Sunday, 3 January 2016

कहानी – साजिश
समय – रात के 8
स्थान – सिविल लाइन पुलिस स्टेशन
ठाने में सन्नाटा था थाने में पसरे सन्नाटे को तोड़ा एक फ़ोन कॉल ने ... शुरुवात में फ़ोन बजता रहा पर कांस्टेबल ने फ़ोन उठाने की जहमत नहीं उठाई .. दुबारा कॉल आया .. ये कॉल भी कटने ही वाली थी की बड़े अनमने मन से कांस्टेबल ने फ़ोन उठाया
(उधर से आई जी का फ़ोन था आई.जी. ने न जाने क्या बात कही की कांस्टेबल एकदम से चीख पड़ा – क्या सर ऐसा नहीं हो सकता है ..)
कांस्टेबल ने वो सूचना जल्द से जल्द अपने सीनियर को पहुचाया ... थोड़ी ही देर में कई पुलिस की गाड़ियाँ डी.आई.जी. के घर के सामने आ कर रुकी जहा पर अभी आधे घंटे पहले ही एक मर्डर हुआ है .. डी.आई.जी. की पत्नी का .. मामले को देखते हुए  कई थाने से पुलिस फोर्स मंगवा ली गई , फॉरेंसिक टीम भी जांच के लिए पहुँच गई ... जांच के लिए कई जगह से नमूने उठाये गए .. मामला मीडिया से छुपाया जा रहा था की उन्हें भनक न लगे
समय – 9 बजे
स्थान – डी.आई.जी का घर
इधर डी.आई.जी. के घर के अन्दर मंत्रणा चल रही थी .. आई.जी. , कई थाने के इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर मौजूद थे और सब कम से कम एक बात पर तो सहमत थे की अगली बारी डी.आई.जी साहब की है ..
जहा सभी अपनी - अपनी बात रख रहे थे
जैसे इन्स. अजय का कहना था की कातिल को पकड़ना बहुत ही मुश्किल है और इस वारदात से ऐसा लगता है की सर के बेटे लकी का कातिल भी यही है और फॉरेंसिक जांच से कोई मदद मिलने की उम्मीद नहीं है
वही डी.आई.जी विक्रम का कहना था की .. कातिल हर हाल में जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए ....
तभी इन्स. गोखले का सुझाव आया की हम सी.बी.आई. या सी.आई.डी. की मदद ले सकते है इस सन्दर्भ में , बीच में इन्स. करण ने स्पष्ट किया “सर सी.बी.आई. को बता दिया है वो जांच में सहयोग करेंगे”
अचानक आई.जी. खन्ना का गुप्त पुलिस अधिकारी को केस देने का सुझाव आया जिस पर विक्रम ने सहमती जाता दी
आई.जी. खन्ना ने प्रताप का नाम सुझाया , खन्ना के मुताबिक प्रताप ही सबसे काबिल खुफिया पुलिस वाला है जो ये काम कर सकता है
डी.आई.जी. विक्रम ने खन्ना से कहा की प्रताप को इस केस पर काम करने के लिए किसी भी सूरते हाल में मनाये और इस केस को जल्द से जल्द ख़तम करे \
खन्ना ने इस बात से मना कर दिया की प्रताप को वो केस में ले सकते है क्योकि प्रताप अपनी बीवी के मर्डर केस के सिलसिले में पुलिस कस्टडी में है \
फिर भी डी.आई.जी. विक्रम ने प्रताप को लाने को कहा
(इसी के साथ मीटिंग स्थगित कर दी गई ... अब डी.आई.जी. की जान प्रताप के ऊपर है)
समय – रात के 10
स्थान – चौक पुलिस स्टेशन
आई.जी. खन्ना अपनी गाड़ी से निचे उतरे और थाने के अन्दर गए वहा के इन्स. शर्मा को बेल के कागजात सौप कर प्रताप को बाहर निकालने को कहा पर प्रताप ने बाहर आने से मना कर दिया
तब खन्ना प्रताप;से मिलने उसके सेल में गए
खन्ना – कैसे हो प्रताप ?
प्रताप – मुझे क्या हुआ है ... आप किस काम से आये है ?
खन्ना – हा ... डी.आई.जी. विक्रम के बेटे का 2 हफ्ते पहले किसी ने क़त्ल कर दिया .. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कुछ नही निकला की मौत की वजह क्या है ... हालाँकि दिल की धड़कन रेट बढ़ी हुई थी पर हा आज करीब साढ़े 7 के आस – पास उनकी बीवी को भी मार दिया ... अब अगली बारी उनकी है
प्रताप – आप के पास सी.आई.डी. है , सी.बी.आई है ... उनसे मदद लीजिये
खन्ना – वो मदद कर रहे है पर हमें अंडरग्राउंड एजेंट की जरुरत है तुम्हारी तरह जो इस केस को जल्द से जल्द ख़त्म कर दे \ मै तुम्हारे लिए घटनास्थल की फोटो लाया हु शायद इससे कुछ हेल्प कर सको हमारी
(खन्ना ने फोटोज प्रताप के आगे बढ़ा दी ... प्रताप ने अनमने ढंग से फोटोज को पकड़ा और उन्हें उपरी तौर पर देखने लगा ... वो फोटोज वापस करने ही वाला था की अचानक एक फोटो पर उसकी नजर अटक गई )
प्रताप ने एक फोटो के बारे में पूछा ... खन्ना ने बताया की वो रबर है
जिस पर प्रताप का दिमाग चकरा गया उसे कुछ गड़बड़ लगी और उसने खन्ना से पुरी घटना बिना कुछ भी छोड़े बताने को कहा
खन्ना ने उस रात की कहानी शुरू की जब डी.आई.जी. विक्रम के बेटे की हत्या हुई थी वही प्रताप ने आँख बंद कर लिया और और विवरण का दिमाग में चित्र बनाने लगा
खन्ना – रोज की तरह लकी 4 दोस्तों के साथ पार्टी करने अपने फार्म हाउस गया ... रात भर पार्टी चलती रही करीब 1 बजे लकी सोने गया और सुबह करीब 6 बजे उसकी दोस्त रुपाली ने देखा तो वो मर चूका था .. हमने लकी के दोस्तों से सख्ती से पूछ लिया है वो इस बारे में कुछ नही जानते
प्रताप – कातिल कोई दोस्त नही हो सकता है क्योकि कातिल खिड़की पर बने लोहे की जाली से होके आया है .. खिड़की की जाली पुरानी ज़माने की है मतलब सिर्फ ऊपर से निचे आते हुए 5-6 लोहे की रॉड है जिनके बिच 4 ऊँगली का गैप है
कातिल ने पहले रॉड पर सोडियम लगाया और पुरे रॉड पर फैक्ट्री मेड कच्चा रबर लगाया .. कच्चा रबर आग से क्रिया करके तेज़ी से फैलता है .. और सोडियम हवा के संपर्क में आते ही आग पकड़ लेता है ,,, रबर के ठन्डे होने का इन्तेजार किया फिर उसे हाथो से फैला कर अन्दर दाखिल हुआ ... इसके बाद उस कातिल ने लकी पर एक खास केमिकल पाइजन “सोडियम एल्केन” के पाउडर का इस्तेमाल किया .. जिससे दिल की धड़कन असामान्य तौर पर बढ़ गई .. और ये 25 मिन. में शरीर से गायब हो जाता है पर एक निशानी छोड़ जाता है कान के पीछे छोटे – छोटे दाने जैसा की इस फोटो में नजर आ रहा है ... इसके बाद जैसे कातिल आया था वैसे ही निकल गया बिना कोई सबूत छोड़े ...रॉड को सीधा करके .. पर रॉड थोडा सा टेढ़ा हो गया अब वाइफ के बारे में बताओ \
खन्ना – वाइफ निर्मला का आज जन्मदिन था और सिर्फ वे दोनों ही सेलिब्रेट कर रहे थे केक बैलून और हीरो के हार के अलावा कोई और चीज नहीं थी अभी प्रोग्राम चल ही रहा था की विक्रम को किसी का फ़ोन आया और वो बाहर आ गया अचानक निर्मला पागलो की तरह हसने लगी और थोड़े ही देर में उसकी दिल की धड़कन रुक गई \
प्रताप – ये तो सिंपल है गुब्बारे में लॉफिंग गैस भरी हुई थी जैसे – जैसे गैस निकलने लगी वैसे – वैसे हसी बढती गई और अंत में मौत का कारण बन गई
खन्ना – कमाल है ऐसा भी हो सकता है क्या ?
प्रताप – हा ... मुझे अब डी.आई.जी के दिनचर्या के बारे में बताओ
खन्ना – विक्रम सुबह 6 बजे उठ जाता है जॉगिंग करता है फिर योग .. फिर नाश्ता .. फिर नहा धो के 10 बजे तक अपनी ड्यूटी पर पहुँच जाते है उसके बाद शाम को 10 बजे वो ड्यूटी छोड़ते है और घर पहुँचते है 11 बजे .. हा पिछले 4 हफ्तों से हर हफ्ते में एक बार उनका फॅमिली डॉक्टर शनि उनके घर आता है उनके डायबिटीज की जांच करने इसके अलावा कुछ नहीं है \
प्रताप – हम्म ये डॉक्टर ... मुझे डॉक्टर पर ही शक है ... डॉक्टर को पकड़ो यही कातिल है .... एक डॉक्टर ही ऐसी मेडिसिन और लॉफिंग गैस का यूज़ कर सकता है और ... हो न हो वो विक्रम को कोई ऐसी दवाई दे रहा हो जो धीमा जहर हो ... पता करो
आई.जी. खन्ना तुरंत ही लॉकअप से निकल गए और उसी रात में डी.आई.जी से मिले, खन्ना ने सारी बाते डी.आई.जी. विक्रम को बताई तो उन्होंने अपने कमरे में छुपे हुए कैमरे लगवा लिए अगली सुबह करीब 10 बजे डॉक्टर शनि पहुंचा और डायबिटीज की जांच करने लगा और फिर एक इंजेक्शन लगाया
कैमरे से दुसरे कमरे में आई.जी. नजर रख रहे थे .. उनकी नजर में दवाई का नाम आ गया (बोरिक एसिड) .. खन्ना के साथ दुसरे डॉक्टर ने बताया की ये एक धीमा जहर है जिससे 30 से 35 दिन में कभी भी मौत हो सकती है
इतना सुनते ही खन्ना ने डॉक्टर को पकड़ लेने को कहा  .. 8-10 पुलिस वालो ने डॉक्टर को घेर कर पकड़ लिया .. फिर जब सख्ती से पेश आये तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया
...डॉक्टर ... विक्रम को तब से मारना चाहता था जब विक्रम की गोली से एनकाउंटर में एक आम लड़का मारा गया ये डॉक्टर उसका पिता था उसने कई बार रिपोर्ट लिखने की कोशिश की पर किसी ने लिखी नहीं .. इसलिए डॉक्टर को मजबूरन वश ऐसा करना पड़ा
डी.आई.जी. विक्रम ने डॉक्टर शनि से माफ़ी मांगी .. और उसे जेल भेज दिया ... और खन्ना से प्रताप को बाहर निकालने को कहा पर खन्ना ने ये कह कर मना कर दिया की “प्रताप बाहर नहीं आना चाहता है\”
समाप्त

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