Tuesday, 3 November 2015

रिव्यु  लेखक - अश्वनी धार द्विवेदी

नोट:-रिव्यु में spoilers हो सकते हैं

रिव्यु-हाँ तो बात करते हैं कहानी की कहानी शुरू होती है कॉमिक्स के नाम से यानी की सर्वसंधि से यानि की देवताओं और असुरों की संधि से जिसमें कोई भी अचरज करने वाली बात नहीं दिखी क्योंकि युगम की बात माननी ही पड़ेगी सबको ।।

फिर शुरू होती है सर्वनायक प्रतियोगिता जिसमें बहुप्रतीक्षित द्वन्द होने वाला होता है यानि की डोगा और शिरोमणि का द्वन्द अगर सच बोलूँ तो मुझे लगता था कि सबसे रोमांचक द्वन्द होगा ये पर अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं उनके बीच हुए पहले द्वन्द में नितिन सर का WWE प्रेम साफ़ साफ़ दिखा क्योंकि डोगा में शारीरिक क्षमता इतनी नहीं की वो शिरोमणि के आगे टिक सके परंतु फिर भी प्रतियोगिता थी और द्वन्द को रोमांचक रखना था तो जो भी हुआ ठीक ही हुआ ।।

कुछ फ्रेम्स असुरों और हरुओं के भी हैं और निशाचर के भी जिनके बारे में आगे की कॉमिक्स में बताया जाएगा(मेरे ख्याल से सर्वशक्ति में) लेकिन इनके रोल्स कुछ ख़ास नहीं हैं इसलिए इनकी बात करना सही नहीं होगा ।।

कहानी का मुख्य आकर्षण है डोगा और शिरोमणि के बीच में हो रही प्रतियोगिता शायद इसीलिए लेखक ने भी इसको मुख्य स्थान दिया है ।।

अंत में तीसरी प्रतियोगिता खत्म हो रही होती है और उसको खत्म करते करते डोगा और शिरोमणि दोनों ही अनिश्चित कालीन मूर्च्छा में चले जाते हैं और अब उन्हें मूर्च्छा से वापिस लाने के लिए संजीवनी की ज़रूरत है जिसके लिए अश्वराज और कोबी जाते हैं ।।

इस कहानी में कुछ बातें हैं जो समझ नहीं आई जैसे गुण को गार्डियन कहना (क्योंकि ड्रैक्युला सीरीज में उस शैतान का नाम गुण था) और भेड़ाक्ष का आना, प्रकृति की बेटी की कहानी को होल्ड पर डाल दिया गया है जो की अच्छी बात नहीं पर यहाँ हम कुछ नहीं कर सकते क्योंकि लेखक ने क्या सोचा है वो वही जानें ।।

अंत में  बस इतना कहूँगा की ये कॉमिक्स एक ठीक ठाक कॉमिक्स है लेकिन आप इससे बहुत ज़्यादा उम्मीदें नहीं रख सकते ।।

रेटिंग्स मैं दे नहीं सकता, इसलिए उसके लिए आपको आलोक भैया के रिव्यु की प्रतीक्षा करनी होगी ।।

धन्यवाद


रिव्यु  लेखक - युधवीर सिंह 


सर्व संधि  (2015) छठा खंड/आठवा पड़ाव
91 Pages/281 Panels (Avg. 3 Panels per page)
Genre-Action-Adventure,comedy
Main character(s)- डोगा,योद्धा,युगम,भेड़ाक्ष,तुरीन,गगन,विनाशदूत,लोरी,कपाल कुण्डला,शुक्राचार्य!

Short Synopsis-

>प्रस्तावना- शक्ति परिक्षण (पेज 2-8)
इस भाग में देवासुर संग्राम शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाता है!

>प्रथम अध्याय आरम्भ- भेड़ाक्ष का आगमन (पेज 9-18)
असम के जंगल में तुरीन और पार्टी के सामने भेड़ाक्ष-भाटिकी है! हल्की सी लड़ाई,जान-पहचान और फिर 2 नई टीम बनाकर अल्पविराम!

>द्वितीय अध्याय आरम्भ- सर्वबल पराक्रमी (पेज 19-44)
इस भाग का मुख्य हिस्सा जिसमे डोगा और योद्धा की जंग शुरू होती है!

>तृतीय अध्याय आरम्भ- हरुनीति (भाग एक) (पेज 45-48)
असुरों और हरुओं के बीच गोलमेज़ बैठक होती है और दोनों ही पार्टियाँ ऊपर से गठबंधन करके अन्दर से एक दूसरे की पीठ में वक़्त आने पर छुरा मारने की खलनायकी करती हैं!

>तृतीय अध्याय आरम्भ- हरुनीति (भाग दो) (पेज 49-53)
महामानव-गलालागीचा-हरुओं वाला प्रसंग और थोडा आगे घिसट जाता है!

>चतुर्थ अध्याय आरम्भ- लघुघातियों का ग्रह  (पेज 54-63)
डोगा-योद्धा के मध्य एक और द्वन्द तक सीमित भाग!

>पंचम अध्याय आरम्भ- पाप क्षेत्र (पेज-64-72)
इरी की गुफा वाला हिस्सा आगे बढ़ता है..कहानी में पहले दिखे कुछ किरदार गायब करके  लोरी,कपाल कुंडला जोड़ दिए गए हैं! निशाचर की एंट्री हो गई है!

>षष्ठम अध्याय आरम्भ- शस्त्र शिरोमणि (पेज 73-87)
डोगा और योद्धा के मध्य पांच ने से तीसरा द्वन्द इस भाग में है! दोनों अब बेहोश हैं और इन्हें होश में लाने की दवाई लेने भेड़िया और अश्वराज को भेजा जा चुका है!

>परिशिष्ट अध्याय आरम्भ- अंतिम अवसर (पेज 88-91)
चंद्रमा की धरती पर ग्रहणों,गगन,विनाशदूत “मियां” के साथ आकाशगंगाओं के “खलीफा” एक नई फिल्म बना रहे हैं! पर ग्रहणों को यह मंजूर नहीं!

षष्ठम खंड समाप्त

Self-realization Points-
1- पाठकों को कॉमिक्स पर वार्तालाप करते रहना चाहिए..क्यूंकि ऐसे ही कुछ कमियां उजागर होती हैं..जिनका उत्तर आगे देना संभव भी हो जाता है! प्रश्न उठा था कि तिरंगा को कालमूर्तियाँ तुरंत ले गई..तिलिस्मदेव को तुरंत क्यूँ नहीं ले गई.. आदरणीय लेखक जी का ध्यान इसपर गया और इस भाग में तुरंत तिलिस्मदेव को भी  कालमूर्तियाँ पकड़ कर ले गई!

2- डोगा और योद्धा के मध्य पठारों वाली लड़ाई जबरदस्त है! डोगा की चीटिंग लात बढ़िया लगेगी! लड़ाई के दरमियाँ पठारों के टूटते टुकड़े और दोनों के हवा में उड़ते शरीर अच्छे लगते हैं! लेकिन हमें यही लगा कि यह लड़ाई neutral नहीं रही..क्यूंकि अंतिम पठार तोड़ने पर इसका निर्णय रखा गया..बजाय इसके कि कौन ज्यादा पठार तोड़ेगा...मान लीजिये कि पूरी लड़ाई के दौरान एक हीरो ने 100 में से 50 पठार तोड़े और दूसरे ने 49 तोड़े...तो अंत में अगर 49 वाला 50वा भी पठार तोड़ देता है..तो वो विजयी बन जाएगा! लेकिन यह विजय नहीं हुई! विजय तभी होती जब अंतिम पठार तोड़ने से पहले दोनों के मध्य एक बराबर संख्या रहे और टाइब्रेकर किया जाए! अभी कोई कहेगा कि योद्धा ने ज्यादा पठार तोड़े तो कोई कहेगा डोगा ने तोड़े..पर अंकतालिका ना होने की वज़ह से संदेह बना रहा! खैर!

3-हरुओं और दैत्यों के मध्य हुई संधि रोचक लग रही है! इसका परिणाम देखने लायक होगा!

4-चलिए यह पता चल गया कि महामानव जिस काल में मौजूद है..वो धरती का आरंभिक चरण है! वो कैद से रिहा कैसे हुआ यह दिखाया गया लेकिन उस ख़ास जगह कैसे पहुंचा यह नहीं दिखाया गया! यह 2 खंड आगे बताया जाएगा!

5-लघु घातियों के साथ दोनों हीरो का द्वन्द वाला पूरा प्रसंग रोचक ढंग से लिखा गया है! यह वाला द्वन्द 100%  neutral तरह से पूरा हुआ है!

6-इरी की गुफा वाला अध्याय पढ़ते हुए हमें अजब गज़ब एहसास हुआ! पवन (परालौकिक विज्ञान नायकगण)..चलिए सर्वनायक विस्तार के लिए एक और ऐसा विषय मिल गया..जिसपर आराम से 5 कॉमिक्स और खींची जा सकती हैं!

7-पेज 75 पढ़कर बहुत आनंद आया ..जो कॉमेडी हुई है..वो समयानुकूल थी...यहाँ पर टपोरी संवाद अच्छे लगे..क्यूंकि वो थोपे नहीं गए हैं...ऐसे ही परमाणु का शक्ति पर तंज कसना भी बिल्कुल सही लगा! जो युद्ध हुआ वो बढ़िया लिखा गया है..पेज-77 मज़ेदार था! बस यह लगा कि लड़ाई थोड़ी छोटी थी...अगर थोड़ी और बढाकर डोगा से तलवार,भाले और योद्धा कई दूसरे बम,गन्स,मोर्टार और इस्तेमाल करता..तो अधिक आनदं आता...खैर कहानी को अल्पविराम दिया गया है!

8-अंतिम जो चंद्रमा पर ग्रहणों वाला भाग है..उसमे कहने लायक कुछ नहीं है..वो सिर्फ एक कदम और आगे बढ़ा है..ना पॉजिटिव है ना नेगेटिव!
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जैसा कि हम हमेशा कहते हैं...जिन भाइयों को पॉजिटिव रिव्यु चाहिए..वो यहीं रुक जाएँ...आगे ना पढ़ें!
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Logical Reasoning Points-

1-    हम इसको गलती नहीं कहेंगे...क्यूंकि गलती छोटी होती है!
प्रश्न- युगम क्या है?
उत्तर - युगम एक काल्पनिक पात्र है जिसको हिन्दू माइथोलॉजी के लचीलेपन की आड़ लेकर इस सीरीज के लिए आदरणीय लेखक जी द्वारा मनोरंजन परोसने के उद्देश्य से गडा गया है! पुराणों में आदि-शक्ति माता अम्बिका और उनके बाद त्रिदेवों को ही सर्वशक्तिमान माना गया है और ब्रह्मा द्वारा रचित समस्त कालों के स्थायित्व पूर्ण संचालन तक ही आपका बनाया यह युगम सीमित रहना चाहिए था! इसको आपने कालों को खत्म करने की शक्ति दे दी..मान लिया! यह बात हमने इसलिए नहीं मानी थी कि यह बात सर्वनायक के आदरणीय लेखक जी ने लिखी थी...इसको मानने के पीछे यह तर्क था कि तीनों कालों को समाप्त कर भी दिया जाए तो क्यूंकि त्रिदेव और देवतागण मौजूद रहेंगे..इसलिए कालों को दोबारा से सृजित भी किया जा सकता है! लेकिन आदरणीय लेखक जी और राज कॉमिक्स द्वारा काल्पनिक पात्र “युगम” से देवताओं को ही ख़त्म कर देने लायक श्रेष्ठता दिखाना अनुचित है!
हिन्दू माइथोलॉजी में सृष्टिसंहारक शक्ति भगवान् शिव के पास है! क्या युगम कल को त्रिदेव को चुनौती दे देगा कि समय उसके नीचे हैं इसलिए वो सबसे ऊपर है?? यदि ब्रह्मा ने सबकुछ तय कर दिया है...विष्णु उसका पालन करवा रहे हैं..तो संहार के लिए शिवजी मौजूद हैं!...कहने का तात्पर्य यह है कि सृष्टि को चलाने के लिए सबके अपने-अपने विभाग हैं..और सबका काम बाँटा गया है! ब्रह्मा को अगर किसी पापी को मरवाना होगा..तो वो विष्णु या शिव से कहेंगे...खुद धनुष लेकर नहीं चल देंगे! देवताओं का जोर अगर किसी प्राणी पर नहीं चलता है..तो वो त्रिदेव के पास उपाय करने जाते हैं..कि नहीं जाते? पूरा काम एक नीति और नियम से होता है! तो अगर युगम को देवताओं को मारना ही है..तो वो अपने ऊपर मौजूद त्रिदेवों या फिर आदि-शक्ति माता अम्बिका से अनुरोध करेगा..ना कि खुद मैदान में कूद पड़ेगा! कई अज्ञानी अब भी कहेंगे कि आदि-शक्ति माता अम्बिका कौन हैं?... कॉमिक्स कलियुग देखो..कि नागराज और ध्रुव किसके सामने अंतिम पन्नों में खड़े सिर झुका रहे हैं! युगम यह कह रहा है कि तीनों युगों में जो अस्थिरता आई है..उसको सही करने का आदेश ऊपर वाले ने दिया है..और वो सिर्फ निमित्त मात्र है..जो इस काम को सही दिशा दे रहा है! ऐसे में देवताओं का सफाया करने का मतलब है...33 कोटि देवी-देवों का सफाया कर देना..जिसके बाद धरा पर पाप-पुण्य कुछ बचेगा ही नहीं...जब पाप-पुण्य ही नहीं बचेगा...तो यह युगम प्रतियोगिता पूरी करवाकर अंत  में कौन सा मनोरथ सिध्द कर लेगा...जिससे चाहे पूर्वकाल बचे या पश्चातकाल...देवताओं के बिना सृष्टि आगे बढ़ेगी ही नहीं....स्वर्ग की स्थापना के पीछे ब्रह्मा का उद्देश्य आदरणीय लेखक जी भूल गए???? अगर पाठको ने महारावण पढ़ी होगी...भोकाल के पास सारे देवताओं की शक्ति थी...लेकिन उसका सिर हमेशा देवताओं के सामने झुका रहा! क्यूंकि तब लेखक जानते थे कि भोकाल एक काल्पनिक पात्र है...जितना चाहे शक्तिशाली दिखाया जाए...रहेगा देवताओं से नीचे ही! मगर आजकल ठीक इसका उल्टा दिखाया जा रहा है कि काल्पनिक पात्र देवताओं को साफ़ करने की धमकी दे रहे हैं! सर्वसंधि का यह प्रथम प्रस्तावना भाग घोर निराशाजनक है! इसपर ज्यादा से ज्यादा जनता का ध्यान आकर्षित किया जाना चाहिए!
उपरोक्त बातें हमने हिन्दू माइथोलॉजी के अनुसार पाठको को इस बात के बारे में  बताया है! अब एक दूसरी तरह से आदरणीय लेखक जी के क्रियाकलाप पर सबकी दृष्टि डलवाते हैं! नारद मुनि पेज-6 पर युगम से कहते हैं कि क्या आप देवों और असुरों का अस्तित्व सच में मिटा देंगे? युगम बड़े आत्मविश्वास से कहता  है- “निसंदेह”
आदरणीय लेखक जी की काल्पनिक रचना श्रीमान युगम...कृपया यह बताने का कष्ट करेंगे कि जिन देवताओं को समुद्र मंथन के बाद भगवान् विष्णु ने मोहिनी रूप लेकर अमृत पिलाकर सदैव के लिए अमरता प्रदान करी हुई है...उनको आप कैसे मारेंगे??? तात्पर्य यह है कि युगम के प्रेम में आदरणीय लेखक जी यह भी भूल गए हैं कि देवता “अमर” हैं! आगे ऐसे ही पेज-84 पैनल 3 पर रावण की जगह मेघनाद का नाम होता!  अब आप खुद समझ सकते हैं कि आदरणीय लेखक जी कितनी मेहनत करके माइथोलॉजी का उपयोग..सॉरी “उपभोग” कर रहे हैं!

आम पाठको से हमारा कहना है कि आपके लिए कुछ दिन बाद दिवाली आने वाली है...इस तरह अपने आराध्यों का अपमान ना करिए कि अगले साल घर में सुख-समृद्ध  आने के लाले पड़ जाएँ! “संभलिये!” लेकिन इतना समझाने के बाद भी किसी को इस मुद्दे की गंभीरता समझ नहीं आई तो हम एक सुझाव देंगे...दीपावली की रात को जब आपके पिताजी कहें कि लक्ष्मी पूजन की व्यवस्था करो...तो वहां से सारे देवी-देवताओं की तस्वीर/मूर्तियाँ हटाकर आपके चहेते लेखक की सर्वसंधि रख देना...और युगम की पूजा शुरू कर देना....पिताजी पूछें तो कहना...कि पिताजी यह युगम तो इन छोटे-मोटे देवताओं से भी कहीं बड़ा शक्तिशाली है...असल पूजा के लायक यही है! उसके बाद आपके पिताजी की चप्पल के प्रसाद से बचकर अगले दिन आप किसी लायक रहे..तो कृपया यहाँ आकर हमें बताइयेगा! हम आपका अभिनन्दन जरूर करेंगे!

2-    हमने पहले भी कहा था कि इतनी बड़ी कहानी और एक अकेला लेखक बहुत नाइंसाफी है! आधी बातें याद, आधी भूल जाना चलता रहेगा! यह बातें हम 3 खंड पहले बताते...लेकिन सोचा लेखक को मौका दें कि शायद वो खुद इसका उत्तर दें...शुरू से बताते हैं!-
A-“धिक्कार” कॉमिक्स में एक रात भोकाल और तुरीन बैठे होते हैं! तुरीन ने लाल रंग की बहुत सुंदर सी ड्रेस पहनी हुई थी (पेज-10) वहीँ से वो गायब हो गई! उसके बाद शूतान,अतिक्रूर वगैरह अलग से गायब हुए (पेज-24)! यह लोग कहाँ और किसके द्वारा गायब हुए..यह बात तब से लेकर आज तक अनुत्तरित ही बनी हुई है! हमारी जानकारी में इस बीच यह लोग किसी कॉमिक्स में नज़र नहीं आये! (अगर ऐसा हो तो कोई याद दिलाकर हमें दुरुस्त करे)! खैर इसके बाद यह सभी लोग एक साथ सर्वयुगम में दिखाई दिए..जहाँ यह सब असम में पूर्वजों की धरती पर आये हैं! इनका उद्देश्य कुछ “शक्तिपुंज तिलिस्म” भेदना है! लेकिन सर्वसंधि के पेज-13 पर तुरीन की बात समझ नहीं आई कि उसको पता है कि “भोकाल और अन्य महानायक कहीं गायब हो चुके हैं!” और बाकी लोगों को भी पता है! हमारा सवाल यह है कि यह लोग तो खुद लापता थे..इन्हें कब पता चला कि भोकाल के साथ क्या हुआ? या बाकी महानायकों के साथ क्या हुआ...और यह नया “शक्तिपुंज तिलिस्म” खोजू प्रसंग कहाँ से जोड़ दिया गया है! वहीँ भेड़ाक्ष वाली बातें भी सिर के ऊपर से निकल गई!

B-सर्वयुगम में दिखाया गया था कि भेड़िया के साथ अतिक्रूर ने लड़ाई शुरू करी..और भेड़िया का साथ गरुडा दे रहा था! यानी तब तक भेड़िया सही सलामत था! लेकिन सर्वसंधि के पेज-14 पर अतिक्रूर अपनी धूर्तता से यह बोलता है कि उसके आते ही भेड़िया गायब हो गया और इसी वज़ह से गरुडा ने उनपर हमला शुरू कर दिया! अतिक्रूर-तुरीन-शूतान  अगर भेड़िया को खोजने वहां एमरजेंसी में आये थे तो बजाय लड़ाई शुरू करके समय बर्बाद करके के सीधे पूछ भी तो सकते थे कि भेड़िया भैया यहाँ कोबी कौन हैं? और तुरीन तो कोबी को पहचानती भी थी!

3- आपको याद होगा तो सर्वनायक प्रतियोगिता शुरू होने से पहले सर्वयुगम के पेज-76 पर सभी हीरोज़ के दिमाग में दूसरे हीरो की सारी जानकारी भरी गई थी! अगर डोगा को पहले से पता है कि योद्धा एक देवपुत्र है तो डोगा के अन्दर संस्कार होने चाहिए कि वो योद्धा को आदरपूर्वक संबोधित करे! लेखक महोदय से यही कहना है कि यह एक गंभीर वातावरण में युगों की बचाने की स्पर्धा चल रही है...इसमें मर्यादाविहीन संवादों से आप अगर कॉमेडी प्रभाव लाने की कोशिश कर रहे हैं तो आपकी सोच गलत दिशा में बढ़ रही है! डोगा और योद्धा के मध्य अगर आप “बेटा” शब्द हटा दीजिये..फिर संवाद पढ़िए..तो पढने में ज्यादा अच्छे लग रहे हैं! योद्धा डोगा के द्वारा बेटा कहे जाने के प्रतिउत्तर में श्वानमुख बोल रहा है... हमें नहीं लगता कि योद्धा जीवन में कभी अशिष्ट शब्द बोलेगा! अगर सामने डोगा है तो वो डोगा ही बोलेगा! जो बोलने में आसान भी है!
संवादों में एक और त्रुटी थी...जब डोगा और योद्धा के बीच तीसरी लड़ाई हो रही थी तब डोगा अचानक से शुद्ध हिंदी के शब्द बोलना शुरू कर देता है..जैसे- पेज-80 का आखिरी संवाद- प्रत्यंचा,प्रस्फुटित,पेज-82-परावर्तित! डोगा के लिए यही बहुत बड़ी बात है कि मुंबई में रहकर वो हिंदी बोल लेता है..लेकिन देवताओं वाली भाषा उसके सिर के ऊपर की बात है! अगर योद्धा और उसके बीच भाषा का फर्क बना रहेगा तो ज्यादा बेहतर लगेगा! लघु घातियों से जीतने के बाद अंतिम पैराग्राफ में योद्धा द्वारा नतमस्तक होकर अभिवादन का जो घटिया जवाब डोगा देता है...वो डोगा प्रेमियों को शर्मिंदा कर गया है! कभी बेटा,कभी पुत्तर...यह डोगा नहीं कह रहा था...लेखक की डोगा पर कमजोर पकड़ करवा रही है! लेखक डोगा को समझ ही नहीं पाए!

4- 5 राउंड वाली लड़ाई बोलने के बाद तिल्सिमदेव-शक्ति वाला युद्ध पूरा नहीं दिखाया गया...तिरंगा-शुक्राल वाला पूरा नहीं किया गया..और अब 3 राउंड्स पर डोगा-योद्धा को रोक दिया गया! क्या हम समझें कि जब दोनों में से किसी एक को ही होश आएगा..तो मतलब यह द्वन्द यहीं पर समाप्त हो चुका है...बाकी बचे 2 राउंड्स की उम्मीद ना रखें!

5- इसके अलावा एक और कमी सर्वयुगम से अब तक चली आ रही है....वो है 2 हीरोज़ जो पहले आपस में मिल चुके हैं..उनको इस सीरीज में लगभग एक दूसरे से अनजान दिखाना..पेज-37 पर परमाणु इस तरह से बात कर रहा है..जैसे उसको योद्धा की शक्तियों के बारे में जानकारी ही नहीं है...जबकि यह दोनों “टक्कर” में आ चुके हैं! ऐसा ही कुछ परमाणु-शक्ति के साथ वाली बातें तो पहले भी बताई जा चुकी हैं! कई दफा यह सभी इस मजबूरी में हो रही प्रतियोगिता को जीतने के नाम पर खलनायकों की तरह बर्ताव करने लगते हैं....जैसे खोज पर जाने से पहले भेड़िया और अश्वराज..के बीच वार्ता! इस पूरी सीरीज में जानबूझकर दूसरी,तीसरी कतार के सुपरहीरोज़ को दंभी,निर्लज्ज,संवेदनारहित दिखाया जा रहा है! इसके उलट ध्रुव,नागराज,भोकाल,गोजो जैसे अपने समय के हिट हीरो का व्यवहार ज्यादा संयमित है! एक नायक हर परिस्थिति में नायक ही होता है! चाहे जीत-हार का उत्साह ही रहे..लेकिन दोनों ही तरफ के हीरो यह जानते हैं कि जीत किसी एक की चाहे हो...दूसरे के पूरे काल को युगम साफ़ कर देने वाला है! इसलिए युग्म प्रतियोगिता को और ज्यादा गंभीर वातावरण में होना चाहिए! जहाँ सभी हीरो आपस में बात करते हुए ऐसे लगें कि वो प्रतियोगिता के साथ-साथ भविष्य के लिए भी आशावादी हैं!

6-महामानव और गलालागीचा वाला प्रसंग सिर्फ एक सवाल का जवाब देता है..लेकिन कई नए सवाल फिर से बना देता है..जैसे वो कौन 3 लोग थे..जिनका जिक्र हुआ है! इसलिए बात वहीँ की वहीँ रुक गई!

7-लेखक इससे पहले सर्व मंथन के पेज 8-9 पर प्रोबोट से यह बुलवा चुके थे कि क्षुद्र ग्रहों से धरती का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है...और कुछ हिस्सा बच गया है! इसके अलावा क्षुद्र ग्रहों से धरती की गर्मी बढ़ रही थी...जिसका उपाय करने नेचर डॉटर को लाने की कोशिश हो रही है! यानी पिछले भाग तक कहीं भी पाप उर्जा का कथन कहानी में मौजूद नहीं था..जिसके लिए पवन का गठन हुआ था! और अब सर्व संधि के पेज 68 पैनल 2 में लिखा गया है कि क्षुद्र ग्रहों से धरती को कोई ख़ास नुकसान पहुंचा ही नहीं है! यहाँ तक कि उसमे से पहले तीव्र ऊष्मा निकल रही थी..अब वो पाप ऊर्जा बताई जा रही है! क्या ऐसा हो सकता है...कि नास्त्रेदमस जैसा वैज्ञानिक इसरिक के साथ टच में नहीं था? वो तो ध्रुव को पहले ही सब बता चुका था! तो लेखक के हिसाब से कहानी में सबसे बड़ा बेवकूफ कौन?
*पहले वो प्रोबोट और इसरिक के अनपढ़ वैज्ञानिक जो कहते हैं ऊपरी धरती तबाह हो गई!
*दूसरे वो पवन के अधनंगे रहने वाले तांत्रिक-मांत्रिक जो कहते हैं कि ऊपरी धरती बच गई!
*या तीसरे वो पाठक जो कहानी को 2 ½  साल से पढ़ रहे हैं!
यहाँ पर लेखक ने कहानी को U-turn दे दिया है! पहले जहाँ 5 अध्याय तक कहा जा रहा था कि धरती की ऊपरी परत तबाह होने वाली है...हो भी चुकी थी...अब कहा गया है कि वैज्ञानिको और पवन के खगोलशास्त्रियों की सारी रिसर्च और भविष्यवाणियाँ गलत थी, यानी धरती सुरक्षित है! पूरा गर्भ गृह बनाना ही बेमतलब बन गया! अब सारी लड़ाई बस पाप ऊर्जा और पुण्य ऊर्जा के बैलेंस को बनाने पर टिक चुकी है! पाठकों को नागायण याद होगी...same यही कांसेप्ट उसमे था...ब्लैक एनर्जी और वाइट एनर्जी के बीच इंसानों को तारतम्य कैसे बैठाया जाए! लेखक द्वारा इस  U-turn के चक्कर में बेचारे पाठक 2 साल अटके रहे...क्यूंकि जो यह बात आज बताई गई है कि क्षुद्र ग्रहों के टकराने पर पृथ्वी का ऊपरी भाग सुरक्षित बना रहेगा...यह पाठको को आराम से सर्वयुगम के पेज-69 के दौरान ही बताया जा सकता था! पर जैसा हमेशा होता हैं कि कहानी को लंबा खींचे जाने के उद्देश्य से 5 मोटे खंड निकालकर U-turn मार दिया गया है! मजे की बात यह है कि पाठक इस चीज़ को महसूस तक नहीं कर पा रहे..कि यह उनके साथ चमत्कार हो चुका है! दरअसल हुआ यह है कि लेखक यहाँ पर एक ही चीज़ के 2 अलग हिस्से करके पाठको को दिखा रहे हैं...वो एक चीज़ थी- क्षुद्र ग्रहों का धरती पर गिरना! और 2 हिस्से हैं...इसरिक और पवन के बीच अलग-अलग जानकारी होना! और मज़े की बात यह कि दोनों ही इससे अनजान हैं!
A-इसरिक के अनुसार धरती की उपरी परत को काफी नुक्सान हुआ है..और क्षुद्र ग्रहों से तीव्र ऊष्मा निकल रही है! जिसको अगर कण्ट्रोल कर लिया जाए तो पृथ्वी के बचे हिस्सों पर मानव बसाए जा सकते हैं!
B-पवन के अनुसार धरती की ऊपरी परत को कोई नुक्सान नहीं हुआ है.. क्षुद्र ग्रहों से पाप ऊर्जा निकल रही है..जिसको कण्ट्रोल कर लिया जाए तो सब ठीक हो जाये!
अब पाठको आप सोचते रहिये कि क्षुद्र ग्रहों से क्या निकल रहा है..या कुछ निकल भी रहा है कि एवें ही खंड पर खंड छपते जा रहे हैं!

8- 48 घंटे वाली घडी का इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए था... इससे पहले पाठक सोच रहे थे कि जो 72 घंटे में से 24 घंटे का समय समस्त आबादी को गर्भ गृह में ले जाने में लगा था..वो नाकाफी था...पर इस बार पेज-67 पर लिखा गया है..कि विस्तृत ब्रह्माण्ड रक्षक उस काम के अलावा एक काम और कर रहे थे..वो था आतंकियों और अपराधियों के साथ जंग लड़ना! पहली जंग शायद कश्मीर में लड़ी थी..जहाँ आतंकी पाए जाते हैं..और कुछ जंगे जाने दुनिया में कहाँ..पर हाँ समय खूब इसमें लगाया गया था! विस्तृत रक्षको ने 24 घंटे में आबादी गर्भ गृह में डालने के अलावा और कई लड़ाइयाँ भी लड़ दी! सर्वयुगम में यही दिखाया गया था कि यही सब लोग उस पहले दिन दिल्ली में मौजूद थे...आज दिखाया जा रहा है कि यह सब देश के अलग-अलग राज्यों में भी घूम रहे थे! इन सबके कितने डुप्लीकेट बनाये गए हैं..जो एक ही वक़्त पर सब जगह दिख रहे हैं?

9- सुना कि पुराने सवालों के जवाब मिल गए हैं...देखिये-
A-क्षुद्र ग्रहों के धरती पर आने की घटना का सिर्फ यही सीन बार-बार दोहराया जा रहा है कि वर्तमान पृथ्वी सुरक्षित बता दी गई...बाकी 2 कालों,3 युगो  और अन्य आयामों में जो क्षुद्र ग्रहों की बरसात हो रही है..उसपर तो एक पैनल नहीं दिखाया गया! मिला जवाब?
B-सुना कि पता चल गया कि चंडकाल भविष्य में कैसे पहुंचा...आपको कॉमिक्स पढ़कर ऐसा कहाँ दिखा कि बेहोश चंडकाल को कौन ले गया?कौन उसको होश में लाया? और क्या यह वही चंडकाल है जो भविष्य में था...या यह वर्तमान का चंडकाल है! जिसको भरोसा ना हो सर्व संधि का पेज 52 का अंतिम पैनल पढ़ ले..जिसमे महामानव और गलालागीचा कह रहे हैं..कि उन्हें नहीं मालुम कि स्वर्ण नगरी से आज़ाद होने के बाद क्या हुआ..! तो अभी आगे के भागों का इंतज़ार करना जरूरी है!
C-सुना, कि क्षुद्र ग्रहों से पाप ऊर्जा निकली (जो पहले ऊष्मा ऊर्जा थी) उससे धरती पर पाप शक्तियां निकल निकल कर आ रही है! अगर ऐसी ऊर्जा हुई तो निशाचर जैसे प्राणी निकल सकते हैं...लेकिन अब तक यह कहाँ बताया गया कि सधम को किसने ईरी की गुफा में लाकर पटका था? उसके अलावा ड्राकुला भी ईरी की गुफा में ही कैसे प्रकट हुआ...ऐसी कौन सी बात है कि सभी पाप शक्तियां सिर्फ ईरी के पास ही आ रही हैं! निशाचर भी जागा तो वहीँ पर आया? अभी इससे जुडी एक बड़ी loophole और मौजूद है...जिसको हम आगे आने वाले भागों में खोलेंगे!

उपरोक्त सभी तथ्य आपके सामने मौजूद हैं..जिससे आपको सीरीज समझने में आसानी होगी!

आर्टवर्क-

इस बार कॉमिक्स में 2 पेंसिलर हैं...सुशांत जी के अलावा हेमंत जी! पेंसिल ठीक ठाक हुई है...डोगा-योद्धा के बीच लड़ाइयों वाले सीन अच्छे लगते हैं! पठारों वाली लड़ाई में काफी योगदान colorist का भी रहा है..जिन्होंने हीरों पर अच्छे इफेक्ट्स दिए हैं!

आर्टवर्क में त्रुटी- हमने कलियुग कॉमिक्स खोली..उसमे देखने पर पता चला कि गुरु शुक्राचार्य की बाईं आँख सलामत है और दाई फूटी हुई है! लेकिन सर्वसंधि में इसका उल्टा दिखाया गया है! बाई फूटी और दाई सलामत! इस गलती को आगे दुरुस्त करिए!

इंकिंग- विनोद कुमार जी का काम हमेशा की तरह अच्छा है..लेकिन उन्हें इस भाग में बहुत कम पेज मिले हैं..ज्यादातर काम ईश्वर आर्ट्स का है..और उनके बाद स्वाति जी का! स्वाति जी का काम विनोद जी का 25% भी नहीं है! शुरुआत में सारा आर्टवर्क सिर्फ देखने में एवरेज लगेगा...लेकिन एक्शन सीन अच्छे बने हैं..इफेक्ट्स भी सही लग रहे हैं!
पेज-54-64 की इंकिंग काफी खराब है! पेज-66-67 down!
68-73 Up! उसके बाद अंत तक इंकिंग एवरेज है!

रंग संयोजन- हेमन्त जी के काफी पन्ने बैकग्राउंड वर्क्स के बिना हैं...लेकिन उनपर इफेक्ट्स इतने अच्छे हैं..कि एक बारगी ध्यान ही नहीं जाता कि सिर्फ foreground बनाया गया है! हम भक्त रंजन जी को पूरे अंक देंगे! उनके बिना लड़ाइयाँ दर्शनीय ना बन पाती!
ओवरआल सर्व संधि का आर्टवर्क above average है! वज़ह 3 inker!

टिप्पणी-

पिछले भाग सर्वमंथन की तुलना में सर्वसंधि थोड़ी सी ही बेहतर होकर उभरी है...लेकिन इतनी बेहतर भी नहीं है कि इसको अब तक आये सभी खंडो में सर्वश्रेष्ठ बता दिया जाए...क्यूंकि अब तक युगांधर की टक्कर की स्टोरीलाइन बाद के एक भी खंड में नहीं आई...इसमें जो अच्छाई हैं..वो इसलिए महसूस हो रही हैं..क्यूंकि 90 में से 45 पेज सिर्फ डोगा-योद्धा की लड़ाई पर केन्द्रित हैं! इसलिए कहानी पढ़ते हुए..आप सिर्फ इन्ही पर फोकस कर रहे होते हैं! इसके बाद 9 पन्ने असम वाले हैं..जो बहुत ही ज्यादा अजीबोगरीब हैं...उनका सर्वनायक से कोई पुराना लिंक नज़र नहीं आ रहा है! उन्हें पढ़कर भी आप सिर्फ यही कहेंगे कि यह तो कोई नई सीरीज शुरू होने वाली है! बचे 35 पन्ने Neutral हैं! ना इधर बढे ना उधर!

अति विश्वास में डूबी RC  द्वारा किसी भी पाठक की पिछली समीक्षाओं में दिए गए सुझाव तो इस बार भी कहीं इस्तेमाल नहीं हुए तो दोबारा देकर क्या फायदा! यही सोचकर हम खुद को तसल्ली देते हुए आपको भी अगला पार्ट सर्वक्रान्ति लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं!

जैसे ही सर्वक्रान्ति उपलब्ध हो..भारी मात्र में कॉमिक्स खरीदकर लेखक और RC को मालामाल बना दीजिये!

Ratings :
Story...★★★★★☆☆☆☆☆
Art......★★★★★☆☆☆☆☆
Pencil....★★★★★★★☆☆☆
Inking....★★★★★☆☆☆☆☆
Entertainment……★★★★★★☆☆☆☆

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