Wednesday, 30 December 2015

कहानी – शैतान का अंत
हमारे प्रदेश व् देश में आज भी लोगो में अन्धविश्वास कूट – कूट कर भरा हुआ है अन्धविश्वास के चलते आम-जन सही-गलत में फैसला नहीं कर पाते है और कानून हाथ में ले लेते है हमें अफ़सोस के साथ कहना पड रहा है की हमारे अपने शहर गाज़ियाबाद में भीं अन्धविश्वास चरम पर है
इसीलिए आज हम यहा इंस्पेक्टर नितिन का सम्मान करने आये है जो रहते तो राजस्थान में है पर उनकी ड्यूटी उत्तर प्रदेश में है आज से वो डी.सी.पी. के पद पर इस थाने में पद-भार संभालेंगे और अन्धविश्वास को रोकने में महत्वपूर्ण कार्य करेंगे ।
हम नितिन जी को बहुत – बहुत शुभकामनाये देते है और हम चाहते है की वो स्टेज पर आये
इन्स. नितिन मंच के सामने लगे कुर्सी पर बैठे थे अपने नाम की उद्घोसना सुनकर वो मुस्कुराते हुए उठे और मंच पर भाषण दे रहे तत्कालीन लोकल मिनिस्टर शेषाद्री यादव से माला पहनते है
मंत्री जी के माला पहनाते ही पूरा ग्राउंड तालियों की आवाज़ से गुंजायमान हो गया
मंत्री जी ने माइक नितिन को दिया कुछ बोलने के लिए दिया पर नितिन जी सिर्फ एक शब्द बोलकर मंच से निचे उतर गए “जय हिन्द” ।
मंत्री जी माहौल को सँभालते हुए बोले – देखिये कितना जिम्मेदार पुलिस वाला है इनके पास मंच पर बोलने का भी समय नहीं है
मंत्री जी के कान में धीरे – से उनके सेवक ने कुछ बोला और मंत्री जी माइक पर बोल उठे – अच्छा अब हम चलते है आप सब लोग प्रसाद लेके जाना और इस बार के चुनाव में मुझे ध्यान रखना
इतना कहकर मंत्री जी अपने जय-जयकार के उद्घोष को सुनते हुए और हाथ हिलाकर हस्ते हुए मंच से निचे उतर गए और कार में बैठ कर वो और उनका काफिला चलते बने
अभी मंत्री जी की गाडी कुछ ही दूर गई होगी की उनका फ़ोन बजा उधर से बोलने वाला मंत्री जी का खास आदमी था
मंत्री जी – काम हुआ या नहीं खेलावन
खेलावन – हुजुर काम तो हो गया है पर कही वो नया डी.एस.पी. कोई पंगा न करे
मंत्री जी – उसकी चिंता तुम मत करो खेलावन सिंह , वो डी.एस.पी कुछ नहीं कर पायेगा , बस बिना उसकी नजर में आये अपना काम जल्दी ख़तम करो समझे न ।
खेलावन – हा मंत्री जी हम समझ गए आपका काम हो जायेगा
शेषाद्री यादव गाजियाबाद का लोकल मिनिस्टर है वो सपा का मिनिस्टर रह चूका है गाजियाबाद का छोटा सा इलाका है – शेषाद्री गंज (पहले इस जगह का नाम प्रभात गंज था पर शेषाद्री के मंत्री बनने के बाद इस जगह का नाम बदल कर शेषाद्री गंज कर दिया गया )
अपने प्रभुत्व के चलते दो डी.एस.पी को लापता करवा चूका है और तीन का ट्रान्सफर, ऊँची पहुच के चलते कोई इसे छु भी नहीं सकता है हर गलत काम में शेषाद्री लिप्त है पर इस सफाई के साथ किसी को कानो-कान भनक न लगे और जिसे भनक लग जाती है उसे मार दिया जाता है
पर इस बार नया डी.एस.पी. आया है जो पहले वालो से ज्यादा तेज़-तर्रार और खतरनाक है जिसे सेंट्रल सरकार ने खुद भेजा है
परन्तु शेषाद्री कभी न रुकने वाला तूफ़ान है , बच्चों की किडनैपिंग उसका मुख्य मकसद है वो नहीं चाहता की नए डी.एस.पी. के नजरो में अभी से कुछ ऐसा आ जाये जो उसके लिए मुसीबत बन जाए 
खेलावन को यही काम दिया गया है  - सफाई से बच्चो की किडनैपिंग करना
शेषाद्री गंज के में एक घर के पास एक गाडी आ कर रुकी उसमे से 2-4 आदमी निकले और अलग – अलग दिशाओ में बंट गए शायद शिकार की तलाश में
थोड़ी ही दूर पर एक बन्दे को छोटा सा बच्चा दिख गया और उस बच्चे को बहला–फुसलाकर अपने साथ ले लिया , बाकी साथियो को भी सफलता मिली सभी के हाथ बच्चे लगे और वे लोग बच्चे ले कर वैन में बैठ कर गायब हो गए
सुबह हर तरफ इस खबर ने आग लगा दी की घर से बच्चे किडनैप हो गए सभी ने थाने जा कर रपट लिखानी चाही पर थानेदार ने भगा दिया , किसी ने सलाह दी की डी.एस.पी. से बताया जाये
सभी डी.एस.पी. के ऑफिस में गए , अपनी बात रखी डी.एस.पी. नितिन ने सबको आश्वासन दिया की आपके बच्चे जल्द ही मिल जायेंगे
नितिन ने थाने में फ़ोन किया और रिपोर्ट लिखने को कहा – और सभी से थाने चलने को कहा
थाने पहुच कर डी.एस.पी. नितिन ने सभी पुलिस वालो की वाट लगा दी
और इस केस तक खुद पहुचने का निर्णय लिया और साबुत जुटाने में लग गए , किसी ने ये खबर शेषाद्री को दे दी
शेषाद्री ने संभल कर काम करना शुरू किया पर डी.एस.पी. के मुखबिरों ने उस गाडी की खबर डी.एस.पी. तक पंहुचा दी जिससे बच्चे गायब हुए है ,पर उन्होंने मालिक का नाम बताने से मना कर दिया शायद मरने के डर से, गाड़ी न. का पता चलते ही डी.एस.पी. ने उस गाड़ी के मालिक को खोजना शुरू किया जो ज्यादा मुश्किल नहीं हुआ और मालिक का नाम निकला – आसिफ , उसे खोजा गया और उसकी थाने में अच्छे से खातिरदारी की गई जहा उसने ये राज खोल दिया की गाड़ी भले ही उसके नाम पर हो पर गाडी को काम में खेलावन लाता है
खेलावन का पता भी आसिफ ने बताया पुलिस ने आसिफ को सरकारी गवाह बनाने का फैसला किया और उसी के बयान के आधार पर पुलिस खेलावन के घर पर पूछ-ताछ करने पहुँच गई
चारो तरफ से बंद घर होने पर पुलिस को दरवाजा तोडना पड़ा और अन्दर का नजारा कुछ अलग था , चारो तरफ सामान बिखरा हुआ था पुलिस वाले बेडरूम की तरफ बढे वह उन्हें कुरसी पर एक व्यक्ति की गोली लगी लाश मिली उस व्यक्ति के हाथ में लिखा था – खेलावन
डी.एस.पी. नितिन को ये समझने में देर नहीं लगी की ये खेलावन किसी के हाथ की कठपुतली था और अगर हम खेलावन को जिन्दा पकड़ पाए तो हम उस बड़ी मछली तक भी पहुच जायेंगे जो मुख्य कर्ता-धर्ता है
पर अब सवाल ये है की उस तक कैसे पहुंचा जाए डी.एस.पी. नितिन ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के लिए भेजने के लिए कह दिया और खुद कमरे की तलाशी लेने लग गए कुछ साथी पुलिस भी साथ देने लगे अचानक दराज़ के अन्दर उन्हें एक डायरी मिली जो खेलावन की थी
उसमे साफ़ – साफ़ लिखा था की वो शेषाद्री के लिए काम करता है और उसके हर बुरे काम में वो साथ देता है
सबूत साफ़ थे पर साबित करने के लिए काफी नहीं थे क्योकि अदालत में इस सबूत को इस तथ्य के साथ ख़ारिज करने में समय नहीं लगेगा की “ये डायरी शेषाद्री को फ़साने के लिए लिखी गई है “।
अब सवाल ये था की शेषाद्री तक कैसे पहुचे और बच्चे कहा पर होंगे ?
डी.सी.पी. नितिन ने कुछ खास मुखबिरों को शेषाद्री पर नजर रखने को कहा , कुछ पुलिस वालो को खोये हुए बच्चो को खोजने के काम में लगा दिया , नितिन जानना चाहता था की बच्चे गायब होने के बाद आखिर जाते कहाँ है ?
इधर किसी पुलिस वाले ने शेषाद्री तक ये बात पहुंचा दी की डी.सी.पी. नितिन उसके गिरेबान पर हाथ डालने के लिए सबूत जुटा रहा है शेषाद्री डी.सी.पी. नितिन को भी ठिकाने लगाने का तरीका सोचने लगा क्योकि शेषाद्री डी.सी.पी. नितिन की मौत को एक दुर्घटना बनाना चाहता है ,हत्या नहीं , शायद चुनाव की वजह से ।
डी.सी.पी. नितिन शाम को जब घर पहुंचे तो कोई उनका इन्तेजार कर रहा था – वो खुद शेषाद्री यादव था ,
शेषाद्री ने डायरी की मांग की पर डी.सी.पी. नितिन किसी भी तरह कि डायरी की जानकारी से मुकर गए इस पर शेषाद्री उन्हें धमकाते हुए चला गया धमकी से एक बात तो साफ़ हों गई थी की डायरी में जो भी लिखा था वो सच है यानि मुख्य अपराधी शेषाद्री है
उस रात घनघोर अँधेरा था रात काफी हो चली थी हवाएँ बहुत तेज़ हो चली थी , पेड़ बहुत तेज़ी से हिल रहे थे जैसे कोई बड़ा तूफ़ान आया हो ।
मौसम ख़राब होने पर आदमी खुद को सुरक्षित करने की कोशिश करता है यही काम डी.सी.पी. नितिन ने भी किया घर के खिड़की और दरवाजे उन्होंने बंद कर लिए
बिना ये सोचे की कोई बस इसी पल का इन्तेजार कर रहा था
डी.सी.पी. नितिन अपने घर पर जरुरी काम निपटा रहे थे तभी कुछ लोगो ने घर पर हमला कर दिया और घर में आग लगा दी, डी.सी.पी. नितिन का बचना मुश्किल था पर किसी तरह न सिर्फ बचा बल्कि उन गुंडों को भी पकड़ लिया , डी.सी.पी. नितिन उन गुंडों को लेकर थाने पहुंच ही रहा था की एक तेज़ स्पीड ट्रक ने उनकी कार में टक्कर मार दी डी.सी.पी. नितिन तो गाडी से कूद कर बच गए पर न ही की गाड़ी बची और न ही उनके कैदी , ट्रक की टक्कर ने गाडी में आग लगा दी और उस आग से न तो गाडी बची और न ही कैदी सब खाक हो गए
बचा सिर्फ एक डी.सी.पी. नितिन वो भी गंभीर रूप से घायल अवस्था में , डी.सी.पी. नितिन ने थाने में फ़ोन कर अपने साथी पुलिस वालो अपने हालात की खबर दी
आनन-फानन में कई पुलिस की गाड़िया एम्बुलेंस के साथ पहुँच गई , डी.सी.पी. नितिन को अस्पताल में भर्ती कराया गया और दवा – दारू शुरू कर दी गई
परन्तु इतना सब करने के बाद भी डी.सी.पी. नितिन को बचाया नहीं जा सका उनकी मृत्यु हो गई
ये खबर जब शेषाद्री को मिली तो उसने इस ख़ुशी में एक पार्टी रखी .. पर इस बात का ख़ास ख्याल रखा की किसी को भी पार्टी देने के पीछे मुख्य मकसद के बारे में पता न चल सके
आधी रात तक पार्टी चलती रही जब सभी मेहमान घर चले गए तो शेषाद्री भी सोने चला गया तभी उसे अपने घर में हर जगह डी.सी.पी. नितिन का भूत नजर आने लगा
उससे बचने के लिए वो इधर उधर भागने लगा – छुपने लगा पर डी.सी.पी. नितिन का भूत उसे खोज निकलता था जब उससे रहा नहीं गया तो उसने डी.सी.पी. नितिन के भूत से पूछ ही लिया तुम क्या चाहते हो
डी.सी.पी. नितिन ने कहा अपने सारे जुर्म अभी उसके सामने बोल दे वरना वो मार डालेगा
शेषाद्री इतना डर गया की डर के मारे अपने सारे जुर्म खुद ही उगल दिए
“की मै बच्चो को किडनैप कर उनकी आँखे और किडनी निकल लेता था और उन्हें दुसरे शहर भीख मांगने के लिए भेज देता था, और पिछले कई डी.सी.पी. की हत्या मैंने ही करवाई है और तुम्हारे ऊपर हमले भी मैंने ही करवाए थे”।
शेषाद्री के इतना कहते ही कमरे की बत्ती (लाइट) जल गई , शेषाद्री ये देख कर दंग रह गया की जिसे वो भूत समझ रहा था वो तो जीता – जीता आदमी निकला मतलब डी.सी.पी. नितिन मरा नहीं था वो जिन्दा है
डी.सी.पी. नितिन- मुझे देख कर चौक गए न की मै जिन्दा कैसे बच गया , पर मै तुम्हे एक बात बताता हु की मै कभी मरा ही नहीं था , तुम्हारे चहरे से शराफत का नकाब निकलना था इसलिए मैंने ये सब नाटक किया और तुम्हारा कबूलनामा मैंने रिकॉर्ड कर लिया है , तुम फस चुके हो शेषाद्री तुम्हारा खेल यह ख़तम होता है ,
चलो पुलिस स्टेशन ।
शेषाद्री आग बबूला हो गया और नितिन पर झपट पड़ा दोनों के बीच कुश्ती का युद्ध शुरू हो गया , ऐसा लग रहा था । शेषाद्री ने नितिन को उठाकर पटक दिया इसके पहले की नितिन उठ पता शेषाद्री नितिन का गला दबाने लगा तभी नितिन की किक पीछे से शेषाद्री को लगी और वो दूर उछल कर जा गिरा
उठापटक की आवाज़ सुनकर शेषाद्री के पाले हुए गुंडे उस रूम में धडधडा कर घुस गए और एक पल में पूरा माजरा और वे नितिन पर टूट पड़े , पर नितिन भी डी.सी.पी. नितिन ऐसे नहीं बना है उन गुंडों और शेषाद्री को ये बात जल्दी ही समझ में आ गई जब सभी गुंडे मुहँ के बल जमीन में पड़े हुए थे, सभी को हाथ-पैर की ठुकाई से ही बेदम कर दिया, नितिन को रिवाल्वर निकलने की जरुरत ही नहीं पड़ी ।
शेषाद्री ने दराज से बन्दूक निकाल ली जो नितिन के कंधे को चीरते हुए निकल गई , नितिन बन्दूक निकालना चाह रहा था पर शेषाद्री कोई मौका नहीं दने के मूड में था तभी नितिन की नजर शेषाद्री के पैरो पर गई वो कारपेट पर खड़ा था और कारपेट का एक सिरा नितिन के नजदीक था , इससे पहले की शेषाद्री गोली चलाकर नितिन के भेजे में छेद कर पाता नितिन ने अतिरिक्त ताकत बटोरकर कारपेट खीच दिया और शेषाद्री उछल कर पीछे गिरने लगा , पर ये क्या ??? कमबख्त ने गिरते – गिरते भी गोली चला दी ...... गोली से बचते बचते भी नहीं बच पाए और गोली ने नितिन की जांघ में सुराख़ कर जगह बना ली पर अब डी.सी.पी. नितिन रुक नहीं सकते थे उन्होंने भी गोली चला दी जो शेषाद्री के गिरते हुए शरीर में सीने में जगह बना ली और चंद पलो के अन्दर दो जिस्म पड़े हुए थे लगभग बेढाल
तभी उस कमरे के बाहर गलियारे से कदमो की आवाज़ आने लगी , बूटो की आवाज़ से पुलिस वाले लग रहे थे ... हाँ  .... वे पुलिस वाले ही थे, वे जब कमरे में पहुंचे तो देखा 2 घायल जिस्म पड़े हुए है 
दोनों जिस्म को उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया
दोनों का 2 घंटे तक जटिल ऑपरेशन चला दोनों जिस्मो से गोलिया निकाली गई लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था जो नहीं होना था वही हो गया उन दोनो जिस्म में से एक जिस्म हमेशा के लिए धड़कन से वंचित हो गया और एक जिस्म बड़ी मुश्किल से न सिर्फ बच गया बल्कि खतरे से बाहर भी आ गया
डॉक्टर ने ऑपरेशन थिएटर से बाहर आकर इस बात से राज खोला की कौन बचा और कौन जिंदगी की जंग हार गया ................ जी हाँ ........... जो बचा वो जिस्म था ......... डी.सी.पी. नितिन का
और डॉक्टर के मुताबिक आज अपने जन्मदिन के दिन डी.सी.पी. नितिन को फिर से नया जन्म मिला है और वो जल्द ही ठीक हो कर फिर से अपने ड्यूटी पर लौट जायेंगे
डी.सी.पी. नितिन ने वो विडियो जिसमे शेषाद्री का कबूलनामा था मीडिया वालो को दे दिया , लोगो के सामने सच्चाई आ गई सब जगह डी.सी.पी. नितिन की वाह-वाही होने लगी , तारीफे होने लगी , बधाई दिए जाने लगे जब मीडिया ने उनसे आवाम के नाम सन्देश देनो को कहा गया तो आपको पता है उन्होंने क्या कहा
डी.सी.पी. नितिन –“जय – हिन्द” ।
खैर डी.सी.पी. नितिन ने सिर्फ इतना ही कहा पर हम कहना चाहेंगे अपराधियों सावधान – सुधार जाओ वरना डी.सी.पी. नितिन द्वारा या तो पकडे जाओगे या मारे जाओगे
जल्द मुलाकात होगी हमारी आपसे
अलविदा ।

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