीन लिया.
( आहा! अब शायद बात बने..)अरेरेरेरे! ये गंडासा मेरे हाथ में आने से इंकार कर रहा है.और उड़कर इसके हाथ में जा रहा है.."
काक-" थू$$$! ( पत्थर मुंह से निकाल कर) ये गंडासा बस मेरा कहा मानता है .पर अब तुझे और मौका नहीं दूंगा.मेरी शक्तियां रात में बुलंद हो रही हैं.अब तू नहीं बचेगा"
काकभगौआ का जादू चला और उसके शरीर में आठ भूंसे के हाथ निकलने लगे.और उनमें घातक हथियार चमकने लगे.
और ध्रुव की मुश्किलें बढ़ने लगीं.
" देखा लड़के! काकभगौआ अपने भूसे के शरीर का आकार बढा़ घटा सकता है.अब तू नहीं बचेगा."

किले के अंदर....

( ओह! आखिरी बार राइम चल रही है .और इस कमरे में हीरे का स्रोत नहीं मिल पा रहा है.अब तो मेरी शक्ति और क्षीण हो रही है अब तो संकेत भी पकड़ नहीं पा रही हूं)

राइम खत्म हो गई...

मैडम विक. की आवाज़ गूंजी-समय खत्म हुआ लड़की.तू वो नहीं है जिसकी मुझे जरूरत है.मगर तेरी बलि मुझे चाहिये."
मैडम एक्स प्रकट हुई और उसके हाथ से निकली जादुई रस्सी लोरी को जकड़ती चली गई.
लोरी-( आहहह! मेरी शक्तियां कम हो रही हैं.और मैं इस रस्सी से नहीं छूट पा रही हूं.ध्रुव कहां है? अब वही मुझे बचा सकता है और दुनिया को भी!"

ध्रुव खुद काक. से बच रहा था.
" तू सच में काबिले तारीफ़ है लड़के.मेरी बुलंद शक्तियों के कारण भी तू कलाबाजियां खाकर बच रहा है.लेकिन कब तक?"
" तुम ठीक तो हो न चंडिका?"
" हां ध्रुव.मैं जल्दी होश में आ गई.....ध्रुव..वो देखो!"
" अरे! ये क्या ..यहां की फसल रात के समय में तेजी से बढ़ रही है! "

" ये फसल ही इसकी शक्ति है ध्रुव और इस फसल को नष्ट करने का सामान मैं लाई हूं"
" मैं इसका ध्यान बंटाता हूं और तुम फसल को देखो!"

" ओके"
ध्रुव काक.पर फिर टूट पड़ा.

ध्रुव( मुझे इसके हथियारों का इलाज करना होगा.ये लकड़ी का बड़ा टुकड़ा.मैं इसपर स्टार ब्लेड धसाऊंगा.और बन जायेगी एक मिनी तलवार)

" ओह! अब तुझे भी हथियार मिल गया.चल ये हसरत भी पूरी कर ले.पर तू ज्यादा देर तक बत न सकेगा!"

चंडिका( इस फसल को नष्ट करना होगा.और ये करेगी मेरी फायर गन.)
फायर गन ने फसलों को सुलगा दिया.

काक. " चाल अच्छी है लड़की.शायद तू समझ गई है कि फसलें ही मेरी शक्ति हैं जो कालीशक्तियों का पोषण मुझतक पहुंचाती है.दरअसल मैं इन्हीं में सूखी फसलों से बना हूं इसलिये ये मुझसे जुड़ी हुई हैं.पर ये जानकर तुम मेरा कुछ बिगाड़ न पाओगे."
काक. ने इशारा किया और फसल के पास रखा पाइप सक्रिय होकर पानी की फुहारें उगलने लगा और फसल की आग बुझ गई.

" ओह! फायर गन भी बेअसर रही.अब तो गीली फस में आग भी नहीं लग सकती!"
ध्रुव- कोई बात नही चंडिका इसकी फसल को हमारी ताकत नहीं काट सकती पर इसकी तो काट सकती है"
ध्रुव ने देखा कि पास में ग्रास कटर मशीन रखी हुई है.मगर उसे हाथ लगाते ही...

" ओह! ये तो छूते ही चलने लगी.मेरे पीछे पड़ गई.और इसमें से खतरनाक नेजें निकल कर मुझपर वार कर रहे हैं!"

" हा हा हा! तूने अपनी मौत का सामान खुद चुन लिया.अब ये मशीन तेरा कीमा बना देगी!"

ध्रुव( ये सही कह रहा है.मुझे कुछ करना होगा.)
"चंडिका, सुनो .मेरे पास एक योजना है तुम फायर गन से इससे निपटो और मैं..."

ध्रुव ने ग्रासकटर का ध्यान अपनी और खींच लिया और चंडिका फायर गन लेकर काक. की ओर चल पड़ी.

" आ लड़की आ! तेरा मित्र तो कटकर मरेगा और तू भी
तेरे बचकाने हथियार मुझपर काम नहीं करेंगे!"
" मेरे हथियार तुझे मार नहीं सकते.पर घायल तो कर सकते हैं!"

फायर गन ने काक. के भूसे के शरीर को सुलगा दिया.
" आहहहह! चाल तो तेरी अच्छी है.पर मैं जल्दी संभल जाऊंगा."

ध्रुव-( गुड! ये मेरे पीछे पड़ा हुआ है.अब ये मेरा पीछा न छोड़ेगा.और ये वही काम करेगा जो मैं इससे कराऊंगा!)

इधर काक. के इशारे पर पाइप ने फुहार छोड़कर आग बुझा दी.
" देखा लड़की , अब तू नहीं बचेगी!"
" इतना सरल नहीं है मुझे मारना.ये देख, मेरे पास चंदन की लकड़ी के बने पवित्र क्रॉस है जो गंगाजल से अभिमंत्रित है.वॉटर गन का पानी खत्म हो गया पर मेरे पास वारों की कमी नहीं है.अब तेरे जले हुये हाथ इसके निशाने से बच नहीं पायेंगे!"
चंडिका नुकीले क्रॉसों का वार काक. पर करने लगी और काक . जड़ हो गया.

और कुछ ही सेकेंडों बाद पछाड़ खाकर गिर पड़ा.
" अरे! क्या ये क्रॉस के कारण गिर गया?"
जवाब ध्रुव ने दिया-' नहीं चंडिका.पीछे देखोगी तो समझ जाओगी!"
" वाऊ ध्रुव! तुमने तो पूरी फसल की कटाई कर दी.पर कैसे?"
" ग्रासकटर मेरा पीछा कर रहा था.और मैं उसको भगा भगा फसल के बीच कूद पड़ा.और मेरा पीछा करने के चक्कर में मशीन फसल को काटती चली गई!"
" वाह ध्रुव! तुमने तो खेत को गंजे के सर की तरह सपाट कर दिया!"
" मगर इस मशीन का क्या करें?"
" हम काक. के हथियारों का प्योग करेंगे.ये तो मारा गया है.अब इसके हथियार हम उठा सकते हैं"
" गुड"
ग्रासकटर मशीन दोनों की ओर बढ़ी मगर काक. के हथियारों ने उसके परखच्चे उड़ा दिया.
" बहुत खूब ध्रुव."
" मगर हमें अंदर जाना होगा क्योंकि लोरी अंदर मौत के खेल में फंसी है"
दोनों किले के द्वार की तरह बढ़ चले.

किले के अंदर
" ओफ! वो दोनों बच गये.कोई बात नहीं .ये किला अत्यंत खतरनाक शक्तियों से भरा है.वो यहां से बच कक न जा पायेंगे."

लोरी-" चिंता मत कर चुड़ैल .ध्रुव तेरे जैसे कई शैतानों को हरा चुका है.अब तू भी नहीं बचेगी"
" बचेगी अब तू नहीं लड़की.मैं अब तेरी बलि चढ़ाने वाली हूं."

क्या यही अंत है? क्या विक्टोरिया ले पायेगी अपनी
" आखिरी बलि" ?

क्रमशः

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