Wednesday, 30 December 2015

कहानी – दा रीमेक ऑफ महल
इस संसार का एक ही नियम है कोई आयेगा तभी कोई जायेगा या कोई जायेगा तभी
कोई आयेगा , बिना किसी के आये कोई जा नहीं सकता और बिना किसी के जाये कोई
आ नहीं सकता अर्थात पुराने की जगह नया लेते है और नया की जगह पुराने,
संसार का यह नियम सर्वविदित है और सभी जगह मान है यह एक ऐसा नियम जो
सृष्टि के हर कण में विधमान है
किसी मशहूर कवी ने खूब लिखा ह
“आया है सो जायेगा राजा , रंक , फकीर
कोई हाथी चढ़ चल रहा कोई बना जंजीर“।
ऐसा ही एक नियम इंसानों के बीच भी चलता है जैसे किसी का कॉलेज के फर्स्ट
इयर में एडमिशन होता है तो किसी की कॉलेज से विदाई ।
डीयू यूनिवर्सिटी के फॉरेंसिक विभाग का आखिरी सत्र आज समाप्त हो रहा था ,
आज कॉलेज के ग्राउंड में फेयरवेल पार्टी दी जा रही थी जूनियर्स के द्वारा
सीनियरस को, लगभग सभी टीचर्स और स्टूडेंट मौजूद थे चारो तरफ सिर्फ लोग ही
लोग दिख रहे है जो अपने – अपने दोस्तों के छोटे – छोटे ग्रुप बना कर बात
कर रहे थे कही ख़ुशी का माहौल है तो कही गम का , ख़ुशी इस बात की वो पास हो
गए है और गम इस बात का की अपने दोस्तों से बिछुड़ जा रहे है पता नहीं फिर
कब मिलना होगा , होगा भी या नहीं , कुछ महत्वकांक्षी स्टूडेंट्स अपनी –
अपनी भावनाएँ व्यक्त कर रहे थे जैसे - इसके बाद आगे क्या करना है , किसी
फील्ड में जाना है या कोई जॉब करना है तो कुछ अपने प्रिय शिक्षको से
आशीर्वाद लेकर अपने नए जीवन की शुरुवात करने जा रहे थे ।
सीनियर फॉरेंसिक विभाग में 30 स्टूडेंट्स है इनमे से 5 लोगो का एक खास
ग्रुप है जिसका नाम है “टाइगर” , इस टाइगर ग्रुप का लीडर नितिन है और
उसके 4 साथी है जो इनका हमेशा साथ देते है संजय , महफूज़ , स्वप्निल और
आकाश ।
स्वप्निल , संजय और महफूज़ एक कोने की टेबल पर बैठ कर चाउमीन खा रहे थे
तभी टेबल पर नितिन जा पंहुचा उसके हाथ में एक प्लेट थी और प्लेट में आइस
क्रीम ।
नितिन : आज का क्या प्रोग्राम है ?
संजय (चाउमीन खाते हुए) : फिरहाल तो चाउमीन खाकर सोने का है ।
नितिन : और तुम्हारा स्वप्निल ?
स्वप्निल : रात में पार्टी दे रहा हु अपने घर पर ।
नितिन : हम्म ! और तुम क्या कर रहे हो महफूज़ ?
महफूज़ : मै तो आज अपने गाँव चला जाऊंगा , बहुत समय हो गया अपने घर वालो
से मिले हुए ।
नितिन : मतलब तुम लोगो के पास कोई एडवेंचरस काम नहीं है ।
(नितिन की बात सुनकर संजय का मुह खुला रह गया )
स्वप्निल : तुम किस एडवेंचर की बात कर रहे हो ?
संजय (धीरे से लगभग फुसफुसाते हुए बोला) : कोई लड़की मिल गई है क्या आज रात के लिए ।
(इतना कहकर संजय जोर से हसने लगा पर संजय का इस तरह हँसना नितिन को पसंद
नहीं आया उसने घूर कर संजय को देखा और और संजय शांत हो गया ।)
महफूज़ : तुम कहना क्या चाहते हो जरा खुल के कहो ।
नितिन : तुम लोगो ने सोनगढ़ के महल के बारे में सुना है ?
(सोनगढ़ के महल का नाम सुनते ही सन्नाटा छा गया , न निवाला निलते बना न निकालते ।)
संजय : तुम उसी अभिशापित महल की बात कर रहे हो न जहाँ जाने के बाद कोई
वापिस नहीं आ पाया ।
स्वप्निल : सुना है वहा भूतो का पहरा है , वहा प्रेत व पिशाच रहते है ।
महफूज़ : मै समझ गया नितिन तुम क्या कहना चाहते हो तुम हम लोगो को उस महल
में जाने को कह रहे हो ... उस महल में एक रात गुजारने को ।
नितिन : हा तुम सही समझे ।
संजय : तुम पागल हो गए हो क्या ? मै वहा नहीं जाऊंगा ।
स्वप्निल : मै भी नहीं जाऊंगा , मुझे अभी जीना है शादी करनी है , फिर
बूढ़े होके मरना है ।
नितिन को महफूज़ से पूछना ही नहीं पड़ा उसने खुद ही कह दिया की .....
महफूज़ : मै चलूँगा ।
(महफूज़ का जवाब सुनकर स्वप्निल और संजय को सांप सूंघ गया वही नितिन के
चहरे पर एक कुटिल मुस्कान फ़ैल गई)
संजय : तू पागल हो गया है क्या मुफ्त में मारा जायेगा .. घर जा और ऐश कर ।
स्वप्निल : तुम यह सब क्यों कर रहे हो ?
नितिन : गाइस ! अगर तुम लोगो को नहीं आना है तो मत आओ पर महफूज़ को मत रोको ?
महफूज़ : दरअसल मैंने उस महल में खजाने के गड़े होने की खबर सुनी है ...
जिसकी कीमत करोड़ो में है ।
नितिन : और अगर हम उसे खोज लेते है तो हम मालामाल हो सकते है ।
महफूज़ : नाम होगा अलग से ।
संजय : तुम दोनों सच में पागल हो गए हो वह जान भी जा सकती है , कहानी
नहीं सुनी है क्या महल की ।
नितिन : क्या पता कहानी सिर्फ डराने के लिए लिखी गई हो ताकि कोई खजाने को
न खोज पाए ।
महफूज़ : मुझे भी ऐसा ही लगता है ।
संजय : पर ......
महफूज़ : पर वर कुछ नहीं तुम लोग आ रहे हो बस ... क्या तुम लोग करोड़पति
नहीं होना चाहते हो ?
स्वप्निल : हा पर .....
नितिन : कम ऑन गाइस ! चलो कुछ धमाका करते है ।
(फिर थोड़ी मान मनुव्वल के बाद चारो चलने को राजी हो जाते है पर एक नई
समस्या अचानक खड़ी हो जाती है )
संजय : हम वहा तक जायेंगे कैसे ?
नितिन : मतलब
स्वप्निल : मतलब हमारे पास गाड़ी तो होनी ही चाहिए न .. जिससे हम महल तक
पहुँच सके और अपने सामान को भी ले जा सके ।
नितिन : उसका बंदोबस्त भी हो गया है मेरा दोस्त थापा उसके पास गाड़ी है ..
आज उसका बर्थडे है तो वो अपनी गाड़ी ले जाने से मना भी नहीं कर पायेगा ।
स्वप्निल : पर अगर वो भी चलने को तैयार हो गया तो ... ?
नितिन : तो उसे भी ले चलेंगे ।
संजय : पर इस तरह तो इस खाजने का एक और हिस्सेदार बढ़ जायेगा ।
महफूज़ : नहीं बढेगा ।
(महफूज़ ने रहस्यमयी मुस्कान ली और संजय सब समझ गया )
चारो ने टेबल छोड़ी और हाथ मुह धोकर फेयरवेल पार्टी से बाहर निकल गए ......
प्लान के मुताबिक संजय और नितिन एक साथ बाइक से थापा के घर पहुचेंगे और
अपनी बाइक छोड़ कर कार ले लेंगे और स्वप्निल और महफूज़ फॉरेंसिक का सारा
सामान जुटाएंगे
प्लान के मुताबिक संजय और नितिन थापा के घर पहुंचे .......
थापा का पूरा नाम अजय थापा है वो दिल्ली में चांदनी चौक में रहता है यहाँ
उसके पिता का बनाया हुआ घर है थापा का घर मेन रोड पर बना हुआ है मेन गेट
से अन्दर घुसते ही सामने ही (थोडा सामने मतलब एक दम सामने से थोडा हटके)
दरवाजा है , 2 मंजिला बना ये घर सफ़ेद रंग से पुता हुआ है मेन गेट के बगल
में गमले रखे हुए है जिनमे डहेलिया , गेंदा आदि फूल वाले पौधे लगे हुए है
कुछ तो सूख भी गए है गमले के बगल में सीढ़ी है जो सीधा सेकंड फ्लोर पर ले
जाती है सीढ़ी के निचे एक छोटा स्टोर रूम है है जहा बाइक खड़ी रहती है मेन
गेट के सामने काफी गैप दिया गया है ताकि एक कार कड़ी रह सके ।
नितिन ने डोर बेल बजाई और अन्दर से आवाज़ आई
“खोल रहा हु भाई कौन है बाहर” ?
दरवाजे के खुलते ही नितिन ने उसे देखते ही गले लगा लिया ......
नितिन : कैसा है थापा तू ?
थापा : मै बढ़िया हु यार तू बता ... इतनो दिनों बाद तुझे हमारी याद कैसे आई ?
संजय : हमें कुछ बात करनी है .. क्या हम अन्दर आ सकते है ?
थापा : हा क्यों नहीं .... वैसे आप कौन है ?
(थापा नितिन के साथ आये अजनबी को देख कर उसके बारे में जानना चाहा )
नितिन : यह संजय है मेरा क्लास मेट है , हम दोनों तुम्हे हैप्पी बर्थडे
विश करने आये है
थापा : हाउ स्वीट ऑफ़ यू ! थंक्स फॉर विशिंग , अन्दर आ जाओ ।
थापा का घर अन्दर से बहुत बढ़िया डेकोरेट किया गया है थापा ने नितिन और
संजय को सोफे पे बिठाया नरम और मुलायम सोफा पर बैठ कर दोनों ने चैन की
सांस ली और फिर आस – पास का जायजा लेने लगे वो दोनों गेस्ट रूम में बैठे
थे , गेस्ट रूम में 2 सिंगल सोफा कुर्सी और एक जॉइंट सोफा था जिस पर तीन
लोग बैठ सकते है इसी पर दोनों बैठे हुए है
इस रूम में 2 खिड़की है एक जॉइंट सोफा के पीछे और एक सिंगल सोफा के पीछे ,
जॉइंट सोफा के दाई तरफ .. खिड़की बंद थी और उस पर सफ़ेद रंग का पर्दा लगा
हुआ था जिस पर महीन हस्त चित्रकारी की गई थी पर्दा लगा होने की वजह से
अन्दर से बाहर का कुछ भी नहीं दिख रहा था , खिड़की के बगल में टी.वी. है
सोनी के 56 इंच का , वही कमरे के बीचो – बिच एक डाइनिंग टेबल है जिस पर
कपड़ा बिछा हुआ है और इसके ऊपर 1 ऐश ट्रे रखी हुई है , जिसमे थोड़ी सी राख
और 3 सिगरेट रखे हुए है ।
थापा किचन में फ्रिज खोला और वही किचन से पूछने लगा ....
थापा : अगर मै बियर लाऊ तो चलेगा ।
नितिन : हा चलेगा ।
थापा फ्रिज से 2 बियर की बोतल , 3 गिलास और एक प्लेट में थोड़ी सी नमकीन
ले कर गेस्ट रूम में आ गया और टेबल पर हड़बड़ी में रख दिया ।
थापा : माफ़ करना दोस्तों ! मेरे पास आज खाने – पिने की चीजो की कमी है ,
तुम लोग आज इन्ही से काम चलाओ ।
(थापा सामान रखने के बाद खुद ही एक सोफा पर बैठ गया और खुद ही जाम बनाने लगा )
थापा (जाम बनाने के बाद): यह लो दोस्तों शुरू हो जाओ ....
(तीनो ने अपने – अपने गिलास उठाये और एक दुसरे से गिलास टकरा के “चियर्स”
बोला और एक – एक घूँट तीनो ने मारा )
थापा : अब बताओ प्लान क्या है ?
नितिन : प्लान बहुत ही सिंपल है ... हम सभी दोस्त आज सोनगढ़ चलेंगे .. शाम
को 4 बजे निकलेंगे और अगर सब ठीक रहा तो लगभग 10 बजे तक .. अपने गंतव्य
स्थान अर्थात सोनगढ़ पहुच जायेंगे और वह सदियों से दफ़न खजाने को निकाल
लेंगे ।
थापा : हम्म मुझे ऐसा लगता है की मेरा पास कुछ ऐसा है ... जिसकी जानकारी
तुम्हारे पास होनी चाहिए ।
संजय : और वो क्या चीज है ?
थापा : रुको ! मै लेकर आता हु ।
(थापा ने गिलास को मेज़ पर रखा और अपनी कुरसी से उठा और दुसरे कमरे में
गया और वह थोड़ी देर तक कुछ खोजता रहा बडबडाता रहा (यही तो रखी थी ) और
थोड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार उसे वो चीज मिल ही गई और वो उस चीज को लेकर
नितिन और संजय के पास पंहुचा ।)
संजय : ये क्या है ?
थापा : ये मेरे पुरखो द्वारा लिखी गई किताब या डायरी है जिसमे उस सोनगढ़
का विवरण है ।
नितिन : मतलब ?
थापा : मतलब ये इस किताब में सोनगढ़ के बारे में बताया गया है ...
संजय : और इसे लिखा किसने है ?
थापा : मेरे पूर्वजो ने .... अब तुम लोग सवाल जवाब ही करोगे या ये विवरण भी सुनोगे
संजय : ठीक है शुरू करो ................
थापा : ये बात बहुत पुरानी है करीब आज से 300 साल पहले की .... जब सोनगढ़
पर यहाँ के राजा भानुमल का शासन था वो एक सत्यनिष्ट व् न्यायप्रिय राजा
थे ..
फ्लैशबैक
होशियार ..... राजाओ के राजा , सत्यनिष्ट व् न्यायप्रिय चक्रवती सम्राट
महाराज राजा भानुमल पधार रहे है .........
घोषणा सुनते ही सभा में मौजूद सभी दरबार कारी खड़े हो गये और राजा के
सम्मान में झुक के खड़े हो कर कार्निश (झुक के सलाम ) करने लगे और पीछे से
कुछ दरबारी उनके जय – जयकार करने लगे ।
राजा अपने सिंघासन पर बैठे ..........
राजा भानुमल : कृपया आप सभी अपने – अपने आसन ग्रहण करे ...
(सब के बैठने के बाद) ..... कृपया दरबार की प्रकिया शुरू की जाये ....
(महामंत्री हाथ जोड़ कर खड़े हो गये)
महामंत्री धरम सिंह : गुस्ताखी माफ़ महाराज .. पर दरबार की कार्यवाही शुरू
होने से पहले हम आपसे एक गंभीर मसले पर बात करना चाहते है
राजा : कहिये महामंत्री जी ऐसा कौन सा मसला है जो आपको परेशान कर रहा है ?
महामंत्री : इस बार सूखे की वजह से फसल नहीं हो पाई है जिससे राज्य में
भुखमरी की नौबत आ गई है जिससे राज्य के किसान “कर” नहीं जमा कर पाए है और
इसकी वजह से .. राजकोष लगभग खाली हो गया है ।
राजा : ओह्ह ... ये समस्या तो बहुत ही गंभीर है आपको क्या लगता है हमें
क्या करना चाहिए ? मेरे ख्याल में हमें “कर” माफ़ कर देना चाहिए और किसानो
के लिए दुसरे राज से अन्न की व्यवस्था की जानी चाहिए ।
महामंत्री : आपका विचार उपयुक्त है महाराज .. परन्तु अन्य राज में भी कोई
खास फसल नहीं हुई है ।
(महामंत्री ने अपनी चिंता व्यक्त की ....)
तभी महल में 2 आदमियों ने लड़ते – झगड़ते प्रवेश किया , जिसमे एक सैनिक व
दूसरा शख्स पंडित था ।
राजा : कौन हो तुम और इस तरह महल में कैसे घुस आये ?
सैनिक : महाराज यह पंडित जबरदस्ती महल में घुसे चले आ रहे थे और मेरे लाख
मना करने के बाद भी ये मान नहीं रहे थे बस हर बार एक ही वाक्य बोल रहे थे
– कि मुझे महाराज से बहुत जरुरी बात करनी है मुझे अन्दर जाने दो , और जब
मैंने अन्दर जाने से मना कर दिया तो ये मुझे धक्का दे कर अन्दर आ गए ।
राजा : तुम जा सकते हो सैनिक .... ऐसी कौन सी समस्या आ गई की आप दरबार के
ख़त्म होने तक का भी इन्तजार नहीं कर पाए ।
पंडित : समस्या ही कुछ ऐसी थी की रुका नहीं गया , दरअसल महाराज मै पंडित
हु मेरा नाम है , विशम्भर नाथ शर्मा और ........
राजा : ओह्ह तो आप ही है वो मशहूर पंडित जिनकी की हुई भविष्यवाडियां कभी
गलत नहीं होती है .....
पंडित : हा महाराज मै वही हु और मुझे ऐसा आभास हुआ है की जल्द ही इस
राज्य और आप पर भरी विपदा आने वाली है ।
राजा : ये आप क्या कह रहे है पंडित जी .. ऐसा क्यों होगा और क्या आप बता
सकते है विपदा किस प्रकार की होगी ?
पंडित : वो सब मै नहीं जनता महाराज पर आपकी और इस राज की दशा सही नहीं है
जल्द ही कुछ बुरा होने वाला है , कुछ बहुत ही बुरा आप सावधान रहना महाराज
आपकी जान भी जा सकती है । जाते - जाते अंत में इतना ही कहुंगा महाराज की
कोई आपका नजदीकी ही आपको हानि पहुँचायेगा ।

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