Tuesday, 14 June 2016

कॉमिंक अवर पैशन प्रस्तुत करते हैं..

कार्तिक अय्यर की कलम से...
मौत का खेल ..भाग दो खंड एक
" आखिरी बलि"
किले के अंदर ...

" उस..उस कल के छोरे ने काकभगौवा को हरा दिया? वो तो बहुत ताकतवर प्रेतात्मा था.
"  
" हा हा हा ! ध्रुव के सामने ये टुच्चे भूत- प्रेत खिलौने हैं.वो तो ड्रैकुला जैसे शैतान को भी मार चुका है अब तेरी बारी है."

विक्टोरिया एक ऊर्जा वार लोरी पर करती है.

" चुप कर लड़की.......वो मेरे किले में है. और यहां से सिर्फ उसकी लाश जायेगी.फिर तेरी बलि चढ़ेगी और फिर मैं " महापुण्यधारी" की लूंगी ...." आखिरी बलि"

किले के बाहर....

" ध्रुव! लोरी अंदर ही है.उसकी जान खतरे में है!"

" नहीं चंडिका, लोरी एक सिद्ध साधिका है.वो इतनी आसानी से खतरे में न फंसेगी बल्कि खतरे का कतरा कतरा कर देगी"

ध्रुव का दावा बिलकुल सही था.लोरी को हराना इतना सरल नहीं था.

लोरी-( शैतानों का अहंकार उनका बहुत बड़ा शत्रु होता है.इसने मुझ पर वार करके अपने बंधनों को हल्का कर लिया है.मैं यहां इसकी मकसद जानने और किले में काली शक्ति के दुष्प्रभाव के कारण बंदी बन गई.अब अगर मैं थोड़ी साधना शक्ति एकत्रित करूं.....तो इसरे बंधनों को तोड़ सकती हूं$$$!"

लोरी ने शक्ति बंधनों को तोड़ दिया और भीषण तंत्र वार विक्टोरिया पर किया.
" तू...तू आजाद कैसे हो गई?"

" मैं तुमसे बात करते हुये ये " तंत्र चिह्न" बना रही थी जो तेरे पिंजरे को काटने के लिये बना है.मगर मेरी शक्ति कम पड़ रही थी.वो तेरे वार ने शक्तिबंधनों को कमजोर कर दिया.और मैं आजाद हो गयी .अब तू देखेगी लोरी की सत्यशक्ति"

लोरी ने हवा हाथ में उठाया और तांत्रिक गोलों का घेरा विक्टोरिया को घेरने लगे. " मूर्ख लड़की ये गोले मेरा क्या बिगाड़ेंगे"

" इन तंत्र गोलों में अभिमंत्रित गंगाजल और तंत्र ऊर्जा भरी है.अब ये गोले फटेंगे और इनके साथ तेरा सर भी तरबूज की तरह फट पड़ेगा"

गोलों के फटके ही तंत्र ऊर्जा और गंगाजल ने विक्टोरिया को भिगो दिया और विक्टोरिया घुटनों पर आ गिरी.

किले अंदर दो तूफान प्रवेश कर रहे थे .

" ध्रुव संभलकर, ये किला कई घातक शैतानी ताकतों का अड्डा है.हमें कदम फूंक फूंककर रखने होंगे."

आगे से आवाज़ आई....

" यहां आये बिन बुलाये मेहमानों को हम अपनी फूंक से " फूंक" डालते हैं!"

" ध्रुव , ये तुम बोल रहे हो? पर तुम्हारी आवाज बदली है और सामने से क्यों आ रही?"

" ये मैं नहीं कर रहा चंडिका.यहां किसी अपने की नहीं पराये की है."

अचानक एक किरण ध्रुव की ओर बढ़ी, ध्रुव भांप गया और अपने हाथों को मुड़े पैरों के घुटनों पर रखकर उछला और वार खाली गया.

" तू भी हमारा अपना हो जायेगा जब तू मरकर हमारी प्रेत जमात में शामिल होगा! और वज्रप्रेत ये काम अवश्य करेगा!"

" ओ गॉड! ये खतरनाक शैतान तो सच में हमको बिजली से " फूंक " देगा!"

" हम अपने फुंकने का इंतजार नहीं करेंगे चंडिका बल्कि इसे फूंक से उड़ा देंगे!"

ध्रुव का शरीर ३६० डिग्री के कोण में हवा में घूमा और एक फ्लाइंग किक वज्रप्रेत मुंह की ओर बढ़ी.मगर ये क्या?...ध्रुव का शरीर आर पार जा गिरा. " मूर्ख लड़के, मैं एक प्रेत हूं और तू मुझे छू तक नहीं सकता और मैं तुझे खाक कर सकता हूं!"

" ओ गॉड! इस प्रेत हम बचेंगे कैसे? "

वज्रप्रेत ने ताबड़तोड़ वार करने शुरु किये.दोनों का बचना मुश्किल हो गया.


किले के दूसरे हिस्से में...

" आह्ह्ह्ह्! पहली बार किसी ने मुझे घुटनों पर ला दिया है.तेरी दाद देती हूं लड़की.जैसे बकरा कटने से पहले फड़फड़ाता है वैसे तू भी बचने की कोशिश करले.मगर विक्टोरिया तेरी बलि जरूर लेगी."

विक्ट. ने आंखे बंद करके जाने क्या मंत्र बुदबुदाया, अचानक उसका शरीर ऊष्मा से तपने लगा.और गंगाजलभाप बन गया और तंत्रऊर्जा विक्ट. सोखती चली गयी.

" हे भगवान! ये इसे क्या हो गया?"

" मेरा शरीर तेरी ऊर्जा सोख चुका है.अब मैं चलती फिरती आग बन गई हूं ..अब बच मेरे वार से!"

लोरी-( ये काली चुड़ैल बहुत ताकतवर है.इसका शरीर तो अंगार बन गया है.मेरे वार ये सोख रही है .जल्द ही ये मुझे भी नहीं छोड़ेगी.)

तभी विक्ट. ने लोरी को एक मुक्का मारा और काली ऊर्जा के झटके से लोरी का शरीर कांप गया.

लोरी-( हाय! शरीर के साथ आत्मा भी कांप गई.मेरी ऊर्जा ये सोख रही है.पर मैं अपनी साधना शक्ति कुंडलीनि से फिर पा सकती हूं.बस मुझे संभलने को समय लग गया.चंडकाल के ऊर्जा हरने के बाद मैंने कुंडलीनी द्वारा ये शक्ति साधना से हासिल की है.पर अब इसका इंतजाम करती हूं!"

लोरी ने अपना हाथों में एक क्रॉस प्रकट किया और विक्ट. की ओर उछाल दिया.

" हा हा हा ....ये क्या बचकानी हरकत है? ये लकड़ी का टुकड़ा मुझे छूते ही जल जायेगा"

मगर...
" अरे! मेरे आस पास का दाब बढ़ रहा हा...क्यों?" " ये क्रॉस मेरी तंत्र शक्ति तुझमें पहुंचा रहा है.अब तेरा शरीर फूलता जायेगा जबतक तू फट न जाये!"

" ये ...ये क्रॉस सच में मुझे फाड़ देगागगगगगगग!"

एक चीख के साथ विक्ट. का शरीरएक धमाके के साथ.लोरी की अतिरिक्त ऊर्जा उसरे शरीर में समा गई.

मगर . .
"अरे! मेरे पीछे से वार किसने किया? "

" मैंने!"
" अरे! विक्. तुम तो फट गई थी न?"

" मैं एक चुड़ैल हूं.एक प्रेत .हम चीथड़े नहीं होते दुश्मन को चीथड़ों में बदलते हैं!"

अंदर कालीशक्तियां लोरी पर भारी पड़ रही थी मगर ध्रुव और चंडिका की भी यही हालत थी.

" तुम लोग कब तक बचोगे? वज्रप्रेत तुमको खाक कर डालेगा!"
" मेरे गैजेट इस परलबेअसर है क्योंकि ये एक आत्मा है...एक ऊर्जा.और ऊर्जाका हम क्या बिगाड़ लेंगे.

" इसकी ऊर्जा मैं अर्थिंग कर देता यदि ये शरीरधारी होता पर इसे छुआकर स्चार रोप भी गल जायेगी.वैसे यदि ये इसका ऊर्जारूप है तो इसका प्रेतशरीर कहां हैं?"

" ये क्या होता है? "

" ये प्रेतों को यातना देने के लिये दंडस्वरूप ईश्वर उनको प्रेत रूपी यातना देह देता है.बिना देह के आत्मा की ऊर्जा भी क्षीण है!ये बाते लोरी की दी एक किताब से पढ़ी.भई, कई बार भूतों से भिड़ा हूं.थोड़ा ये सब जानना जरूरी है"

" तो क्या उस किताब में इनसे निपटने का तरीका नहीं लिखा?'
" है न! यदि इसका प्रेत शरीर पंगु या नष्ट हो जाये!...ओह! वो मारा!"

" क्या तुमको झटका लग गया?"

" नहीं.सुनो चंडिका..."
दोनों वज्रप्रेत के वार बचाते हुये योजना बनाने लगे.
और वहीं किले के दूसरे भाग में..

Post a Comment: