Tuesday, 27 October 2015


"हमें शादी कर लेनी चाहिए" आकाश के ये शब्द मेघा के कानों मे गूंज रहे थे, किसी पुराने गाने के रेकॉर्ड की तरह, पर इसमे संगीत नही था, थी तो बस चुभन।

आज ये बात न मानने के लिए, मेघा के मन का एक कोना उसे धिक्कारता तो दूसरा उसके इसी फैसले को सही बताता।

कभी यही शब्द उसके लिए एक आशिक़ की तिष्णगी थे, उम्मीद थे,प्रार्थना थी।
और आज हर शब्द नश्तर!
एक ऐसा नश्तर जो उसके आकाश के साथ गुज़रे अनगिनत सुहाने पलों मे से "इस एक" दर्द देते लम्हे को काटकर, यादों की किताब के पहले पन्ने पर रख देता।
वो जब ये "किताब" खोलती , तब ये लम्हा उसके आगे जीवंत हो उठता!

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" सर्दी की छुट्टियों मे आकाश Navy का Commodore बनने के बाद, पहली बार मेघा से मिलने आया था। दोनो,एक साल से live in मे थे, मेघा की मर्ज़ी से। आकाश तो शादी करना चाहता था, पर मेघा हर बार टाल देती।

पर आज कुछ सोच कर आया था वो, मेघा को लेकर जुहू बीच के उत्तरी छोर पर पहुँचा।
मेघा वहां एक Yacht देख भौचक रह गयी, और जब सम्भली तो आकाश को मुस्कुराता पाया।
मेघा की नज़र हर्ष और सवालों से डबडबा गयी।

'तुमने ही तो कहा था, की सागर पर चलना है सिर्फ मेरे साथ', आकाश ने उसे याद दिलाया।

'तो तुमने Yacht खरीद ली!', मेघा चीखी और Yacht की तरफ दौड़ पड़ी।

'भाड़े पे ली है', आकाश पीछे पीछे भागा।

वो जबतक Yacht के doc पर पहुँचा, मेघा एक round लगा चुकी थी। - 'Its beautiful'

'For You' आकाश मुस्कुराया।

मेघा की आँखें आकाश की आँखों मे प्यार देख रही थी, साफ साफ, पूनम की उस रात मे सब रोशन था। भावनाएं, प्यार, ततपरता सब।
मेघा ने देखा की आकाश की आंखो मे प्यार के साथ एक सवाल फिर आ गया था।
मेघा ने नज़रें चुरा लीं।
पर आकाश आज उसे बचकर नही जाने देना चाहता था।

'मेरे साथ सागर पर चलो मेघा, आज की रात को ख़्वाहिश पूरी करने की रात बनाते हैं''
मेघा को कुछ ठोस नही सूझा,उसका मन एक कदम आगे जाता तो दो पीछे।
पर आकाश ने जब उसका हाथ थामा तो मेघा का मन बहती लहरों के साथ हो लिया।

वैसे भी उसको समंदर का सफर सबसे प्यारा था, मन की चिंताओं से दूर सागर का शोर उसे बहुत सुकून देता था, और ऐसे ही एक सफर मे उसे आकाश मिला।
एक cruise के सफर का साथी आज मेघा को हमसफर बनाने की चाहत रखता था।

Yacht आगे बढ़ी, आकाश ने मेघा को बाहों मे समेट लिया।

दूर क्षितिज पर चाँद इनके प्यार की कश्ती के लिए रास्ता बना रहा था, चांदनी का रास्ता, पानी पर।

कश्ती और आगे बढ़ी,पीछे बस मुम्बई की रोशनी थी और सामने चाँद की, आकाश ने हल्के से कहा

'हमे शादी कर लेनी चाहिए'

उसके शब्दों मे तिश्नगी थी, उम्मीद थी, प्रार्थना थी। आंखो मे बात करने वाला आकाश आज पहली बार मुखर हुआ था। मेघा भी उसकी चाहत से अनजान नही थी, मगर आज ये शब्द 'सुनकर' वो बेचैन हो गयी, खुद को उसकी बाहों से आजाद किया, दूर चाँद को ताकने लगी।

'मुझे जवाब दो मेघा, please'

' मैं तुमसे शादी नही कर सकती आकाश, फिर तुम्हे और क्या मिलेगा शादी कर के?'

मेघा ने उसकी मद्धिम सी उम्मीद तोड़ने के लिए चुप्पी तोड़ी।

'हमारे रिश्ते को नाम मिलेगा मेघा, तुम्हे अब सिर्फ अपनी girlfriend नही बोल सकता मैं, तुम इससे कहीं ज़्यादा हो...' आकाश बेचारगी से बोला।

'तो मत बोलो, तोड़ दो इस रिश्ते को ही क्योंकि नाम देकर भी तुम इसे,और खूबसूरत नही बना पाओगे, हां उस नाम के कारण ही ये खराब जरूर हो जायेगा' मेघा के शब्द तीखे हो रहे थे। आकाश समझ नही पाया।

'तुम फौजी बड़े बेवफा होते हो, शादी करोगे फिर कल को फ़र्ज़ के नाम पर शहीद कहलाओगे और तुम्हारे पीछे मैं विधवा!
वैसे ही जैसे ताउम्र मेरी माँ रही है मुझे ऐसी ज़िन्दगी नही चाहिए, आंसू-दर्द नही चाहिए मुझे, मैं चाहती हूँ की तुम्हे याद करूँ तो बस हंसने के लिए। मैं तुम्हारी विधवा कहलाने से अच्छा तुम्हारी ex कहलाना पसंद करूंगी।'

आकाश अब तक चुप था, 'उसकी' मेघा बरस रही थी, हरेक शब्द उसकी उम्मीद की नाव पर भारी पत्थरों की तरह जमा हो रहे था।

वो कहना तो बहुत कुछ चाहता था पर जानता था की अभी कुछ बोला तो मेघा आज ही उसे अपनी ज़िन्दगी से दूर कर देगी, बहुत अक्खड़ है वो।

' ok but you know I love You Megha', बहुत देर बाद वो बोला, पर मेघा चुप रही।

उसकी चुप्पी उम्मीद की नाव पर आखिरी भारी पत्थर की तरह पड़ी, नाव डूब गयी।"
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बाहर कुछ हलचल हुई तो मेघा अपने खयालों से बाहर आई, शायद आकाश लौट चुका था उसने खिड़की से झाँका, हां आकाश लौट चुका था, तिरंगे से लिपटे एक बक्से में।

 मेघा दुख से ज़्यादा आत्मग्लानी से भर उठी।
दर्द तकलीफ और आँसू जब ज़रा धीमे पड़े तो उसने अपने हाथों मे एक ख़त पाया,
लिखा था- "for Megha"


ख़त की सिलवटें सुलझीं और दर्द के लम्हे का सिरा हाथ मे आ गया।

" Hi Megha,

कल तुमसे कुछ कह नही पाया, क्योंकि ज़्यादा pursue करके तुम्हे और दूर होता नही देख पाता, मेघा शायद मैं कल ना रहूँ ठीक उसी तरह जैसे तुम्हारे पापा नही रहे और तुम्हे भी अपनी माँ की तरह रोना पड़े पर जान, क्या तुमने उनके सिर्फ आंसू देखे? तुमने शायद उनके चेहरे पर गर्व नही देखा जो एक शहीद की बीवी कहलाते हुए उनके चेहरे पर उमड़ आते हों।
तुम्हारे पापा नही थे पर उनके फौजी होने के कारण लोगों की जो संवेदनाएं उन्हें मिली होंगी उनके सम्बल के कारण , तुम्हारी माँ ने अकेला नही महसूस किया होगा।

मैं तुमसे कोई वादा तो नही कर सकता की मैं तुम्हारे साथ उम्र भर रहूंगा पर क्या कोई और भी ये वादा कर सकता है? नही!
पर मेरे न होने के बाद तुम संभल जाओगी ये वादा तुम भी नही कर सकती, पर अकेलापन तुम्हे कहा जायेगा ये मुझे पता है। तब शायद लोग तुम्हे विधवा न कहें पर तुम? तुम कह पाओगी खुद को single?
ख़ैर,
जानती हो, ये सागर जिसके ऊपर मैंने तुम्हे propose किया उसी सागर की लहरों की आवाज़ें मुझे तुम्हारी याद दिलाती हैं, लगता है की जैसे मैं तुमसे ही बातें कर रहा हूँ, इस सागर की नमी जब हाथों मे आती है लगता है की तुम्हारे हाथों को थामे बैठा हूँ।

जब तक इस सागर की नमी मेरे हाथो मे है तुम्हारा एहसास मेरे साथ है और तुम पागल, कल मेरे I love You का reply भी नही किया।

ख़ैर इन आतंकवादियों की ख़बर ले के लौटता हूँ तुम्हारी ख़बर लेने, इतनी आसानी से नही मानने वाला मैं, सागर की नरमी लेकर आऊंगा शायद तुम पिघल जाओ।

You Know What Would I Say Lastly

Yeah Me Too.

तुम्हारा आकाश।"

चिट्ठी पढ़ कर जैसे मेघा एक नींद से जागी, उसके मन का धिक्कारता कोना अब और ज़्यादा चीखने लगा।
अब मेघा चाहकर भी आकाश से नही कह सकती थी की वो ज़िद उसकी नादानी थी और वो गलती सुधारना चाहती है पर देर हो चुकी थी आकाश नही लौटने वाला था।

सागर पे जान लुटाने वाला सागर को बचाते हुए शहीद हो चुका था।

और मेघा,

 उसके हाथों की चूड़ियाँ नही टूटीं, पर उसके सपनों का शीशमहल बिखर गया।

उसके गले का मंगलसूत्र नही उतरा पर आंसू उसके आंखो से एकसूत्र उतरते गए।

माथे का सिंदूर नही मिटाया गया पर उसका रंग आँखों मे उतर आया था।

आकाश के बिना मेघा विधवा ही कहलायेगी, बाहर का पता नही पर अंदर वो विधवा हो गयी है!

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1 comments :

ek bhavnatmak kahani... bhavuk kar diya bhai

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