Wednesday, 20 April 2016

Reveal must die
Final battle (part 6)

SPECIAL Thanks to ...Narendra Kothari sir...for nagraj's action scenes
महानगर
अब तक रिवील वेदाचार्य से पीछा छुड़ाने का मन बना चुकी थी।"माफ़ कीजिए,मुझे जाना है।मै फिर कभी आऊँगी इस किताब के साथ।अपना वक़्त देने के लिये धन्यवाद।" वेदाचार्य ने उसे रोकने की कोशिश की,लेकिन रिवील बाहर जा चुकी थी। निकलते ही उसकी मुलाकात देविका से हो गई। "देविका?"रिवील के मुँह से निकला।(उसे पता था कि निशा देविका के साथ ही भारत आई थी) "तुम यहाँ क्या कर रही हो?"रिवील उसकी तरफ बढ़ी। "वही,जो एक रिपोर्टर को करना चाहिए, मिस..."देविका रुकी।देविका की नजर उस किताब पर पड़ गई थी,जो इस वक़्त रिवील के लिये उसकी जान से ज्यादा कीमती थी। "ये किताब तुम्हे कहाँ मिली?"एकाएक ही देविका की आवाज तेज ही गई।साथ ही उसका हाथ तेजी से किताब की तरफ बढ़ा। "Don't dare...I'm warning you."रिवील ने किताब को पीछे किया,साथ ही बायें हाथ की उंगली आगे करके उसे चेतावनी भी दे डाली। "वो किताब तो हमें भी चाहिए।"नागराज की आवाज रिवील के कानों में पड़ी।वो पलटी। पीछे नागराज ब्रह्माण्ड रक्षकों के साथ खड़ा था। वेदाचार्य जैसे ही भारती के साथ बाहर निकले,उन्हें वहाँ नागराज और उसके दोस्तों के वहाँ होने का आभास हो गया। "नागराज,वो किताब किसीभी हालत में उससे हासिल करो।उसमे कुछ ऐसा है, जो ध्रुव से जुड़ा है।"वेदाचार्य हलक फाड़कर चीखे। रिवील ने जबड़े भींचे।"बुड्ढे,तुझे अँधा समझ कर छोड़ा था।तू तो मरेगा ही,ये कीड़े भी मरेंगे अब।और तुम सब की कब्र यही बनेगी।"रिवील की आँखें शोले उगलने लगीं थीं। देविका पीछे हटी,क्योंकि उसके दिमाग में रिवील के खिलाफ एक अच्छा प्रतिद्वंद्वी आ गया था। राजनगर सिटी हॉस्पिटल देविका एडा के कमरे में दाखिल हुई।अब रिवील के खिलाफ सिर्फ वही उसे ठीक लग रही थी। लेकिन वो अंदर दाखिल हुई ही थी कि.. उसे 440 वॉल्ट से भी जोरदार झटका लगा।एडा जमीन पर बैठी हुई थी,बेसुध सी और उसकी बाईं कनपटी से निकलती खून की धार अब तक फर्श का रंग बदल चुकी थीं।उसके दाए हाथ मे एक दिल था,जो अब तक धड़कना बन्द कर चूका था। "एडा?"देविका के होश उड़ गए।वो उसे छूने को हुई। "डोंट टच हर.."आवाज पहचानी सी थी। एडा की तरह वाला एंड्राइड। नहीं,नहीं।ये तो वही एंड्राइड है, जिसे वो खुद काली पहाड़ी से लाइ थी,रिवील को फंसाने के लिये। पर ये सही सलामत कैसे है?मतलब एडा भी... उसकी सोचो को रुकना पड़ा। एडा की तरह दिखने वाले उस एंड्राइड की हथेली देविका की तरफ थी और वो चमक रही थी।शायद वो वार के लिये तैयार था। "आईएम नॉट टचिंग हर।"देविका वापस एडा की तरफ पलटी और संसार का आठवां अजूबा उसका इंतज़ार कर रहा था। "हे तक्षकराज!"उसके मुँह से निकला। फर्श पर फैला खून गायब था।साथ ही उसने अपनी आँखों से जमीन पर फैले खून को वापस उसकी कनपटी में समाते देखा।उसकी कनपटी की फट चुकी नस अब वापस मशीनी अंदाज में जुड़ने लगी थी।देविका की आँखें फटी रह गई। ये कैसे हुआ? एडा की आँखे बन्द हुई।साथ ही देविका उठ खड़ी हुई। "आईएम फाइन।"एडा भी खड़ी हुई। महानगर आसमान में बादल छाने लगे थे। रिवील और ब्रह्माण्ड रक्षक आमने सामने थे। "हमारी कब्र बनाना इतना आसान भी नहीं।"नागराज बोला। "मेरे लिये कुछ भी मुश्किल नहीं।"रिवील खिलखिलाई।"मुझे हाथ भी नहीं लगाना पड़ेगा तुम जैसे कीड़ो को मारने के लिये।"उसने जमीन पर निगाहें डाली।"ये काम तो मेरी सेना ही कर देगी।" एकाएक ही जमीन कांपने लगी,जैसे कोई भूकंप आया हो।सभी ब्रह्माण्ड रक्षक तैयार हो गए। और जमीन से हजारो की संख्या में छोटे छोटे मेंढक बाहर निकलने लगे। परमाणु की हंसी निकल गई।"ये मेंढक तुम्हारी सेना है?और तुम कौन हो,मेंन्ढको की रानी?" नागराज ने उसे चुप रहने का इशारा किया। "100 मेंढकों को मेरा 1 ही सांप निगल सकता है।"नागराज ने कलाई से एक छोटा सर्प निकाला। "सच में?"रिवील ने आँखें सिकोड़ी।"या एक ही मेंढक तुम जैसे 100 नागराज को निगल सकता है।"कहते हुए उसने मेंढकों पर नजर डाली। उनके आकार में तबदीली होनी शुरू हुई और एकाएक ही प्रत्येक का आकार एक 3 मंजिल की इमारत जितना हो गया। नागराज सहित सभी की आँखें फटी रह गईं। राजनगर सिटी हॉस्पिटल एडा अब तक पूरी तरह ठीक हो चुकी थी।और अपने सारे गैजेट्स अब पैक कर रही थी। "ओके,अब ये भी बता दो,कि तुम कर क्या रही हो,मिस (ब्लड)क्वीन।"देविका बहुत देर से उसे देख रही थी।पर अब सब्र का बाँध टूट गया। "अंधी हो क्या?"एडा दहाड़ी।आवाज इतनी तेज थी,कि लगा जैसे वो किसी प्लेन के इंजन में बैठी हो।"दिख नहीं रहा कि मै वापस जा रही हूँ।हार चुकी हूँ रिवील से।एक बार नहीं,दो बार।"अब उसकी आवाज में संतुलन आया।"किसी से वादा किया था कि उसे वापस लेकर ही लौटूंगी।लेकिन मुझे पता है कि मै उसे नहीं हरा सकती।आज निशा मुझे छोड़ गई।कल उसकी नजर "एमी" पर होगी।" (एमी रॉश,16 साल की एक हाइस्कूल गर्ल और एडा की छोटी बहन) "और अगर उसकी नजर गलती से भी नम्रता मैम पर पड़ी और अगर उन्हें खरोंच भी आई,तो न अमेरिका बचेगा,न रिवील,न ही कोई इंसान।"अब तो बस किसी की जान लेने का मन था एडा का। (नम्रता शर्मा,32 साल की एक एडवोकेट,जिसका कर्ज इतना बड़ा है एडा के ऊपर,जिसे वो शायद वो जिंदगी भर न चूका पायेगी।) (एमी और नमृता से आपकी मुलाकात होगी,डोगा और एडा की आगामी सीरीज "सूरज और सोनू"में) "तुम्हे एक बात बताऊँ?"देविका ने यूँ कहा,जैसे वो बहुत बड़ा राज़ बताने जा रही हो।"निशा जिन्दा है।" एडा ने उसे यूं देखा,जैसे उसे कच्चा चबा जाने का इरादा रखती हो।"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई,मुझसे मजाक करने की?"वो देविका को मारने आगे बढ़ी ही थी। "रुको,आई हैवे प्रूफ.."कहते हुए उसने अपना आईफोन आगे कर दिया,जिसमें निशा के नाम से मैसेज था। "मुझे पता चला है कि रिवील महानगर में मौजूद है।ब्रह्माण्ड रक्षक उसे पकड़ने जा रहे हैं।साथ ही मै भी। निशा" "अब यकीन हुआ?"देविका ने प्रश्नसूचक दृष्टि से उसकी तरफ देखा। "और वो मैसेज तुमने भेजा था न?"एडा ने भंवे उचका कर कहा।"नागराज को।नागसंकेत से।"उसके होंठों पर मुस्कान छा गई। देविका का मुँह खुला रह गया। महानगर मेंढकों ने लंबी लंबी छलांगे लगाकर इमारतों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था।इमारतों पर चढ़ते ही मेंढकों ने उन्हें खाना शुरू कर दिया। रिवील मुस्कुरा पड़ी,जबकि ब्रह्माण्ड रक्षक उन्हें रोकने तेजी से आगे बढ़ गए। "हाहाहा,"प्यारी सी हंसी थी वो।अगर उसके पीछे मकसद भयानक न होते। "अरे नागराज,तुम तो रुको।"उसका टोकना नागराज को पसन्द नहीं आया।"सबको तुम्हे ही थोड़े न रोकना है।तुम्हारे लिये कुछ और है।"कहते हुए रिवील ने आसमान की तरफ इशारा किया। 70 फुट लंबे चमगादड़ो का झुण्ड हजारों की संख्या में उनकी तरफ बढ़ रहा था। नागराज की आँखें उनकी संख्या गिनने लगी,साथ ही आश्चर्य से फटती चली गई। देविका वापस पहुँची,तो बस देखती रह गई।थोड़ी ही देर में क्या से क्या हो चूका था। (अपनी नागशक्तियों के कारण वो कुछ ही पलों में महानगर से राजनगर और राजनगर से महानगर का सफर तय कर पा रही थी) नागराज और शक्ति,परमाणु,भेड़िया,स्टील ड्रैगन की कद काठी के चमगादड़ो से भिड़ने में व्यस्त थे,तो शक्ति का ही एक रूप डोगा और ध्रुव,चंडिका,तिरंगा से मिलकर मेंढकों से लोगो को बचाने और उन्हें मारने में लगे थे।हालांकि दोनों तरफ ही सफलता नजर नहीं आ रही थी। एकाएक ही मेंढकों ने इमारतें निगलनी शुरू कर दी,जो कि बेहद डरावना था। ध्रुव ने एक बार चमगादड़ों की तरफ नजर दौड़ाई और फिर मेंढकों की तरफ।नागराज ने ध्रुव को देख लिया था।उसे समझते देर नहीं लगी कि ध्रुव के दिमाग में क्या चल रहा है। नागराज ने उसे मानसिक संकेत भेजा(क्योंकि दोनों एक दूसरे से काफी दूर थे।"क्या सोच रहे हो ध्रुव?" "यही कि दोनों को ही तुम्हारा जहर मार सकता है।"ध्रुव का जवाब था। नागराज ने परमाणु को करीब बुलाया और अपने जहर को फुंकार में तब्दील किया।उसे नागों की सेना ने अपने अंदर समेटा।अब वो किसी बड़ी सी गेंद की तरह नजर आ रहे थे।नागराज ने परमाणु से उन सांपो को आसमान तक छोड़ आने को कहा।(उसने परमाणु को अपना जहर सीमित मात्रा में ही दिया)। आसमान में पहुँचते ही सांपो ने अलग होना शुरू कर दिया।जहर बादलों में मिलने लगा। कुछ ही देर में आसमान से विषवर्षा होने लगी,जो हजारों की संख्या में फैले चमगादड़ों को ही पहले झेलनी पड़ी।गल गल कर चमगादड़ों के शरीर जमीन पर गिरने लगे। अब निशाना मेंढक थे।जिन्हें भेड़िया अपनी गदा से और शक्ति अपनी ताप से झुलसाने में लगे थे। देविका दूर से सब देख रही थी।"ये तो कुछ भी नहीं कर पा रहे।मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।" उसकी नजरें आसपास पड़ी।किसी की तवज्जो उसकी तरफ नहीं थी।उसने चुपचाप से केंचुए के साइज़ का सांप जमीन पर गिरा दिया,जो गिरते ही जमीन में समा गया। अचानक जमीन फिर हिलने लगी। "लगता है, और मेंढक बाहर आने वाले हैं।"नागराज परमाणु से बोला। "गेट रेडी।"परमाणु बोला। देखते ही देखते जमीन से सैकड़ों फ़ीट लंबा एक नाग निकला और तेजी से एक मेंढक को निगलकर वापस जमीन में समा गया। कमाल की बात ये थी कि जमीन में कोई दरार तक नहीं आई थी।न ही बिल्डिंग्स पर कोई फर्क पड़ा।नागराज सहित सभी भौचक्के से देखते रह गए। "ये...क्या था?"तिरंगा के मुँह से निकला। "नागराज का कोई सांप?"समझ नहीं आया किशक्ति ने सवाल किया या जवाब दिया। अभीतक वो समझे भी नहीं थे कि इसबार तीन नाग एक साथ निकले और मेंढकों को निगलकर वापस जमीन में समा गए।अब तो हर बार पहले से तीन चार गुना ज्यादा सांप जमीन से निकलने लगे और मेंढकों को निगलने लगे। "कमाल है नागराज।मुझे तो तुम्हारी इस पॉवर के बारे में पता ही नहीं था।"परमाणु बोला। "मुझे भी।"नागराज मंत्रमुग्ध सा नागों को देखता बोला।"खैर,अब मुझे रिवील से निपटना है।तुम इन्हें संभालो।" रिवील के माथे पर बल पड़े थे इस वक़्त। "ये सांप कहा से प्रकट हो रहे थे।" "तुमने हमें कम आँका।"पीछे से नागराज बोला।उसकी नजर अब भी उस किताब पर थी,जो इस वक़्त रिवील के कब्जे में थी। "तुम इतने खतरनाक भी नहीं नागराज।"रिवील की नजरें ध्रुव की तरफ उठी। और नागराज की नजरें किताब की तरफ। आसमान के काले बादल अब छटने लगे थे और सूरज अब अपनी चमक बिखेर रहा था। "वो किताब मुझे दे दो।"नागराज ने कहा। "आकर लेलो।"रिवील ने चुनौतीपूर्ण लहजे में कहा। नागराज के जबड़े भींचे।तेजी से तीक्ष्ण सर्प उसकी तरफ बढे।रिवील ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और सर्प उसकी हथेलियो में समा गए। "इसकी उम्मीद नहीं होगी तुम्हे,है न?"रिवील मुस्काई।"और न ही इसकी"कहते हुए अपनी हथेली उसने नागराज के सामने कर दी।तीक्ष्ण सर्प तेजी से बाहर आये और नागराज से जा टकराए। "उफ्फ्फ"की तेज आवाज के साथ नागराज उस निर्माणाधीन इमारत से नीचे जा गिरा। "ह्ह्ह,नागराज।"कहते हुए लापरवाही से रिवील पलटी ही थी कि एक तेज मुक्के ने उसकी चेतना को चुनौती दे डाली। कनपटी पर पड़े उस मुक्के ने उसे हिला दिया और कई गुना दूर पीछे चलती चली गई वो। नजर उठी और सामने थी "एडा"। "हे भगवान!तू अब भी जिन्दा है?"रिवील ने बड़ी मुश्किल से कहे ये शब्द। "जब तुझ जैसे कमीने लोग जिन्दा हैं, तो मैने तो अभी तक कुछ किया ही नहीं।"जबड़े भींचे थे एडा के।"और याद है मैने क्या कहा था?की जब तक तुझे तेरे अंजाम तक न पहुंचा दूँ।मै मरूँगी नहीं।आज मुझे सताने का बदला तेरी हड्डियां तोड़कर लूँगी मै।"कहते हुए उसने आगे बढ़ना शुरू किया। रिवील ने खुद को तैयार कर लिया था कि उसके हमला करते ही वो आरपार हो जायेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं,बल्कि इसबार का हमला उसे घुटनों पर ले आया।पूरी ताकत से किया हमला था वो,जो सीधे रिवील के जबड़ों पर पड़ा और उसके होठों से खून बाहर छलक उठा। रिवील के चेहरे पर आश्चर्य नजर आ रहा था।"वो किसी वार के आरपार होकर उसे बचा क्यों नहीं पा रही है?' "चिंता मत करो रिवील।"एडा ने जैसे उसके दिल की बात पढ़ ली।"तुम्हारी गर्दन की हड्डी तोड़ते वक़्त ये भी बता दूंगी तुम्हे।" (एडा फुल ट्रेंड मार्शलआर्ट और जुडो कराटे एक्सपर्ट थी,इसलिए भी रिवील नहीं समझ प् रही थी उसके वार) लगातार होते वारों ने उसे पस्त कर दिया था। जमीन पर पड़ी अब वो साँसे लेने की कोशिश कर रही थी।उसके चेहरे का नक्शा ही बदल दिया था एडा ने।
खून ने उसके चेहरे का रंग भी बदल रखा था। "अब अपने भगवान को याद कर लो रिवील।तुम्हारे उन्से मिलने का वक़्त हो गया है।"एडा की मुट्ठियाँ भींची और ब्लेड एक्टिवेट होकर बाहर आ गए। "रुको एडा।"पीछे नागराज खड़ा था।"तुम रिवील का क़त्ल नहीं कर सकती।" एडा ने एक नजर उसे देखा।"रियली?गेट दिस।"कहते हुए उसने बीच वाली ऊँगली नागराज की तरफ उठा दी। नागराज के गुस्से की सिमा न रही।तेजी से उसने कलाइयों से सर्प छोड़े,जिसे एडा ने तुरंत ही काटकर रख दिया।"बचपना बन्द करो और निकलो यहाँ से।वरना तुम भी मरोगे।" एकाएक ही दूसरी रिवील एडा के पीछे नजर आई।नागराज के नेत्र फैले।एक रिवील घायल पड़ी है और दूसरी एडा के पीछे। दूसरी रिवील ने उस इमारत से एक सरिया बाहर खींचा।(लड़ाई उसी निर्माणाधीन इमारत पर हो रही थी।) वो एडा के ठीक पीछे आई और सरिये को मोड़कर सीधे उसके गले में फंसा दिया।जैसे उसका गला दबा रही हो। "तुमने क्या सोचा था,यू ब्लडी ****।कि तेरे इस टुच्चे वारों से मै मर जाउंगी।अरे रिवील तो वो समुन्दर है, जिसमें से एक गिलास पानी निकालने से उसके वजूद में कोई फर्क नहीं आता।"सामने पड़ी रिवील की तरफ इशारा किया उसने।"ये..वही एक गिलास का पानी है।पूरी दुनिया में जितने कीड़े नहीं है, उससे 1000 गुना ज्यादा मेरे रूप हैं।समझी यू ब्लडी ****।"उसकी पकड़ कसती ही जा रही थी सरिये पर। आसमान में फिर से काले बादल छाने लगे थे।मेंढकों की "टर्र टर्र"फिर सुनाई देने लगीं थी। एडा उसको छुड़ाने की कोशिश में लगी थी।नागराज ये सब देख रहा था।पर वो किस तरह एडा की मदद करे उसे समझ नहीं आ रहा था।उसने आसपास नजरें घुमाई। अचानक उसकी नजर घायल रिवील के पास पड़ी किताब पर ठहरी।वो लपककर उस किताब के पास पहुंचा, जैसे ही उसने किताब उठाने की कोशिश की।एक नाग उसे मुँह में दबा कर निकल भागा।नागराज ने भी किताब को थाम रखा था।इसलिए एक पन्ना उसके हाथ में आ गया। दूसरी तरफ एडा के संघर्ष में अब कमजोरी झलकने लगी।एकाएक ही एक तेज वार ने रिवील को कई फ़ीट पीछे धकेल दिया। "उफ्फ्फ्फ़"उसने पीछे पलटकर देखा। एडा के साथ एक और एडा मौजूद थी। (असल में वो एडा की तरह दिखने वाला एंड्राइड था।) "तुमने कहा था न"एडा खांसी।फिर बोली।"कि समुन्दर में से एक गिलास पानी निकालने से उसके वजूद में कोई फर्क नहीं आता।"उसने अपने जैसे दिखने वाले एंड्राइड की तरफ इशारा किया।"ये वही गिलास है।" वो आगे बढ़ी।रिवील चुपचाप उसे अपनी तरफ बढ़ता देखती रही।एडा उसके बेहद करीब आकर खड़ी हुई।उसने रिवील के कन्धे पर हाथ रखा। "ये देखो।"कहते हुए उसने अपनी हथेली सामने की।उसकी हथेली में से अचानक एक प्रोजेक्टर चालू हुआ और उसमे जो दिखा,उसे देखकर रिवील की आँखे फट गई। "ये तो..ये तो.." "तुम्हारा बाप है।"शब्द एडा ने पुरे किये।"वो बाप,जिसने मेरे माँ बाप को मारा।"उसने प्रोजेक्टर बन्द किया। "ये किसी तरह का मजाक नहीं है।याद है,8 साल पहले,जब तुम घर पहुंची और ये मरने वाला था।तब वहाँ मौजूद 3 लोग मेरे ही कंपनी के थे।वो इस गटर की पैदाइश को मारने नहीं,सिर्फ तुम्हे पकड़ने आये थे।जब इस **** को उनकी गोलियां लगीं तो ये ***** मरा नहीं,बल्कि कोमा में चला गया।"एक एक शब्द चबा कर कहा था एडा ने।"जानती हो,ये **** का अभी है कहाँ?वेरोना में ही।तुम्हारे घर के नीचे मौजूद तलघर में।" "बहुत भौंक ली तू ****।अब तू मरेगी।"कहते हुए रिवील ने एडा की गर्दन थामी और उसे दीवार में टिका दिया। "सोच ले **** की औलाद।क्योंकि अगर मै मरी,तो तेरा बाप भी मर जायेगा।"रिवील की पकड़ छूटी। "मतलब?" "मतलब?"एडा ने मुस्कान से उसे चिढ़ाया।"मै तुम्हारे मारने पर भी नहीं मरी थी,ये बात तुम्हे तब ही समझ जानी चाहिये थी,जब मुझे अस्पताल में मारने के बावजूद तुम्हारा ट्रांसलेटर काम कर रहा था।ये सब मेरे डीएनए से बने है।और तभी तक काम करेंगे,जब तक मै जिन्दा हूँ।तुम्हारा बाप कोमा में जरूर है, पर उसके दिल को पेसमिकर की जरूरत थी,जो कि मेरी कम्पनी ने लगाया उसे।"वो पलटी।"अगर में मरी,तो वो पेसमिकर भी बन्द हो जायेगा।" "एडा,"रिवील ने चुनौती देती नजरों से उसे कहा।"मै तुम्हे नहीं छोडूंगी।" "छौडुंगी तो मै तुम्हे नहीं।तुम्हे पता चल गया है कि तुम्हारा बाप कहाँ है।अब उसे लेकर दफा हो जाओ।फिलहाल तुम्हे छोड़ रही हूँ।लेकिन भविष्य में अगर तुमने इस देश का रुख किया या उन बचे हुए 8 सीआइए एजेंट्स की तरफ बढ़ने की कोशिश की।तो मुझे उस पेसमिकर को अपने डीएनए से अलग करना पड़ेगा।और अगर मैने ऐसा किया तो तुम जानती हो कि क्या होगा।"कहते हुए एडा नीचे को चल दी।एंड्राइड ने उसे फॉलो किया। जमीन से निकले मेंढक अब वापस समाने लगे थे।नागराज के सिवाय किसीको भी नहीं पता था की उन्हें बचाने में किसने सही में मेहनत की थी। काले बादल छटने लगे थे। महानगर में हुए हड़कम्प ने कुछ ही इमारते सलामत छोड़ी थी। जंग ख़त्म हो चुकी थी।रह गया था तो सिर्फ "Epilogue" (Part 7) क्या हुआ इतना सब होने के बाद क्या तस्वीर हुई राजनगर और महानगर की। और सारे सुपरहीरोज़ की जिंदगी में आये क्या भूचाल।(1st may)

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