Wednesday, 14 October 2015



तुम मुझे ऐसे क्युँ देखते हो?" उसने गंभीर होकर पूछा.

कैसे?" मैने उसपर से नज़र घुमा ली.

ऐसे जैसे..."

जैसे तुम कोई हिरोइन हो!!!"  मैने उसे बीच मे टोक दिया.

उसने नज़रें घुमा लीं.

I am kidding!"  मैने हँसते हुए अपना बचाव किया.

उसने फ़िर से मुझे नज़रन्दाज कर दिया,
वो नही घूमी.

लगा सांस ही वापस नही आयी.

अच्छा बोलो न कैसे please!" इस मर्तबा मै गंभीर हो गया.

जैसे मै कोई हिरोइन हूँ" कहकर मेरी तरफ़ देख के हँस पड़ी.

साँस वापस आयी.

मेरे होठों पर खुद ब खुद मुस्कान फैल गयी.

वो ऐसी ही है, पल भर मे DAMN SERIOUS और अगले ही पल, ज़माने भर की हँसी लपेट लेती है.

पता है तुम बहुत खूबसूरत हो" मैने कहा तो उसकी हँसी रुकी.
भौहें सिकोड़ कर बोली - "अच्छा?!"

Hmmm!" मैने हाँ मि सर हिलाया और अपना चेहरा हाथो में टिकाकर उसे देखने लगा.

सफ़ेद सलवार-सूट पहन रखा ठा उसने, चूड़ीदार, जिसमे उसको मैने पहली बार देखा था.
काली गहरी सी आंखें, तीखी नाक, पतले सुर्ख होठ, उनमे होश गुम कर देने वाली तैरती मुस्कुराहट, गोरा नही गुलाबी रंग, और लंबे straight बाल.

जब देख था तो देखता रह गया था.
आज भी देखता हूँ, तो बस देखता रह जाता हूँ.
कुछ भी तो नही बदला इस बेवकूफ़ लड़की मे.

मुझे यूँ अपनी ओर देखता देख, वो अपना दायां भौं उपर करके बोली - क्या??".

अरे यार ऐसे कैसे कर लेती हो तुम?"  मैने भी सिर्फ एक भौं उठाने की असफल कोशिश की.

वो खिलखिला पड़ी - " Art है बाबू Art सबको नहीं मिलता"

वो जब हँसती है तो और सुंदर लगती है.

"तुम बहुत खूबसूरत हो" ये शब्द जैसे मुँह से अपने आप निकल गये.

"I know baba!" मुस्कुराकर कहा उसने और सामने देखने लगी.

चाँदनी रात में, नदी कि पानी मे पैर डाले, बैठकर हम एक दूसरे को देख रहे थे, पानी से छन कर आ रही चाँदनी उसके मुलायम चेहरे के रंग को और निखार रही थी.
 आंखो मे आंखे तो थीं पर मन, मन तो सपनो की दुनिया मे था, हर ख्वाहिश पूरी करने में लगा था.

"सुनो ना!" मैने कहा.
"बोलो ना!" उसने कहा.

I love you!"

I love you too!"

यह हमारा इज़हार-ए-इश्क का तरीका था. हमेशा की तरह. कभी मै पहले कभी वो.
मैने लंबी साँस ली.

ये सपने सच ही तो हो रहे  हैं,  झक सफ़ेद चमकते कपड़ो में, चाँदनी की ओट में परियों सी चमकती, दुनिया की सबसे सुंदर लड़की मुझसे अपने प्यार का इज़हार कर रही है.

अपनी किस्मत पर बरबस मुस्कुरा उठा मैं.

"8 बज गये!" वो लगभग चीखती हुइ बोली

वहाँ बैठे हुए हमें 2 घंटे बीत गये थे, हमेशा की तरह मिलने के बाद ज़ुदा होने का वक़्त आ गया था.

थोड़ी देर प्लीज" मैंने हल्के से कहा.

"कल आऊँगी न फ़िर"

पक्का!"

"शक है?" आंखे बड़ी करते हुए पूछा उसने.

मैने न में सर हिलाया. आंखे उसी पे टिकी थीं.

"तो कल हमेशा की तरह, same time same place"

हमेशा की तरह वो कल आयेगी ज़रूर आयेगी...चुपके से, छिपते-छिपाते, किसी न किसी बहाने से वो आ ही जाती है, मुझसे मिलने, वादा जो कर रखा है...और वो...

"वादा कभी नही तोड़ती...मै"

हम उठ खड़ए हुए, वो मुड़ कर जाने लगी, मैने उसका हाथ थामना चाहा, कि उसने अपना दुपट्टा हवा में लहरा दिया, मेरी साँस उसकी खुश्बू से भर गयी, आंखे खुद ब खुद बंद हो गयीं. और जब खुली तो वो ज़रा सा आगे बढ चुकी थी.

"सुनो ना!" मैने कहा.

"I LOVE YOU" उसने कहा. इस बार मुझसे पहले.

"one all...कल फ़िर से शुरू करना गिनना हमेशा की तरह."

हम दोनो हँस दिये.

❤❤❤❤❤❤❤

थोड़ी दूर पर :-

"अरे! वो शर्मा जी का लड़का है न, गुप्ता ji?"

"हाँ मेहरा साब"

"उसे रोज़ देखता हूँ, शाम के वक़्त आता है, और घंटो बैठ कर खुद से बड़ बड़ करता है."!

गुप्ता जी-  खुद से नही मेहरा साब, अपनी girlfriend से बात करता है. हाहाहाहा

"पर मैने तो कभी कोई लड़की देखी नही उसके साथ"

"अजी कैसे देखेंगे, 15 दिन पहले तो आप शिफ्ट हुए हैं मेहरा जी. उस लड़की को मरे 4 महीने हो गये, यही नदी मे उसके बाप ने धक्का दि दिया था बेचारी को..."

"हे भगवान! पर क्युँ?"

"इस लड़के से उसकी आशिक़ी की खबर उसे रास नही आयी, और क्या"

" और ये लड़का..."

"रोज़ शाम को यहाँ आता है, कहता है इसकी गर्ल फ्रेंड वादा नही तोड़ती......रोज़ मिलने आती है इसे.....हमेशा की तरह...

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