Tuesday, 12 April 2016


किरदार-संदीप,प्रिंस भाई,कबीर भाई,अभिराज भाई,तन्मय भाई,अक्लीम भाई,सजल भाई,आकिब भाई,ब्रम्हा भाई, शाश्वत भाई,अभिषेक भाई
सूचना-सभी किरदार वास्तविक है पर इनका चरित्र विवरण कल्पनाओ पर आधारित है.|अतः दिल पर न ले|
कथा प्रारम्भ-
रात का समय था, करीब 9 बजे|
सभी ढाबे मे बैठे हुए थे(सस्ता वाला था)
ब्रम्हा भाई-यार इतना बेकार ढाबा है,मालिक जंगली लग रहा है फिर भी यहा कन्याए आती है|
अभिराज भाई-पता नही क्यो....पर आपकी दुकान को  देखकर भी मुझे यही ख्याल आता है|
जोक बेकार था| आकिब के अलावा कोई नही हसा|
ब्रम्हा भाई (मन मे)-फिर बोला ये.....अगर 24 घंटे के अन्दर बदला ना लिया तो तीन दिन तक सभी ग्राहको को दीदी बोलूंगा|
तभी खाना आता है|खाना देखकर सबकी घिग्घि बन्द|दो मिनट तक सन्नाटा
शाश्वत भाई-चमेली क्लब मे शादी है किसी की|कौन कौन चल रहा है मेरे साथ
बिना बोले सब निकल गये.....दस मिनट बाद चमेली क्लब पहुंचे...चमेली क्लब के गेट पे लिखा था-"अमित संग स्नेहा(जी)"|ये देखकर 'किसी' का चेहरा अजीब तरह से हो गया....बाकी सब अजीब तरह से मुस्कुरा रहे थे पता नही क्यो?संदीप को कुछ समझ नही आया......खैर सब अंदर गये
गेट पर एक सुंदर कन्या वेटर-आप सब किसकी तरफ से है?
शाश्वत-आपकी तरफ से
वेटर-जी......?
कबीर भाई-इनका मतलब कन्या पछ से

वेटर ने रास्ता दिखाया और सभी अंदर आए|प्रिंस ने संदीप को इशारा किया और दोनो कही अलग चले गये|अभिराज भाई सजल को लेकर निकल गये....बाकी सब खाने की तलाश मे साथ मे निकल गय|
15 मिनट बाद सजल दौड़ कर आया
सजल-जल्दी चलो भाईयो..लड़के वाले और लड़की वाले दोनो अभिराज भाई को मार रहे है
अक्लीम भाई-किस खुशी मे?
ब्रम्हा भाई (मन मे)-योजना सफल रही
सजल-वो नशे मे साड़ी पहन कर नाच रहे थे
अभिषेक भाई-तो ये कौन सी बड़ी बात हो गयी
सजल-उन्होने दुल्हन की साड़ी छीन कर पहन ली थी| बेचारा दूल्हा अपनी शेरवानी से ही अपनी और दुल्हन दोनो की इज्जत बचा रहा है
शाश्वत भाई-अच्छा मौका है|चलो चलकर फोटो लेते है उसकी
कबीर भाई-हमारा दोस्त पिट रहा है और तुम्हे उसकी फोटो लेनी है?
शाश्वत भाई-दोस्त की नही दुल्हन की फोटो लेने का अच्छा मौका है
सभी मन ही मन खुश हो जाते है पर बोलता कोई नही|सभी अभिराज भाई की ओर निकल लेते है| पर शाश्वत भाई दुल्हन की ओर निकल जाते है|
अभिराज भाई के पास पहुचने पर दिखता है अभिराज  अभी भी पिट रहा है| सभी किसी तरह उन्हे बचाते है
मामला शान्त होते ही-
ब्रम्हा भाई (अभिराज भाई की ओर इशारा करके)-अरे ये तो वही है जो गुलाबी सलवार वाली का दुपट्टा लेकर भागा था
अभिरज (मन मे)-पक्का किसी बात का बदला ले रहा है|छोड़ूंगा नही इसे
सभी दुबारा अभिराज भाई की ओर बढ़ने लगे....तभी-
सलवार वाली लड़की(शरमाते हुए)-जी इन्हे छोड़ दीजिये...मुझे बुरा नही लगा(मुझे तो मजा आ गया था)
अभिराज भाई(मन मे)-सारा दर्द दूर हो गया
ब्रम्हा भाई(मन मे)-धत्.....दुपट्टा तो मैने खीचा था
खैर मामला शान्त हुआ और सब अभिराज को साड़ी मे ही लेकर निकल गये....चेहरे पर चोट थी इसलिये ढक के रखा था|सामने से शाश्वत भाई बिना कपड़ो के चले आ रहे थे
तन्मय भाई-आपको क्या हुआ?
शाश्वत भाई-यार दुल्हन के फोटो ले रहा था,दूल्हे ने देख लिया और मेरे कपड़े छीनकर दुल्हन को पहना दिये
तन्मय-ओहोहो....ये तो बुरा हुआ
शाश्वत-नही.....अच्छा हुआ
तन्मय-कैसे?
शाश्वत(ठरकी मुस्कान के साथ)-वो...मेरी शर्ट बहुत टाइट था और ऊपर का बटन भी टूटा था....हीहीही...फोटो ले ली
कबीर भाई(गम्भीर होने का नाटक करते हुए)-दिखाना ज़रा
शाश्वत-भाई दूल्हे ने मोबाइल पटक दिया
सभी लोग मन मसोस के रह गये
आकिब-ये बुरा हुआ
शाश्वत-नही ये भी अच्छा हुआ
आकिब-कैसे?
शाश्वत-जब दूल्हे ने मोबाइल पटका तो दुल्हन फोन उठाने के लिये ठोड़ा झुकी...और आपको तो पता ही है...हीहीही...ऊपर का बटन टूटा था
ब्रम्हा भाई(मन मे)-काम मैने किया और मजे इन सबको मिल रहे है
कुछ दूर प्रिंस और संदीप बैठे थे जो शुरू मे ही अलग हो गये थे....प्रिंस गाल पर हाथ रखकर बैठा था
संदीप-भाई मै कह रहा था...हर लड़की से "मैने आपको अपने कॉलेज मे देखा
है " कहोगे तो सैंडिल का इस्तेमाल होगा ही
तभी इन दोनो को बाकी दोस्त और साड़ी मे लड़की दिखती है |दोनो उनके पास जाते है
प्रिंस-घबराइये नही...मै आपको पहचानता हूँ
अभिराज(मन मे)-ये मेरा सच्चा दोस्त है
प्रिंस-मैने आपको अपने कॉलेज मे देखा है...उस दिन आप बहुत सुंदर लग रही थी... मै आपसे बात नही कर पाया था पर मुझे अच्छा लगा था
अभिराज(गुस्से मे घूंघट उठाते हुए)- फिर से देख बे..और अच्छा लगेगा
प्रिंस-अरे भाई मै तो मजाक कर रहा था
(मन मे)-ये तो पूरा लड़की लग रहा था
कहानी खत्म और बता दू कि खाना कोई नही खा पाया था| जो लोग सोच रहे है ब्रम्हा भाई का बदला कैसे पूरा हुआ उन्हे बता दू कि बीच मे कुछ देर के लिये लाइट चली गयी थी| उसी समय ब्रम्हा भाई दुल्हन की साड़ी खीच के भाग गये थे(समझ नही आ रहा खीचते समय दुल्हन कुछ बोली क्यो नही) उस समय अभिराज न्रित्य मे मग्न थे..तो उन्हे पता नही चला किसी ने उन्हे साड़ी पहना दी है......गुलाबी सलवार का दुपट्टा खीचने वाले भी ब्रम्हा भाई थे और हा...साड़ी खिचते समय दुल्हन ने ब्रम्हा भाई से ये कहा था(जो ब्रम्हा भाई खुशी के मारे सुन नही पाए थे)-

""  'अभि' ये क्या कर रहे हो...आज मेरी शादी है""

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