Sunday, 20 March 2016



जंग शुरू हो चुकी थी।ब्रह्माण्ड रक्षकों की एक जैविक रोबोट के साथ और एडा और ध्रुव की रोबो आर्मी के साथ।
फर्क इतना ही था कि एडा और ध्रुव आसानी से अपनी जंग जीतने वाले थे,पर ब्रह्माण्ड रक्षकों के लिए ये बहुत मुश्किल होने वाला था।
राजनगर
रोबो की गुप्त लैब
"धरा?कौन धरा?"एडा के नैत्र सिकुडे।
(मल्टीलेंग्वेज ट्रांसलेटर के जरिए एडा उससे हिंदी मे बात कर रही थी।)
एकाएक ध्रुव होश मे आया।
"तुम कौन हो?"उसकी नजरें आसपास घुमी।"औऱ हम कहाँ हैं?"
"रोबो की लैब मे, शायद उसने तुम्हें किडनैप किया हुआ था।"एडा उठ खडी हुई।
"रोबो?यह रोबो कौन है, औऱ तुम कौन हो कन्या?"ध्रुव का दिमाग घुम गया मालूम होता था।
"मुझे एडा रौश कहते है,सीआईए की तरफ से।"एडा ने अपना परिचय दिया।
"एडा,?"ध्रुव ने कुछ क्षण विचार किया, फिर बोला।"यह नाम पहले तो नहीं सुना, क्या तुम हमारे राज्य मे नई आई हो?"
"तुम्हारा राज्य?"एडा चौंकी।"अबे शक्ल देखी है अपनी।"एकाएक उसके मूँह से निकला।
"क्या?"ध्रुव कुछ यूँ चौंका, जैसे उसे यह शब्द सुनने की अपेक्षा न रही हो।
"आई मीन, हाँ।"एडा नेखुद को संभाला।"लेकिन आप यही वार्तालाप करेंगे या अपने राज्य को भी बचायेंगे।"एडा ने भी नाटक करना शुरू किया।
"क्या हुआ हमारे राज्य को?"ध्रुव उग्र हो उठा।
"यहाँ से निकलोगे,तब पता चलेगा न।"कहते हुए एडा बाहर को घुमी।जैसे ही वो पलटी,एक जलन उसे अपने दाहिने हाथ पर महसूस हुई।एडा गुस्से से ध्रुव की तरफ पलटी।देखा तो ध्रुव अभी कई कदम दूर था उससे।एकाएक उसकी नजर नताशा पर पड़ी,जो अपनी जगह पर मौजूद नहीं थी।उसके हाथो पर चढ़े गैजेट्स ने उसे बचा लिया था,पर फिर भी उसके कोहनी के ऊपरी हिस्से में घाव हो ही गया था।
नताशा दायीं तरफ खड़ी एडा के ऊपर अगला हमला करने जा रही थी कि अचानक ही एडा के हाथ में गन नजर आई।उसने आव देखा न ताव और गुस्से में गन की सारी मेग्जीन नताशा पर खाली करनी शुरू कर दी।वक्त रहते ही नताशा ने अपनी जगह छोड़ी।वहां पहले ही मौजूद सिलेंडर पर गोलियां लगी और धमाके होने शुरू हो गए।नताशा के काफी पास एक सिलेंडर फटा और वो थोड़ी घायल हो गयी।क्योंकि वक़्त रहते उसने अपनी जगह छोड़ दी थी।
"उस तरफ से बाहर निकलो,ध्रुव।"एडा गन से बाहर की तरफ इशारा करती बोली।(मन में:-आज इस लड़की की समाधी बना कर ही जाऊंगी।)

"तुम हमें हुक्म दे रही हो,युवती?"ध्रुव थोड़े अभिमान के साथ बोला।
"तुम्हे यहाँ नोटंकी करनी है या अपने शहर को बचाना है?"दोनों ने कुछ पल अपलक एकदूसरे को देखा।फिर ध्रुव बाहर की तरफ चल दिया।
एडा जैसे ही वापस मुड़ी, सामने नताशा खड़ी थी और उसकी लेजर आई चमक रही थी।एडा की आँखे चौड़ी हुई।वो तेजी से नीचे झुकी,साथ ही लेजर आई से लेजर किरणे भी छूटी।
एडा नताशा से कुछ लंबी थी,इस कारन जेसे ही वो नीचे को झुकी,न चाहते हुए भी लेजर किरणे उसके कंधों से टकरा ही गई।उसने तेजी से होंठ भिंचे।शायद अपने दर्द को दबा लेने के लिए।वापस खड़ी हुई और उसके मशीनी शरीर पर एक जोरदार मुक्का जमाया।नताशा के होंठो के पास के मशीनी पुर्जे हवा में उड़ते नजर आये।साथ ही नताशा का सर घूम गया।
नताशा(मन मे:-हे भगवान, इसके वार तो होश उड़ाए दे रहे है, जल्द ही कुछ करना होगा।वर्ना जान नहीं बचेगी)
एडा ने वापस उसे उठाया और कंधे पर डाला।तेजी से वो वापस उसी कमरे में दौड़ पड़ी,जहाँ थोड़ी देर पहले ध्रुव मिला था और उसने सिलेंडर फोड़कर तबाही मचाई थी।
तेजी से उसने नताशा को पीठ के बल सामने दीवार पर फेक दिया,किसी खिलौने की तरह।साथ ही दोबारा नताशा की चेतना खोने लगी।
"बहुत परेशान कर चुकी तुम,अब मरोगी।"एडा के चेहरे पर सख्त नफरत के भाव झलक रहे थे।
उसने गन की नाल नताशा की तरफ की।फिर बोली:-"जाने दो,तुम जैसे कीड़ो को मारने के लिये नहीं है मेरी गोलियां।"
बाहर निकलते ही ध्रुव का दिमाग चकराया।
"ये कौन सी जगह है?और विषनगरी और क्षितिजनगर कहा गए?"
वो जैविक रोबोट अब तक एयरपोर्ट के बाहर आ चूका था और ब्रह्माण्ड रक्षक पूरी कोशिश कर रहे थे उसे रोकने की।
परमाणु तेजी से उसके करीब पंहुचा और इसबार उसे परमाणु रस्सी से पकड़ लिया।
"शक्ति, अब तुम्हारी बारी।"परमाणु उसे थामे रखने की कोशिश में लगा हुआ था।
शक्ति तेजी से आई और एकाएक ही रुक गई।
"क्या हुआ?"परमाणु घबराया।
"कोई औरत मुसीबत में है।"शक्ति के मुँह से निकला।
"मर गए"परमाणु के मुँह से निकला और उस रोबोट ने परमाणु रस्सी तोड़ दी।
शक्ति ने इन चीजों की परवाह न की और तेजी से अपना एक रूप अलग किया।दूसरी शक्ति हवा की तरह एक ओर उड़ चली।
वो आवाज नताशा की थी,जिसने शक्ति को आने को मजबूर कर दिया था।नताशा में अब उठने की हिम्मत नहीं बची थी,पर वो कोशिश पूरी कर रही थी।उसका पाँव एक सिलेंडर के नीचे दब गया था और जल्द ही उसमे भी आग लगने वाली थी।शक्ति के पास इतना वक़्त नहीं था की वो नताशा को वहां से हटा पाती।वो कुछ सोच पाती, उसके पहले ही सिलेंडर फट गया।शक्ति प्रकाश गति से उसके सामने जा खड़ी हुई और सारी आग,जो नताशा की तरफ बढ़ी,को अपने अंदर समा लिया।
ध्रुव और नागराज जेसे ही समय द्वार के बाहर आये।दोनों की आँखें फ़ैल गई।सामने वही रोबोट था।
"ये क्या है?"दोनों के मुँह से निकला।
एक तरफ सभी ब्रह्माण्ड रक्षकों केचेहरे खिल चुके थे।दूसरी तरफ अब भी मुसीबत उनके और राजनगर के सिर पर मंडरा रही थी।
"चिंता मत करो,मै भी तुम लोगों के साथ हूँ।"जनाना आवाज ने उनका ध्यान खींचा।
"चंडिका?"ध्रुव के मुँह से निकला।
"हां,चंडिका।जहाँ मुसीबत,वहाँ चंडिका।"सबके मुँह कुछ कहने को खुले ही थे।की तेजी से चंडिका ने खुद को संभाला।"आई मीन,सॉल्व करने के लिये।"
दूसरी तरफ परमाणु प्रोबोट से उस रोबोट की जानकारी निकालने में जूटा था।
"प्रोबोट,पता करो कि ये किस धातु का बना है।"
"ये कोई अनजान धातु है, परमाणु।जिसका उल्लेख शायद विज्ञान भी नहीं कर सका है।"प्रोबोट की आवाज आई।
"फिर भी,कोई तो धातु ऐसी होगी इस रोबोट में जिसे हम जानते हो।"
"सुनो नागराज,हमे नहीं पता।ये किस चीज का बना है।"ध्रुव बोला"पर वो चीज घातक भी हो सकती है।इसे किसी खाली जगह ले जाना होगा।"उसकी नजरें आसपास दौड़ी।
ध्रुव ने एकाएक इशारा किया।"उस तरफ!"
उस जैविक रोबोट की शक्तियां किसी की समझ में नहीं आ रही थी।वो बस चारों तरफ तबाही मचाने में व्यस्त था।
कभी मिसाईल छोड़कर तो कभी ध्वनि तरंगों से।
अचानक ध्रुव बोला"नागराज,सिर्फ तुम्हारे पास ही ऐसी ताकत है, जो इस रोबोट को उस तरफ खींच सकती है, जहाँ हम जाना चाहते है।"
परमाणु की कोशिश भी रंग ला रही थी।
प्रोबोट की आवाज आई।"परमाणु,इस रोबोट के अंदर हथियारों का एक पूरा जखीरा मौजूद है और कोई इसे यहाँ से पूर्व की तरफ 25 किलोमीटर दूर बैठे कंट्रोल कर रहा है।इसके कवच में कुछ एल्युमिनियम के कण भी मौजूद है।"
परमाणु ने ये बात बाकि ब्रह्माण्ड रक्षकों को बताने में ज्यादा देर नहीं लगाई।
भेड़िया और तिरंगा को 25 किलोमीटर दूर बैठे लोगों से निपटने की जिम्मेदारी मिली और परमाणु और शक्ति को रोबोट को पास में निर्माणाधीन इमारत तक पहुँचाने की।

राजनगर
25 किलोमीटर दूर

रोबो और नारका जेल से भागे अपराधी उस रोबोट को चलाने में व्यस्त थे।
सभी के कानों में एक डिवाइस लगी थी,जिससे वो आपस में एक दूसरे को सुन रहे थे।
एकाएक सभी के कानों में एक आवाज पड़ी।
"तुरंत वहाँ से निकलो,कुछ लोग तुम्हारी तरफ आ रहे है।"अवाज रिवील की थी।
"तो क्या हुआ?हम उनसे निपट लेंगे।"रोबो की आवाज में दम्भ झलक उठा।
"सच में?मान लिया कि भेड़िया और तिरंगा से तो निपट लोगे, जो कि नामुमकिन है तुम्हारे लिये।लेकिन एक और तूफान है, जो उस तरफ आ रहा है, जिसे रोकना तुम्हारे बस की बात नहीं।"रिवील बोलती रही।"जल्दी वहाँ से निकलो,वरना मुसीबत में पड़ जाओगे।"
रोबो झुंझला उठा।"पता नहीं ये खुद को क्या समझती है?"
जैसे ही वो पलटा, घबरा गया,क्योंकि सामने रिवील थी।
"तू..तू..तुम..यहाँ कैसे?"रोबो की आँखे फटी रह गई।
"सवाल मै पूछूंगी!तुम नहीं।यहाँ से निकल रहे हो,या नहीं?"वो एकटक उसे देखने लगी।
रोबो ने खुद को किसी सम्मोहन पाश में जकड़ते महसूस किया,जिससे वो चाहकर भी छूट न सका।
"चलो!"रोबो ने सभी को हुक्म सुनाया।
रिवील के वहाँ होने के कारण कोई भी उस समय कुछ नहीं बोला।
"भेड़िया देवता मदद"की एक जोरदारआवाज सब ने सुनी और सामने की दिवार को टूटते देखा।
सामने भेड़िया और तिरंगा खड़े थे।जिनकी आँखों से इस वक़्त शोले बरस रहे थे।
कोई कुछ समझ पाता, उसके पहले ही तिरंगा ने ढाल की कटर एक्टीवेट कर उसका वार रोबो पर कर दिया।रिवील ने हाथों के इशारे से उसे रोका और वापस भेड़िया की तरफ मोड़ दिया।भेड़िया के हाथ में अब भी गदा थी।उसने उसे कुछ इस तरह घुमाया,जैसे कोई बल्लेबाज बल्ला घुमाता है।गदा से टकराकर ढाल वापस रोबो की तरफ बढ़ी।इस बार तेजी कुछ ज्यादा ही थी।न तो रिवील रोक पायी,न रोबो हट सका।ढाल के कटर सीधे रोबो के मशीनी शरीर में जा घुसे और उसके कंधे के ऊपरी हिस्से के आरपार हो गए।
"आह्ह"रोबो की घुटी हुई चीख निकल गई।शायद उसने रोकने की कोशिश पूरी की थी।
रिवील ने खीचकर ढाल अलग की और वापस वार तिरंगा पर किया।तिरंगा तेजी से वार बचाने के लिये हटा,पर गति से मात खा गया।कटर उसके बाजु छिलता निकल गया।"उफ़्फ़"निकल गया उसके भी मुँह से।
"तुम लोग निकलो,मै इन्हें संभाल लूंगी।"रिवीलशांत स्वर में बोली।
"कुछ करो भेड़िया,वो निकलने नहीं चाहिए।"तिरंगा वापस उठता बोला।भेड़िया ने आव देखा न ताव।सीधे अपने गदा का वार जमीन पर कर दिया।जमीन दूर दूर तक टूटती चली गई।और उसकी आवाज दूर तक फ़ैल गई।लेकिन इससे पहले कि किसीको नुकसान पहुचता,रिवील ने हाथों के इशारे से एक समयद्वार खोला और सारे विलैन्स लड़खड़ाते हुए उसमे जा घुसे।
राजनगर
रोबो की लैब से कुछ दूर
एडा ने कार ड्राइव करते हुए अपने गैजेट्स के जरिये अपनी कंपनी (Queens international)में कर ही लिया।वो एक होलोग्राम डिवाइस थी।लाइन पर तक्षिका थी।
"हे तक्षकराज!ये तुम्हे क्या हुआ?और कैसे हुआ?"एडा की शक्ल देखते ही उसके मुँह से निकला।
एडा,जो इस वक़्त बुरी तरह घायल थी।सिर के बायें हिस्से पर लगी लगातार 3 चोटों ने उसे बुरी तरह पस्त कर दिया था।पर उसके आधे चेहरे पर लाल रंग(खून) पूरी तरह छा चूका था।फिर भी वो लगातार काम किये जा रही थी।
"वो सब छोडो,"उसने एक लंबी सांस छोड़ी।"सुनो,तुम्हे क्या करना है।इस वक़्त भारत में जितने भी गैजेट्स बिना किसी डीएनए के चल रहे है, उन्हें हमेशा के लिये डिसेबल कर दो।"कुछ रुककर वो फिर बोली।"पता है कि ये काम मै खुद भी कर सकती हूँ।पर फिलहाल दिमाग को कॉन्सट्रेट नहीं कर पा रही हूँ।"बार बार वो आँखें कुछ इस तरह खोलती थी,जैसे खुद को जगाये रखने की कोशिश कर रही हो।
"ओके,ओके,डोंट वरी!"तक्षिका जल्दी जल्दी बोली।"मै करती हूँ।पहले तुम खुद को संभालो।"
एडा ने लाइन कट की।साथ ही एक तेज भूकंप के झटके ने उसकी कार पलट दी।(जो कि भेड़िया की गदा के कारण आया था)कार के पलटते ही उसमे आग लग गई और एडा किसी तरह खुद को निकालने की नाकाम कोशिश करने लगी।

राजनगर
परमाणु रोबोट को परमाणु रस्सी से बांधे रखने की कोशिश कर रहा था कि तभी उसकी मदद को नाग रस्सी भी आ गई।जिसे नागराज ने फेका था।नाग रस्सी ने रोबोट को जकड़ लिया।अब दोनों मिलकर उसे करीब की निर्माणाधीन इमारत तक पहुचाने में लग गए।कि एकाएक आये भूकंप के उस झटके ने न सिर्फ रोबोट को बल्कि नागराज को भी जमीन की धूल चाटने पर मजबूर कर दिया।
जमीन पर गिरते ही रोबोट के टुकड़े हो गए।5 हिस्सों में।
ब्रह्माण्ड रक्षकों के मुँह से एक लंबी और ठंडी सांस निकली।नागराज अभी सोच ही रहा था कि एकाएक भूकंप कहाँ से आया कि अचानक उसने रोबोट के टुकड़ो में हलचल देखी।उसकी नजरें पैनी हुई और एकाएक ही चौड़ी।क्योंकि रोबोट का हर एक टुकड़ा खुद को रोबोट बनाने में लग गया था।
"मतलब हर एक टुकड़े के पास खुद का एक स्वतंत्र दिमाग है।हे देव कालजयी!"नागराज बड़बड़ा उठा।
ध्रुव सहित सभी की आँखें फट गई।
सभी रोबोट्स ने एक साथ अपने हथियार एक्टिवेट किये।सभी के हाथ एक साथ उठे और उंगलियों से लेकर कंधे और कंधे से लेकर कमर तक ढेर सारी गन्स उनके आर्मर से बाहर आई।वो सभी एक साथ चलने ही वाली थी कि अचानक सारे रोबोट जड़ की तरह जमे रह गए।ब्रह्माण्ड रक्षक लोगो को बचाने में जुट भी गए थे कि उन्होंने नोटिस किया कि रोबोट्स रुक गए है, पर क्यों?
इस सारे घटनाक्रम पर देविका नाम की उस नागिन की नजर बराबर लगी थी,जो the poison की तरफ से इस न्यूज़ को कवर भी कर रही थी और रिपोर्ट भी।नागराज की नाग शक्तियां देखकर उसके खुराफाती दिमाग में खुराफात शुरू हो गई थी।
कुछ मिनट ही हुए थे कि उन्हें तिरंगा और भेड़िया की तरफ से बुलावा आ गया,रेवेल के खिलाफ निपटने के लिये।
दूसरी तरफ
रेवील अकेले ही उन दोनों पर भारी पड़ रही थी।लगभग 5 या 6 मिनट हो चुके थे उन दोनों को उससे लड़ते।पर हर वार उसके आरपार हो जाता था और वो थी कि सिर्फ हाथों के इशारे से आसपास की चीज़ों से उन्हें घायल करने में लगी थी और काफी हद तक सफल भी हो रही थी।
तभी उनकी जान में जान आई,जब एक ध्वंसक सर्प रिवील से आ टकराया।
नागराज अपनी ब्रह्माण्ड रक्षक सेना के साथ वहां आ पंहुचा था।(इनमे शक्ति नहीं थी,वो चंदा के रूप में श्वेता को घर तक पहुचाने चल दी थी)और उनका पीछा करते हुए देविका भी वहाँ आ चुकी थी।
"देखो लड़की।हम तुमसे लड़ना नहीं चाहते।बस हमे बता दो की रोबो और उसके साथी कहा है।"डोगा ने बारूद उगला।
"नहीं बताती।"वो बेपरवाह सी बोली।"क्या कर लोगे?"
"तो अब तुम्हारे अंजाम की जिम्मेदार तुम खुद होने वाली हो।"नागराज ने उसे आखिरी चेतावनीदी।
रिवील ने अपने हाथोंसे उन्हें आगे बढ़ने का इशारा किया।
अब जंग आमने सामने की थी।
नागराज ने नागफनी सर्प अपनी कलाई से आजाद किया,जो सीधे रिवील की तरफ बढ़ चला।रिवील ने उसे हाथों में थामा और चबा गई।
सबके मुँह खुले रह गए।डोगा ने अपनी राइफल सीधी की और दनादन गोलियाँ बरसाने लगा।गोलियां रिवील को तो नहीं लगी,पर आसपास बनी उस लैब की धज्जियां बराबर उड़ाने लगी।
"रुको डोगा,कोई फायदा नहीं।"ध्रुव बोला।फिर वो रिवील से बोला"आखिर तुम चाहती क्या हो?क्यों ये सब कर रही हो?"
"देखो,"वो कुछ क्षण रुकी,जेसे उनका नाम सोच रही हो।"हारे हुए प्राणियों,"
"हारे हुए प्राणी"इस शब्द ने ही उनके अंदर एक गुस्सा भर दिया और सबके अंदर एक साथ डोगा जाग उठा।
वो बोलती रही"इस सब से मुझे कुछ नहीं मिलेगा।हां,अगर कुछ मिलेगा,तो,बस थोडा सा मनोरंजन।लेकिन तुम लोगों से ये भी नहीं देखा जाता।"
"बस, बस, बस"सभी की निगाहें उस तरफ मुड़ गई।सामने एडा खड़ी थी।अब तक सिर्फ आधा घायल दिखने वाला चेहरा अब पूरी तरह घायल था।चेहरे पर कुछ नजर आता था,तो सिर्फ सुख चूका खून।
"बहुत मनोरंजन हो गया तुम्हारा।अब मै करुँगी।"वो ब्रह्माण्ड रक्षकों की ओर मुड़ी।"बेहतर होगा, अगर तुम लोग बीच में न पड़ो।तुम्हारा काम हो गया,अब तुम जा सकते हो।"
"तुम होती कौन हो हमें हुक्म देने वाली?"डोगा दहाड़ा।
"और वैसे भी,हम चले नहीं जायेंगे।"ध्रुव ने डोगा की हां में हां मिलाई।
"जाना तुम्हे होगा।क्योंकि ये लड़की हमारे साथ जायेगी।"इस बार नागराज बोला।

एडा सबकी बातें चुपचाप सुनती रही।फिर बोली।
"ठीक है, अगर अगले 1 मिनट में तुम लोगों ने मुझे हरा दिया या फिर मेरे घुटने ही जमीन पर टिका दिए,तो ये तुम्हारी।"कुछ देर रुककर वो फिर बोली"और अगर नाकाम हुए,तो"उसने जानबूझकर वाक्य अधूरा छोड़ दिया।
"एंड योर टाइम स्टार्ट.."उसने अपनी कलाई पर निगाह डाली,जहाँ कोई घड़ी मौजूद नहीं थी।"नाउ"
ब्रह्माण्ड रक्षक सोच में पड़ गए,एक घायल लड़की के ऊपर हाथ कैसे उठाये।
"वेस्टिंग योर टाइम.."एडा ने जैसे याद दिलाया।
"अब क्या करें, नागराज?"ध्रुव ने मन ही मन पूछा।
नागराज ने उसे ऐसे देखा,जैसे कह रहा हो"ये तो तुमसे पूछने वाला था।"
डोगा आगे बढ़ा।"डोगा तुझे हमेशा के लिये सुला देगा लड़की।"डोगा ने कह तो दिया था,पर वो खुद भी जानता था कि जब तक कोई अपराध होता न देख ले,किसीको गोली नहीं मार सकता।उसके नियम भी थे।
तिरंगा ने कटर डीएक्टिवेट की और हल्का वार एडा पर किया।उसे फेककर।
एडा ने उसे लपका और इतनी तेजी से वापस फेका कि अगर भेड़िया अपनी गदा सामने न लाता, तो तिरंगा को गंभीर चोट लगती।इतना ही काफी था,ब्रह्माण्ड रक्षकों को भड़काने के लिये।
डोगा ने गन की नाल सीधी की और पैरों को निशाना बनाकर गोलियां चलाई,पर सामने एडा थी।इतना आसान थोड़े था उसे चोट पहुचाना।4 बैक फ्लिप लगाती वो पीछे हटी।
एकाएक ही उसे डोगा पीछे खड़ा नजर आया।वो संभल पाती, उसके पहले ही डोगा ने गन के हैंडल का भरपूर और ताकतवर वार उसके बायीं कनपटी पर कर दिया।जो पहले ही घायल थी।हैंडल की जगह,जो लकड़ी होती है, उसके टुकड़े हवा में उड़ गए।एक पल के लिये एडा की नजरो के सामने अँधेरा छा गया।लेकिन उसका चेहरा इस वार से उतना ही घुमा,जितना एक जोरदार थप्पड़ से घूमता है।कराह के नाम पर कुछ नहीं।हां,उसके जबड़े जरूर भींच गए।एडा अपना चेहरा वापस घुमा पाती, उससे पहले ही डोगा ने गन की नाल का वार उसी जगह कर दिया। तिरंगा ने मौके पर चौका लगाया और ढाल का वार उसके घुटनों के पिछले हिस्से पर कर दिया।
लेकिन एडा थी,कि टस से मस नहीं हो रही थी।उसने अपने निचले होंठ काटे।(जब उसे गुस्सा आता था,तो वो ऐसा ही करती थी)
"तेरी तो..."वो सीधे डोगा के ऊपर झपटी।
ब्रह्माण्ड रक्षक शॉक से खड़े रह गए।उन्हें यकीन नहीं आया कि सच में इस लड़की को कुछ नहीं हुआ।
रिवील चुपचाप एक जगह खड़ी इस जंग को देख रही थी।उसे पता था कि इतना आसान नहीं ब्रह्माण्ड रक्षकों के लिये एडा से जीतना।जिसे वो खुद पिछले 5 सालों से मारने की कोशिश कररही है और आज भी असफल है, उसे ये कैसे हराएंगे।
सभी एकाएक जागे और एडा की ओर लपके।इसबार नागराज ने ध्वंसक सर्प छोड़े।उसे समझ आ गया था कि ये लड़की घातक वार पचा सकती है।ध्वंसक सर्प एडा से टकराये और एडा को डोगा को छोड़ना पड़ा,जिसकी उसने गर्दन थाम रखी थी।
तिरंगा ने भेड़िया को इशारा किया की वो दोबारा अपनी गदा जमीन पर मारे।भेड़िया ने इशारा समझा, पर साथ ही एडा ने भी।
जेसे ही भेड़िया ने अपनी गदा जमीन पर मारी।एडा ने भी अपनी जगह से उछलकर सीधी किक तिरंगा के सीने पर जमा दी।तिरंगा दर्द के चलते दूर जा गिरा।उसे लगा जैसे कोई चट्टान उसके सीने से टकराई हो।भेड़िया की गदा से आये भूकम्प से बचने के लिये तिरंगा के अलावा कोई तैयार था नहीं।तो सारे के सारे जमीन चाटते नजर आये।और अगर कोई खड़ा था,तो,सिर्फ,एडा।
"टाइम्स अप!"एडा बोली।
तभी एडा के सिर से चट्टानी वार आ टकराया।और इस बार उसके घुटने मुड़ने लगे।उसने पलटकर देखा तो
सामने रिवील खड़ी थी।उसके होंठो पर मुस्कान थिरक रही थी।
एडा का गुस्सा सातवें आसमान पर था।उसे समझ नहीं आया कि वार हुआ किस चीज़ से।
"हाहाहा,देखो खुद को एडा।देखो।जिंदगी भर मेरे सामने न झुकने वाली।आज कैसे मेरे कदमों में आ गिरी हो तुम।"कातिलाना हंसी थी वो।"पिछले 5 सालों से तुम्हे मारने की कोशिश कर रही हूँ।हर बार बच जाती हो।तुम इंसान हो या नहीं?"कहते हुए उसने नीचे गिरती एडा को थामा।एडा अब घुटनों पर थी और ब्रह्माण्ड रक्षक स्तब्ध खड़े थे।
उसके नीचे झुक चुके चेहरे को रिवील ने उठाया।"क्या हुआ एडा?दर्द हो रहा है?"
एडा ने शक्ल कुछ ऐसी बनाई हुई थी,जैसे गला फाड़कर रोना चाहती हो।

"कम ओन एडा।cry...you have to....today you'll cry and I'll see your tears.... come on..."इन शब्दो को कहने में उसने पूरी ताकत लगा दी थी।
एडा ने सिर उठाया और उसकी ओर देखकर मुस्कुरा दी।
रिवील ने उसके सीने में हाथ डाला और सबकी नजरों के सामने वो हाथ आरपार हो गया।
लेकिन इससे पहले कि हाथ उसके दिल को लेकर बाहर निकल पाता,नागराज ने अपनी मानसिक ताकत लगा कर उस पर जोरदार वार किया।वार उससे टकराया जरूर,पर
"ओके।तुम लोगो को भी मरना है?"उसे कोई ख़ास नहीं फर्क नहीं पड़ा।
एडा का शरीर बेजान सा जमीन पर आ गिरा।
सभी ब्रह्माण्ड रक्षक साथ आ खड़े हुए।
"तुम्हारी हालत अभी नहीं कि मुझे टक्कर दे सको।खैर वो तो तुम मुझे कभी नहीं दे पाओगे।फिर भी आज तुम्हे ज़िंदा छोड़ रही हूँ।लेकिन अगली बार अपना बीमा करवाने के बाद ही सामने आना।"कहते हुए वो एक दिवार में समां गई।
"हे भगवान!"पीछे ध्रुव बोला।"यानि वो नकली श्वेता..."
"शायद यही थी।"नागराज बोला।
"अब इसका क्या?"डोगा एडा की ओर इशारा करता बोला।
"तुमने मारा है.."परमाणु बोला।"तुम्ही हॉस्पिटल ले जाओ।"
"जरूरत नहीं.."आवाज देविका की थी।जिसने सबकुछ देखा भी था और रिकॉर्ड भी किया था।"ये मेरे साथ है।मै ले जाउंगी।"
"तुम कौन?"नागराज एडा की तरफ बढ़ती देविका के सामने आया।
"देविका कौशल, चीफ रिपोर्टर फ्रॉम द पाइजन।"उसने अपना आईडी कार्ड शो किया।
नागराज उसकी आँखों में देखता रह गया।गहरी नीली और सम्मोहित करने वाली।
परमाणु खांसा। नागराज की तन्द्रा टूटी और उसने देविका का रास्ता छोड़ा।
राजनगर
ध्रुव का घर
श्वेता के रुम में इस वक़्त सिर्फ चंडिका मौजूद थी और कुछ कह रही थी,जब ध्रुव ने अंदर कदम रखा।चंडिका पलटी और उसने ध्रुव को कुछ यूँ देखा,जैसे वो उसकी बहुत बड़ी फेन हो।
"शुक्रिया चंडिका,श्वेता का ख्याल रखने के लिये।"ध्रुव की आँखे नम हो उठी।
वो हड़बड़ाई।"हां..कोई बात नहीं ...ध्रुव।वैसे भी एक दोस्त का फ़र्ज़ इससे कहीं ज्यादा होता है।"
वो चुपचाप बाहर को चल दी।कुछ देर भाई बहन को दुःख दर्द बांटने दो।
बेड पर पड़ी श्वेता की आंखों में भी आंसू चमक उठे,जब उसने अपने भाई को जिन्दा देखा।वो कोमा में जरूर थी,पर उन्हें देख सकती थी।महसूस कर सकती थी।
एकाएक ही चंदा(शक्ति) ने भीतर कदम रखा,पर उन्हें देखकर वो दरवाजे पर ही ठिठक गई।
"श्वेता, देख तो सही,तेरा भाई आया है।आज मुझसे नहीं लड़ेगी क्या?"कहते हुए उसका गला रुंध गया।
साथ ही आँखों ने दिल के हालात बयां कर दिये।
चंदा ने ध्रुव के कन्धे पर हाथ रखा।
"रोओ मत ध्रुव, इस वक़्त जैसा तुम महसूस कर रहे हो।श्वेता की हालत उससे अलग नहीं है।वो भी रो रही है।पर मजबूर है कि दिल के हालात जुबा पर नहीं ला पा रही है।"चंदा की आँखें भी गीली थी।"वो तुम्हे देख सकती है, हमें देख सकती है।महसूस कर सकती है।सुन सकती है।वो बर्दाश्त नहीं कर पायेगी कि तुम उसे देखकर कितने दुखी हो रहे हो।"चंदा बाहर को लपकी।शायद अब उसके लिये खुद के आंसू रोक पाना मुश्किल था।
"मैने फैसला कर लिया है ध्रुव।तुम्हारी शादी ऋचा से ही होगी।"रजनी देवी की आवाज गूंज उठी।
सभी की नजरें उस तरफ उठ गई।
"मैने आज ही तुम्हारी कुंडली वेदाचार्य जी के पास भेज दी है।और ऋचा की भी।"उन्होंने जैसे फैसला सुनाया।
चंडिका बोल उठी।"लेकिन..."
"तुम चुप रहो...मै नहीं चाहती कि..."वो तनिक हिचकिचाई।"अब तुम क्राइम फाइटिंग करो।"
चारों ओर सन्नाटा छा गया।
"ठीक है।"ध्रुव बोला।
सबकी नजरें ध्रुव की ओर उठ गई।ये क्या बोल रहा है ध्रुव।
"मै उस दिन क्राइम फाइटिंग छोड़ दूंगा,जिस दिन क्राइम ख़त्म हो जायेगा।"ध्रुव की आँखों में चिंगारियां नजर आ रही थी।
सबकी जान में जान आई।
"आप खुद ही सोचिये माँ,मै उसे कैसे छोड़ दूँ।जिसने मेरी बहन की ये हालत की।"ध्रुव ने तर्क दिया।
"मै कुछ नहीं जानती।मै बस ये जानती हूँ कि तुम्हे ये शादी करनी ही होगी।"रजनी देवी ने वहां से पलायन कर लिया।
परमाणु बोला"बधाई हो।"
"चुप"
राजनगर
वहाँ का सिटी हॉस्पिटल
दैविका ने डॉ. के रूम में कदम रखा।
डॉ.जान्हवी आर्य
"हेल्लो मिस डॉक्टर।मरीज का क्या हाल है?"वहाँ की एक चेयर पर ढेर होती वो बोली।
"हेल्लो,अब सबसे पहले ये बताओ कि ये नमूनी कहां मिली?"उसके पेशानी में बल देविका को साफ़ नजर आये।
"मेरे ख्याल से तो मेने एक लड़की को एडमिट कराया था।"टेबल के ऊपर टिकती वो बोली।
"अच्छा?ये देखो।"डॉ.ने कबर्ड से एक एक्सरे विजन निकाला।
"ये इस लड़की के सिर का है।"
देविका ने उसे गौर से देखा।
"ये तो खाली है।चोट का कोई निशान नही।"उसने वापस डॉ.की तरफ बढ़ाया।
"वही तो.."उसने विजन वापस कबर्ड के हवाले किया।
"जब तुम इसे यहाँ लाई थी,तो चेहरे का कोई हिस्सा नहीं था,जो खून से न रंगा हो।2 मिनट बाद मै रेडी होकर आई,तो देखा इसका चेहरा कुछ तरह साफ़ था,जैसे ये नहाकर आई हो।बल्कि मै तो कहूँगी कि नहाने के बाद भी किसी का चेहरा इतना साफ़ नहीं हो सकता।एक तो वैसे ही इसका रंग दूध से ज्यादा सफ़ेद है।मैनेविजन निकाला, जिसकी शक्ल तुम देख ही चुकी हो।हो सकता है अब तक होश भी आ गया हो।अब बोलो क्या करें?
"क्या मै उससे मिल सकती हूँ।"देविका उठती हुई बोली।
"बिलकुल।"
उसने डॉ.का अभिवादन किया और बाहर निकली।
वो उसके रूम के बाहर रुकी और दरवाजे पर कान लगाकर सुनने लगी।
"अंदर आ जाओ,देविका।"उसे सुनाई दिया।
उसे लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई हो।
हँसते हुए उसने अंदर कदम रखा।
"तो तुम ही मुझे यहाँ लाइ थी,है न।"एडा उसे खा जाने वाली निगाहों से देख रही थी।
उसने धीरे से सहमति में सिर हिलाया।
"तुम्हारी हिम्मत.."एडा को बोलने का चान्स नहीं दिया उसने।
"देखो मिस क्वीन(ब्लड क्वीन),अगर मै नहीं तो कोई और तो तुम्हे उठाता ही।तो मेने उठा लिया।"वो करीब आई।"जानती हूँ कि अगर तुम्हारे माँ-बाप के सिवाय कोई तुम्हें छु सकता है तो वो निशा है, पर निशा वहां उस वक़्त नहीं थी।"
"उस वक्त से क्या मतलब?"एडा की आँखें सिकुड़ी।"वो वैसे भी यहाँ नहीं है।"
"कौन बोला?"उसके शब्दों में विश्वास झलका।"मै उसके साथ ही यहाँ आई हूँ।"
"बस, तुम्हारा झूठ बहुत हो गया।"एडा उसके तरफ लपकी।"अपने भगवान को याद करलो।"
देविका ने तेजी से अपना बचाव किया।
"Listen yaar..I'm sorry.. for touch.. but really... nisha is here..in rajnagar.."उसे पता था,भागेगी तो बचना मुश्किल होगा।इसलिए उसने समझाना बेहतर लगा।
"ओके,"पता नहीं उसके दिमाग में क्या आया था।"छोड़ दूंगी तुम्हें।पर मेरा एक काम तुम्हे करना होगा।"
"क्या?"देविका का मन सशंकित हो उठा।
"काली पहाड़ी जाना होगा और वहां से कुछ है, जो यहाँ लाना होगा।"उसने कलाई पर निगाह डाली,जहाँ कोई घड़ी मौजूद नही थी।"आधे घण्टे में।and..your.. time.. start.. now.."
महानगर
दादा वेदाचार्य और उनकी पोती भारती का घर
इस वक़्त वेदाचार्य ध्रुव और ऋचा की कुंडली का मिलान करने में व्यस्त थे।जबकि भारती वहाँ आई।
"ये आप किसकी कुंडली देख रहे है, दादाजी।"
"ध्रुव और ऋचा की।"उन्होंने दो टूक जवाब दिया।
"ध्रुव और ऋचा की?"आश्चर्य की सीमा न रही उसके।वो तो जानती थी कि ध्रुव नताशा से प्यार करता है तो फिर ऋचा से शादी कैसे कर सकता है।
उसके अंतर्मन को पढ़ा वेदाचार्य ने।"दरअसल,ध्रुव की माँ चाहती हैं कि ध्रुव को ऋचा से शादी कर लेनी चाहिए।"
"लेकिन क्या उन्हें नताशा का इंतजार नहीं करना चाहिए?"भारती के मन मे अब भी सवाल थे।
"उसके गायब हो जाने के बाद ही उन्होंने ये फैसला किया है।"
बातें और भी होतीं अगर दरवाजे की बेल न बजी होती।
दरवाजे पर एक कैमरा लगा था,जिससे अंदर टीवी पर नजर आ जाता था कि बाहर कौन आया है।और आने वाला कोई दुश्मन हो तो चारों ओर लगा तिलिस्म पहले ही सब कुछ बयां कर देता था।
आने वाली रिवील थी।
वो अंदर आई तो वेदाचार्य की नजरें सिकुड़ी।एक इटेलियन लड़की को उनसे क्या काम हो सकता है।
"नमस्ते"उसने शुद्ध हिंदी में कहा,तो वेदाचार्य और भारती दोनों के ही नेत्र फैल गए।
"बैठो"वेदाचार्य ने सामने कुर्सी की तरफ इशारा किया।
"आपसे खास काम था।"कहते हुए उसने भारती की तरफ देखा।
"चिंता मत करो,ये मेरी पोती है।तुम इसके सामने बात कर सकती हो।"
"ओके,ये किताब मेरे पिताजी ने मुझे दी थी।"कहते हुए उसने किताब आगे कर दी।"पर मेरी समझ के बाहर है यह भाषा।"
वेदाचार्य ने किताब थामी।

*****शास्त्र(मै किसी भी शास्त्र का नाम नहीं लेना चाहता।)
"अगर तुम्हे यह भाषा नहीं आती तो तुम हिन्दी कैसे बोल रही हो?क्योंकि यह लिपि इसके काफी करीब है।"
"इसकी मदद से"कहते हुए रिवील ने कान के ऊपर से बाल हटाये।और ब्लूटूथ की तरह दिखने वाला ट्रांसलेटर दृष्टीगोचर हुआ।
"ओह्ह"वेदाचार्य के मुँह से निकला।
वो किताब के पन्ने पलटने लगे।साथ ही उनके नेत्र फैलते चले गए।रिवील ने वेदाचार्य के बदलते भावों को साफ़ पढ़ा।
"क्या तुम इसे यहाँ छोड़ सकती हो।"उनके सवाल में प्रार्थना झलक रही थी।वो चाहती तो ऐसा कर सकती थी।पर इस वक़्त वो नागराज के इलाके में थी।
राजनगर
ध्रुव के घर पर इस वक़्त सारे ब्रह्माण्ड रक्षक मौजूद थे(कुछेक को छोड़कर)।
"अब बताओ ध्रुव, ये कैसे हुआ कि श्वेता के रूप में रिवील ने तुम्हे हराया कैसे?"परमाणु ने पूछा।
"रुको परमाणु,हम अब भी ये नहीं कह सकते कि रेवेल ही श्वेता के रूप में थी।"ध्रुव अब भी संशय में था।
"वो सब छोडो,पहले बताओ तो।"परमाणु अब भी जल्दी में था।
"हां,हां,बता ही दो।"चंडिका ने समर्थन किया।
"ठीक है, सुनो.."ध्रुव ने बताना शुरू किया।
"रुको..."नागराज ने उन्हें टोका।
"अब क्या..."परमाणु रो देने वाले लहजे में बोला।
"नाग संकेत।लेकिन ये मेरे किसी नाग का नहीं लगता।"नागराज ने आँखें मूंद रखी थी।"इस संकेत के मुताबिक रिवील को महानगर में देखा गया है, "उसने आँखें खोली।"वो भी दादा वेदाचार्य जी के यहाँ।"
राजनगर
सिटी हॉस्पिटल
निशा भागती हुई कमरे में दाखिल हुई।
"हे भगवान!तुम ठीक तो हो।मेने जब तुम्हारे बारे में सुना तो मुझे तो चक्कर ही आ गया।"निशा हांफने लगी।
एडा उसे एकटक देखती रही।
"क्या?"आखिर निशा ही बोली।
"तुम यहाँ क्या कर रही हो?"एडा ने कुछ यूँ कहा,जैसे उसे कोई फर्क ही न पड़ा हो।
"वो..वो मै जुली मैम से परमिशन लेकर आई हूँ।उन्होंने ही मुझे कहा कि तुम्हें हेल्प की जरूरत पड़ सकती है।"निशा ने साफ़ झूठ कहा था,क्योंकि वो जानती थी।सच कहना उसकी सेहत के लिये खराब होगा।
एडा ने कुछ नहीं कहा।वो बस उसे एकटक देखती रही।
"वेल,मुझे पता चला है कि रिवील को अभी अभी महानगर में देखा गया है।"कहकर वो पलटी।उसे उम्मीद थी कि एडा उसे फॉलो करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।"चलो।"
आखिर एडा उठी।वो उसके आगे निकली।
तभी निशा का हाथ बिजली की गति से उसकी पीठ के आरपार दिल पर जम गया।
पर यह क्या?यहाँ तो दिल था ही नहीं।बल्कि एक तेज झटके ने उसके होश उङा दिये।
अभी वो कुछ समझ पाती उसके पहले ही एडा का सिर 180° तक घूमकर पीठ पर पहुँच गया।हड़बड़ाकर निशा ने हाथ पीछे खींचा।बिजली के झटके अब भी उसकी उंगलियों में दौड़ रहे थे।
"ओह्हो,अब तो निशा से भी बचकर रहना पड़ेगा।"
निशा आवाज की दिशा में घुमी।सामने एडा खड़ी थी।
उसने पलटकर देखा तो एक एडा अब भी उसकी बगल में खड़ी थी।(जो एक एंड्राइड थी)
निशा मुस्काई। ।तेजी से उसकी आंखों ने रंग बदला। जो भूरी थी,अब बदलकर नीली हो गई।फिर धीरे धीरे उसका चेहरे ने रंग बदला।कुछ ही सेकेंड्स बाद निशा की जगह रिवील थी।और ये सब देखकर भी एडा के चेहरे पर किसी तरह के आश्चर्य भाव नहीं थे,जैसे वो जानती हो।कि निशा की जगह रिवील आई थी। "तुम्हे पता था.."रिवील को रुकना पड़ा।क्योंकि एडा ने उसे टोका। "हां,सिर्फ यही नहीं।ये भी पता है कि श्वेता के रूप में उन 4 सीआइए एजेंट्स को मारने वाली भी तुम ही थी।इस वक़्त तुम महानगर में भी मौजूद हो।और यहाँ भी।तुमने सबसे बड़ी गलती की मेरी एजेंसी से गैजेट्स चुराने की।उसके बाद उन्हें इस्तेमाल करने की।बहुत हो गए तो रोबो के साइंटिस्ट ने मिलकर उसे मॉडिफाई कराने की।वो रोबोट मेंरे ही गैजेट से बना था।इसलिए मेने उन डिवाइस को डिसेबल कराया,जो किसी डीएनए से न जुड़े हो।क्योंकि तुम्हे तो ढूँढना ही था।ये सारे डिवाइस मेरे डीएनए से बने हैं।इसलिए मै इन्हें कंट्रोल कर सकती हूँ।फिर देखा कि एक गैजेट करीब है।जो निशा थी।लेकिन निशा क्यों ट्रांसलेटर यूज़ करेगी।वो तो तुम ही हो सकती हो।" रिवील ने मुस्कान के साथ ताली बजाई। "अब नहीं जानना चाहोगी की सच में निशा कहाँ है?"उसकी आंखों में झांकती वो बोली। "निशा यहाँ आई ही नहीं।"एडा बोली। "आई थी,उस रिपोर्टर के साथ"रिवील मुस्कुरा पड़ी।"यकीन नहीं तो पूछ लो कि उसे निशा ने तुम्हारा अतीत बताया या नहीं।मुझे निशा बनकर उसके साथ आने की जरूरत नहीं।क्योंकि मै तो हवा का वो झोंका हूँ, जो एक ही वक़्त में करोड़ो जगह एक साथ होता है।करोड़ो रूप है मेरे।या शायद अरबों।" एडा सोचने पर मजबूर हो गई। "कहाँ है निशा?"एडा के जबड़े भींचे। रिवील ने खुद के सीने में हाथ डाला,जो आरपार हो गया,और खून से लथपथ दिल उसके हाथ में था। "यहाँ।"उसकी सर्द आवाज गूंजी।"ये मेरा नहीं,निशा का दिल है।" एडा की हिम्मत नहीं हुई उसे थामने की।रिवील ने उसका हाथ पकड़ा और दिल उसकी हथेली में थमा दिया। एडा पीछे लगी दीवार से टकराई और जमीन पर बैठती चली गई। "मुझे लगता है, सदमे से तुम मर जरूर जाओगी।"वो चल दी।एकाएक पलटी।"क्या पता न भी मरो।अभी मुझे ब्रह्माण्ड रक्षकों से खेलना है और मै नहीं चाहती कि तुम उसमे मेरा खेल ख़राब करो।" उसने सामने लगी ग्लूकोज स्टिक उठाई।उसे मोड़ा।तोड़ा। एडा के सामने आई।"कम ओन एडा।नाउ क्राई।"और सीधे उसकी बाईं कनपटी पर हमला कर दिया।एडा ने। उससे बचने की कोशिश नहीं की।और वो वार सीधे उसकी कनपटी की नस फाड़ गया।खून तेजी से बहने लगा।और सिर के साथ उसके पुरे जिस्म को भिगाने में लग गया। "गुडबाय एडा।फाइनली मेने तुम्हारा किस्सा खत्म किया।"रिवील के विजयी शब्द गूंजे। एडा के लिये ख़त्म,तो ब्रह्माण्ड रक्षकों के लिये शुरू हो चुकी थी।

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1 comments :

Bhai ho sake to aage ki story jaldi upload kar dijiyega..story bahut hi badhiya hai

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