Thursday, 17 March 2016



"साला कुछ भी अच्चा नही आ रहा है टीवी पर।😡😡😡😡😡 आजकल तो क्रिएटिविटी लगता है जैसे ऐसे गायब हो गयी है जैसे की आरसी से superindian(हीही.😀😀..afterall कॉमिक्स📔📔 पढ़ाकू हूँ..तो डायलॉग भी वैसे ही मारूंगा ना).."-गुस्से से रिमोट 🎴को bed पे पटकते हुए अपने निशांत भैया बोले।
  परन्तु हाय रे फूटी किस्मत
माताजी के सीरियल का टाइम हो रहा था।
और वो इधर को ही आ रही थी।
-"निठल्ला कहीं का..सारा दिन पड़े पड़े टीवी 📺📺 देखता रहता है ya fir computer 💻💻chalata rehta hai और यहाँ लम्बी लम्बी हांक रहा है। क्यू पटके रिमोट को..जरा भी खरोंच आई होगी तो..."
 निशांत भैया-(बुदबुदाते हुए😒😒):-"मेरा बस चले तो इस करमजले रिमोट को ही क्या,इस बेहूदे टीवी को भी उठा के पटक दूँ।"
माताजी-"तेरे होंठ ऊपर निचे क्यू हो रहे है..और तूने गाली कहाँ से देनी सीखी.."
निशांत भैया(मन में-फंस गया बे बेटा निशांत 😕😕😕 बुहुहू)-"किसने दी गाली..मैंने तो नहीं दी"
माताजी-"चुप..गधेड़ा।अपनी माँ से झूठ बोलता है।😤😤 अभी तो तूने करमजला बेहूदा और ना जाने क्या क्या कहा। बहुत दिनों से मार नही पड़ी है इसलिए बिगड़ गया है"
निशांत भैया-"अभी सुबह ही तो कायदे से धोयी हो..अभी तक दर्द कर रहा है। हाय हाय.😲😲..और कहती हो कितने दिनों से मार नही पड़ी..ये दादागिरी नही चलेगी(कुछ जादा तो नही हो गया..😜😜)"
माताजी-"बेशरम जुबान लड़ाता है..रुक"
निशांत भैया(थोड़े क्रांतिकारी बनते हुए🙅🙅)-"क्या रुक हाँ..ये क्या बात बात में मारने लगती हो..अब मै कोई बच्चा थोड़े न हूँ..25 साल का बांका...हीहीही...नौजवान हूँ।और अभी भी कपडे की तरह धोती हो।मारती हो सो अलग...और जले पे नमक छिड़कने के लिए बोल देती हो की कितने दिनों से मार नही पड़ी। ये क्या बात हुई।"
माताजी-"वो कभी कभी...हीही..थोडा थोडा भूल जाती हूँ।"
निशांत भैया(कभी कभी??😫😫)-"हाँ तो उसी तरह टीवी में से कोई गाली दिया होगा और तुम मेरा नाम फंसा रही हो।"😭😭
माताजी-"मेरे कान👂👂 में कोई खराबी नहीं है। मुझसे बचने की कोसिस मत करो।"
निशांत-"अरे मोरी मैया...तुम्हे तो पता है मैं कितना शिष्टाचारी लड़का हूँ(मैं और शिष्टाचारी..हीही😋😋)..मई गाली बोलना तो दूर गाली सोचता ही नही हूँ(ये देखो..कितना लम्बा फेंका😝😝)..और तो और कोई गलत काम भी नही करता हूँ(हीही..लगता हे फेंकने की लम्बाई आज चीन की दीवार को पीछे छोर देगी👻👻)।अ..."
माताजी बोली-"तू कहना क्या चाहता है..कि गाली मेरे टीवी सीरियल से आ रही है।"
निशांत भैया(कहना चाह नही रहा हूँ...बल्कि साक्षात् कह रहा हूँ।)
 माताजी-"और इतना बात जान ले। सीरियल में ऐसा कुछ नही होता है। अन्धविश्वासो को ख़तम करती है। झगड़ो का निपटारा हम सीरियल से कर सकते है की कोण दोषी है..किसने काला जादू किया या चुगली की.."
निशांत भैया(झगडे का निपटारा..और सीरियल से..हीही...बेचारी निर्दोष को दोषी और पुजारिन को डायन बना देती होगी तुमलोग)-हाहाहा..अन्धविश्वास से परे..और सीरियल..अरे सीरियल में तो कुछ कुछ ऐसे अंधविश्वास होते है की अच्चा भला आदमी👲👲 भी सठिया जाए।इस सीरियल के कुछ ऐसे अंधविश्वास रूपक है जिसे देख कर हंस हंस कर किडनिया भी दर्द करने लगती है..हिह्हिहिही..जैसे की:-
दूध की गिलास 🍺🍺गिरने का मतलब अपशकुन
दिया बूझने का मतलब लड़की का पति...हीही..मरने वाला है
माता रानी की मूर्ती चमकने का मतलब जरुर चमत्कार होने वाले है
और लड़की के रोड पर अकेले चलने का मतलब की ...हीही..उसका एक्सीडेंट🚘🚘🚘 होने वाला है...
हहहहा(रावण हंसी) कितनी बेवकूफी वाली बात है.."-अपने बालों 👨👨पे हाथ फेरते हुए विजयी मुस्कान के साथ अपने निशांत भैया बोले।
"चुप रे नालायक.बहुत ज्ञानी बनता फिरता है तू..और तूने तीन महीने से बाल क्यों नही कटाया.?"
"वो ये तो स्टाइल है जी...(और इससे बचे पैसो से लडकियों के साथ कम से कम...🙌🙌हीही..अय्यासी कर लेता हूँ )"अपने कंधो से होकर माथे पे बालों में हाथ को ले जाकर निशांत भैया गाना गाये-"आई ना कुछ खबर...मेरे यार की..😙😙.ये हमें है यकीन..बेवफा वो नहीं🎶🎶"
"बहुत बेवफाई चढ़ रही है तुझे..लडकियों के चक्कर में भ्रष्ट हो गया है..आज के आज बाल कटने चाहिए...नहीं बालो को आग लगा दूँगी.🎆🎆.किरासन डाल के...गर्र र्र र्र र्र.."
"नहीं कट्वाऊंगा..मुझे मेरे बाल में परिवर्तन नहीं चाहिए"
"वो तो करना पड़ेगा बेटे"

मौका देख के निशांत भैया ने लम्बा चौरा डायलॉग मार दिया
"बाह्य से परिवर्तन और आतंरिक रूप से शून्य।।।। शून्य और परिवर्तन के इस विचित्र संयोग पे आपको आश्चर्य होगा-शून्य और परिवर्तन काएक सम्बन्ध केसे हो सकता है,स्वभाविक प्रश्न है। परन्तु वही स्तिथि जहा मनुष्य परिवर्तन और शून्य के भेदभाव से ऊपर उठ जाता है,ज्ञान की अंतिम सीमा है। संसार क्या है?शून्य है!और परिवर्तन उस शून्य की चाल है,!परिवर्तन एक कल्पनाहै और कल्पना स्वयं ⭕⭕शून्य है.....ब्ला ब्ला ब्लाह....समझे"
माताजी(हो क्या गया है इस लड़के..ये क्या क्या बोला इसने ..सब सर के ऊपर से चला गया..)-"रूक तू ऐसे नही मानेगा..."
निशांत भैया डर से घर के बहार भागने लगे।
"और सुन..बिना बाल कटवाए मत अइयो..वरना घर में घुसने नही दूँगी.."

निशांत भैया(मुंह बनाते हुए😏😏😏):-हुंह ..घुसने नहीं देगी"

और निशांत भैया ने बाजार का रुख कर लिया।

आते है स्टोरी पे...😊😊
मेरा मतलब रोड पे😛😛
जहाँ निशांत भैया हसीनाओं की गलियों की और जाने की और नैन मटक्का क्रीडा करने की बात सोच सोच के कभी हंस रहे है तो कभी कभी भोजपुरी गाना गा🎤🎤🎤 लेते है।

"हीही....(क्या हीही..हाँ..यहाँ वाट लगी हुई है और हंसी खोज रहे हो..😠😠😠) पता नही ये माताजी क्यूँ बेवजह भौकाल बनाती रहती है हमरा...अब बताइए..इही बालों के जोर पे न लार्कियाँ पटाये है..😀😀मतलब बाले पर न फ़िदा होती है ऊ सब..और माताजी एकरे कटाबे के बोल रही है।ऊ चंपा तो हैयरे स्टाइल देख के बुडबका गयी.कौनो फिल्म के एक्टर समझ बैठी..और ससुरी चीज भी तो टंच थी।हाय हाय क्या कमल जैसे कोमल होंठ 💋💋💋थे। गोद में कितनी सुखी से शाम कटते थे। आये हाय।

 पर पता नही कहा से उस दिन जूं 🐛🐛🐛निकल कर उसके कपड़ो के ऊपर चढ़ गयी।😔😔😖😖 ई ससुरी लड़की लोग खाली हम लडको के सामने ही सुक्खल फुटानी करती है बाकी डरती त ऊ सब जूँ से भी है😤😤। ससुरी ऊ दिन के बाद से जंगली समझ बैठी। करमजली पास भी नही आती। अउर ऊ चिन्टुआ के बेटी पुष्पा।करमजली तो बाल कटवाने भी नहीं देती थी। उस चक्कर में माताजी से 2 महीने तक नॉन स्टॉप मार खानी पड़ी 😣😣😣।एक दिन ससुरा जोश में आके बाल कटवाए तो ससुरी प्यार का रिश्ता ही काट गयी। चल हटाओ। जाने दो %&###&#@++&&*[###((#(#(#&&₹===€√●π÷×{(मैं गाली नहीं बकता। जाके निशांत भैया से पूछो की का का गाली बकले रहे ससुरी को। खाली फ़ोकट दिमाग का भिन्डी मत करो😒😒😒)

एक जायेगी..
तभी तो दूसरी आएगी।
😮😮😮😮😮
येही बात सोच सोच कर निशांत भैया जोश 🙌🙌में चिल्ला पड़ते थे।

"अब बाल कटवाऊं💇💇 की नहीं"
चलो देखते है

रविवार का दिन था। तो सभी सैलॊन्स में भीड़ रहना लाजिमी है।
निशांत भाई बेधरक सैलून में घुसे।

"का रे पिंटुआ,का हाल है बे। बड़ा चहक रहे हो। gf vf पटाये हो का"-अन्दर घुसते ही निशांत भैया दहाड़ मार के बोले। सब भले प्रतिष्ठित लोग विश्मयता पूर्वक उनकी ओर ताकने लगे।

"आओ भैया..बड़े दिनों बाद आये"
"हां बे पिंटू..बात जे है से की आज थोड़ी बाल बनवानी💇💇💇 है..त इधर की और कूद पड़े"
"तनिक बैठो भैया। आओ बात कर लो थोडा सा। फिर न जाने कब मिलो"

तभी और लोग👦👧👨👩👴 चिल्लाने लगे-"अरे जल्दी से काटो। अभी हमारा नंबर है"
"चुपचाप 😶😶😶बैठो..अरे निशांत भाई खास आदमी है हमार। अरे मिनटुआ..बाल काट त तब तक ई लोग के"

निशांत भैया मुस्कुरा☺☺ रहे थे।
"त और सब बताओ भैया।का लोगे"
"का लोगे मतलब..कौन सा संपत्ति लिखने वाले हो हमरा नाम बे"
"ऊ नाही भैया। हमरा मतलब का लोगे ठंडा 🍸🍸या गरम 🍺🍺"
"अब तू तो जानते हो की हम तो 'होटनेस' के पुजारी है। समज रहे हो न बे। अउर ठंडा गरम छोड़ और खैनी गुटखा 🚬🚬🚬हो तो मंगाओ"
"रे साम..जरा गुटखा लाओ त बे"
"और खैनी तोहर बाप मंगाई का
"ऊ हमरा पास है भैया। हम लेटा के देते है खैनी"
"ई हुई न...हीही ..मर्दों वाली बात"
"और सब बताओ भैया। भाबी जी केसी है..नाम का है..कब मिलवाओगे(हिहीही...लाइन जो मारना है उनको)
"हमरा छोड़ तू बता"
"ऊ का है भैया,आजकल कुछ जादा जवानी चढ़ रही है"
"का बात है बेटे..i like this spirit..ससुरी कोण है?"
"दू दू ठो है भैया.एक ससुरी चंपा..और एक ठो कौनो चिंटुआ के बेटी पुष्पा..ससुरी दोनों गज्जब टंच माल है। दुन्नो के होंठ ससुरी..का बताये.खैनी से भी ज्यादा नशा और चूना से भी ज्यादा कोमल..(👉👉👉देखो भाइयो..निशांत भाई के कैसे कैसे ख़ास आदमी है)..दारू से भी ज्यादा मादकता है भाई"

निशांत भैया आगबबूला🔥🔥🔥 हो रहे थे...अबे मन में हो रहे थे बे...
"अउर ई सब आपकी वजह से हुआ भैया"
"हमरी वजह से...?????"
"हाँ भैया..ऊ हम आपका हेयर स्टाइल 👵👵👵का अपना लिए ससुरी लड़की सब फ़िदा हो रही हो। अपनी तो चांदी ही चांदी भाई.!!"
(कमीना..😠😠😠चिरांद.😬😬😬.हमरे फार्मूला से हमरे माल पे हाथ साफ़ कर रहे हो...देख लेंगे तुमका..बड़ा आया)
हाँ ऊ सब त ठीक है अब तनिक बाल तो बना दो💇💇💇💇

"ठीक है भैया..ई लो खैनी...ला रे शाम जरा गुटखा..बड़ी देर लगा दी..."

निशांत भैया खैनी होंठ तले दबा कर गुटखा चबाते हुए कुर्सी पे बैठ गए।

"बाल तो सच में बड़े हो गए भाई...ऐसा लग रहा है किसी लड़की की याद में सब कुच्छ भुला गए"

"(गुटखा खाते हुए) ऊ का है न की.."
निशांत भैया जैसे थूक 😙😙फेंकने के लिए नजर घुमाए,कि उनकी नजर बाहर जाती एक खूबसूरत कन्या 👩👩👩पर पड़ गयी। लड़की 👱👱भी रूककर🚺🚺 देखने लगी की ये लफंगा क्यू घूर रहा है मुझे(वैसे आपलोगों को कारण मुझे नही लगता की बताना पड़ेगा..बाकी आपको खुद पता है।। 😅😅😅हीही)

"रुक बे पिंटू। अभी कैंची मत भिड़ा"
का हुआ भैया
"अबे ऊ देख। ऊ रही तोहार 👸👸भौजी। देख कैसे मुझे देख रही है"
"ऊ हम जानत है भैया। ऊ रिन्किया खाली फ़ालतू चीज में इंटरेस्ट लेती है,,,हीहीही"

"मतलब का है तुमरा बे ₹%&₹@#%*+-!!#₹%%%₹...चुहार साला...हम तुमका फ़ालतू लगते है का"
"(और नही तो का)गलती हो गयी हमसे..chorry...हीहीही"

"हम्म ठीक है...ससुरी का नाम रिंकी है"
"हाँ जहाँपनाह...दासी का नाम अनारकली...मेरा मतलब रिकी है"

निशांत भैया को दिल्ली🏩🏩 सिंघासन पर आसीन, अनारकली का नृत्य देख रहे जहांगीर वाली अनुभूति होने लगी..हीहीही..

"रुक..पाहिले हम ओकरा पटा के आते हैं"
...

निशांत भैया फिरंट होने लगे...हमरा मतलब निकल लिए...🏃🏃🏃🏃

रिंकी आगे आगे..निशांत भैया पीछे पीछे...
और पीछे से निशांत भैया कभी कभी कमेंट और कभी कभी गाना मारने लगे...

"सारी दुनिया मेरे पीछे
लेकिन मै तेरे पीछे"🏃🏃
"हाय हाय(भोजपुरी फिल्म के गुंडों की तरह होंठो पर ऊँगली फिराते हुए)-का जवानी है बे..ससुरा नस नस में इश्क का वायरस काटने लगा है..उफ्फ्फ..लचकती कमर बलखाती जावानी...आँखों से कैसे मिटे..तेरे जिस्म की निशानी,,,(गुटखा थूककर)..देखो तो जरा कैसे हमरा दिल में आग लगाकर मटक मटक कर चल रही है..एक बार पलट तो जरा जालिम.."

रिन्किया न पलटी

"रुक जाना ओ जाना हमसे दो बातें..करके चली जाना..की मौसम है..diiiii..waaaaaaaa...naaaaaaaaaa"

लड़की भले न पलट रही हो..पर मजे तो वो भी लूट रही थी

और निशांत भैया की हालत एक बेवरे जैसी थी(मेरा मतलब इश्क का सुरापान किये हुए)
अपनी छिछोरपना और चिरान्द्पंती के प्रभाव में वो कुछ से कुछ बोले जा रहे थे...
"एक बार नजर घुमा ले जालिम,ऐ जान-ए-तमन्ना,
दीदार तेरी सूरत का करना है...
सूने पड़े दिल में तेरे
इश्क अपने नाम का भरना है ....हीहीही..."🌹🌹🌹

लड़की अपना चेहरा घुमाई पर तुरंत फेर भी ली।

और निशांत भैया के मुंह से लार की फुहार निकलने लगी।
"आये हाय...
तुझे देखकर जग वाले पर यकीं नहीं क्यूकर होगा...
जिसकी रचना इतनी सुन्दर..वो कितना सुन्दर होगा...
   का रंगत है ससुरा...चाल ढाल...दिल का गजब आलम हुआ जा रहा है..एक बार फिर पलट ससुरी..."

रिंकी को ससुरी वर्ड थोडा बुरा लगा...वो नही पलटी..
"दीवानों को न ऐसे जला..यूँ न दिलों पर छुरियां 🔪🔪🔪🔪चला.."

लड़की-घुयियाँ पलटेंगे...😒😒😒

"क्या रंग रूप है क्या चाल ढाल है..
.....
नया नया बाल है नया नया माल है(हीही)"

और इस्सी तरह न जाने क्या क्या बकते रहे भैया पूरे रास्ते!!

कुछ दूर और चलने के बाद लड़की निशांत भैया की तरफ पलट कर मुस्कुरा कर दुल्हन ब्यूटी पार्लर 🏩🏩के अन्दर चले गयी।

निशांत भैया बाहर इन्तेजार करने लगे...

सब आजहीं पढ़ लोगे का.

...तनिक इन्तेजार करो...अगला पार्ट जल्द देंगे...तब तक निशांत भैया को ब्यूटी पार्लर के सामने लार टपकाते हुए जरा इन्तेजार का मजा लेने दीजिये...

निशांत भैया अभी तक इन्तेजार में खड़े थे...1 घंटे से..

"साला आज तो ससुरी को लेकर ही जाना है" और न जाने क्या क्या सोच रहे थे वो.

तभी सामने से हलकट दोस्त चप्पू आता दिखाई दिया।

आते ही निशांत भैया को एक चमाट रशीद करते हुए बोला-"क्या बे छिछोरे..यहां का सूंघ रहा है बे"
"अरे यार चप्पू...का हाल है बे चिरकुट..आज तीन महीने बाद मिले हो तुम...कहाँ थे इतने दिन"

"(अब इसे क्या बताऊ..कितनी मार पड़ी है)-कुच्छो नै बे..दरअसल आजकल हम बिजी थे थोड़ा"

"(ससुरा हमें ही खेल रहे हो)- ससुरा हमरी मुर्गी खा के हड्डी हमहीं पे फेंक रहे हो...हम तो सुने की तुमका खर्चा पानी नसीब हुआ था"
इतना कहकर सामने से जा रही लड़की को देख निशांत भैया सीटी मार के गाना गाने लगे
"का हो जवानिया आचार डालबू..आचार..."
लड़की मुंह बिचकाकर चली गयी।
"देख भाया..तेरे मेरे बीच की बात है..किसीको बतइयो ना.."
"देखो ताऊ बात जे है से कि हम तो बात अच्छी तरह से पचा जाते है..याद है तुमका..उस दिन जो ससुरा गांजे के नशे में बिल्ली के शंदास को हलवा समझ के खा गए थे,ई बात हम केकरो न बताये है"
"तू ही तो chaddiya यार है अपना..हीही"

तभी सामने से दूसरी लड़की जा रही थी।
निशांत भैया सीटी मार के बोले:-ससुरा का इठलाती जवानी है यार..
            ....हमरे राजा जी दिन में न बोली की रातिये में...""
ये लड़की भी भाग गयी।

"उस दिन तुमरी भाभी बोली की रात में हमरे यहाँ आके हमरे बाप से हाथ मांग लेना.ससुरा रात में गए रहे हम..ऊका मैया ससुरी बाहर में ही थी..उसी को अपनी वाली समझ बैठे..ससुरी अमावस्या का फायदा उठा के ऊ भी हमरे साथ जोड़ घटाव खेले लगी। तभी नामुराद हमरा होने वाला ससुर आ गया। खूब मारा बे..कुत्तों की तरह घसीटा है बे..चार आदमियों ने एक एक हाथ पैर पकड़ के पीछे में खूब धोया है..ऊके बाद सालों ने दो बोतल खून भी निकल लिया..आज ही हस्पताल से बाहर है..जहाँ मिली चुड़ैल,खून पी जायेंगे उसका"

तभी एक और लड़की को देख के निशांत भैया गंदे गंदे वर्ड्स बोलते हुए बोले"हे राजा जी..बाजा बाजी की न बाजी..."
लड़की आँखे तरेरते हुए सामने आई। घूर कर निशांत भैया को देखि और तीन चार चमाट जर के चल दी।
(दिल के टुकड़े,टुकड़े करके हवा में उड़ा के चल दिए...ब हुहुहू)
निशांत भैया गोल गोल घुमते हुए गिर पड़े।

निशांत(झूठा गुस्सा दिखाते हुए)-"ससुरा पहले बताये के था न..तुम भी ससुरा एक नंबर के नल्ले हो...काट के रख देते पूरा खानदान को(वो बात और है की हमसे तो भिन्डी भी नही कटती)...खून की नदिया बहा देते..(साला हम तो लाल रंग देख के भी गीले हो जाते है)..और ससुरा तुम हमी से छुपा गए।" इतना बोलते ही निशांत भैया ने सामने खड़ी कार के ड्राईवर सीट वाले शीशे पे एक मुक्का मारा!पर ससुरा शीशा तो डाउन था।
कार एक मोटी औरत ड्राइव कर रही थी।
180km/hr वाला मुक्का सीधा उनके चेहरे पर लगा।

प्लाट पर ही नाक से खून निकलने लगा। एक दांत भी टूट गया(क्यू की उसमे कीड़े लगे हुए थे)

निशांत भैया डर से थर थर काँप रहे थे।
"(ससुरा आज तक मच्छर भी नही मरा है हमसे और आज साला...ई का हुई गवा..बुहुहुहू....हे नीचे वाले !रक्षा करना..)

कार वाली मोटी बाहर निकली और पागल की तरह चीखने लगी.

निशांत भैया की हालत बाद से बदतर हुई जा रही थी।

"मुझे माफ़ कीजियेगा..auntyji"

मोटी-"एक तो मारता है और ऊपर से आंटी जी बोलता है"
"सॉरी सॉरी बेहनजी"
"अबे बहनजी होगी तेरी करमजली औरत...अब देख मई तेरा क्या हाल करती हूँ"
"मुझे माफ़ कर दो.."
"जहां सुन्दर लड़की देखि की छेड़ना चालू"

इतना कहकर उसने एक थप्पड़ निशांत भैया को मारा।
फिर एक मुक्का माथे के बींचोबीच
तीसरा वार उसने निशांत भैया के कंधो पे किया..167km/hr वाले कराटे से। पर उसको कराटे आता नही था।
वो अब अपनी sandle खोलने ही वाली थी की तभी शोर शराबा सुनकर बाकी लोग भी आ जमा हो गए।

"क्या हुआ मैडम"
"इस लड़के ने मेरे साथ बदतमीजी की है"
"कौन है ये लड़का..शकल से थोडा थोडा शरीफ लग रहा है।"
"अरे आजकल शकल सूरत पे न जाओ..लुच्चा कोई भी हो सकता है"
"मैं पहचानता हूँ इस लड़के को। भोजपुरी फिल्म का भक्त है और आये दिन लडकियों को छेड़ता है। जब तक दिन में पांच लडकियों की sandle का स्वाद न ले,तब तक इसका दिन नही बनता।"
एक सज्जन ने आवाज दी-"आपको कैसे मालूम?"
""ये भोजपुरी फिल्में भराने मेरे ही दूकान आता है। तीन लड़कियों से वहीँ मार खा जाता है"
"तो आज हम सब से लात जूते खायेगा"

सारे के सारे बिन बादल के बरस पड़े।मिल के निशांत भैया की चटनी बना दी।
कुछ देर बाद दो मुस्टंडे आये।
"डाल दो इसको गाडी में bodyguards"
"ओके मैडम"

चप्पू मौका देख के भाग रहा था। एक सज्जन की नजर पड़ी ।

"तू कहाँ भागता है बे चिल्कुट"

औरउसको भी कूट दिया गया। फिर उसको भी कार में डाल दिया गया।आगे की सीट पर चप्पू और दोनों ड्राईवर थे। पीछे की सीट पर मोटी ने नैनमटक्का खेलने के लिए निशांत भैया को रख लिया।

"देख रे..तू है बहुत कमीना..लेकिन बड़ा चिकना है.."
"मुझे माफ़ कर दो.."
"माफ़ी तभी मिलेगी जब तू मेरे साथ शादी करेगा..हीहीही"
"देखिये बहनजी..मुझे आपसे शादी वादी नहीं करनी"
कैसे न करोगे मोरे राजा...तू मेरा जानू है..हिहिहिही"
"मैं कोई जानू वानु नही हूँ..मुझे छोड़ दो ..जाने दो"
"कैसे छोड़ दें..तू ही तो जन्नत मेरी .तू ही ..."

चप्पू मिरर में देख देख कर मजे ले रहा था। उसको निशांत की दुर्गति देखने में मजा आ रहा था।
(साले तेरे ही कारण मैं फंसा हूँ..अब भुगतो)

"सुना है तुम भोजपुरी के फेन हो. एक दो चिपकाओ तो "
"छोड़ दो"
"चुपचाप गाना गाओ..वरना पिटवा दूँगी।
"हाय रे होंठलाली...हाय रे कजरा...जान मारे तोहर.."
"वाह क्या सुरीली आवाज है तेरी..चल अब दूसरा गा"

(बुहुहुहू..का का करवा रही है ससुरी .)
"तू लगावे लू जब लिपस्टिक.. हिलेलू सारा डिस्ट्रिक्ट..."
(सभी मित्रों से अनुरोध है की निशांत भैया के लिए ताली मारे"

"वाह वाह...मेरी होंठो पे मर मिटा है तू ..अब थोड़ा उस टाइप का गा"
"किस टाइप का .."
"बोला न उस टाइप का.."

"सुनअ ऐ राजाजी सुहाग वाली रतिया...(हिहिहिही)
चल जाई बिजली बिगड़ जाई बतिया..ओहो"

"वाह वाह..चिकने..बड़ी जल्दी है तुझे...बोल...गाडी मुरवाऊ क्या सुनसान घाटी की तरफ"

"नहीं नहीं...मुझे जाने दो.."

"ऐसे कैसे जाने दे..पहले मेरे होंठो के रसीले जाम ले ले"
आजा आजा..मूँ..

लड़की निशांत भैया को जोर से पकड़कर अपना होंठ उसके तरफ बढाने लगी।
तभी नाक से खून की बूँद निशांत भैया के मुंह में गिरी।

"आक्थू..थु थु थु.."
थूक लड़की के चेहरे पे पड़ी..वो तिलमिला उठी..

"कुत्ते..एक तो तुझे इतना भाव दे रही हूँ और तू नखरे बतिया रहा है..चल तू आज"

लड़की का घर आ गया।

"घसीट कर ले चलो दोनों को"

दोनों को अन्दर लाया गया।
मोटी ने निशांत भैया की खूब बुराइ की।
बाप-"हम्म...तो तूने आज मेरी बेटी को छेड़ा..."
"नहीं नहीं..मैंने आपकी मोटी ..मेरा मतलब बेटी को नहीं छेड़ा"
बाप(चप्पू से)-और तू तो वही छिछोड़ा है जो मेरी पत्नी से रात में होतोतो खेलने आया था। कमीनों शकल से ही चिरांद लग रहे हो। रे रामू..ला तो वो बाघ की चमरी वाला कोड़ा.."

कोड़ा लाया गया।
सबने मिलकर दोनों की सूताई की।
मोटी को निशांत भैया के लिए दुःख हो रहा था। वो उनको खींच कर बहार लाइ।
"भाग जाओ..और हाँ...छिछोर गली में मेरा इन्तेजार करना"

"चुप नकचढ़ी..करम जली...चलने लायक नही छोड़ा..."
इतना बोल के वो निकल लिए।
पर बेचारे चप्पू की पूर्ववत धुलाइ हुई।
निदान ये की वो आज सुबह हॉस्पिटल से बाहर आया। और रात में फिर भेज दिया गया।

और निशांत भैया..??

वो बेचारे मटक मटक कर चल रहे थे।
"कमीनो ने चलने लायक नहीं छोड़ा। सालो..आग लगे तुम्हारे खानदान को...तुमलोगो के टांगो में कोच्क्रोच काटे...सुबुक सुबुक "

पेट भर गाली देने बाद...वो घर की ओर रवाना हुए।

रस्ते में कुल्टा प्यासी शराब दूकान पड़ती थी। भैया ने जाकर दो देशी ढरकाई और बिना घर चल दिए। और गिरते पड़ते घर पहुंचे।

घर पर

"हाय राम..हाय राम ...ये क्या हुआ तुझे..??"
निशांत भैया-"हिच्च.कुच्च..हम तो मोहब्बत करेगा
दुनिया से..हिच्च..नही डरेगा.
चाहे ये जमाना कहे हमको..हिच्च..दीवाना..
हम तो.."

"रूक तेरी सारी मोहब्बत को आग लगाती हूँ..अरे ओ..जरा ला तो झाड़ू और डंडे..और दो बाल्टी पानी भी लेते आ..."


उसके बाद निशांत भैया की क्या दशा हुई..कह नही सकता..आँखे भर आती है..आप उन्ही से पूछ लो...हिहिःइहिहि....


.......................समाप्त.............................
अबे ओ..अभी कहाँ समाप्त...अभी तो सटकी ठाकुर का नंबर लगा हुआ है....."

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