Saturday, 19 March 2016



Brooklyn(New York)
एडा Queens international पहुंची।।
Queens international..
(अमेरिका की हथियार और आर्मर्स बनाने वाली सबसे बडी कम्पनी।।इस कम्पनी के बनाये हथियार किसी की मर्जी से नहीं बल्कि जो इन्हें इस्तेमाल करता है उसके डी एन ए से चलते हैं।।)
एडा के पहुचने की देर थी।कि मेनडोर पे ही उसका स्वागत तक्षिका ने झिलमिल मुस्कान के साथ किया।।।
तक्षिका वर्मा
एक बेहद खुबसूरत औऱ गोरी औऱ 5'8" के कद वाली एक इच्छाधारी नागिन।।।जिसकी मुलाकात अब तक नागराज से नहीं हुई है।।
"क्या बात है कोई बुरी खबर सुनाने वाली हो??"एडा ने उसे देखते ही कहा।।
"हम्म।"तक्षिका ने मासूमियत से सहमति से सिर हिलाया।।
"क्या?"एडा मेनडोर को धक्का देते हुए अंदर दाखिल हुई।।
वह कोई 20 फुट चौङा औऱ 30 फुट लम्बा कॉरिडोर था।।
अंदर घुसते ही अचानक कई होलोग्राम्स प्रकट हुए।।साथ ही कई सारी लेजरगन्स दिवारों से निकल कर एडा की तरफ मुड गई।।कई आवाजें एक साथ चलने लगी औऱ एक दुसरे की आवाजों को काटने लगीं।।
"Footprint checking... checking complete..."
"Fingerprints identify..."
"Eye scanning... scanning complete"
अब तक एडा उस कॉरिडोर को पार कर चुकी थी।।
पीछे पीछे तक्षिका भी आ चुकी थी।।
"DNA matched"अंतिम आवाज आई।।
"अब कहो..क्या हुआ??"एडा ने पलटकर तक्षिका की तरफ देखा।।
"Actually.."कुछ देर रूककर तक्षिका बोली।"अभी हाल ही मे बनाए गए multilaguages trancelater की एक पुरी सेट की चोरी हो गई है।।"
एडा ने एकटक कुछ देर उसे देखा।।फिर कहा"कब?"
"आज"तक्षिका ने तुरंत जवाब दिया।।
"तुम देख चुकी हो कि मैं यहाँ तक कैसे पहुँच पाई।।अगर मेरे शरीर की एक नस भी मैच नही होती तो क्या होता.. ये तुम्हें पता है।।"एकाएक उसकी आवाज तेज हुई.."औऱ तुम कहती हो कि कोई आता है औऱ गैजेट्स चुरा ले जाता है औऱ तुम लोग उसे रोक नहीं पाते।।"
"एक्चुअली.."तक्षिका ने बेहद धीमी आवाज मे कहा..।"वो नजर नहीं आई।।"
"आई??"एडा की भवें उठीं।।"तुम्हें कैसे पता कि वो लङकी थी?"
"स्कैनर्स ने उसे भी स्कैन किया था पर लेजरगन्स के फायर्स उसे नुकसान नहीं पहुंचा पाये बल्कि आपस मे ही टकरा कर खत्म होने लगे।।"तक्षिका ने सबकुछ बयां कर दिया।।
(लेजरगन्स ऑटोरिपेयेबल हैं... वो खत्म होने के बाद खुद को अपने आप रिपेयर कर लेते हैं।।सभी गैजेट्स औऱ आर्मर्स एडा ने अपने "डीएनए" से बनाए हैं।।इसलिए सारे गैजेट्स एडा के दिमाग से जुड़े हुए हैं।।वो खुद को तब तक खुद ही रिपेयर कर लेंगे जब तक एडा जिन्दा है।।)
"ठीक है।।जाएगी कहाँ लेकर।।"(मन मे:-"फंस गई मछली")एडा उठी।"मेरे गैजेट्स ले आओ।मुझे बाहर जाना है।।"
"अरे।।कुछ खा तो लो।"तक्षिका पीछे दौङी।
"भुख नहीं है।।"एडा अपने चार्टर प्लेन के पास रूकी।।
"कमाल है..9 दिनों से कुछ खाया नहीं।।फिर भी भुख नहीं।।"तक्षिका बोली।।
"सोयी तो मैं 5 सालों से नही..इसका मतलब ये तो नहीं कि मैं सो जाऊं।।सोऊ भी तो कैसे?कोई है जो मुझे सोने ही नहीं देता।।"कहते हुए एडा अतीत मे डुबने लगी।कि एकाएक बाहर आई।।"खैर.. आगे से ख्याल रखना।।औऱ हाँ.. भारत से एक लडकी आने वाली थी.. हमारी कम्पनी मे ज्वाइन करने।।आई नहीं अब तक?"अब तक उसका गैजेट्स का बैग आ चुका था।।
"पता नहीं क्यों नहीं आई..।वैसे उसके आने मे 3 दिन है अभी।"तक्षिका ने एडा को उसका गैजेट्स का बैग थमाया।।
"नाम क्या है उसका??"एडा बैग अंदर प्लेन मे रखती बोली।
तक्षिका ने बॉम फोड़ा..."श्वेता मेहरा"..।
कुछ देर शान्ति रही.।
"एन्ड्रायड्स का काम अभी रोक देते है।।"एक क्षण रुककर एडा बोली.।"औऱ हाँ..जो एक सेम्पल बनाया था..वो भी मुझे दे दो..शायद उसकी टेस्टिंग का वक्त आ गया है।।"
(एन्ड्रायड इन्सान की तरह दिखाई देने वाला रॉबॉट होता है.. ये दिमाग के मामले मे आम इन्सान से कई गुना आगे होता है।।)
CIA headquarter...
New jersey
निशा इस वक्त अपनी ग्रुप लीडर मिस जुलिया के सामने खङी थी।।
(Julia Robert(julie)
Height.5'9"
Color:-fair
Age:-38 years old..
Signature color:-blue..)
"हम्म..मैं तुम्हें जाने तो दे दुन्गी..पर इस केस को कौन सॉल्व करेगा फिर?"जूली निशा की तरफ एकटक देखती बोली।।
"मेरे दिमाग मे एक नाम है।।"निशा अपनी कनपटी खुजाती बोली।।
"अच्छा..।कौन है वो बहादुर?"जुली ने आश्चर्य से आंखें बडी कीं।।
"केरॉलिना केस्केट"निशा ने कुछ इस अंदाज मे कहा. जैसे उसने कोई कठिन पजल मिनटों मे सॉल्व कर लिया हो।।
Carolina cassket
height:-5'11"
Color:-fair
signature color:-pink
Codname:-frosty

जुली ने मुस्कुरा कर निशा की तरफ देखा।।
"तुम्हें पता है.. इस लिस्ट मे उसका भी नाम है।।"
निशा की मुस्कान गायब।।।
"सच बोलो तो शायद मैं तुम्हें जाने दूं।।"जूली ने लिस्ट सामने टेबल पर फेंक दी।।
निशा ने एक लम्बी सांस छोड़ी.."ओके.. मैं इसलिए जाना चाहती हूँ, क्यों कि एडा ने कई दिनों से कुछ नहीं खाया है औऱ मैं उसे इस हाल मे नहीं देख सकती।।"
"वो तुम्हें वहाँ देख कर खुश होगी??"जूली ने पुछा।।
निशा से जवाब देते न बना।।
"ठीक है।जाओ..पर तुम्हें कोई कॉप्टर नहीं मिलेगा सीआईए की तरफ से।।अब चाहे पैदल जाओ या उङ कर।।"हवा मे हाथ से प्लेन उडाते जूली ने फैसला सुनाया।वो जानती थी कि निशा रुकने वाली नहीं औऱ एडा के बिना तो वो रह भी नहीं सकती।।
निशा उसे घुरती हुई बाहर निकल गई।।
New jersey..
The poison...
(यूएसए का सबसे बडा न्यूज नेटवर्क.. सबसे खास बात.. इसमें काम करनेवाले व्यक्ति कोई इंसान नहीं बल्कि इच्छाधारी नाग औऱ नागिन थे।।हर एक इतना ताकतवर था कि अपने अंदर करोड़ों नागों को रख सकता था।।लेकिन ये सारे खुद किसी औऱ के शरीर का हिस्सा थे।।)
("मैथिली.."
कद:-5'10"
उम्र:-करोड़ों वर्ष या शायद अरबों वर्ष..
रंग:-हद से ज्यादा सफेद.. लगता था जैसे शरीर से सारा खुन चुस लिया गया हो।
इसे देखने का मौका कुछ ही लोगों को मिला था।।
इन सभी इच्छाधारी नागों के ऊपर राज करनेवाली साम्राग्यी औऱ द पॉइजन की मालकिन)
देविका कौशल.. उन खुशनसीब लोगों मे से जो उससे मिल सकते थे।।
देविका...बताने की जरूरत नहीं कि ये भी एक इच्छाधारी नागिन है।।इस कम्पनी की चीफ क्राइम रिपोर्टर।।
मैथिली ने ये केस (ध्रुव के कातिल का पता)देविका को दिया था।।साथ ही ये हिदायत भी"चाहे मर भी जाओ तो भी अपनी शक्ति का इस्तेमाल किसी इंसान के सामने मत करना।।"
जैसे ही देविका बाहर निकली, सामने निशा खडी नजर आई।।
"कहो,मिस एजेंट।"(देविका लोगों से मिलने पर उनके प्रोफेशनल नाम से पुकारती है)
"एक्चुअली,एक राइड लेनी थी तुम्हारे साथ।।"निशा चेहरे पर मुस्कान सजाती बोली।।
"क्यों?सीआईए ने प्लेन नहीं दिया।"देविका ने भी मुस्कान के साथ पुछा।
"हाँ.. डरते है. कहीं ट्रैफिक मे ठोक न दूं।"उसने अपने ही हाथ को हवा मे प्लेन की तरह उडाया।।
देविका चौंकी.."क्या.?हवा मे ट्रैफिक?"अचानक उसे मजाक समझ आ गया।"ओह.. समझी.लेकिन मेरा फायदा।"
निशा ने कुछ पल सोचा."अबतक की प्रोग्रेस और तुम्हारी पसंदीदा हिरोइन की कहानी..।"
देविका मुस्काई.."बैठ जाओ."
अमेरिका से सफर शुरू हो चुका था।।
राजनगर
नारका जेल
रात के 12:30
कुछ सिपाही टहल रहे थे तो कुछ झपकियाँ ले रहे थे।।
सुबह के 7:30 बजे नागराज ध्रुव की लाश लेकर आने वाला था।।
एकाएक चमगादङों का एक झुंड जेल मे घुस आया।।
वो संख्या मे कितने थे.. ये बता पाना मुश्किल है।।लेकिन वो हजारों की संख्या मे थे।
चमगादडों को देखते ही सबके दिमाग कुंद हो गए।समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए।।
लेकिन तभी उनकी आँखें फटी रह गई।उनकी कोई अगुवाई भी कर रहा था।।जो कि एक लडकी थी।।
सभी चमगादड छतों पर लटक गए..जैसे उसे जगह दे रहे हो।।
चेहरे पर से पर्दा हटा औऱ सभी किसी सम्मोहन पाश मे बंधते चले गए।।उनके लिए ये चेहरा नया था औऱ बेहद खुबसुरत भी।।
(वो लडकी "रिवील" थी)
एकाएक ही सभी होश मे आए।।
"कौन हो तुम??"उनमें से एक उसकी तरफ गन ताने बढा।
सभी ने उसे फॉलो किया।।
"मौत"रिवील ने ये शब्द हिंदी मे कहा था।(कारण था, उसके कानों मे लगा multilanguges trancelater..जिसे उसने बालों की आड मे छिपा रखा था।।)
सारे चमगादड सैनिकों पर टुट पडे।।
कुछ ने भाग कर जान बचाई।कुछ बहादुर घायल हो गए।।
रिवील आराम से आगे बढती रही।उसकी राह मे कोई नहीं आया।वो एक जगह जाकर रुकी।उसने सभी सेल्स को एक नजर देखा।अचानक ही सारे सेल्स की सारी सलाखें निकल कर हवा मे उडने लगीं औऱ छिपे हुए सैनिकों के सीने के आरपार होने लगीं।सारे कैदी आजाद हो चुके थे।लेकिन इससे पहले कि वो कहीं भाग पाते..(सबसे पहले बाहर निकल कर भागने वाला बौना वामन था)एक सलाख तेजी से आकर उसके एक इंच आगे जमीन मे आ गडा।बौना वामन वापस भागा।
"डरने की जरूरत नहीं.. तुम्हें आजाद कराने ही मैं यहाँ आई हूँ।"रिवील उनकी तरफ बढी।"लेकिन.."वो रुकी।"तुम सब को मेरा काम करना होगा।"चुम्बा ने कुछ कहना चाहा।कि रिवील बोल पडी।"औऱ अगर किसी ने मना किया तो उसका हश्र इन पुलिस वालों से अलग नहीं होगा।"

"लेकिन हमें करना क्या है?"बौना वामन साहस कर बैठा।।
"सुबह 7:30 बजे नागराज ध्रुव की लाश लेकर यहाँ(राजनगर) आयेगा।पुरी जनता उसे आखिरी बार देखने एयरपोर्ट जरूर जायेगी।"कुछ सेकंड रुककर वो फिर बोल पडी।"क्या हो,अगर तभी राजनगर पर हमला हो जाए।"
अपनी बात पुरी करने के बाद वो उनकी तरफ देखने लगी।"तो अब कौन कौन जिन्दगी से प्यार करता है।"
सबके हाथ ऊपर।।
"बहुत अच्छे।"
बौनावामन बोला"लेकिन हममें से लीडर कौन होगा?"
"तुममें से?"रिवील ने उसे सिर से पांव तक देखा।
बौनावामन पीछे हट गया।।
रिवील उनकी तरफ मुडी।"तुम्हारा लीडर होगा अंतर्राष्ट्रीय आतंकी ग्रैंड मास्टर रोबो।"
राजनगर
रोबो की गुप्त लैब
ध्रुव को सामने देखते ही नताशा के सीने मे साँसों का ऐसा तूफान उठा कि कुछ पलों के लिए उसे खुद की साँसे घुटती महसूस हुई।।
सामने ध्रुव था।एक बडे से जार मे बंद।नताशा उसे छूने के लिए बेताब हो उठी।लेकिन फिलहाल कुछ भी उसके बस मे नहीं था।
"प..पा..पापा... क..क्..क्या.. ये.. ही..ध्.ध्रु..म..मे.. मेरा... ध्रुव....... है..।"खुशी के कारण उसके बोल नहीं निकल रहे थे।।
"हाँ.. यही असली ध्रुव है।तुम्हारा.. ध्रुव.. औऱ अब इसका ख्याल तुम्हें ही रखना है।।"रोबो ने कह तो दिया था।(मन मे:-मैं खुद नहीं जानता कि ये असली है या वो था, जो मर गया)
बाहर आहट हुई।।
"तुम अपने ध्रुव के साथ रुको।मैं आता हूँ।"कहते हुए रोबो बाहर निकल गया।
बाहर निकलते ही रोबो चौंका।
सामने रिवील औऱ नारका जेल से भागे अपराधी मौजूद थे।।
टीम तैयार हो रहीं थी।।
नागराज औऱ उसके साथी अब राजनगर से कुछ ही दूर थे।।नागराज ध्रुव की लाश के सामने बैठे मन ही मन खुद को कोस रहा था।।
"तुम अब किसी काम के नहीं रहे नागराज।।तुम उसी शहर मे मौजूद थे, फिर भी अपने दोस्त को नहीं बचा सके।।लानत है तुम पर।।"औऱ भी न जाने कैसे कैसे ख्याल उसके दिमाग को झिंझोड रहे थे।उसके दोस्त भी उसके दिल का हाल समझ रहे थे.. औऱ उसका हाल देख खुद भी अंदर टुट रहे थे।।
एकाएक एक रोशनी चमकी औऱ प्रकाश पुंज प्रकट हुआ।एक सफेद साया उसमें से निकला औऱ ध्रुव को गोद मे उठा कर तेजी से वापस लौट गया।।
ये सब कुछ ही सेकंड्स मे हो गया।।नागराज कुछ समझ पाता, उसके पहले ही प्रकाश पुंज बंद होने लगा।नागराज ने आव देखा न ताव औऱ प्रकाश पुंज मे समा गया।।उसके दोस्त हक्के बक्के से खडे रह गए।।
एडा अपने बुस्टरयुक्त प्लेन के कारण नागराज से काफी पहले राजनगर पहुँच गई।।एयरपोर्ट पर बहुत अधिक भीड़ होने के कारण उसे प्लेन उतारने की इजाजत नहीं मिली।।
"हाँ..हाँ.. क्यों नहीं.. सारा एयरपोर्ट नागराज औऱ ध्रुव के लिए खाली कर दो।।"झुंझलाती एडा बोली।।"मेप चैक करो।"
उसकी आवाज पर प्लेन मे लगे कम्प्यूटर ने मेप पर उसे एक खाली जगह दिखा दी।।जो काली पहाड़ी थी।।उसने प्लेन को वहाँ उतारा औऱ अपने गैजेट्स लेकर वहाँ से निकल पडी।।
निशा भी देविका के साथ नागराज के मुकाबले आधा घंटा पहले निकली थी।तो पहुँच भी पहले गई।
"वॉव यार.. व्हाट अ फैन फॉलॉइंग..?काश मेरे भी इतने फैन्स होते।।"निशा का मुँह खुला रह गया।।
"तुम भी मर जाओ"देविका दो टुक बोली।।
निशा ने सिर्फ एक पल उसे घुरकर देखा।।
"चलो बाहर।"निशा बोली।।
"तुम जाओ..मैं रूकुँगी।।"
निशा बाहर निकल गई।।साथ ही उसने अपने जासूस एक्टीवेट कर लिए।
एडा को पता लगाने मे ज्यादा वक्त नहीं लगा कि रिवील कहाँ है।।कारण था रिवील द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा उसी की कम्पनी का गैजेट(multilanguges trancelater)।(जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है... एडा की कम्पनी के गैजेट्स उसके दिमाग से जुड़े हैं.. उसके डीएनए से बने है.. इसलिए उन्हें ट्रैक करना उसके लिए मुश्किल नहीं था।।)वो सीधे रोबो के अड्डे की तरफ चल पडी।
नागराज जब प्रकाश पुंज से बाहर निकला, तब उसे महसूस हुआ कि इस जगह को वो पहचानता है(स्वर्ण नगरी)।वो साया अब भी आगे बढ रहा था।नागराज के लिए उसकी रफ्तार को पकड़ पाना मुश्किल हो रहा था।
उसने ध्वंसक सर्प का हमला उस साये पर कर दिया।वो उस साये से टकराकर ध्वंसक सर्प गायब हो गए।।साथ ही वो साया भी नागराज की नजरों से ओझल हो गया।।
प्लेन लैंड कर चुका था, पर राजनगर वासी ध्रुव को देखने को तरसते नजर आये.. क्यों कि ध्रुव तो नहीं. एक लकड़ी का ताबूत उन्हें नजर आया.. जिसमें ध्रुव की लाश होने का अंदेशा था।
अचानक एक धमाका हुआ।।।

औऱ आसमान से एक जैविक रोबोट रनवे पर आ खडा हुआ औऱ एक प्लेन के सामने जा रुका।।(वो लकड़ी का ताबूत इसी प्लेन से निकाला गया था)उस रोबोट की ऊँचाई 70 फिट थी।उसने अपने दोनों हाथ प्लेन की तरफ उठाए औऱ भयंकर ध्वनि तरंगों के टकराव से प्लेन के टुकड़े हवा मे उडने लगे।चारों ओर भगदड़ मच गई, जो कि होना ही था।इस वक्त जो बचाव दल सामने था, उसे ब्रह्मांड रक्षक कहते है(नागराज,ध्रुव इसमें शामिल नहीं हैं)।
एडा रोबो की गुप्त लैब तक पहुँच गई थी।उसने अपने गैजेट्स का बैग उतारा औऱ अपने गैजेट्स पहनना शुरू किया।कुछ मिनटों मे वो तैयार थी।अंदर घुसते ही उसकी मुलाकात कुछ(रोबो)आर्मी मैम्बर से हो गई।
"कौन हो तुम?अंदर कैसे आई?"गरजता हुआ एक मैम्बर उसकी तरफ बढा।पीछे खडे तीन लोगों ने उसे फॉलो किया।
एडा ने उनके करीब आने का इंतजार किया।उनके करीब आते ही..
"अपने हाथ सिर पर रखो औऱ घुम जाओ।"उसने गन की नाल एडा के चेहरे पर टिकाई।।
("बेवकूफ गधा")
एडा की मुट्ठियाँ भिंच गई।उसके हाथ मे कंगन की तरह दिखाई देने वाला एक गैजेट था, जो उसके मानसिक संकेत से एक्टिवेट हुआ।उस गैजेट मे से स्टील ब्लेड बाहर आया, जो दो फुट लम्बा था(दोनों हाथ के मिलाकर दो ब्लेड)।एडा ने तेजी से बायें हाथ के ब्लेड से सीधे उसकी गर्दन को धङ से अलग कर दिया।पीछे खडे तीनों हडबडाये।एक ने तेजी से गन उसकी तरफ मोड़ी..लेकिन एडा ज्यादा तेज निकली।वो तेजी से नीचे झुकी औऱ सीधे उसके सीने पर वार कर दिया।पीछे खडे दोनों मैम्बर्स ने जब वो ब्लेड उसके सीने के पार पीठ से निकलता देखा.. तो उनकी भी साँसे रुक गई।एक पलट कर तेजी से भागा।वो ज्यादा दूर निकल भी नहीं पाया था कि उसके पीछे से तीसरे साथी का सिर उसके आगे आ गिरा।चिख मारकर वो रुका।पीछे पलटा ही था कि उसे खुद की गर्दन पर ब्लेड चलता महसूस हुआ।सामने एडा खडी थी औऱ उसका सिर जमीन पर जा गिरा।।
एडा लापरवाही से अंदर घुसती चली गई।जो भी बीच मे आया.. उसे गाजर मुली की तरह काटते हुए।अचानक वो ठिठकी..एक दरवाजे के पास।।
"ध्रुव??"आश्चर्य के साथ उसके मुँह से निकला।।
नागराज आखिरकार उस जगह पहुँच ही गया, जहाँ वो साया ध्रुव के साथ मौजूद था।नागराज उसपर हमला करनेवाला वाला था कि झरोखे से उसे ध्रुव के करीब बैठा धनंजय नजर आया।उसे समझने मे देर न लगी कि वो साया कौन था।
"बाबा गोरखनाथ"नागराज के मुँह से निकला।
उसने देखा.. बाबा गोरखनाथ ने ध्रुव के सीने पर हाथ रखा हुआ था औऱ एक प्रकाश उनके हाथों से निकल कर ध्रुव के सीने मे समा गया।
ध्रुव के शरीर ने इस तरह झटकालिया.. जैसे उसे हिचकी आई हो।जैसे ही नागराज ने यह देखा.. वह दौड़ कर ध्रुव से लिपट गया।।
"ध्रुव... त..तुम ठीक तो हो?"नागराज की आँखों मे नमी आ गई।
"मैं.. मैं ठीक हूँ.. नागराज..लेकिन.. श्वेता कहाँ है..?औऱ उसने मुझ पर हमला क्यों किया?"ध्रुव उठ खडा हुआ।
"वो श्वेता नहीं थी ध्रुव।"बाबा गोरखनाथ ने पीछे से ध्रुव के कंधे पर हाथ रखा।नागराज ने आश्चर्य से उनकी तरफ देखा।।
"हाँ नागराज..वो कोई शक्ति है.. बेहद ताकतवर.. मैं नहीं जानता कि उसने तुम्हें(ध्रुव को)जिन्दा क्यों छोडा।शायद उसका मकसद तुम्हें मारना नहीं था.. हालांकि तुम्हारी साँसे इतनी कमजोर अवश्य हो गई थी कि आम इंसानों के लिए वो मृत व्यक्ति के समान थी।"कुछ देर रुककर वो पुनः बोले.."इस बार तो सब ठीक हुआ.. परन्तु अगला वार जानलेवा सिध्द हो सकता है।।अपना ख्याल रखना बच्चों।"कहते हुए बाबा गोरखनाथ अंतर्ध्यान हो गए।
पीछे नागराज औऱ ध्रुव गले मिले।।
"श्वेता कहाँ है औऱ कैसी है नागराज?"ध्रुव को आखिर बहन की याद आ ही गई थी।।
"तुम्हें बहुत कुछ बताना है.. चलो राजनगर।"नागराज ने ध्रुव के कंधे मे हाथ डाला।।
राजनगर...
वो तो खुद मुसीबत मे था।।
अब तक वो रोबोट रनवे छोड़ जनसमुह की तरफ बढ चुका था।एकाएक उसे अपनी तरफ बढते देख पब्लिक तेजी से पीछे की तरफ भागी।जैसा कि अपेक्षित था सभी एकदूसरे को कुचलते हुए भागने लगे।।इस बीच एक महिला का बच्चा गिर गया।तेजी से ब्रह्माण्ड रक्षक, जो कि अब तक बाहर थे, अंदर आये।।वो बच्चा कुछ लोगों के पैरों तले आने ही वाला था कि"शक्ति"प्रकाश की गति से उसे सबके बीच से निकाल ले गई।।
परमाणु अब तक उस जैविकरोबोट के सामने आ पहुंचा था।"इसे परमाणु छल्लों से कैद करने की कोशिश करता हूँ।"सोचते हुए उसने उसने परमाणु छल्लों का वार उस पर किया।
लेकिन
रोबोट ने परमाणु छल्लों को दायें हाथ से थामा औऱ परमाणु को अपनी तरफ खींच लिया।वो अपने दोनों(मशीनी) हाथो से उसके शरीर को चीरने लगा।
"आहह्ह"परमाणु की चीख निकल गई।
एकाएक इंस्पेक्टर स्टील की मेगागन गरजी औऱ परमाणु उस रोबोट की पकड़ से छुट जमीनपर आ गिरा।
"मार डाला.."परमाणु अपनी कमर पकड़ कर उठता बोला।स्टील की मेगागन भी उसपर कोई खंरोच तक नहीं डाल सकी थी।
"अब?"परमाणु ने स्टील की तरफ देखा।


एडा ने सावधानीपूर्वक अंदर कदम रखा।किसीके वहाँ होने की आहट वो साफ महसूस कर रही थी।सामने ध्रुव एक जार मे बंद था औऱ उसके अंदर उस तक ऑक्सीजन पहुंचाने के साधन नजर आ रहे थे।एक नजर मे ही उसने उस जगह का मुआयना किया।वो कोई लैब थी... चारों तरफ गैस सिलेंडर औऱ केमिकल जार नजर आ रहे थे।
अचानक उसने महसूस किया कि कोई उसके पीछे खडा है।पीछे नताशा थी.. जिसने इस वक्त एक भरे हुए गैस सिलेंडर को पकड़ रखा था।उसने पूरी ताकत से उठा कर सिलेंडर का वार एडा के सिर के पीछे कर दिया।ऐन वक्त पर एडा मुडी।जाहिर है जो वार उसके सिर के पीछे होता..वो बायीं कनपटी से थोड़ा आगे सिर पर हुआ।वार करते ही नताशा कई कदम पीछे हट गई।तुरंत ही उसे आश्चर्यचकित होना पडा।।
क्यों कि..
एडा का सिर सिर्फ उतना ही हिला.. जितना एक जोरदार थप्पड़ से किसी का चेहरा घूम जाता है।
"Was it the best you can??"एडा ने उसे और गुस्सा दिलाया।।उसके सिर से खून निकलकर उसके लाल बालों को और भी लाल रंग में रंगने लगा।
इस बार नताशा ने बगल में रखा पहले से बड़ा सिलेंडर उठाया।(मुश्किल से)और एडा के ऊपर फेकने के लिए सिर के ऊपर तक ले गई।इससे पहले की वो एडा पर हमला कर पाती, एडा तेजी से दौड़कर आई और अपने कंधे की भरपूर ठोकर उसके पेट पर जमा दी।वो यही नहीं रुकी,बल्कि नताशा को घुटनों से थामकर उसने कंधे पर उठाया और सामने दीवार पर दे मारा।नताशा दर्द से तड़प उठी।उठना उसके बस में नहीं रहा।।
एडा उसकी हालत देखकर बोली।"बेचारी नताशा।क्या हुआ?मशीन बनते ही इंसानो की ताकत खो दी।कितनी कमजोर हो गई।।हुह?"पलट कर ध्रुव की तरफ देखते हुए बोली।"मैं उसे लेकर जा रही हूँ।अगर तुमने अपनी माँ का दूध पिया हो,तो रोक लेना।लेकिन तब मैं तुम्हारे इस मशीनी शरीर को तोड़ कर रख दूंगी।याद रखना।"वार्निंग देकर वो पलटी ही थी कि नताशा दोबारा उठ खड़ी हुई।उसने फिर से वही सिलेंडर उठाया,जो वो पहले एडा पर फेक कर मारने वाली थी,इस बार भी वो आसानी से नहीं उठा, और एडा पर दे मारा।सिलेंडर एडा के सिर से टकराया।वो आगे बढ़ती हुई एकाएक रुकी।
"लगता है, इसका इंतज़ाम करना ही पड़ेगा।"वो पीछे मुड़ी।
नताशा डर गई।"ये क्या?इसके सिर से खून निकल रहा है,फिर भी इसे दर्द नहीं हो रहा।"वो मन ही मन सोचने लगी।
एडा के सिर से निकलता खून अब उसके लाल बालों के साथ अब उसके लाल कपडों पर बह निकला।
उसने अपने दाँतो से निचला होंठ काटा।(जब भी एडा को गुस्सा आता था,वो अपना निचला होंठ काटने लगती थी)
नताशा आस पास देखने लगी,कोई तो चीज़ हो जो इसे नुकसान पहुचा सके।अब तक एडा तेजी से उसकी तरफ बढ़ी और उसे गले से पकड़ कर पीछे धकेलने लगी।नताशा ने खुद को छुड़ाने की कोशिश जरूर की,लेकिन पकड़ किसी बाज़ के पंजे की तरह थी।नताशा का सिर दिवार से टकराया।एडा ने तेजी से अपना हाथ घुमाया और उसके आधे मशीन बन चुके चेहरे पर एक जोरदार मुक्का दे मारा।नताशा का आधा चेहरा(जो मशीनी था),उसके कई पुर्जे हवा में उड़ने लगे।
"आह्ह"नताशा के मुँह से जोरदार चीख निकली।
एडा ने नताशा के बाल थामे और उसका सिर दिवार पर दे मारा।
"उफ़्फ़"एक घुटी हुई चीख नताशा के मुँह से निकली और वो वही ढेर हो गई।
हम जब बेहोश होते है या नींद में होते है,तब भी किसी न किसी सपने में होते है।देखते है"जार के अंदर बंद ध्रुव के दिमाग में कौन है"
एक बेहद सुंदर बगीचा,चारों ओर बेहद खूबसूरत और रंगबिरंगे फूल खिले हुए है।पेड़ो पर झूले पड़े हुए है और उन पर श्वेत परियां झूल रही है।।एक बेहद खूबसूरत परी जेसी दिखने वाली लड़की बगीचे में दौड़ रही है और उसके पीछे ....."ध्रुव"....था।राजसी कपड़ो में।
आखिर ध्रुव ने उसे पकड़ ही लिया।उसने उसे बाहों में भींच लिया और उसकी आंखों में देखने लगा।लड़की पलटी और ध्रुव से लिपट गई।
"अब तुम्हारे बिना रहा नहीं जाता,आदित्य।"उसकी शहद सी मीठी आवाज उसके कानों में पड़ी।
(आदित्य? हां,इसी नाम से तो पुकारा है उसने अभी ध्रुव को)
"मैं भी अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकता,धरा।"ध्रुव,माफ़ करना,आदित्य बोला।
"तो बात कीजिए न,महाराज से।"उस परी जैसी दिखने वाली लड़की,जिसका नाम धरा है, की आँखों में आंसू की बूंदे चमक उठी।
"करूँगा धरा,करूँगा।वेसे भी अब तुम्हारे बिना जीवित रहना मुश्किल है मेरा।"कहते हुए आदित्य ने धरा को गले लगा लिया।
तभी एक तेज आवाज हुई और ध्रुव जार से बाहर आ गिरा।एडा ने उसे आजाद कर दिया था।
"धरा?"ध्रुव के मुँह से निकला।
(धरा कौन है?और सबसे जरुरी बात की असली ध्रुव कौन है, एक नागराज के पास तो दूसरा एडा के पास।क्योंकि दोनों तो नहीं हो सकते।कोई एक ही हो सकता है राजनगर का।
The real protector
(Part 5)
कहानी जारी रहेगी।।

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